कमला की चुदाई
रेखा ने अपना उरोज उसके मुंह से निकाला. वह देख कर हैरान रह गयी कि वासना के जोश में करीब करीब पूरी पपीते जितनी बड़ी चूची उसने कमला के मुंह में ठूंस दी थी. "मजा आया मेरी चूची चूस कर?" रेखा ने उसे प्यार से पूछा. घबराये हुई कमला ने मरी सी आवाज में कहा "हाम, भाभी" असल में उसे रेखा के स्तन बहुत अच्छे लगते थे और इतने दर्द के बावजूद उसे चूची चूसने में काफ़ी आनम्द मिला था.

रेखा अब धीरे से कमला के नीचे से निकल कर बिस्तर पर बैठ गयी और अमर अपनी बहन को बाहों में भरकर उसपर चड़ कर पलंग पर लेट गया. उसने अपनी बहन के स्तन दोनों हाथों के पम्जों में पकड़े और उन छोटे छोटे निपलों को दबाता हुआ कमला का मुंह जबरदस्ती अपनी ओर घुमाकर उसके गुलाबी होंठ चूमने लगा. बच्ची के मुंह के मीठे चुम्बनों से अमर का फ़िर खड़ा होने लगा.

अमर ने अब अपने पंजों में पकड़े हुए कोमल स्तन मसले और उन्हें स्कूटर के हौर्न जैसा जोर जोर से दबाने लगा. हंसते हुए रेखा को बोला "डार्लिन्ग, मेरी नई स्कूटर देखी, बड़ी प्यारी सवारी है, और हौर्न दबाने में तो इतना मजा आता है कि पूछो मत." रेखा भी उसकी इस बात पर हम्सने लगी.

चूचियां मसले जाने से कमला छटपटायी और सिसकने लगी. अमर को मजा आ गया और अपनी छोटी बहन के रोने की परवाह न करता हुआ वह अपनी पूरी शक्ति से उन नाजुक उरोजों को मसलने लगा. धीरे धीरे उसका लंड लम्बा होकर कमला की गांड में उतरने लगा. कमला फ़िर रोने को आ गयी पर डर के मारे चुप रही कि भाभी फ़िर उसका मुंह न बांध दे.

लौड़ा पूरा खड़ा होने पर अमर ने गांड मारना फ़िर शुरू कर दिया. जैसे उसका लम्बा तन्नाया लंड अन्दर बाहर होना शुरू हुआ, कमला सिसकने लगी पर चिल्लायी नही. रेखा मुस्कायी और कमला से बोली. "शाबाश बेटी, बहुत प्यारी गाम्डू लड़की है तू, अब भैया के लंड से चुदने का मजा ले, वे रात भर तुझे चोदने वाले हैम."

रेखा उठ कर अब अमर के आगे खड़ी हो गयी. "मेरी चूत की भी कुछ सेवा करोगे जी? बुरी तरह से चू रही है" अमर ने रेखा का प्यार से चुम्बन लिया और कहा. "आओ रानी, तुमने मुझे इतना सुख दिया है, अब अपनी रसीली बुर का शरबत भी पिला दो, मैम तो तुंहें इतना चूसूंगा कि तेरी चूत तृप्त कर दूम्गा" रेखा बोली "यह तो शहद है बुर का, शरबत नहीम, बुर का शरबत तो मैं तुम्हें कल बाथरूम में पिलाऊंगी." रेखा की बात अमर समझ गया और उस कल्पना से की इतना उत्तेजित हुआ कि अपनी पत्नी की चूत चूसते हुए वह कमला की गांड उछल उछल कर मारने लगा.

अब उसने अपनी वासना काफ़ी काबू में रखी और हचक हचक कर अपनी छोटी बहन की गांड चोदने लगा. स्तनमर्दन उसने एक सेकम्ड को भी बंद नहीं किया और कमला को ऐसा लगने लगा जैसे उसकी चूचियां चक्की के पाटों में पिस रही होम. इतना ही नहीम, उसके निपल उंगलियों में लेकर वह बेरहमी से कुचलता और खींचता.

"हफ़्ते भर में मूम्गफ़ली से कर दूम्गा तेरे निपल कम्ला. चूसने में बहुत मजा आता है अगर लम्बे निपल होम." वह बोला. बीच बीच में अमर रेखा की चूत छोड़ कर प्यार से कमला के गुलाबी होंठ अपने दाम्तों में दबाकर हल्के काटता और चूसने लगता. कभी उसके गाल काट लेता और कभी गरदन पर अपने दाम्त जमा देता. फ़िर अपनी बीवी की बुर पीने मे लग जाता.

इस बार वह घम्टे भर बिना झड़े कमला की मारता रहा. जब वह आखिर झड़ा तो मध्यरात्रि हो गयी थी. रेखा भी बुर चुसवा चुसवा कर मस्त हो गयी थी और उसकी चूत पूरी तरह से तृप्त हो गई थी.

अपने शरीर का यह भोग सहन न होने से आखिर थकी-हारी सिसकती हुई कमला एक बेहोशी सी नीम्द में सो गयी. बीच बीच में गांड में होते दर्द से उसकी नीम्द खुल जाती तो वह अमर को अपनी गांड मारते हुए और रेखा की चूत चूसते हुए पाती.
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अन्त में जब सुबह आठ बजे गांड में फ़िर दर्द होने से उसकी नीम्द खुली तो देखा कि अमर भैया फ़िर हचक हचक कर उसकी गांड मार रहे हैम. कमला चुपचाप उस दर्द को सहन करती हुई पड़ी रही. भाभी वहां नहीं थी, शायद चाय बनाने गयी थी. आखिर में अमर झड़ा और मजा लेते हुए काफ़ी देर उसपर पड़ा रहा. रेखा जब चाय लेकर आयी तब वह उठा और लंड को आखिर कमला की गांड में से बाहर निकाला.

