गर्ल्स स्कूल
भिवानी जाने के लिए जैसे तैसे उसने बस पकड़ी, भीड़ ज़्यादा होने की वजह से वो बस में पिछे जाकर खड़ा हो गया।
शमशेर सिंह मन ही मन बहुत खुश था. ९ साल की सर्विस में पहली बार उसकी पोस्टिंग गर्ल स्कूल में हुई थी. ६ फीट से लंबा कद, कसरती बदन रौबिला चेहरा, उसका रौब देखते ही बनता था. ३२ का होने के बावजूद उसने शादी नही की थी. ऐसा नही था की उसको किसी ने दिल ही ना दिया हो, क्या शादी-शुदा क्या कुँवारी, शायद ही कोई ऐसी हो जो उसको नजर भर देखते ही मर ना मिटे, पिछले स्कूल में भी २-४ मॅडमो को वो अपनी रंगिनियत के दर्शन करा चुका था. पर आम राय यही थी की वो निहायत ही सिन्सियर और सीरीयस टाइप का आदमी है. असलियत ये थी की वो कलियों का रसिया था, फूलों का नही. और कलियों का रस पीने का अवसर उसको ६-७ साल से नही मिला था. यही वजह थी की आज वो खुद पर काबू नही कर पा रहा था.
उसका इंतज़ार ख़तम होने ही वाला था
अचनाक उसके अग्रभाग में कुछ हल-चल होने से उसकी तंद्रा भंग हुई. २६-२७ साल की एक औरत का पिछवाड़ा उसके लिंग से जा टकराया. उसने उस औरत की और देखा तो औरत ने कहा, "सॉरी, भीड़ ज़्यादा है"
"इट्स ओक", शमशेर ने कहा और थोड़ा पिछे हो गया
औरत पढ़ी लिखी और सभ्य मालूम होती थी. रंग थोड़ा सांवला जरूर था पर यौवन पूरे शबाब पर था. वो भी शमशेर को देखकर अट्रॅक्ट हुए बिना न रह सकी. कनखियों से बार-बार पिछे देख लेती.
तभी बस ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगा दिए जिससे शमशेर का बदन एक-दम उस औरत से जा टकराया. वो गिरने को हुई तो शमशेर ने एक हाथ आगे ले जाकर उसको मजबूती से थाम लिया. किस्मत कहें या दुर्भाग्य, शमशेर के हाथ में उसका दायां स्तन था
जल्दी ही शमशेर ने सॉरी बोलते हुए अपना हाथ हटा लिया, पर उस औरत पर जो बीती उसको तो वो ही समझ सकती थी.
"उफ, इतने मजबूत हाथ!" सोचते हुए औरत के पुरे बदन में सिहरन दौड़ गयी
उसके एक बार छुने से ही उसकी पैंटी गीली हो गयी. वो खुद पे शर्मिंदा सी हुई पर कुछ बोल ना सकी
उधर शमशेर भी ताड़ गया की वो कुँवारी है. इतना कसा हुआ बदन शादीशुदा का तो हो नही सकता. उसने उससे पूछ ही लिया, जी क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?"
थोड़ा सोचते हुए उसने जवाब दिया,
"जी मेरा नाम अंजलि है"
शमशेर: कहाँ तक जा रही हैं आप?
अंजलि: जी भिवानी से आगे लोहरू गाँव है, मैं वहाँ गर्ल स्कूल में प्रिन्सिपल हूँ
सुनते ही शमशेर चौंक गया. यही नाम तो बताया गया था उसे प्रिन्सिपल का पर कुछ सोचकर उसने अपने बारे में कुछ नही बताया
अजीब संयोग था, अंजलि को पकड़ते ही वो भाँप गया था की यहाँ चान्स हैं
धीरे-धीरे बस में भीड़ बढ़ने लगी और अंजलि ने पिछे घूम कर शमशेर की और मुँह कर लिया. तभी एक सीट खाली हुई पर जाने क्यूँ अंजलि को शमशेर से दूर जाना अच्छा नही लगा उसने सीट एक बुढ़िया को ऑफर कर दी और खुद वही खड़ी रही
अंजलि,"कहाँ खो गये आप"
शमशेर: कुछ नही बस यही सोच रहा था की आपकी अभी तक शादी क्यूँ नही हुई?
अंजलि सुनकर शर्मा सी गयी और बोली: ज..जी आपको कैसे मालूम
शमशेर ने भी तीर छोड़ा: आपके बदन की कसावट देखकर... शादी तो हमारी भी नही हुई पर दुनिया तो देख ही चुके हैं.
अंजलि: जी.. क्या मतलब?
शमशेर: खैर जाने दें, पर इतनी कम उम्र में आप प्रिन्सिपल! यकीन नही आता!
अंजलि: हो सकता है पर में २ साल पहले डाइरेक्ट अपायंट हुई हूँ
यूँ ही बातों का सिल-सिला चलते-चलते अंजलि को जाने क्या मस्ती सूझी उसने उल्टियाँ आने की बात कही और शमशेर के कंधे पर सिर टीका लिया. शमशेर ने एक लड़के की सीट खाली कराई और अंजलि को वहाँ बैठा दिया अंजलि मायूस सी हो गयी पर जल्दी ही उसके साथ वाली सवारी उठ गयी और शमशेर भी उसके साथ जा बैठा अंजलि ने उसकी छाति पर सिर रख लिया
शमशेर समझ गया था की ये चिड़िया फँसने वाली है वो भी उसके बालों में हाथ फेरने लगा अंजलि ने नींद का बहाना किया और उसकी गोद में सिर रख लिया
अब ये शमशेर के भी सहन के बाहर की बात थी पैंट में छिपा उसका औजार अंगड़ाई लेने लगा अंजलि भी क्यूंकी सोने की एक्टिंग कर रही थी इसलिए वो उस हलचल को ताड़ गयी नींद की एक्टिंग करते-करते ही उसने अपना एक हाथ सिर के नीचे रख लिया अब वो उसकी बढ़ती लंबाई को डायरेक्ट्ली फील कर सकती थी
अंजलि का चेहरा लाल होता जा रहा था उसकी दबी हुई सेक्स भावना सुलगने लगी थी ऐसे शानदार मर्द को देखकर वो अपनी मर्यादा भूल गयी थी फिर उसके लिए तो वो एक अंजान मर्द ही था फिर २-३ घंटे के लिए...हर्ज ही क्या है?
अचानक कैथल बस स्टैंड पर चाय पानी के लिए बस रुकी शमशेर को भी अहसास था वो जाग रही है पर अंजान बनते हुए वो उसके कुल्हों पर हाथ लगाकर उसको उठाने लगा २-३ बार उसको हिलने पर जैसे उसने जागने की आक्टिंग करी फिर बोली "ओह सॉरी"
शमशेर: अरे इसमें सॉरी की क्या बात है पर जरा सी प्राब्लम है
अंजलि: वो क्या?
