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कमसिन कलियाँ
01-07-2013, 07:14 PM
Post: #1
कमसिन कलियाँ
प्रस्तावना

रात का समय, तेज घनघोर बारिश हो रही है। सुनसान जगह पर स्तिथ एक महलनुमा हवेली से एक के बाद एक गोली चलने की आवाज बिजली कड़कने के शोर में दब के रह गयी थी। उस हवेली के ड्राइंगरूम में पड़ी हुई रक्तरंजित लाश को घूरते हुए जड़वत खड़े हुए लोग। एक लम्बा और चौड़ा दबंग सा दिखने वाला व्यक्ति हाथ में गन थामे नीचे पड़ी हुई लाश को घृणा भरी नजरों से घूरता हुआ जिसे चार मुस्टंडे कस कर पकड़े हुए हैं। एक ओर पड़ी हुई घायल लड़की को अपनी बाँहों में थामे एक नवयुवक जिसकी सिसकियाँ की आवाज कमरे में गूँज रही है। उन्हीं दोनों को घेरे हुए एक छोटी बच्ची और एक नवयौवना गोदी मे बच्ची को लिए घायल लड़की को घूरती है…।
घायल लड़की अपनी उखड़ी हुई आवाज में बोलती है… मै तुम पर अपनी दीदी और उनकी बच्चियों की जिम्मेदारी डाल रही हूँ प्लीज उनका ख्याल रखना। युवक पास खड़ी हुई छोटी बच्ची के हाथ को थाम कर सिसकते हुए हामी भरता है।
तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे… मगर मै तुम्हें भूलने नहीं दूँगी क्योंकि मै वापिस आऊँगी… कहते हुए घायल पड़ी लड़की एक आखिरी हिचकी लेकर हमेशा के लिए शान्त हो जाती है।

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01-07-2013, 07:15 PM
Post: #2
RE: कमसिन कलियाँ
नवयुवक उस लड़की से लिपट कर रोता है। पास खड़ी नवयुवती उसे सांत्वना देती हुई उसका ध्यान सामने पड़ी हुई दूसरी लाश की ओर खींचती है। नवयुवक की नजर पड़ते ही उसके मुख से चीख निकल जाती है… पिताजी…। उठ कर कहते हुए सामने पड़ी हुई लाश से लिपट कर बिलख-बिलख कर रोने लगता है। कुछ देर के बाद अपने आप को शान्त करते हुए कहता है… ठाकुर तूने अपनी झूठी शान के लिए मेरी पत्नी और मेरे पिता को मार दिया… मै कसम खाता हूँ कि तेरे जीतेजी मै तेरी हर एक बेटी को अपनी हमबिस्तर बनाऊँगा अब तू रोक सके तो रोक लेना… साले हवस के पुजारी… तूने मेरा घर बर्बाद कर दिया अब तू अपनी बर्बादी का मंजर देख…
नवयुवती गोदी मे बच्ची लिए उस दबंग से दिखने वाले व्यक्ति की ओर बढ़ती है और गुस्से में बिफरती हुई… पिताजी आज से मै और मेरी बच्चियाँ आप के लिए हमेशा के लिए मर गयी है… मै जा रही हूँ… कहते हुए नवयुवक का हाथ थाम कर चली जाती है।

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01-07-2013, 07:15 PM
Post: #3
RE: कमसिन कलियाँ
सीन-1
(शाम का समय: बीयर बार, राजेश अपने दोस्त एलन और उसकी पत्नी डौली के साथ गपश्प करता हुआ।)
राजेश: बहुत दिनों के बाद दिखे, क्या हाल है।
एलन: कुछ खास बात नहीं। कुछ घरेलू कार्य की वजह से निकलना नहीं हुआ।
राजेश: और डौली तुम कहाँ गायब हो गयी थी। अगर एलन नहीं है, तुम तो अपना समय हमारे साथ गुजार सकती हो? बहुत दिन हो गये तुम्हारे साथ रात बिताये हुए।
डौली: नहीं, एसी कोई बात नहीं। आपके दोस्त की मदद कर रही थी। एक साल से पीछे पड़े थे कि स्वीटी अब बड़ी हो गयी हे, अभी भी बच्ची बनी हुई है, पता नहीं कब बड़ी होगी?
