गधापचीसी - अभी ना जाओ चोद के
मैं चाहती थी कि वो पहले मुझे चूमे चाटे और मेरे शरीर के सारे अंगों को सहलाए और उन्हें प्यार करे,
उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है।

ये गुलाबो भी एक नंबर की हरामजादी है। मैना और मिट्ठू के बारे में कुछ बताती ही नहीं। इस से अच्छी तो रज्जो ही थी जो पूरे मोहल्ले की खबर बता देती थी। किस लौंडिया का किस लौंडे के साथ चक्कर चल रहा है। फलां ने रात को अपनी औरत को कैसे चोदा कितनी बार चोदा और गांड मारी। मिसेज सक्सेना ने अपने मियां को कल रात कैसे चोदा ? और रीतू आंटी ने गुप्ता अंकल को पिछले दस दिनों से अपनी चूत मारने तो क्या उस पर हाथ भी नहीं रखने दिया है। पर दो-तीन महीने पहले वो अपने तीन बच्चों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ भाग गई तो इस कम्बख्त गुलाबो को मजबूरी में काम पर रखना पड़ा। पर ये गुलाबो की बच्ची तो कुछ बताती ही नहीं। इसे तो हर समय बस पैसे की ही लगी रहती है। अब कल की ही बात लो एक हज़ार रुपये एडवांस मांग रही थी और साथ में चार दिनों की छुट्टी। तो फिर चार दिनों तक घर का काम और सफाई क्या उसकी अम्मा आकर करेगी ? आज आने दो खबर लेती हूँ।
आप चौंक गई होंगी कि यह गुलाबो, मैना और मिट्ठू का क्या चक्कर है ?
ओह .... असल में ये मैना नई नई आई है ना। क्या कमाल का फिगर है साली का। मोटे नैन नक्श, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, कमान की तरह तनी भोंहें, कंधारी अनार की तरह गज़ब के स्तन और पतली कमर ! रेशमी बाहें और खूबसूरत चिकनी टांगें। नितम्बों का तो पूछो ही मत और उस पर लटकती काली चोटी तो ऐसे लगती है जैसे कि कोई नागिन लहराकर चल रही हो। एक दम क़यामत लगती है साली। कूल्हे मटका कर तो ऐसे चलती है जैसे इसके बाप की सड़क हो। पूरे मोहल्ले के लौंडो को दीवाना बना रखा है।
मेरा तो जी करता है कि इसका टेंटुआ ही पकड़ कर दबा दूँ। साली ने मेरा तो जीना ही हराम कर दिया है। जो पहले मेरी एक झलक पाने को तरसते थे आज मेरी ओर देखते ही नहीं, मैना जो आ गई है। मुझे समझ नहीं आता इस मैना में ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है ?
अगर सच पूछो तो ३६ साल की उम्र में भी मेरी फिगर बहुत कातिलाना लगती है। बस कमर कोई २-३ इंच जरूर फालतू होगी। मेरे नितम्ब और बूब्स तो उस से भी २१ ही होंगे। मेरे नितम्बों के कटाव तो जानलेवा हैं। जब मैं नाभि-दर्शना काली साडी पहनकर चलती हूँ तो कई मस्ताने मेरे नितम्बों की लचक देखकर गस खाकर गिर ही पड़ते है। पीछे से बजती हुई सीटियाँ सुन कर मैं तो निहाल ही हो जाती हूँ। पिछले ८-१० सालों में तो मैंने इस पूरे मोहल्ले पर एकछत्र राज ही किया है। पर जब से ये मैना आई है मेरा तो जैसे पत्ता ही कट गया।
और ये साला मिट्ठू तो किसी की ओर देखता ही नहीं। पहले तो इसकी मौसी इसे अपने पल्लू से बांधे फिरती थी और उसके जाने के बाद ये मैना आ गई। ये प्रेम का बच्चा भी तो एक दम मिट्ठू बना हुआ है अपनी मैना का। आज सुबह जब ऑफिस जा रहा था तो कार तक आकर फिर वापस अन्दर चला गया जैसे कोई चीज भूल आया हो। जब बाहर आया तो मैना भी साड़ी के पल्लू से अपने होंठ पोंछते हुए गेट तक आई। हाईई .... क्या किस्सा-ए-तोता मैना है। मेरी तो झांटें ही जल गई। बाथरूम में जाकर कोई २० मिनट तक चूत में अंगुली की तब जाकर सुकून मिला।
मैंने कितनी कोशिश की है इस मिट्ठू पर लाइन मारने की, पर साला मेरी ओर तो अब आँख उठा कर भी नहीं देखता। पता नहीं अपने आप को अजय देवगन समझता है। ओह. कल तो हद ही कर दी। जब बाज़ार में मिला तो विश करते हुए आंटी बोल गया और वो भी उस हरामजादी मैना के सामने। क्या मैं इतनी बड़ी लगती हूँ कि आंटी कहा जाए ?