शमशेर: वो ये की आपने मेरे एहसास को जगा दिया है अब मुझे बाथरूम जाना पड़ेगा आपके लिए पानी और कुछ खाने को भी ले आता हूँ कहकर वो बस से उतर गया
अंजलि खुद पर हैरान थी माना वो मर्द ही ऐसा है पर वो खुद इतनी हिम्मत कैसे कर गयी मन ही मन सोच रही थी की काश ये सफर कभी पूरा ना हो और वो जन्नत का अहसास करती रहे यक़ीनन आज से पहले उसकी जिंदगी में कभी ऐसा नही हुआ था
उधर शमशेर बाकी रास्ते को रंगीन बनाने की तैयारी कर रहा था उसने नशे की गोली खरीदी और कोल्ड्रींक में मिला दिया अंधेरा हो गया था उसने अपनी पैंट की ज़िप खुली छोड़ दी ताकि अंजलि को उसे महसूस करने में आसानी हो सके
शमशेर मन ही मन सोच रहा था अगर अंजलि ही वो लड़की है जिसके स्कूल में जाकर उसको जोइन करना है, फिर तो उसकी पाँचो उंगलियाँ घी में होंगी उसको अंजलि की हालत देखकर यकीन हो चला था की अगर वो शुरुआत करेगा तो अंजलि पीछे नही रहेगी पर अगर वो जान गयी की मैं उसके स्कूल मैं ही जोइन करने जा रहा हूँ तो वो हिचक जाएगी इसीलिए वो आज ही उसको पता लगने से पहले ही उसकी चूत मार लेना चाहता था साथ-साथ उसको एक डर भी था! अगर अंजलि के मन को वो भाँप नही पाया, और उसने शुरुआत कर दी और अंजलि का रिएक्शन अलग हुआ तो फिर मुश्किल हो जाएगी ऐसे में वो स्कूल जाकर उसका सामना कैसे करेगा इसीलिए शमशेर चाहता था की पहल अंजलि की तरफ से ही होनी चाहिए अचानक बस स्टार्ट हो गयी और वो यही सोचता हुआ बस में चढ़ गया
अंजलि: कहाँ रह गये थे आप; मैने तो सोचा आप वापस ही नही आओगे
शमशेर: अरे नही... आपके लिए कोल्ड-ड्रिंक और फ्रूट्स लाने चला गया था कोल्ड्रींक की वो बोतल जिसमें उसने नशे की गोलियाँ मिलाई थी उसकी तरफ करते हुए कहा
अंजलि: सॉरी सर, लेकिन मैं कोल्ड्रींक नही पीती
शमशेर को अपने अरमानो पर पानी फिरता महसूस हुआ
शमशेर: अरे लीजिए ना, आपको उल्टियाँ आ रही थी, इसीलिए... इससे आपका दिल नही मचलेगा
अंजलि: थैंक्स, बट मैं पी नही पाउन्गि, इनफैक्ट मैं कभी नही पीती हां फ्रूट्स जरूर लूँगी हंसते हुए उसने कहा
शमशेर ने अनबूझे मन से कोल्ड्रींक की बोतल बॅग में रख ली फिर बोला,"
लीजिए केला खाइए
केले का साइज देखकर अंजलि को कुछ याद आया और उसकी हँसी छूट गयी वो मुश्किल से ३ इंच लंबा था
शमशेर: जी, क्या हुआ?
अंजली हांसते हुए जी कुछ नही.
अंजलि को केले की और देखता पाकर शमशेर कुछ-कुछ समझ गया
शमशेर: बताइए ना क्या बात है वैसे आप हँसती हुई बहुत सुंदर लगती हैं
अंजलि: क्या मतलब. वैसे नही लगती..
शमशेर: अरे नही....
अंजलि: जाने दीजिए, मैं तो आपके केले को देख कर हंस रही थी
शमशेर का ध्यान सीधा अपनी पैट की तरफ गया एक पल के लिए उसको लगा कहीं ज़िप खुली होने से उसका केला तो बाहर नही निकल आया सब ठीक ठाक था फिर केले के साइज को देखकर मामला समझ गया
शमशेर: जी क्या करे, मैने खुद तो उगाया नही है यहाँ बस यही मिले
अंजलि की हँसी रुकने का नाम ही नही ले रही थी उसके मन में तो दूसरा ही केला घूम रहा था हालाँकि उसने अपने व्यक्तीता का हमेशा ख्याल रखा था. पर शमशेर के नायाब जिस्म को देखकर उसमें खुमारी आती जा रही थी
अंजलि: शमशेर जी, आप करते क्या हैं?
शमशेर: अजी जिन बातों का समय आने पर खुद ही पता चल जाना है उनके बारे में क्या बात करनी आप अपनी बताइए, आपने शादी क्यूँ नही की?
अंजली कुछ देर सोचते हुए, है तो पर्सनल मेटर पर मैं नही समझती की आपको बताने से कोई नुकसान होगा आक्च्युली मेरी छोटि बहन ६ साल पहले किसी लड़के के साथ भाग गयी थी. बस तब से ही सब कुछ बिखर गया पापा पहले ही नही थे, मम्मी ने स्यूसाइड कर लिया... कहते हुए अंजलि फफक पड़ी. मुझे नही पता मेरी गलती क्या है, पर अब मैने अकेले ही जीने की सोच ली है
शमशेर बुरी तरह विचलित हो गया उसे कहने को कुछ नही मिल रहा था फिर धीरे से बोला,"सॉरी अंजलि जी" मैने तो बस यूँही पूछ लिया था
अंन्जलि ने उसके कंधे पर सर रखा और सुबकने लगी
शमशेर को और कुछ नही सूझा तो वो बोला मुझसे नही पूछेंगी क्या मैने शादी क्यूँ नही की!
अंजलि की आँखों में अचानक जैसे चमक आ गयी और हड़बड़ा कर बोली,"
क्या आपने भी... मतलब क्या आपकी शादी...क्यूँ नही की आपने
शमशेर: कुछ फिज़िकल प्राब्लम है?
अंजलि जैसे अपने गुम को भूल गयी थी,"क्या प्राब्लम है"
शमशेर ने मज़ाक में कहा,"बताने लायक नही है मेडम"
अंजलि: क्यूँ नही है, क्या हम दोस्त नही हैं?
शमशेर: जी वो एररेक्टिओं में प्राब्लम है
अंजलि एररेक्टिओं का मतलब अच्छि तरह समझती थी की वो अपना लंड खड़ा ना हो सकने के बारे में कह रहा है पर ये तो झूठ था, वो खुद महसूस कर चुकी थी पर वो कह क्या सकती थी? सो चुप रही
शमशेर: क्या हुआ? मैने तो पहले ही कहा था की बताने लायक नही है
अंजलि: (शरमाते हुए) मुझे नही पता, मुझे नींद आ रही है, क्या मैं आपकी गोद में सर रखकर सो जाउ
शमशेर: हां हां क्यूँ नही और उसने अंजलि को अपनी गोद में लिटा लिया
अंजलि ने वही किया, अपने हाथ को सर के नीचे रख लिया और धीरे-धीरे हाथ हिलाने लगी ऐसा करने से उसने महसूस किया की शमशेर का लंड अपने विकराल आकर में आता जा रहा है अंजलि सोच रही थी की उसने झूठ क्यूँ बोला. उधर शमशेर ने भी सोने की आक्टिंग करते हुए अपने हाथ धीरे-धीरे अंजलि के कंधे से सरका कर उसकी मांसल तनी हुई चूंचियों पर ले गया दोनो की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. जैसे ही शमशेर आगे बढ़कर उसकी चूत पर हाथ ले जाने ही वाला था की अचानक अंजलि उठी और बोली,"झुठे, तुमने झूठ क्यूँ बोला" उसकी आवाज में मानो नाराजगी नही, एक बुलावा था; सेक्स के लिए
शमशेर आँखें बंद किए हुए ही बोला,"क्या झूठ बोला मैने आपसे"
अंजलि: यही की एररेक्ट नही होता.
शमशेर: तो मैने झूठ कहाँ बोला? हां नही होता
अंजलि: मैने चेक किया है वो धीरे-धीरे बोल रही थी
शमशेर: क्या चेक किया है आपने
अंजलि उसके बाद कुछ बोलने ही वाली थी की अचानक बस बंद हो गयी कंडक्टर ने बताया की बस खराब हो गयी है आगे दूसरी बस मैं जाना पड़ेगा
आमतौर पर इस सिचुयेशन में ख़ासकर अकेली लेडीस की हालत खराब हो जाती है
पर अंजलि ने चहकते हुए कहा,"अब मैं कैसे जाउंगी"
शमशेर," मैं हूं ना""चलो समान उतारो"
बस से उतारकर दोनों सड़क के किनारे खड़े हो गये अंजलि से कंट्रोल नही हो रहा था वो सोच रही थी इतना कुछ होने के बाद भी ये पता नही किस बात का इंतज़ार कर रहा है एक-एक करके सभी लोग चले गये लेकिन ना तो शमशेर और ना ही अंजलि को जाने की जल्दी थी दोनों चाह कर भी शुरुआत नही कर पा रहे थे फिर ड्राइवर और कंडक्टर भी चले गये तो वहाँ सब सुनसान नजर आने लगा
अचानक अंजलि ने चुप्पी तोड़ी,"अब क्या करेंगे?"