राजेश: यार, तुम दोनों की मदद चाहिये। अगर कामयाब हो गया, तो जन्न्त, वरना निश्चित तलाक।
एलन: लगता हे कि अब गाड़ी लाईन पर आ गयी। लीना या टीना? आखिर दोनों अपनी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है। यार तूने अपनी बच्चियो को प्यार के सुख से वन्चित रखा है। अगर किसी स्कूली भँवरे को उनकी मह्क लग गयी, तो बहुत पछ्ताएगा।
राजेश: तू सही कह रहा है। पर तू मुमु को जानता है, वह डौली की तरह खुले विचारों की नहीं है। सेक्स के मामले में बहुत दकियानूसी है।
(एलन दंपति एक दूसरे की तरफ मुस्कुरा कर देखते है)
राजेश: मुझे एक कातिल आइडिया आया है, जो तुम्हारी मदद के बिना पूरा नहीं हो सकता।
(तीनो नजदीक आकर खुसर-पुसर करते है। अचानक राजेश और डौली खिलखिला कर हँसते है और डौली एलन को चूम लेती है)

गुरु लोग अपने ग्रंथों में कहते है कि नवयौवना बसन्त बहार अपने शरीर में सबसे पहले बदलाव महसूस करती है। इस मास की सबसे पहली फुहार एक नवयौवना के दिल और शरीर में तरंगे पैदा करती है। उसके स्तन पर शिखर कलश तन कर खड़े हो जाते है। इसका वर्णन कालिदास ने बखूबी अपनी रचनाओं मे किया है। वात्सायन लिखते है कि नारी का मन जानना नामुम्किन है। लेकिन वह अपने ग्रंथ में बसन्त के मौसम में कमसिन नारी की मनोस्तिथि को भरपूर दर्शाते है। उसी को ले कर मेरी कहानी के इस भाग की शुरुआत होती है…

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01-07-2013, 07:15 PM
Post: #4
RE: कमसिन कलियाँ
सीन-2
(राजेश के घर के ड्राइंगरूम का सीन)
(राजेश सोफे पर लेट कर टीवी देख रहा है, मुमु नजदीक बैठी हुई है। राजेश बार-2 अपना हाथ मुमु के सीने की तरफ बढ़ाता है पर मुमु उसके हाथ को झट्क देती है। टीना का आगमन।)
(अभी-2 टीना सो कर उठी है। छोटी सी महीन टी-शर्ट मे से छोटे-छोटे नांरगी जैसे पुष्ट सीने के उभार साफ दिखते हुए, और घुटने से भी एक फुट उपर मिनि सर्क्ट जो बामुश्किल जांघो को छुपाने की नाकाम कोशिश करती हुई। आकर राजेश के उपर गिर कर लिपट जाती है।)
टीना: मम्मी, मुझे दीदी की याद आ रही है।
(राजेश अपने हाथ प्यार से धीरे-धीरे टीना की पीठ पर फिराते हुए उसे अपनी ओर खीचता है। टीना की अर्धविकसित उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से जा टकराते है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न जांघों पर आ टिकता है। मुमु इन सब से बेखबर, टीवी देखने मे मस्त।)
टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) मम्मी तुम सुन नहीं रहीं।
(राजेश थोड़ा मस्ती में टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े होते लिंग का दबाव बढ़ाता है। कोई चीज अपनी जांघ के निचले हिस्से में गड़ती हुई मह्सूस करती हुए, टीना फिर से एक बार कसमसाती है।)
मुमु: एक महीने कि तो बात है। अपनी क्लास के साथ छुट्टियां मनाने कशमीर गयी है, कोई फोरन तो नहीं गयी है।
टीना: (थोड़ा कसमसाते हुए) पापा, मुझे छोड़ो।
राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, लीना जल्दी वपिस आएगी। तेरी मम्मी को तो टीवी देखने से फुरसत मिले तो वह तेरे बारे में सोचे कि तू अपनी छुट्टियाँ कैसे बिताए।
मुमु: तुम तो रहने दो। टीना ह्ट वहां से, अब तू छोटी बच्ची नहीं रही। कोई देखेगा तो क्या कहेगा।
टीना: (थोड़ा इठलाते हुए) क्यों पापा, क्या मैं बच्ची नहीं रही, अब मैं जवान हो गयी हुं ।
राजेश: (अपने लिंग को धीरे से घिसते और दबाव बढ़ाते हुए) न मेरा प्यारा बेटा, तू तो अभी मेरी छोटीसी गुड़िया है। तेरी मम्मी के दिमाग का तो भगवान ही मालिक है। (टीना के गाल को चूमते हुए) तुझे नहीं लगता, तेरी मम्मी अक्ल और शरीर से मोटी होती जा रही है?