मैं तो जल भुन ही गई। जी में तो आया कि गोली ही मार दूं ! पर क्या करुँ। खैर मैंने भी सोच लिया है इस प्रेम के बच्चे को अगर अपना मिट्ठू बना कर गंगाराम नहीं बुलवाया तो मेरा नाम भी निर्मला बेन गणेश पटेल नहीं।
मैं अभी अपने खयालों में खोई ही थी कि कॉल-बेल बजी। गुलाबो आई थी। वो अपनी टांगें चौड़ी करके चल रही थी। उसके होंठ सूजे हुए थे और गालों पर नीले निशान से पड़े थे। जब मैंने उस से इस बाबत पूछा तो उसने कहा,"ओह ! बीबीजी हमें शर्म आती है !" कहकर अपनी साड़ी के पल्लू को मुंह में लगा कर हंसने लगी।
मुझे बड़ी हैरानी हुई। कहीं मार कुटाई तो नहीं कर दी उसके पति ने ? मैंने उस से फिर पूछा तो उसने बताया "कल रात नंदू ने हमारे साथ गधा-पचीसी खेली थी ना ?" उसने अपना सिर झुका लिया।
"गधापचीसी ? ये क्या होती है ?"
उसने मेरी ओर ऐसे देखा जैसे मैं किसी सर्कस की कोई जानवर हूँ ! और फिर उसने शरमाते हुए बताया, "वो .... वो. कभी कभी पीछे से करता है ना ?"
"ओह " मेरी भी हंसी निकल गई। "तू तो एक नंबर की छिनाल है री ? तू मना नहीं करती क्या ?"
"अपने मरद को मना कैसे किया जा सकता है ? मरद की ख़ुशी के लिए वो जब और जैसे चाहे करवाना ही पड़ता है। क्या आप नहीं करवाती ?"
"धत् . बदमाश कहीं की ....? अच्छा.... तुझे दर्द नहीं होता ?"
"पहले पहले तो होता था पर अब तो बड़ा मज़ा आता है। गधापचीसी खेलने के बाद वो मुझे बहुत प्यार जो करता है ?"
मैं उस से पूछना तो चाहती थी कि उसके पति का कितना बड़ा है और कितनी देर तक करता है पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी। मैंने बातों का विषय बदला और उससे कहा "अच्छा पहले चाय पिला फिर झाडू पोंछा कर लेना !" मैं आज मैना और मिट्ठू के बारे में तफसील से पूछना चाहती थी इसलिए उसे चाय का लालच देना जरूरी था।
मैं सोफे पर बैठी थी। गुलाबो चाय बना कर ले आई और मेरे पास ही फर्श पर नीचे बैठ गई। चाय की चुस्कियां लेते हुए मैंने पूछा "अरी गुलाबो एक बात बता ?"
"क्या बीबीजी ?"
"ये मैना कैसी है ?"
"मैना कौन बीबीजी ?"
"अरी मैं उस सामने वाली छमकछल्लो की बात कर रही हूँ !"
"ओह.। वो मधु दीदी ? ओह वो तो बेचारी बहुत अच्छी हैं !"
"तुम उसे अच्छी कहती हो ?"
"क्यों क्या हुआ ? क्या किया है उसने .... वो तो. वो तो. बड़ी.. !"
"अच्छा उसकी वकालत छोड़. एक बात बता ?"
"क्या ?"
"ये मैना और मिट्ठू दिनभर अन्दर ही घुसे क्या करते रहते हैं ?"
"दिन में तो साहबजी दफ्तर चले जाते हैं !"
"ओह ! तुम भी निरी जाहिल हो ! मैं ऑफिस के बाद के बाद की बात कर रही हूँ।"
गुलाबो हंस पड़ी, "ओह. वो. बड़ा प्यार है जी उन दोनों में !"
"यह तो मैं भी जानती हूँ पर ये बता वो प्यार करते कैसे हैं ?"
"क्या ?? कहीं आप उस वाले प्यार की बात तो नहीं कर रही ?"
"हाँ हाँ चलो वो वाला प्यार ही बता दो ?"
"वो तो बस आपस में चिपके ही बैठे रहते हैं !"
"और क्या करते हैं ?" मेरी झुंझलाहट बढ़ती जा रही थी। यह गुलाबो की बच्ची तो बात को लम्बा खींच रही है असली बात तो बता ही नहीं रही।
गुलाबो हंसते हुए बोली "रात का तो मुझे पता नहीं पर कई बार मैंने छुट्टी वाले दिन उनको जरूर देखा है !" उसने आँखें नचाते हुए कहा।
अब आप मेरी चूत की हालत का अंदाजा लगा सकती है वो किस कदर पनिया गई थी और उसमें तो जैसे आग ही लग गई थी। मैंने अपनी जांघें जोर से भींच लीं।
"अरी बता ना ? क्या करते हैं ?"
"वो बाथरूम में घुस जाते हैं और .... और ...."
हे भगवान् इस हरामजादी गुलाबो को तो किसी खुफिया उपन्यास की लेखिका होना चाहिए किस कदर रहस्य बना कर बता रही है।
"ओफो .... अब आगे भी तो कुछ करते होंगे बताओ ना ?"
गुलाबो हंसते हुए बोली "और क्या फिर दोनों कपालभाति खेलते हैं !"
"कैसे ?"
"मधु दीदी पहले उनका वो चूसती हैं फिर साहबजी उनकी मुनिया को चूसते हैं ....!"
मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और मेरी मुनिया तो अब बस पीहू पीहू करने लगी थी। उसमें तो कामरस की बाढ़ सी आ गई थी। और अब तो उसका रस मेरी गांड के सुराख तक पहुँच गया था। जी तो कर रहा था कि अभी उसमें अंगुली डालकर आगे पीछे करने लगूं पर गुलाबो के सामने ऐसा कैसे किया जा सकता था। मैंने अपनी जांघें जोर से कस लीं।
"फिर ?"

 
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