शमशेर: बोलो क्या करें?
अंजलि: अरे तुम्ही तो कह रहे थे,"मैं हूँ ना" अब क्या हुआ?
शमशेर चलना तो नही चाहता था पर बोला"ठीक है", अब की बार कोई भी वेहिकल आएगा तो लिफ्ट ले लेंगे
अंजलि: मैं तो बहुत तक गयी हूँ. क्या कुछ देर बस में चलकर बैठें? मुझे प्यास भी लगी है
वो दोनों जाकर बस में बैठ गये फिर अचानक शमशेर को कोल्ड्रींक याद आई जो उसने बैग में रखी थी वो अपना रंग दिखा सकती थी शमशेर ने कहा,"प्यास का तो मेरे पास एक ही इलाज है
अंजलि:क्या?
शमशेर: वो कोल्ड्रींक!
अंजलि: अरे हां...थैंक्स... उससे प्यास मिट जाएगी.. लाओ प्लीज!
शमशेर ने बैग से निकाल कर वो बोतल अंजलि को दे दी. अंजलि ने सारी बोतल खाली कर दी, १०-१५ मीं. में ही गोली अपना रंग दिखाने लगी थी अंजलि ने शमशेर से कहा," क्या हम यही सो जायें सुबह चलेंगे
अंजलि पर नशे का सुरूर सॉफ दिखाई दे रहा था अब शमशेर को लगा बात बढ़ानी चाहिए. वो बोला," आप बस में क्या कह रही थी"
अंजलि,"मुझे आप क्यू कहते हो तुम? मुझे अंजलि कहो ना
शमशेर: वो तो ठीक है पर आप प्रिन्सिपल हो
अंजलि: फिर आप, मैं कोई तुम्हारी प्रिन्सिपल थोड़े ही हूँ, मुझे अंजलि कहो ना प्लीज.. नही अंजू कहो और हां तुमने झूठ क्यूँ बोला की एररेक्टिओं की प्राब्लम है
शमशेर: तुम्हे कैसे पता की मैने झूठ बोला
अंजलि: मैने चेक किया था ये
शमशेर: ये क्या!
अंजलि खूब उत्तेजित हो चुकी थी उसने कुछ सोचा और शमशेर की पैंट को आगे से हाथ लगाकर बोली,"ये"... "अरे तुम्हारी तो जीप खुली है. हा हा हा
शमशेर को पता था वो नशे में है वो बोला," क्या तुम्हे नींद नही आ रही?
आओ मेरी गोद में सिर रख लो!
अंजलि: नही मुझे देखना है ये कैसे खड़ा नही होता, अगर मैं इसको खड़ा कर दूं तो तुम मुझे क्या दोगे
शमशेर कुछ नही बोला
अंजलि: बोलो ना...
शमशेर: जो तुम चाहोगी!
अंजलि: ओके निकालो बाहर!
शमशेर: क्या निकालू?
अंजलि: छि-छि नाम नही लेते, ठीक है मैं खुद निकाल लेती हूँ, कहते हुए वो भूखी शेरनी की तरह शमशेर पर टूट पड़ी
शमशेर तो जैसे इसी मौके के इंतज़ार मैं था उसने अंजलि को जैसे लपक लिया नीचे सीट पर गिरा लिया और उसे कपड़ों के उपर से ही चूमने लगा अंजलि बदहवास हो चुकी थी उसने शमशेर का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों को अपने होठों में दबा लिया शमशेर के हाथ उसकी चूंचियों पर कहर ढा रहे थे एक-एक करके वह दोनो चूंचियों को बुरी तरह मसल रहे थे अंजलि अब उसकी छाति सहलाते हुए बड़बड़ाने लगी थी..ओह लव मि प्लीज़.. लव मि... आइ कांट वेट.. आइ कांट लिव.. विदाउट यू जान..
सुनसान सड़क पर खड़ी बस में तूफान आया हुआ था एक-एक करके जब शमशेर ने अंजलि का हर कपड़ा उसके शरीर से अलग कर दिया तो वो देखता ही रह गया स्वर्ग से उतरी मेनका जैसा जिस्म... सुडौल चुचियाँ... एक दम तनी हुई सुराहिदार चिकना पेट और मांसल जांघें... चूत पर एक भी बाल नही था उसकी चूत एक छोटी सी मछली जैसी सुंदर लग रही थी उसने दोनों चूंचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी चूत पर मुँह लगा दिया अंजलि उबल पड़ी साँसे इतनी तेज़ चल रही थी जैसे अभी उखड़ जाएँगी पहले पहल तो उसे अजीब लगा अपनी चूत चटवाते हुए पर बाद में वह खुद अपनी गांड उछाल-उछाल कर उसकी जीभ को अपने योनि रस का स्वाद देने लगी
शमशेर ने अपनी पैंट उतार फेकी और अपना ८.५ इंच लंबा और करीब ४ इंच मोटा लंड उसके मुँह में देने लगा पर अंजलि तो किसी जल्दबाज़ी में थी. बोली,"प्लीज़ घुसा दो ना मेरी चूत में प्लीज़ शमशेर ने भी सोचा अब तो कयी सालों का साथ है ओरल बाद में देख लेंगे
उसने अंजलि की टाँगों को अपने कंधे पर रखा और अपने लंड का सूपाड़ा अंजलि की चूत पर रखकर दबाव डाला पर वो तो बिल्कुल टाइट थी शमशेर ने उसकी योनि रस के साथ ही अपना थूक लगाया और दोबारा ट्राइ किया अंजलि चिहुँक उठी सूपाड़ा योनि के अंदर था और अंजलि की हालत आ बैल मुझे मार वाली हो रही थी उसने अपने को पीछे हटाने की कोशिश की लेकिन उसका सिर खिड़की से लगा था अंजलि बोली,"प्लीज़ जान एक बार निकाल लो फिर कभी करेंगे पर शमशेर ने अभी नही तो कभी नही वाले अंदाज में एक धक्का लगाया और आधा लंड उसकी चूत में घुस गया अंजलि की चीख को सुनके अपने होटो से दबा दिया कुछ देर इसी हालत में रहने के बाद जब अंजलि पर मस्ती सवार हुई तो पूछो मत उसने बेहयाई की सारी हदें पर कर दी वह सिसकारी लेते हुए बड़बड़ा रही थी. "हाय रे, मेरी चूत...मज़ा दे दिया... कब से तेरे लंड... की .. प .. प्यासी थी
चोद दे जान मुझे... आ. आ कभी मत निकलना इसको ... मेरी चू...त आ उधर शमशेर का भी यही हाल था उसकी तो जैसे भगवान ने सुन ली जन्नत सी मिल गयी थी उसको.. उछल-उछल कर वो उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था की अचानक अंजलि ने ज़ोर से अपनी टांगे भींच ली उसका सारा बदन अकड़ सा गया था उसने उपर उठकर शमशेर को ज़ोर स पकड़ लिया उसकी चूत पानी छोडती ही जा रही थी उससे शमशेर का काम आसान हो गया अब वो और तेज़ी से धक्के लगा रहा था पर अब अंजलि गिड-गिडाने लगी प्लीज़ अब निकल लो सहन नही होता
थोड़ी देर के लिए शमशेर रुक गया और अंजलि की होटो और चूंचियों को चूसने लगा वो एक बार फिर अपने चूतड़ उछलने लगी इस बार उसने अंजलि को उल्टा लिटा लिया अंजलि की गांड सीट के किनारे थी और उसकी मनमोहक चूत बड़ी प्यारी लग रही थी अंजलि के घुटने ज़मीन पर थे और मुँह खिड़की की और इस पोज़ में जब शमशेर ने अपना लंड अंजलि की चूत में डाला तो एक अलग ही आनंद प्राप्त हुआ अब अंजलि को हिलने का अवसर नही मिल रहा था पर मुँह से मादक सिसकारियाँ निकल रही थी हर पल उसे जन्नत तक लेकर जा रहा था
इस बार करीब २० मिनट बाद वो दोनों एक साथ झडे और शमशेर उसके उपर ढेर हो गया कुछ देर बाद वो दोनों उठे लेकिन अंजलि उससे नज़रें नही मिला पा रही थी प्यार का खुमार जो उतार गया था उसने जल्दी से अपने कपड़े पहने और एक सीट पर जाकर बाहर की और देखने लगी शमशेर को पता था की क्या करना है वो उसके पास गया, और आके पास बैठकर बोला... आइ लव यू अंजलि. अंजलि ने उसकी छाति में मुँह छिपा दिया और सुबकने लगी ये नही पता.. पश्याताप के आँसू थे या मंज़िल पाने की खुशी के....