मुमु: (आंख तरेरते हुए) तुम रहने दो। तुमको इतने दिनों से कह रहीं हुं कि मेरा वजन बढ़ता जा रहा है, कोई फिट्नेस सेन्टर के बारे मे पता लगाओ। पर तुम हो कि कुछ भी नहीं करते।
टीना: (अपने को राजेश की बाहो से छुड़ाते हुए) मम्मी, यह ठीक रहेगा। मैं और आप, दोनों एक ही फिट्नेस सेन्टर जौइन कर लेते है क्योंकि मुझे भी अपना फ़िगर और वजन ठीक रखना है। मेरी छुट्टियाँ भी अच्छी तरह से इस्तेमाल हो जाएगी।
राजेश: (टीना को अपनी ओर खींचते हुए) मैनें तुम्हारे बारे मैं एलन और डौली से बात की है, उनका कहना है कि पहले तुम एक बार उनके फिट्नेस सेन्टर पर आओ और देखो, फिर वह दोनों तुमसे बात करने घर पर आएगें।
मुमु: उनको तो रहने दो, मैनें उनके बारे मे बहुत सुन रखा है। दोनों बहुत लम्पट किस्म के है।
राजेश: (टीना की नग्न जांघ पर अपना हाथ फिराते हुए, नीचे से अपने खड़े हुए लिंग को घिसते हुए) तुम पता नहीं घर मे बैठ कर कहाँ से उल्टी-सीधी बातें सुन लेती हो। उनका फिट्नेस सेन्टर शहर का सबसे बड़ा और एक्स्क्लुसिव सेन्टर है। हर कोई उसका मेम्बर नहीं बन सकता।
टीना: (फिर से एक बार कसमसाती है, हिलने से उसके अर्धविकसित उरोज राजेश की छाती पर घिसाव करते है जिस से उसकी छोटी-छोटी घुन्डियां खड़ी होने लगती है। लाल-लाल डोरे मासूम आँखों में तैरने लगते है। अजीब सी कश्मकश मासूम टीना को अपने शरीर में महसूस होने लगी थी। छातियों की घुन्डियों से करन्ट उत्पन्न हो कर पुरे शरीर में फैल रहा था और सीधे नीचे जाकर योनिद्वार पर दस्तक दे रहा था। उधर राजेश के हाथ और लिंग के जैसे अपने दिमाग थे, कि हाथ का निशाना टीना की नग्न जांघों पर था और खड़ा हुआ लिंग कपड़ों से ढंकी योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मार रहा था) (हल्की सी कपकंपायीं आवाज मे) मम्मी अ...हं..ह्ह.....लन अंकल का फिट्नेस सेन्टर बहुत मशहूर है। मेरी कुछ फ्रेंड्स के पेरन्ट्स मेम्बरशिप पाने के लिये बहुत दिनों से कोशिश कर रहे है पर उन्हें अभी तक नहीं मिला है .अंह..अंह..ह.ह..(अचानक बार-बार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकला, वह राजेश से कस के लिपट गयी)
मुमु: अरे इसे क्या हुआ?
राजेश: (अपने तन्नाए हुए लिंग को और भीषणता से घिसते हुए, टीना को अपनी बाँहों मे भींचते हुए) कुछ नहीं, बस जरा कस के पकड़ लिया तो बेचारी की साँस घुट कर रह गयी। तुम बताओ कि क्या सोचा? (इस बीच टीना ने जबरदस्ती अपने को राजेश की बाँहों से मुक्त किया और बाथरुम की ओर भाग गयी। आखिरी कश्मकश मे राजेश के लिंग ने भी उफनता हुआ लावा हल्का सा छ्लका दिया, इस से पहले मुमु देखे जल्दी से राजेश ने पाजामा ठीक-ठाक किया) .... अं.ह... मेरा ख्याल है कि एक बार तुम जा कर देख लो, अगर अच्छा लगे तो करना अन्यथा कुछ और सोचेंगे।
मुमु: लेकिन जो बाते मैनें सुनी है, मै टीना को उधर ले जाना ठीक नही समझती क्योंकि मैनें सुना है कि उधर बहुत अश्लील पहनावे मे जवान युवक-युवतियां योग एवं क्रीड़ा में मग्न होते है।

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01-07-2013, 07:16 PM
Post: #5
RE: कमसिन कलियाँ
गुरु लोगों ने कमसिन नारी की कल्पना करते हुए उसके शरीर के अन्दर आते हुए उतार चढ़ाव और उस पर उफ़नते हुए जज्बातों को टाइम बाम्ब की संज्ञा से नवाजा है। एक लड़की के सबसे संवेदनशील स्थान उसके स्तन और केले से समान चिकनी जंघाएँ होती है। कोका गुरु बताते है कि रेशम से ढकी हुई जंघा को हलका सा सहलाना से ही बालिका का योनिमुख अपने आप ही खुल जाता है और उसके स्तानाग्र पत्थर की तरह तन जाते है। हल्का सा स्तनाग्र के घिसाव से काम पिपासा भड़क उठती है…

…(दरवाजे के पीछे से टीना ने सब सुन लिया और पैर पट्कती हुई आती है और मुमु से लड़ती है)
टीना: (रुआंसी हो कर) मम्मी तुम हमेशा ऐसे ही करती हो। तुम्हारी दकियानूसी बातें हमे अच्छी नहीं लगती। तुम लीना दीदी को भी टूर पर जाने से मना कर रही थी। अगर पापा जिद्द नहीं करते तो लीना दीदी भी आज शायद यहीं पर बैठ कर बोर हो रही होती।
राजेश: (जरा कठोरता से) टीना बेटा, तुम्हें अपनी मम्मी से ऐसे बात नहीं करनी चाहिये। वह हमेशा तुम्हारी भलाई की सोचती है। अगर वह सोचती है कि फिट्नेस सेन्टर में तुम्हारा जाना अच्छा नहीं है तो तुम्हें जिद्द नहीं करनी चाहिये। तुम्हें अपनी मम्मी से माफ़ी माँगनी चाहिये।
(राजेश को मुमु की तरफदारी करते हुए देख कर, टीना झेंप जाती है और रोते हुए अपने कमरे मे चली जाती है।)
राजेश: मुमु, टीना नाराज हो गयी। अब कई दिनों तक मुँह फुला के बैठी रहेगी। बेचारी की सारी छुट्टियाँ बरबाद हो जायेंगी।
मुमु: लेकिन उसकी हर जिद्द तो पूरी नहीं की जा सकती। और वैसे भी मैं उसके खुले विचारों से पहिले से ही काफी चिन्तित हूँ।
राजेश: तुम चिन्ता मत करो, मैं उसे मनाने की कोशिश करुँगा। पर तुम अब अपनी सेहत के बारे मे सोचो, एलन का फिटनेस प्रोग्राम बहुत लाभदायक है। मैंने कई लोगों से इसके बारे मे सुना है।
मुमु: तुम जा कर टीना को मनाओ, वर्ना आज वह पूरे दिन मातमी चेहरा बना कर बैठी रहेगी।
राजेश: हाँ, मैं उसके पास जाता हुं।
मुमु: मैं थोड़ी देर के लिये बेला के घर जा रही हुं, उसकी बेटी और दामाद आए हुए है। तुम दरवाजा बंद कर लो क्योंकि तुम उपर टीना के पास बैठने जा रहे हो। मैं आकर घंटी बजा दूँगी।
(मुमु घर से जाती है, राजेश दरवाजे को लाक करके टीना के पास जाता है।)

कोका अपने शास्त्र में कहते है कि लड़की की काम पिपासा भड़कने के बाद उसकी योनि और स्तनाग्र के बीच के स्नायु अत्याधिक संवेदनशील हो जाते है। योनिमुख पर हल्का सा द्बाव ही काफी है कि अपनी लार टपकाने के लिए…

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01-07-2013, 07:16 PM
Post: #6
RE: कमसिन कलियाँ
सीन-3 (टीना का बेडरूम)
(राजेश धीरे से टीना के दरवाजे पर दस्तक देता है।)
राजेश: बेटा टीना, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ ?
(कोई जवाब न पा कर, राजेश धीरे से दरवाजे को अन्दर की ओर ढ्केलता है और बेडरूम मे दाखिल हो जाता है। टीना उन्हीं वस्त्रों मे अपने बिस्तर पर ओंधे मुँह लेटी हुई सुबक रही है। मिनी-स्कर्ट कुछ उपर खिसक जाने से उसकी मासंल जांघे और आधे अधूरे गोल-गोल नितंब सर्वविदित होते हुए। पीठ पर से टी-शर्ट भी कुछ उपर खिसक गयी है।)
राजेश: बेटा, मुझसे बात भी नहीं करोगी? क्या बहुत नाराज़ हो?
(यह सब बोलते हुए, राजेश बेड के पास आ कर खड़ा हो जाता है। टीना हल्के से कुनमुनाती है पर कुछ नहीं बोलती है। राजेश धीरे से उसके साथ ही बेड पर लेट जाता है। और धीरे से उसे पलट कर सीधा कर देता है। रोता हुआ चेहरा लाल हो गया है, यह देख कर झट से टीना के गाल चूम लेता है और उसे अपनी ओर खींच लेता है।)
टीना: मैं आपसे नहीं बोल रहीं।
राजेश: क्यों नहीं बोल रहीं? बेटा, क्या मुझसे कोई गल्ती हो गयी? लड़ाई तुम माँ-बेटी करती हो और अपनी नाराजगी मुझ गरीब पर उतारती हो।
(यह सब बात करते हुए, राजेश जबरदस्ती टीना को अपने उपर घसीट लेता है। इस खीचाँतानी मे टीना का दायाँ ऊरोज उघड़ गया, गोरे स्तन पर एक गुलाबी घुंडी के दर्शन मात्र से राजेश के रोंगटे खड़े हो गये। अर्धविकसित बायाँ उरोज, राजेश की बालिष्ट छाती से दब गया। इन सब से अनिभिज्ञ, मासूम टीना मचलती हुई राजेश की गिरफ्त से निकलने की पुरजोर कोशिश करते हुए उसके और चिपक जाती है। राजेश का हाथ नीचे की ओर चला जाता है और टीना के नग्न नितंबों पर आकर ठहर जाता है। अब वही पहिले जैसी स्थिति मे दोनों आ जाते है। टीना को पकड़े हुए राजेश करवट बदलता है और उसे अपने नीचे दबा लेता है। अपने तन्नाए हुए लिंग का दबाव बढ़ाते हुए और टीना के गालों को लगातार चूमता हुआ गिड़गिड़ाता है।)
राजेश: न मेरा प्यारा बेटा, इतनी नाराज़गी अच्छी नहीं। (चूमते हुए........) क्या मैने तुम्हारी कोई इच्छा को आज तक मना किया है?