एक दूसरे की बाहों में लेटे-लेटे कब सुबह हो गयी पता ही नही चला. सुबह के ५ बाज चुके थे अभी वो भिवानी से २० मिनट की दूरी पर थे जबकि अंजलि को आगे लोहरू तक भी जाना था जाना तो शमशेर को भी वही था पर अंजलि को नही पता था की उनकी मंज़िल एक ही है वो तो ये सोचकर मायूस थी की उनका अब कुछ पल का ही साथ बाकी है रात को जिसने उसको पहली बार औरत होने का अहसास कराया था और जिसकी छाती पर उसने आँसू बहाए थे उससे बात करते हुए भी वो कतरा रही थी
अंत में शमशेर ने ही चुप्पी तोड़ी,"चलें"
अंजलि: जी... आप कहाँ तक चलेंगे?
शमशेर: तुम्हारे साथ... और कहाँ?
अंजलि: नही!...म..मेरा मतलब है ये पासिबल नही है
शमशेर: भला क्यूँ?
अंजलि: वो एक गाँव है और सबको पता है की मैं कुँवारी हूँ वहाँ लोग इस बात को हल्के से नही लेंगे की मेरे साथ कोई मर्द आया था फिर वहाँ मेरी इज़्ज़त है.
शमशेर ने चुटकी ली," हां, आपकी इज़्ज़त तो मैं रात अच्छि तरह देख चुका हूँ
अंजलि बुरी तरह झेंप गयी काटो तो खून नही तभी बस आने पर वो उसमें बैठ गये अंजलि ने फिर उसको टोका,"बता दीजिए ना की आप क्या करते हैं, कहाँ रहते हैं कोई कॉंटॅक्ट नंबर
शमशेर ने फिर चुटकी ली,"अब तो आपके दिल मैं रहता हूँ आपसे प्यार करता हूँ, और आपका कॉंटॅक्ट नंबर ही मेरा कॉंटॅक्ट नंबर. है
अंजलि: मतलब आप बताना नही चाहते ये तो बता दीजिए की जा कहाँ रहे हैं? तभी भिवानी बस स्टॉप पर पहुँच कर बस रुक गयी अंजलि और शमशेर बस से उतर गये अंजलि ने हसरत भारी निगाह से शमशेर को आखरी बार देखा और लोहरू की बस में बैठ गयी उसकी आँखो में तब भी आँसू थे
कुछ देर बाद ही वह चौक गयी जब शमशेर आकर उसकी साथ वाली सीट पर बैठ गया
अंजलि को भी अब अपनी ग़लती का अहसास हो रहा था ये आदमी जिसको उसने स्वयं को सौप दिया, ना तो अपने बारे में कुछ बता रहा है ना ही उसका पीछा छोड. रहा है उसकी साथ आने वाली हरकत तो उसको बचकानी लगी कहीं ये उसको ब्लॅकमेल करने की कोशिश तो नही करेगा वो सिहर गयी वो उठी और दूसरी सीट पर जाकर बैठ गयी
शमशेर उसका डर समझ रहा था वो अचानक ही बस से उतार गया और बिना मुड़े उसकी आँखों से गायब हो गया
अंजलि ने राहत की साँस ली. पर उसको दुख भी था की उस मर्द से दोबारा नही मिल पाएगी सोचते-सोचते लोहरू आ गया और वो अनमने मन से स्कूल में दाखिल हो गयी
ऑफीस मैं बैठे-बैठे वो शमशेर के बारे मैं ही सोच रही थी, जब दरवाजे पर अचानक शमशेर प्रकट हुआ,"मे आई कम इन मेम?"
अंजलि अवाँक रह गयी, मुश्किल से उसने अपने आप पर कंट्रोल किया और बाकी स्टाफ लॅडीस को बाहर भेजा
अंजलि(धीरे से) आप क्या लेने आए हो यहाँ प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिए और यहाँ से चले जाइए
शमशेर: रिलेक्स मेम! आइ'एम हियर फॉर माइ ड्यूटी. आइ हॅव टू जायन हियर अस साइंस टीचर. प्लीज़ लेट मे जायन आंड ऑब्लाइज
अंजलि अपनी कुर्सी से उछल पड़ी,"वॉट?" ख़ुशी और आशचर्य का मिला जुला रूप उसके "वॉट" में था पहले तो उसको यकीन ही नही हुआ पर औतॉरिटी लेटर को देखकर सारा माजरा उसकी समझ में आ गया पर अपनी ख़ुशी को दबाते हुए उसने पिओन को बुलाकर रिजिस्टर निकलवाया और शमशेर को जाय्न करा लिया फिर अपनी झेंप छिपाते हुए बोली, मिस्टर. शमशेर आप १० क्लास के इंचार्ज है पर पीरियड्स आपको ६थ से १०थ तक सभी लेने होंगे हमारे यहाँ पर मैथ्स का टीचर नही है अगर आप ८थ और १०थ की एक्सट्रा क्लास ले सकें तो मेहरबानी होगी
शमशेर: थॅंक्स मेम पर एक प्राब्लम है?
अंजलि: जी बोलिए!
शमशेर: जी मैं कुँवारा हूँ....मतलब मैं यहाँ अकेला ही रहूँगा. अगर गाँव में कहीं रहने का इंतज़ाम हो जाए तो...
अंजलि उसको बीच में ही टोकते हुए बोली मैं पिओन को बोल देती हूँ देखते हैं हम क्या कर सकते हैं
शमशेर (आँख मरते हुए) थॅंक्स मेम!
अंजलि उसकी इस हरकत पर मुस्कुराए बिना नही रह सकी
शमशेर ने रिजिस्टर उठाए और १०थ क्लास की और चल दिया...
शमशेर क्लास तक पहुँचा ही था की एक लड़की दौड़ती हुई आई और बोली, गुड मॉर्निंग सर.
लड़की १०थ क्लास की लगती थी. शमशेर ने उसको गौर से उपर से नीचे तक देखा. क्या कोरा माल था हाए! भारी-भारी अमरूद जैसी गोल-गोल चुचियाँ, गोल मस्त गांड., रसीले गुलाबी अनछुए होंट, लगता था मानो भगवान ने फ़ुर्सत से बनाया है. और बोल भी उतना ही मधुर," सर, आपको बड़ी मेम बुला रही हैं
शमशेर," चलो बेटा"
"सर, क्या आप हमें भी पढ़ाएँगे?"
"कौनसी क्लास में हो बेटा? क्या नाम है?"
"सर मेरा नाम वाणी है और मैं ८वी में हूँ"
"क्या... ८वी में!" मैं तपाक ही गया था जैसे उस्स पर! ८वी का ये हाल है
तो उपर क्या होगा." हां बेटा, तुम्हे मैं साइंस पढ़ाउंगा"
कहकर मैं ऑफीस की तरफ चल पड़ा. वाणी मुझे मूड-मूड कर देखती जा रही थी
ऑफीस में गया तो अंजलि अकेली बैठी थी मैने जाते ही जुमला फेका,"यस, बड़ी मेम"
अंजलि सीरीयस थी," सॉरी शमशेर...आइ मीन शमशेर जी मैं आपको ग़लत समझ बैठी थी पर आपने मुझे बताया क्यूँ नही."
शमशेर: बता देता तो तुम्हे अपना थोड़े ही बना पता
अंजलि के सामने रात की बात घूम गयी अब उसको ये भी अहसास हो गया की शमशेर
ने रात को चुदाई में पहल क्यूँ नही की फिर मीठी आवाज़ में बोली," शमशेर
जी, हम स्कूल में ऐसे ही रहेंगे मैने आपके रहने खाने का मॅनेज करने को बोला है हो सका तो मेरे घर के आसपास ही कोशिश करूँगी.
शमशेर: अपने घर में क्यूँ नही?
अंजलि: अरे मैं भी तो किराए पर ही रहती हूँ हालाँकि वहाँ नीचे २ कमरे खाली हैं पर गाँव का माहौल देखते हुए ऐसा करना ठीक नही है लोग तरह-तरह की बातें करेंगे
शमशेर: बड़ी मेम, प्यार किया तो डरना क्या?
अंजलि: ष्ह..ह! प्लीज़.... खैर मैने आपको कुछ ज़रूरी बातों पर डिसकस करने के लिए बुलाया है
शमशेर: जी बोलिए!
अंजलि: आपने देखा भी होगा यहाँ पर कोई भी मेल टीचर या स्टूडेंट नही है
शमशेर: क्या मैं नही हूँ?
अंजलि: अरे आप अभी आए हो सुनिए ना!
शमशेर: जी सुनाए!
अंजलि: लड़कियाँ लड़कों के बगैर काफ़ी उद्दंड हो जाती हैं ज़रा भी ढिलाई बरतने पर वो अश्लीलता की हदों को पार कर जाती हैं इसीलिए उनको डिसिप्लिन में रखने के लिए सखतायी बहुत ज़रूरी है मैने गाँव वालों को विस्वास में ले रखा है आप उन्हे जो भी सज़ा देनी पड़े पर डिसिप्लिन नही टूटना चाहिए
वैसे भी यहाँ लड़कियाँ उमर में काफ़ी बड़ी हैं १०+२ में तो एक लड़की मुझसे ५ साल छ्होटी है बस
शमशेर मॅन ही मॅन उछल रहा था पर अपनी ख़ुसी छुपाकर बोला, ओके बड़ी मॅम! मैं संभाल लूँगा!
अंजलि: प्लीज़ आप ऐसे ना बोलिए!
शमशेर: ओक अंजू! सॉरी मॅम!
अंजलि मुस्कुरा दी!
"आप एक बार स्कूल का राउंड लगा लीजिए!"
"ओक" कहकर शमशेर राउंड लगाने के लिए निकल गया अंजलि भी उसके साथ थी. एक क्लास में उसने देखा, २ लड़कियाँ मुर्गा सॉरी मुर्गी बनी हुई थी गॅंड उपर उठाए दोनो ने शमशेर को देखा तो शर्मा कर नीचे हो गयी नीचे होते ही मेडम ने गांड पर ऐसी बेंट जमाई कि बेचारी दोहरी हो गयी एक की जाँघो से सलवार फटी पड़ी थी शमशेर के जी में आया जैसे वो अपना लंड उस फटी सलवार में से ही लड़की की गांड में घुसा दे सोचते ही उसका लंड पैंट के अंदर ही फुंकारने लगा
उसने अंजलि से पूछा," मॅम, किस बात की सज़ा मिल रही है इन्हे?"
अंदर से मॅम ने आकर बताया," अजी, दोनु आपस मे लडन लग री थी भैरोइ. सारा दिन कोए काम नही करना, गॅंड मटकंडी हांडे जा से"
उसकी बात सुनकर शमशेर हक्का बक्का रह गया उसने अंजलि की और देखा लेकिन वो आगे बढ़ गयी
आगे चल कर उसने बताया ये इसी गाँव की है सरपंच की बहू है बहुत बदला पर ये नही सुधरी बाकी टीचर्स अच्च्ची हैं"
स्कूल का राउंड लगाकर शमशेर वापस ऑफीस में आ गया लंच हो चुका था और चाय बनकर आ गयी थी अंजलि ने सभी टीचर्स से शमशेर का परिचय करवाया पर उसको तो लड़कियों से मिलने की जल्दी थी जल्दी जल्दी चाय पीकर स्कूल देखने के बहाने बाहर चला आया...
घूमता फिरता १०थ क्लास में पहुँच गया लंच होने की वजह से वहाँ सिर्फ़ २ लड़कियाँ बैठी थी और कुछ याद कर रही थी एक तो बहुत ही सुंदर थी. जैसे यौवन ने अभी दस्तक दी ही हो चेहरे पर लाली, गोल चेहरा और... ज़्यादा क्या कहें कुल मिलकर सेक्स कि प्रतिमा थी शमशेर को देखते ही नमस्ते करना तो दूर उल्टा सवाल करने लगी," हां, क्या काम है?" शमशेर ने मुस्कुराते हुए पूछा, क्या नाम है तुम्हारा?" वह तुनक गयी, "क्यूँ सगाई लेवेगा के?"
तेरे जैसे शहरा के बहुत हीरो देख रखे हैं आ गया लाइन मारन" जाउ के मेडम के पास" शमशेर को इस तीखे जवाब की आशा ना थी फिर भी वो मुस्कुराते हुए ही बोला," हां जाओ, चलो मैं भी चलता हूं." ये सुनते ही वो गुस्से से लाल हो गयी और प्रिन्सिपल के पास जाने के लिए निकली ही थी कि सामने से वाणी और उसकी दोस्त सामने से आ गयी दूसरी लड़की ने कहा," गुड मॉर्निंग सर, सस्स...सर? कौन सर?" वाणी ने जवाब दिया,"अरे दीदी ये हमारे नये सर हैं, हमें साइंस पढ़ाएँगे" इतना सुनते ही उस लड़की का रंग सफेद पड़ गया उसकी शमशेर की और मुँह करने की हिम्मत ही ना हुई और वो खड़ी खड़ी काँपने लगी वो रो रही थी शमशेर ने पूछा," क्या नाम है तुम्हारा?" वो बोली," सस्स..सॉरी स..सर." शमशेर ने मज़ाक में कहा," सॉरी सर... बड़ा अच्छा नाम है तभी बेल हुई और शमशेर हंसते हुए वहाँ से चला गया
दिशा को समझ नही आ रहा तहा वो क्या करे अंजाने में ही सही उसने सर के साथ बहुत बुरा सलूक किया था वैसे वो बहुत इंटेलिजेंट लड़की थी, पर ज़रा सी तुनक मिज़ाज थी गाँव के सारे लड़के उसके दीवाने थे पर उसने कभी अपनी नाक पर मक्खि तक नही बैठने दी गलियों से गुज़रते हुए लड़के उस पर फ़िकरे कसते थे उसका जवानी से लबरेज एक-एक अंग इसके लिए ज़िम्मेदार था उसका रंग एकदम गोरा था छातिया इतनी कसी हुई थी की उनको थामने के लिए ब्लाउस की ज़रूरत ही ना पड़े लड़के उस पर फ़िकरे कसते थे की जिस दिन इसने अपना नंगा जिस्म किसी को दिखा दिया वो तो हार्ड अटेक से ही मर जाएगा जब वो चलती थी तो उसके अंग-अंग की गति अलग-अलग दिखाई पड़ती थी गॅंड को उसके कमीज़ से इतना प्यार था की जब भी वो उठती थी उसकी गॅंड कमीज़ को अपनी दरार में खींच लेती आए हाए... लड़के भी क्या ग़लत कहते थे, बस ऐसा लगता था की जैसे उसके बाद तो दुनिया ही ख़तम हो जाएगी पिछले हफ्ते ही उसने १८ पुरा किए था
लड़कों से तंग दिशा ने अपना गुस्सा बेचारे सर पर निकल दिया इसी बात को सोच-सोच कर वो मारी जा रही थी अब क्या होगा? क्या सर उसको माफ़ कर देंगे?