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01-07-2013, 07:16 PM
Post: #7
RE: कमसिन कलियाँ
(सिल्क पाजामे मे से राजेश का तन्नाया हुआ लिंग टीना की जांघों के बीचोंबीच आ टिकता है। फिर से एक बार टीना कसमसाती है, हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी होने लगती है। राजेश अपनी बालिष्ट छाती से टीना के स्तनों को पीस देता है। टीना की मासूम आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब बैचैनी और कश्मकश में मासूम टीना अपनी आँखे मूंद लेती है। छातियों की घुन्डियों मे से करन्ट फिर से प्रावाहित होना शुरु कर देता है। नीचे लिंगदेव कठोरता धारण कर योनिद्वार पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देते है।
राजेश: क्या हुआ, टीना की मुआफी नहीं मिलेगी। मुझसे बात नहीं करोगी।
टीना: (नशीली आवाज में) आपने मम्मी की साइड क्यों ली? आप लीना दीदी को ज्यादा प्यार करते हो, मुझे नहीं। जाओ मैं आपसे बात नहीं करती।
(अब राजेश के हाथ भी हरकत मे आ गये और नीचे की ओर सरकते हुए टीना के नग्न नितम्बों पर जा कर ठहर गये। कुछ ढूँढते हुए और हल्के-2 हाथ से सहलाते हुए कुछ दबाते हुए इधर-उधर बेटोक विचरने लगे। अचानक, राजेश को विदित हुआ कि टीना नीचे से बिलकुल नग्न अवस्था में लेटी हुई है और उसके लिंग और योनिमुख के बीच मे बस एक रेशम की दीवार है। अपनी भुजाओं मे कस कर, राजेश धीरे से टीना का बायां पाँव उपर उठा कर अपने लिंग को ढकेलता है। एक हल्की सिसकारी के साथ टीना कस के राजेश को चिपट जाती है।)
राजेश: नहीं बेटा, घर मे मुझे सबसे ज्यादा प्रिय कोई है तो वह तुम और लीना हो और कोई नहीं। अगर मै उस समय तुम्हारा साथ देता तो तेरी मम्मी कभी भी फिट्नेस सेन्टर जाने के लिये सहमति नहीं देती। (बात करते हुए, राजेश अपने तन्नाए हुए लिंग को भीषणता से ठेलता है। जोर-जबरदस्ती के आलम मे रेशम से ढके लिंगदेव का अग्र भाग अछूती योनिमुख के कपाट थोड़ा सा खोलने मे सफल हो जाता है।)
टीना: पा .उई....प.आ... पा, मै भी अपने वजन को कम करना चाहती हूँ। मै भी मम्मी की तरह अपनी फिगर को मेन्टेन करना चाहती हूँ। आगे चलके मेरा भी मम्मी जैसा हाल न हो जाए इसलिए मै फिट्नेस सेन्टर जाना चाहती हूँ.उ.उ.उ...आह......
(राजेश बार-बार टीना के गालों को चूमता, नीचे से अपने लिंग को धीरे से ठेलता हुआ अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है। बार-बार नितम्बों पर दबाव, लगातार घर्षण और ठोकर से टीना की योनिद्वार के मुख से गर्म लावा बह निकलता है, टीना बदहवासी मे राजेश से कस कर लिपट जाती है। राजेश के लिंगदेव ने भी गुस्से से लावा उगलना शुरु कर दिया। राजेश ने वक्त़ की नजाकत को समझते हुए टीना को पुचकारना शुरु किया।)
राजेश: टीना ..टीना..क्या हुआ। (पिण्डलियों मे से हाथ निकाल कर, टीना को हिलाते हुए).. टीना..क्या हुआ।
टीना: (झेंप कर) कुछ.. नहीं।
राजेश: क्या हुआ बताओ। मुझे फिकर हो रही है। तुम बोल क्यों नहीं रहीं?
(सब तूफान शांत हो गया था। राजेश धीरे से टीना के उपर से सरक कर उसकी ओर मुख करके लेट जाता है। पाजामे के सामने का हिस्सा दोनों के प्रेमरस के मिश्रण की गाथा से सरोबर हो रहा था।)
राजेश: (टीना को अपनी छाती से लगाते और दिखाते हुए) अररे...यह क्या हुआ? क्या यहां पानी पड़ा था? सारा पाजामा गीला हो गया।
(उघड़ा हुआ अपना दायाँ ऊरोज को देख कर टीना जल्दी से टी-शर्ट नीचे खींचती है। अपनी झेंप मिटाने के लिये, झुकी हुई आँखें लिये राजेश के सीने से लग जाती है।)
टीना: (रुआँसी आवाज में) पापा, पता नहीं मुझे क्या हो गया है। जब भी आप मुझे प्यार से लिपटाते हो, मुझे न जाने क्या हो जाता है। मेरे पूरे शरीर में और पेट में अजीब सी हलचल मच जाती है और अचानक ऐसा लगता है कि मेरा पेशाब निकल जायगा। (और यह कर रोने लगती है)
राजेश: न बेटा, न रो। मेरा पजामा तेरे पेशाब से नहीं भीगा है। (टीना को पुचकारता हुआ) अब तू जवान हो गयी है। जब तुझे बहुत प्यार आता है तो तेरे शरीर में से एक तरह के टाक्सिन बनने लगते है और जब तू बहुत एक्साईटिड हो जाती है तो सारे टाक्सिन बाहर निकल जाते हैं।
(टीना ढ्बढबाई आँखों से चुपचाप राजेश के सीने से लग कर सारी बात सुनती है। राजेश भी आत्मग्लानि मे डुबा हुआ मासूम टीना को प्यार से समझाता है।)
राजेश: बेटा, जैसे तुम्हारी माहवारी होती है। वैसे ही तुम्हारे जवान होने पर यह टाक्सिन बनने और निकलना शुरु हो जाते है। यही हाल लड़कों के साथ भी होता है। मेरे को भी जब तुम पर बहुत प्यार आता है, मेरे शरीर से भी टाक्सिन निकल जाते है। खैर, तुम इसकी चिन्ता न करो। मुँह-हाथ धो कर फ्रेश हो जाओ। हम दोनों नीचे ड्राइंगरूम में बैठ कर फिट्नेस सेन्टर की पहेली सुलझाते है।
(राजेश उसके गाल थपथपाता है और टीना के कमरे से बाहिर निकल जाता है।)

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01-07-2013, 07:16 PM
Post: #8
RE: कमसिन कलियाँ
सीन-4 (ड्राइंगरूम का सीन)
(राजेश अपने कुर्ते-पाजामे में सोफ़े पर बैठ कर टीवी पर अंग्रेजी फिल्म देख रहा है। टीना का आगमन्। मलमल का कुरता, जींन्स, चेहरे पर मासूमियत और यौन संतुष्टि की पुर्ण रौनक)
राजेश: आओ, बेटा मेरे पास बैठ जाओ।
टीना: पापा, मुझे मम्मी के साथ एलन अंकल के फिट्नेस सेन्टर में एनरोल करा दिजिये। मेरी छुट्टियाँ भी अच्छी तरह से कट जाएँगीं।
राजेश: पर तुम्हारी मम्मी नहीं मानेंगी।
टीना: (ठुनकते हुए) यह भी कोई बात हुई। आप किसी भी तरह मम्मी को राजी कराईए।
राजेश: तुम जानती हो अपनी मम्मी को, वह नहीं मानेगी। (राजेश अपनी ओर टीना को खींचता है।)
टीना: (राजेश से सटती हुई उसके गाल को चूमती है) आप मुझे प्यार करते हो?