तभी नेहा ने उसको टोका," अरे क्या हो गया तूने जान बुझ कर थोड़े ही किया है ऐसा! सर भी तो इस बात को समझते होंगे! चल छोड़, अब तू इतनी फिकर ना कर!"
दिशा ने बुरा सा मुँह बना कर कहा," ठीक है!"
नेहा: तू एक बात बता, अपने सर बिल्कुल फिल्मों के हीरो की तरह दिखाई देते हैं ना क्या सलमान जैसी बॉडी है उनकी मुझे तो बहुत बुरा लगा जब तूने उसको उल्टा पुल्टा बोला हाए; मेरा तो दिल किया उसको देखते ही की मैं दुनिया की शर्म छोड़ कर उससे लिपट जाउ सच्ची दिशा
दिशा: चल बेशर्म सर के बारे में भी....
नेहा: अरे मुझे थोड़े ही पता था की वो सर हैं... ये तो मैने तब सोचा था जब वो क्लास में आए थे
दिशा: देख मेरे पास बैठकर... य..ये लड़को की बातें मत किया कर दुनिया के सारे मर्द एक जैसे घटिया होते हैं
नेहा: सर से पूछ के देखूं?
दिशा: नेहा! तुझे पता है मैं सर की बात नही कर रही
नेहा: तो तू मानती है ना सर बहुत प्यारे हैं
दिशा: तू भी ना बस. और उसने अपनी कॉपी नेहा के सिर पर दे मारी
दिशा का ध्यान बार-बार सर की और जा रहा था कैसे वो उसको माफ़ करंगे या शायद ना भी करें तभी क्लास में हिस्टरी वाली मेडम आ गयी, सरपंच की बहू...उसका नाम प्यारी था...
प्यारी: हां रे छ्होरियो; कॉपिया निकल लो कल के काम वाली...
एक एक करके लड़कियाँ अपनी कॉपी लेकर उसके पास जाती रही उससे सबको डर लगता था इसीलिए कोई भी कभी उसका काम अधूरा नही छ्चोड़ती थी कभी ग़लती से रह जाए तो उसकी खैर नही और आज दिव्या की खैर नही थी वो कॉपी घर भूल आई थी
प्यारी घुरते हुए, हां! तेरी कापी कहाँ है रंडी
दिव्या: जी... सॉरी मॅ'म घर पर रह गयी
प्यारी: चल पीछे, और मुर्गी बन जा
दिव्या की कुछ बोलने की हिम्मत ही ना हुई वो पीछे जाकर मुर्गी बन गयी
प्यारी दूसरी लड़कियों की कॉपीस चेक करने लगी जब दिव्या से और ना सहा गया तो हिम्मत करके बोली: मॅम मैं अभी ले आती हूँ भागकर!
प्यारी: (घूरते हुए) अच्छा अब ले आएगी तू भाग कर ठहर अभी आती हूँ तेरे पास
ये सुनते ही दिव्या काँप गयी! प्यारी देवी उसके पास गयी, उसको खड़ा किया और उसकी चूची के निप्पल को उमेट दिया. दिव्या दर्द से कराह उठी. " साली,
वेश्या, जान बुझ कर कॉपी छ्चोड़ कर आती है, ताकि बाद में अकेली जाए, और अपने यार से मिलकर आ सके हां बता.. कौन मदारचोड़ तेरी चो.. कहते कहते अचानक उसको रुकना पड़ा पीयान ने मेडम से अंदर आने की पर्मिशन माँगी और बोली," बड़ी मॅम ने कहा है जिस किसी के घर में कमरा रहने के लिए किराए पर खाली हो वो जाकर बड़ी मॅम से मिल ले नये सर के लिए चाहिए है
प्यारी देवी: अरे, हमारी हवेली के होते हुए मास्टर जी को किराए पर रहने की कोई ज़रूरत ना से जाकर कह दे उनसे, मैं छ्हॉकरों को बुला कर समान रखवा देती हूं रुक मैं आती ही हूँ
प्यारी देवी ४० के आसपास की महिला थी एक दम घटिया नेचर की महिला उस पर ये की उसका पति गाँव का सरपंच था ऐसा नही था की गाँव में किसी को उसके लड़कियों के साथ अश्लील हरकतों का पता नही था गाँव में अपने कॅरक्टर को लेकर वो पहले ही बदनाम थी पर इकलौते बड़े ज़मींदार होने के नाते किसी की उनसे कुछ कहने की हिम्मत ही नही होती थी उसकी लड़की भी उसके ही पदचिन्हों पर चल रही थी सरिता; वो नोवी में थी पर लड़कों से चुद्व-चुद्व कर औरत हो चुकी थी
मेडम के जाने के बाद नेहा ने दिशा से कहा," अरे यार, तुम्हारे मामा का भी तो सारा मकान खाली है तुम क्यूँ नही कह देती वहाँ रहने को
दिशा: हां...पर!
नेहा: पर क्या, क्या इतने अच्छे सर इतने घटिया लोगों के यहाँ रुकेंगे
देख मॅम पूरी चालू है अगर हमने अभी उनको नही बोला तो वो इस चुड़ैल के जाल में फँस जाएँगे
दिशा: तुझे भी इन्न बातों के सिवा कुछ नही आता पर मामा से भी तो पूछना पड़ेगा
नेहा: अरे, उनको मैं माना लूँगी, चल सर को ढूँढते हैं चल जल्दी चल तेरी माफी भी हो जाएगी
दिशा चल तो पड़ी पर उसको यकीन नही हो रहा था की सर उसको माफ़ कर देंगे
फिर क्या पता मामा मना ही ना कर दें मना करने पर जो बे-इज़्ज़ती होगी सो अलग पर नेहा उसको लगभग खींचती सी ८वी क्लास में ले गयी, जहाँ शमशेर पढ़ा रहा था
उनको देखकर शमशेर कुर्सी से उठा और मुस्कुराता हुआ बाहर आया," हां तो क्या नाम है आपका" शमशेर उसको छोड़ने के मूड में नही था
दिशा ने लाख कोशिश की पर उसके होंट लरजकर रह गये गर्दन झुकाए हुए वो कयामत ढा रही थी
नेहा: सर, ये कहना चाहती है आप इनके घर में रह लीजिए यह सुनते ही वाणी भी बाहर आ गयी," हां सर, आप हमारे घर में रह लीजिए"
शमशेर ने सोचते हुए कहा," अब तुम्हारा क्या कनेक्षन है?
वाणी: सर, मैं दिशा दीदी के मामा की लड़की हूँ
शमशेर: तो?
वाणी चुप हो गयी इश्स पर नेहा एक्सप्लेन करने के लिए आगे आई," सर, आक्च्युयली दिशा यहाँ अपने मामा के यहाँ रहती है वाणी अपने मम्मी पापा की इकलौती संतान है, और बचपन से ही उन्होने दिशा को खुद ही पाला है. इसीलिए....
शमशेर: बस बस... मैं भी सोच रहा था एक ही नेज़ल लगती है दोनों की ओक
गॅल्स, मैं छुट्टि के बाद तुम्हारे घर चलूँगा
दिशा: पर... स.. सर!
शमशेर: पर क्या
दिशा: वो मामा से पूछना पड़ेगा!
वाणी बीच में ही कूद पड़ी," नही सर, आप आज ही चलिए मैं पापा को अपने आप बोल दूँगी"
शमशेर वाणी के गालों पर हाथ फेरता हुआ बोला, नही बेटा! पहले मम्मी-पापा से पूछ लो अगर वो खुश हैं तो में तेरे पास ही रहूँगा, प्रोमिस
वाणी: ओक, थॅंक यू सर
इसके बाद छुट्टि का टाइम होने वाला था, सो शमशेर सीधा ऑफीस ही चला गया
वहाँ अंजलि बैठी कु्छ सोच रही थी
"मे आइ केम इन मॅम", शमशेर ने उसके विचारों को भंग किया
अंजलि: आओ शमशेर जी
शमशेर: किस बात की टेन्षन है अंजलि, शमशेर ने धीरे से कहा
अंजलि: प्यारी मेडम आई थी, कह रही थी तुम्हे उनकी हवेली मैं रहना पड़ेगा
पर मैं नही चाहती वो निहायत ही वाहयात औरत है
शमशेर: तो माना कर देते हैं प्राब्लम क्या है?