राजेश: (जवाब में राजेश भी उसके गाल को चूमता है) यह भी कोई पूछने की बात है। मैं तुमसे सब से ज्यादा प्यार करता हूँ।
राजेश: हाँ, एक काम कर सकता हूँ कि तुम एलन अंकल वाली एक्सरसाईज भी कर पाओ और मम्मी को भी पता न चले।
टीना: (खुशी से राजेश के उपर कूद पड़ती है) पापा, मेरे लिए प्लीज कुछ ऐसा कर दो।
(राजेश टीवी पर ध्यान लगाता है। सीन में आदमी एक नवयौवना को बाँहों में लेकर उसके होंठ चूमता है। लड़की भी उसके होंठ अपने होंठों में लेकर चूमती है।)
टीना: छिँ ... छिँ.. पापा, आप क्या गन्दी फिल्म देख रहे हो। मेरी मदद करो।
राजेश: क्यों बेटा, इस में क्या गन्दा है। वह अपने प्यार का इजहार कर रहें है। जब कोई किसी से प्यार करता है, वह ऐसे ही चूमते है।
टीना: क्या यह करना जरुरी है?
राजेश: हाँ, बिलकुल। ऐसा करने से वह अपने प्यार को प्रगाढ़ करते है और उसके परिणामस्वरूप उनके शरीरों से उतप्न्न टाक्सिन बाहिर निकाल फेकते है।
टीना: (मन्त्र्मुग्ध सी राजेश की बात सुनती है) आखिर यह टाक्सिन क्या होता है।
राजेश: टाक्सिन शरीर के अन्दर का जहरीला केमिकल है जिसकी वजह से चेहरे पर दाग, बालों का झड़ना, खाल में झुर्रियॉ, इत्यादि, हो जाती है। टाक्सिन का शरीर से निकालना बहुत ही आवयश्क है। वर्ना व्यक्ति जल्दी बूढ़ा होने लगता है।
टीना: पापा, क्या मेरे चेहरे पर भी दाग आजाएगें अगर मैनें टाक्सिन बाहिर नहीं निकाल फेके? राजेश: बिलकुल।
(टीना का चेहरा अपने हाथ में ले कर, राजेश धीरे से गालों को चूमता है)
राजेश: बताओ, तुम्हें कुछ मह्सूस हुआ?
टीना: नहीं, कुछ भी नहीं।
राजेश: इसका मतलब है कि ऐसे चूमने से तुम्हारे शरीर का जहर टाक्सिन नहीं बन पाया।
टीना: पर सब तो ऐसे ही करते है। क्या अभी आप ने मुझे ऐसे नहीं चूमा था?
राजेश: हाँ। तुम सही कह रही हो। पर मैं मुमु को तो तुम्हारी तरह नहीं चूमता हूँ। उसके तो होंठों को अपने होंठों मे ले कर चूमता हूँ।
टीना: पर मुझसे क्यों नहीं? या इस लिए कि मै आपकी बेटी हूँ और यह अच्छी बात नहीं।
राजेश: पहली बात, सिर्फ प्यार मे दो व्यक्ति ऐसा करते है। प्यार के बिना चूमने से टाक्सिन नहीं बनेंगें। दूसरी बात, जब तुम छोटी थी, मैं तुम्हें ऐसे ही चूमता था, पर जब से तुम बड़ी हुई मैं ऐसा करने से डरता था।
टीना: क्या आप मम्मी से डरते थे? या मुझसे?
राजेश: दोंनों से। यह पता नहीं ज्यादा डर किस से लगता है। (बड़े दुखी से चेहरे के साथ) पर मुझे लगता था कि अब तुम मुझे प्यार नहीं करती हो इस लिए मैं अपने प्यार का इजहार तम्हें नही कर पाता हूँ। और कहीं कर दिया तो तुम्हारी मम्मी को ऐसा न लगे कि मै तुम्हें उस से ज्यादा प्यार करता हूँ।
टीना: (खुशी में राजेश के गाल को जोरों से चूम लेती है) पापा मैं आपसे सब से ज्यादा प्यार करती हूँ। मम्मी और दीदी से भी ज्यादा। पर ऐसे चूमना गलत नहीं होगा।
राजेश: बताओ तुम मुझसे प्यार करती हो?