अंजलि: प्राब्लम ये है की और कोई अरेंज्मेंट अभी हुआ नही है
शमशेर: तो मैं तुम्हारे साथ रहूँगा ना जान
अंजलि: मैने तुम्हे बताया तो था ये नही हो सकता मैं वैसे भी अकेली रहती हूँ कोई फॅमिली साथ होती तो भी अलग बात थी
शमशेर: वैसे तुम रहती कहाँ हो
अंजलि: यही उस सामने वाले मकान में अंजलि ने खिड़की से इशारा करते हुए कहा मकान स्कूल के पास ही गाँव से बाहर ही था
शमशेर: कोई बात नही! मकान तो शायद कल तक मिल जाएगा आज मैं भिवानी अपने दोस्त के पास चला जाता हूँ
अंजलि: कौनसा मकान?
शमशेर: कुछ सोचने की आक्टिंग करते हुए) वो कोई दिशा के मामा का घर है बच्चे कह रहे थे, कल घर से पूछ के आएँगे हालाँकि वो उनके बदन की एक-एक हड्डी तक का आइडिया लगा चुका था
अंजलि: अरे हां वो बहुत अच्छा रहेगा बहुत ही अच्छे लोग हैं उनका मकान भी काफ़ी बड़ा है फिर वो ४ ही तो जान हैं घर में मुझे भी अपने साथ रखने की काफ़ी ज़िद की थी उन्होने मुझे यकीन है वो ज़रूर मान जाएँगे
शमशेर: कितना अच्च्छा होता, अगर हम...
तभी स्कूल की छुट्टी हो गयी स्टाफ आने वाला था शमशेर बाहर निकल गया
उसने देखा दिशा उसकी और बार-बार अजीब सी नज़रों से देखती जा रही थी जैसे उसको पहचानने की कोशिश कर रही हो
रात के ८ बाज चुके थे अंजलि घर पर अकेली थी रह-रह कर उसको पिछली हसीन याद आ रही थी कुंवारेपन के २७ सालों में उसको कभी भी ऐसा नही लगा था की सेक्स के बिना जीवन जिया नही जा सकता इसी को अपनी नियती मान लिया था उसने पर आज उसको शमशेर की ज़रूरत अपने ख़ालीपन में महसूस हो रही थी अगर वो शमशेर ना होता तो कभी कल रात वाली बात होती ही नही जाने क्या कशिश थी उसमें लगता ही नही था वो ३० पार कर चुका है ऐसा सखतजान, ऐसा सुंदर... उसने तो कभी सोचा ही नही था की उसकी सुहागरात इतनी हसीन और अड्वेंचरस होगी सोचते-सोचते उसके बदन में सिहरन सी होने लगी ओह वो तो शमशेर का नंबर लेना भी भूल गयी बात ही कर लेती खुल कर स्कूल में तो मौका ही नही मिला सोचते-सोचते उसके हाथ उसकी ब्रा में पहुँच गये उसको कपड़ों जकड़न सी महसूस होने लगी एक-एक कर उसने अपना हर वस्त्रा उतार फेका और बाथरूम में चली गयी; बिल्कुल नंगी! सोचा नहा कर उसके गरम होते शरीर को शांति मिले पर उसे लगा जैसे पानी ही उसको छूकर गरम हो रहा है २० मिनट तक नहाने के बाद वो बाहर निकल आई आकर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गयी अपने एक-एक अंग को ध्यान से देखने लगी उसकी चूचियाँ पहले से भी सख़्त होती जा रही थी निप्पल एक दम तने हुए थे कल पहली बार किसी मर्द ने इनको इनकी कीमत का अहसास कराया था पानी में भीगी हुई उसकी चूत पर नज़र पड़ते ही वो सिहर गयी."आ" उसके मुँह से निकला उसकी चूत शमशेर की जवानी का रस पीकर खिल उठी थी, जैसे गुलाब की पंखुड़ीयान हों उसका हाथ उसकी पंखुड़ियों तक जा पहुँचा अकेली होने पर भी उसको उसे छूने में संकोच सा हो रहा था ये तो अब शमशेर की थी उसने पीठ घुमाई, शमशेर उसकी गंद को देखकर पागल सा हो गया था उसकी चूतदों की गोलाइयाँ थी भी ऐसी ही अचानक ही उसे याद आया, शमशेर का बॅग तो यही है उसके पास! जैसे डूबते को तिनके का सहारा शायद कही उसका नंबर लिखा हुआ मिल जाए वो एकदम खिल उठी उसने बॅग को टटोला तो एक डाइयरी में फ्रंट पर एक नंबर लिखा हुआ मिला उसने झट से डाइयल किया; वो शमशेर की आवाज़ सुनने को तड़प रही थी
उधर से आवाज़ आई," हेलो"
अंजलि की आँखें चमक उठी," शमशेर"
"जी, कौन"
"शमशेर, मैं हूँ!"
"जी, 'मैं' तो मैं भी हूँ"
"अरे मैं हूँ अंजलि" वो तुनक कर बोली
"ओह, सॉरी मॅम! आपको मेरा नंबर. कहाँ से मिला!"
"छोडो ना, अभी आ सकते हो क्या?"
शमशेर ने चौंक कर पूछा," क्या हुआ?"
"मैं मरने वाली हूँ, आ जाओ ना"
शमशेर उसकी बात का मतलब समझ गया जो आग कल उसने अंजलि को चोद कर उसने जगा
दी थी, बुझाना भी तो उसी को पड़ेगा," ओ.के. मॅम, ई आम कमिंग इन हाफ आन अवर. कह कर उसने फोने काट दिया
अंजलि सेक्स की खुमारी में मोबाइल को ही बेतसा चूमने लगी जल्दी से उसने ब्रा के बगैर ही सूट डाल लिया वो बेचेन हो रही थी कैसे अपने साजन के लिए खुद को तैयार करे बदहवास सी वो तैयार होकर खिड़की के पास खड़ी हो गयी जैसे आधा घंटा अभी २-३ मिनट में ही हो जाएगा लगभग २०-२५ मिनट बाद ही उसे रोड पर आती गाड़ी की लाइट दिखाई दी जो स्कूल के पास आकर बंद हो गयी...
अंजलि ने दरवाजा खोलने में एक सेकेंड की भी देर ना लगाई बिना कुछ सोचे समझे, बिना किसी हिचक और बिना दरवाज़ा बंद किए वो उसकी छति से लिपट गयी
" अरे, रूको तो सही, शमशेर ने उसके गालों को चूम कर उसको अपने से अलग किया और दरवाजा बंद करते हुए बोला, मैने पहले नही बोला था"
अंजलि जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी वो फिर शमशेर की बाहों में आने के लिए बढ़ी तो शमशेर ने उसको अपनी बाहों में उठा लिया और प्यार से बोला, मेडम जी, खुद तो तैयार होके बैठी हो, ज़रा मैं भी तो फ्रेश हो लूँ"
अंजलि ने प्यार से उसकी छति पर घूँसा जमाया और उसके गालों पर किस किया
शमशेर ने उसको बेड पर लिटाया और अपने बॅग से टॉवेल निकल कर बाथरूम में चला आया
नाहकर जब वा बाहर आया तो उसने कमर पर टॉवेल के अलावा कुछ नही पहन रखा था पानी उसके शानदार शरीर और बालों से चू रहा था अंजलि उसके शरीर को देखकर बोली," तुम्हे तो हीरो होना चाहिए था"
"क्यूँ हीरो क्या फिल्मों में ही होते है" कहते हुए शमशेर बेड पर आ बैठा और अंजलि को अपनी गोद में बैठा लिया अंजलि का मुँह उसके सामने था और उसकी चिकनी टाँगें शमशेर की टाँगों के उपर से जाकर उसकी कमर से चिपकी हुई थी
" प्लीज़ अब प्यार कर लो जल्दी"
"अरे कर तो रहा हूँ प्यार" शमशेर ने उसके होंटो को चूमते हुए कहा
" कहाँ कर रहे हो इसमें घुसाओ ना जल्दी"
शमशेर हँसने लगा" अरे क्या इसमें घुसने को ही प्यार बोलते हैं"
"तो"अंजलि ने उल्टा सवाल किया!