टीना: हाँ।
राजेश: (बड़े भोले अन्दाज में) और मै तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। जब हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है तो ऐसे चूमना गलत कैसे होगा?
टीना: (कुछ सोचती और सकुचाई हुई) ऐसा तो मैनें सोचा ही नहीं था। पर पापा मुझे तो ऐसे चूमना नहीं आता।
राजेश: बेटा, जब तुम्हें मैथ्स के सवाल नहीं आते, तो किसके पास सीखने जाती हो?
टीना: आप के पास।
राजेश: तो फिर आज से हम ऐसे ही चूमेगें। इस से हमारे बीच प्यार भी बढ़ेगा और हमारे शरीर से टाक्सिन भी निकलवायेंगे। (थोड़ा रुक कर) पर तुम तो जानती हो की तुम्हारी मम्मी कितनी शक्की किस्म की औरत है। अगर उसके सामने हम ने ऐसा किया तो वह सोचेगी मै तुम्हें उस से ज्यादा प्यार करता हूँ।
टीना: हाँ, इस से तो वह अपना सारा गुस्सा हम पर निकालेगीं। पापा, क्यों न हम यह सब मम्मी के पीठ पीछे करें, तो उन्हें पता ही नहीं चलेगा।
राजेश: (अंधा क्या चाहे, दो आँखे) हाँ, यह ठीक रहेगा। अभी तुम्हारी मम्मी बेला आंटी के घर पर गयी हुई है, क्यों न हम ऐसे चूमने की कोशिश करके देखें। देखें कि क्या ऐसा करने से टाक्सिन बनते है कि नहीं।

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01-07-2013, 07:16 PM
Post: #9
RE: कमसिन कलियाँ
कोका गुरु कहते है कि स्खलन स्त्री और पुरुष दोनों मे ही होता है। हालाँकि पुरुष को तो एक बार के बाद कुछ समय चाहिए लेकिन स्त्री के लिए मात्र उत्तेजना ही स्खलन का कारण है और इसी लिए एक के बाद एक स्खलन (मल्टिपल ओर्गेस्म) भी उस की कामपिपासा को शान्त करने के लिए काफी नही है। गुरुजी का कहना है कि एक स्त्री को पहले उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँचने दो और उसके बाद ही एकाकार की सोचो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शर्तीय पुरुष पहले शहीद हो जाएगा। कहानी के दौरान कोका गुरु के बताये हुए प्रेशर पोइन्ट्स के बारे मे भी कुछ रौशनी डालूँगा।

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01-07-2013, 07:17 PM
Post: #10
RE: कमसिन कलियाँ
टीना: (कुछ असमंजस में, कुछ शर्माती हुई और कुछ सकुचाई) हुं..हुं
राजेश: अगर तुम्हें कोई आपत्ति है तो नहीं करते है। बेटा, इससे मेरे प्यार में कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
टीना: (कुछ शर्माती हुई) नहीं, ऐसी बात नहीं। पापा मुझे डर लग रहा है। चलिये आप मुझे सिखाना शुरु करिये।
(राजेश अपने सामने टीना को बैठाता है। टीन शर्म से अपनी आँखें मूंद लेती है। राजेश कुछ पल उसके चेहरे को निहारता है। तीखे नयन नक्श, मोहिनी मूरत, माँ का प्रंतिरुप, गुलाब सी पंखुड़ियों से होंठों को देख कर राजेश की दिल की धड़कने बड़ जाती हैं। वह धीरे से अपने होठों को टीना के होठों पर कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा देता है।)
राजेश: बताओ टीना, कुछ हुआ क्या?
टीना: नहीं, कुछ भी नहीं।
राजेश: यह इस लिए कि मैनें सिर्फ अपने होंठों से तुम्हारे होंठों को स्पर्श किया था। इस क्रिया में प्यार नहीं था। तुमने अपने शरीर को अकड़ा लिया और होंठ भींच लिये थे। अपने शरीर को ढीला छोड़ दो और अपने होंठों को जरा सा खोलो।
टीना: (कुछ शर्माती हुई) ठीक है।
(एक बार फिर सकुचाती हुई टीना आँखें मूंद कर बैठ जाती है। राजेश एक बार फिर से टीना के कमसिन गुलाबी होंठों की ओर बढ़ता है। टीना की मासूम जवानी को सिर से पाँव तक आँखों से पीने की कोशिश करता है। कुछ क्षणों के लिये ठिठक कर रुक जाता है, पर फिर टीना की कमर को पकड़ कर अपनी ओर धीरे से खींचते हुए अपने शरीर से सटा लेता है।)
राजेश: (बहुत धीरे से अपने होठों को टीना के कान से छूते हुए) टीना अपने शरीर को ढीला छोड़ दो।
(राजेश की गर्म साँसों को कान पर मह्सूस होते ही टीना के शरीर में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। अपने हाथों में टीना का चेहरा ले कर, बड़े प्यार से अपने होंठ टीना के होठों पर रख देता है और धीरे से अपनी जुबान का अग्र भाग टीना के निचले होंठ पर फिराता है। इस नये एहसास से टीना के शरीर मे बिजली सी कौंध जाती है और उसके होंठ थोड़े से अपनेआप खुल जाते है। उसी क्षण राजेश के होंठ टीना के निचले होंठ को अपने कब्जे मे ले लेते है जैसे वह इसी ताक में बैठे थे। राजेश धीरे-धीरे निचले होंठ को चूसना शुरु कर देता है और बीच-बीच में अपनी जुबान टीना के उपरी होंठ पर फिराता है। टीना अपने आपे में नहीं रह पाती और अपने होठों को पूरा खोल देती है पर राजेश टीना से अलग हो जाता है। टीना आँखे मूंदें अपने झोंक में राजेश के होंठों को छूने के लिये आगे को झुकती है पर कुछ न पा कर आँखें खोलती है तो राजेश से आँख मिलते ही झेंप जाती है।)
राजेश: अब की बार कुछ हुआ क्या? मुझे तो 740 वोल्ट का करन्ट लगा। इसका तो यह मतलब है कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो।
टीना: (कुछ सकुचाई) हुं..हुं हाँ। पापा, मुझे पुरा विश्वास हो गया कि आप मुझ से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं।
राजेश: यह तुम्हें कैसे पता चला। क्या तुम्हें भी ऐसा लगा कि टाक्सिन बनने लगे?
टीना: (कुछ शर्माती हुई सिर हिला कर हामी भर देती है)
राजेश: पर बेटा, मुझे कुछ ज्यादा महसूस नहीं हुआ क्योंकि इस बार सब कुछ मैं ही कर रहा था। अगर तुम भी वही सब मेरे साथ करोगी तो मेरे अन्दर भी टाक्सिन बनने शुरु हो जाएँगे। क्या एक बार फिर से करें?
टीना: (एक बार फिर से शर्माती हुई सिर हिला कर हामी भर देती है)
राजेश: बेटा, एक या दो बार, या दस बार? प्लीज बताओ।
टीना: पा.. पा. (ठुनकते हुए) आप भी...न.. जाओ मै आप से नहीं बोलती।
राजेश: (मुस्कुराते हुए) मेरी गुड़िया फिर से नाराज हो गयी। पर बताओ तो सही क्योंकि मै जानना चाहता हूँ कि तुम्हें कैसा लगा। बताओ प्लीज्।
टीना: (शर्माते हुए) जितनी बार आप चाहें।
राजेश: मै तो बार-बार करना चाहता हूँ। तुम्हारे प्रति अपना प्यार बाँट्ने का सपना हमेशा देखता रहता हूँ।
टीना: (थोड़ा इठलाते हुए) आप ही बेकार बातों में समय बिता रहें है।
राजेश: सौरी। लेकिन अब की बार हम खड़े हो कर करते हैं। बैठ्ने से मिलन आधा-अधुरा रहता है और झुकने से पीठ में दर्द भी होता है।
(टीना सकुचाई सी राजेश से सट के खड़ी हो जाती है। दोनो अब आमने-सामने से चिपक कर खड़े हो जाते है। टीना की कमर को पकड़ कर राजेश धीरे से अपनी ओर खींचता है। राजेश की दिल की धड़कने बड़ जाती हैं क्योंकि अब टीना के स्तन राजेश के सीने में गड़ जाते है और नीचे से लिंगदेव मे भी हरकत आ जाती है। वह धीरे से अपने होठों को टीना के होठों के करीब ले जाता और कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा देता है।)
राजेश: टीना अब की बार तुम करो।
(शर्माते हुई धीरे से टीना भी अपने होठों को राजेश के होठों के करीब ले जाती है और कुछ क्षणों के लिए रख कर हटा लेती है।)
राजेश: कुछ हुआ क्या? तुमको वही करना है जो मैनें पहले तुम्हारे होठों के साथ किया था। इसी तरह से हम दोनों के शरीरों मे टाक्सिन बनेगें।
(टीना को राजेश ने अपनी बालिष्ठ बाहों मे और कस कर जकड़ लेता है। टीना कसमसाती है, हिलने से उसकी अर्धविकसित छोटी-छोटी घुन्डियां रगड़ खा कर खड़ी होने लगती है। राजेश टीना के स्तनों को पीस देता है। टीना की मासूम आँखों में एक बार फिर से लाल-लाल डोरे तैरने लगते है। अजीब बैचैनी और कश्मकश में मासूम टीना अपने होठों के बीच राजेश के निचले होंठ को ले कर धीरे से चूसते हुए आँखे मूंद लेती है। स्तनों की घुन्डियों मे एक बार फिर से करन्ट प्रावाहित होना शुरु हो जाता है। नीचे पाजामे में राजेश का लिंग कठोरता धारण कर टीना के पेट पर बार-बार ठोकर मारना शुरु कर देता है। जैसे ही टीना अपनी जुबान का अग्र भाग राजेश के उपर के होठ पर फिराती है, कि दरवाजे की घंटी बज उठ्ती है। डर के मारे दोनों जल्दी से अलग हो जाते हैं।)

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