देखती जाओ मैं दिखता हूँ प्यार क्या होता है शमशेर ने उसको ऐसे ही बेड पर लिटा दिया उसका नाइट सूट नीचे से हटाया और एक-एक करके उसके बटन खोलने लगा अब अंजलि के बदन पर एक पैंटी के अलावा कुछ नही था शमशेर ने अपना टॉवेल उतार दिया और झुक कर उसकी नाभि को चूमने लगा अंजलि के बदन में चीटियाँ सी दौड़ रही थी उसका मॅन हो रहा तहा की बिना देर किए शमशेर उसकी चूत का मुँह अपने लंड से भरकर बंद कर दे वो तड़पति रही पर कुछ ना बोली; उसको प्यार सीखना जो था
धीरे-धीरे शमशेर अपने हाथो को उसकी चूचियों पर लाया और अंगुलियों से उसके निप्पल्स को छेड़ने लगा शमशेर का लंड उसकी चूत पर पैंटी के उपर से दस्तक दे रहा था अंजलि को लग रहा था जैसे उसकी चूत को किसी ने जलते तेल के कढाहे में डाल दिया हो वो फूल कर पकौड़े की तरह होती जा रही थी
अचानक शमशेर पीछे लेट गया और अंजलि को बिठा लिया और अपने लंड की और इशारा करते हुए बोला," इसे मुँह में लो."
अंजलि तन्नाई हुई थी,बोली," ज़रूरी है क्या.... पर ये मेरे मुँह में आएगा कैसे?
शमशेर: बचपन में कुलफी खाई है ना, बस ऐसे ही
अंजलि ने शमशेर के लंड के सूपाड़ा पर जीभ लगाई तो उसको करेंट सा लगा धीरे-धीरे उसने सूपाडे को मुँह में भर लिया और चूसने सी लगी उसको बहुत मज़ा आ रहा था शमशेर ज़्यादा के लिए कहना चाहता था पर उसको पता था ले नही पाएगी
" मज़ा आ रहा है ना!"
"हुम्म" अंजलि ने सूपाड़ा मुँह से निकलते हुए कहा"पर इसमें खुजली हो रही है" अपनी चूत को मसालते हुए उसने कहा." कुछ करो ना....
यह सुनकर शमशेर ने उसको अपनी पीठ पर टाँगों की तरफ मुँह करके बैठने को कहा उसने ऐसा ही किया शमशेर ने उसको आगे अपने लंड की और झुका दिया जिससे अंजलि की चूत और गांड शमशेर के मुँह के पास आ गयी एकदम तन्नाया हुआ शमशेर का लंड अंजलि की आँखों के सामने सलामी दे रहा था शमशेर ने जब अपने होंट अंजलि की चूत की फांको पर टिकाए तो वा सीत्कार कर उतही इतना अधिक आनंद उससे सहन नही हो रहा था उसने अपने होंट लंड के सूपाडे पर जमा दिए शमशेर उसकी चूत को नीचे से उपर तक चाट रहा था उसकी एक उंगली अंजलि की गांड के छेद को हल्के से कुरेद रही थी इससे अंजलि का मज़ा दोगुना हो रहा था अब वो ज़ोर-ज़ोर से लंड पर अपने होंटो और जीभ का जादू दिखाने लगी लेकिन ज़्यादा देर तक वो इतना आनंद सहन ना कर पाई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया जो शमशेर की मांसल छाति पर टपकने लगा अंजलि ने शमशेर की टाँगो को जाकड़ लिया और हाँफने लगी शमशेर का शेर हमले को तैयार था उसने ज़्यादा देर ना करते हुए कंबल की सीट बना कर बेड पर रखा और अंजलि को उसस्पर उल्टा लिटा दिया अंजलि की गांड अब उपर की और उठी हुई थी और चुचियाँ बेड से टकरा रही थी शमशेर ने अपना लंड उसकी चूत के द्वार पर रखा और पेल दिया चूत रस की वजह से चूत गीली होने से ८ इंची लंड 'पुच्छ' की आवाज़ के साथ पूरा उसमें उतार गया अंजलि की तो जान ही निकल गयी इतना मीठा दर्द! उसको लगा लंड उसकी आंतडियों से जा टकराया है
शमशेर ने अंजलि की गंद को एक हाथ से पकड़ कर धक्के लगाने सुरू कर दिए
एक-एक धक्के के साथ जैसे अंजलि जन्नत तक जाकर आ रही थी जब उसको बहुत मज़े आने लगे तो उसने अपनी गांड को थोड़ा और चोडा करके पीछे की और कर लिया शमशेर के टेस्टेस उसकी चूत के पास जैसे थप्पड़ से मार रहे थे शमशेर की नज़र अंजलि की गांड के छेद पर पड़ी कितना सुंदर छेद था उसने उस छेद पर थूक गिराया और उंगली से उसको कुरेदने लगा अंजलि अनानद से करती जा रही थी शमशेर धीरे-धीरे अपनी उंगली को अंजलि की गांड में घुसने लगा"उहह, सीसी...क्या....क्कार... रहे हो.. ज..ज्ज़ान!"अंजलि कसमसा उठी
देखती रहो! और शमशेर ने पूरी उंगली धक्के लगते-लगते उसकी गांड में उतार दी अंजलि पागल सी हो गयी थी वो नीचे की और मुँह करके अपनी चूत में जाते लंड को देखने की कोशिश कर रही थी पर कुम्बल की वजह से ऐसा नही हो पाया शमशेर को जब लगा की अंजलि का काम अब होने ही वाला है तो उसने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी सीधे गर्भाष्य पे धक्कों को अंजलि सहन ना कर सकी और ढेर हो गयी
शमशेर ने तुरंत उसको सीधा लिटाया और वापस अपना लंड चूत में पेल दिया
अंजलि अब बिल्कुल थक चुकी थी और उसका हर अंग दुख रहा था, पर वो सहन करने की कोशिश करती रही शमशेर ने झुक कर उसके होंटो को अपने होंटो से चिपका दिया और अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा दी धीरे-धीरे एक बार फिर अंजलि को मज़ा आने लगा और वो भी सहयोग करने लगी अब शमशेर ने उसकी चुचियों को मसलना सुरू कर दिया था अंजलि फिर से मंज़िल के करीब थी उसने जब शमशेर की बाहों पर अपने दाँत गाड़ने शुरू कर दिए तो शमशेर भी और ज़्यादा स्पीड से धक्के लगाने लगा अंजलि की चूत के पानी छोड़ते ही उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और अंजलि के मुँह में दे दिया अजाली के चूत रस से सना होने की वजह से एक बार तो अंजलि ने मना करने की सोची पर कु्छ ना कहकर उसको बैठकर मुँह में ले ही लिया शमशेर ने अंजलि का सिर पीछे से पकड़ लिया और मुँह में वीर्य की बौछार सी कर दी अंजलि गू...गूओ करके रह गयी पर क्या कर सकती थी करीब ८-१० बौछार वीर्य ने उसके मुँह को पूरा भर दिया शमशेर ने उसको तभी छोड़ा जब वो सारा वीर्य गटक गयी दोनों एक दूसरे पर ढेर हो गये अंजलि गुस्से और प्यार से पहले तो उसको देखती रही जब उसको लगा की वीर्य पीना कुछ खास बुरा नही था तो वो शमशेर से चिपक गयी और उसके उपर आकर उसके चेहरे को चूमने लगी...


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