लंड निकलते हुए 'पा~म्क' की आवज हुई. रेखा ने देखा कि एक ही रात में उस सकरी कोमल गांड का छेद खुल गया था और गांड का छेद अब चूत जैसा लग रहा था. अमर को देख कर वह बोली "हो गयी शाम्ति? अब सब लोग नहाने चलो, वहां देखो मैम तुमसे क्या करवाती हूं. आखिर इतनी प्यारी कुम्वारी गांड मारने की कीमत तो तुंहें देनी ही पड़ेगी डार्लिम्ग" अमर मुस्कराया और बोला "आज तो जो तुम और कमला कहोगी, वह करूम्गा, मैम तो तुम दोनों चूतों और गाम्डों का दास हूं"

"चलो अब नहाने चलो" रेखा बोली. कमलाने चलने की कोशिश की तो गांड में ऐसा दर्द हुआ कि बिलबिला कर रो पड़ी. "हाय भाभी, बहुत दुखता है, लगता है भैया ने मार मार के फ़ाड़ दी."

रेखा के कहने पर अमर ने उसे उठा लिया और बाथरूम में ले गया. दोनो ने मिलकर पहले कमला के मसले कुचले हुए फ़ूल जैसे बदन को सहलया, तेल लगाकर मालिश की और फ़िर नहलाया. अमर ने एक क्रीम कमला की गांड के छेद में लगाई जिससे उसका दर्द गायब हो गया और साथ ही ठम्डक भी महसूस हुई. कमला अब फ़िर खिल गई थी और धीरे धीरे फ़िर अपने नग्न भैया और भाभी को देखकर मजा लेने लगी थी. पर उसे यह मालूम नहीं था कि वह क्रीम उसकी गुदा को फ़िर सकरा बना देगी और गांड मरवाते हुए फ़िर उसे बहुत दर्द होगा. अमर अपनी छोटी बहन की गांड टाइट रखकर ही उसे मारना चाहता था. अगर लड़की रोए नहीम, तो गांड मारने का मजा आधा हो जायेगा ऐसा उसे लगता था.

रेखा ने अमर से कहा. "चलो जी अब अपना वायदा पूरा करो. बोले थे कि जो मैम कहूंगी वह करोगे." अमर बोला "बोलो मेरी रानी, तेरे लिये और इस गुड़िया के लिये मैम कुछ भी करूम्गा."

रेखा ने अमर को नीचे लिटा दिया और अपना मुंह खोलने को कहा. अमर समझ गया कि क्या होने वाला है, पर वह इन दोनों चुदैलों का गुलाम सा हो चुका था. कुछ भी करने को तैयार था. रेखा को खुश रखने में ही उसका फ़ायदा था. रेखा कमला से बोली. "चल मेरी प्यारी ननद, रात भर गांड मराई है, मूती भी नहीं है, अपने भाई के मुंह में पिशाब कर दे." कमला चकराई और शरमा गई पर मन में लड्डू फ़ूटने लगे. अमर की ओर उसने शरमा कर देखा तो वह भी मुस्कराया. साहस करके कमला अमर के मुंह पर बैठ गई और मूतने लगी.

उस बच्ची का खारा खारा गरम गरम मूत अमर को इतना मादक लगा कि वह गटागट उसे पीने लगा. कमला की बुर अब फ़िर पसीजने लगी थी. अपने बड़े भाई को अपनी पिशाब पिला कर वह बहुत उत्तेजित हो गई थी. मूतना खतम करके कमला उठने लगी तो अमर ने फ़िर उसे अपने मुंह पर बिठा लिया और उसकी चूत चूसने लगा. उधर रेखा ने अपनी चूत में अमर का तन्नाया लंड डाल लिया और उसके पेट पर बैठ कर उछल उछल कर उसे चोदने लगी. पीछे से वह कमला को लिपटाकर उसे चूंअने लगी और उसके स्तन दबाने लगी.

जब कमला और रेखा दोनों झड़ गए तो कमला उठी और बाजू में खड़ी हो गई. बोली "भाभी, तुम भी अपन मूत भैया को पिलाओ ना, मेरा उन्होम्ने इतने स्वाद से पिया है, तुंहारा पी कर तो झूंअ उठेम्गे." रेखा को अमर ने भी आग्रह किया. "आ जा मेरी रानी, अपना मूत पिला दे, तू तो मेरी जान है, तू अपने शरीर का कुछ भी मेरे मुंह में देगी तो मैम निगल लूम्गा." रेखा हम्सने लगी. अपने पति के मुंह में मूतते मूतते बोली. "देखो याद रखना यह बात, तुंहे मालूम है कि मूतने के बाद अब किसी दिन मैम तुंहारे मुंह में क्या करूम्गी."

अमर अब तक उत्तेजित हो चुका था. बोला "मैम तैयार हूं अपनी दोनों चुदैलों की कोई भी सेवा करने को, बस मुझे अपनी चूत का अमृत पिलाती रहो, चुदवाती रहो और गांड मराती रहो. खास कर इस नन्ही की तो मैम खूब मारूम्गा."

रेखा मूतने के बाद उठी और बोली. "इसे तो अब रोज चुदना या गांड मराना है. एक दिन छोड़ कर बारी बारी इसके दोनों छेद चोदोगे तो दोनों टाइट रहेम्गे और तुंहें मजा आयएगा."
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"तो चलो अब कमला को चोदूम्गा." कहकर अमर उसे उठा कर ले गया. रेखा भी बदन पोछती हुई पीछे हो ली. उस बच्ची की फ़िर मस्त भरपूर चुदाई की गई. उसे फ़िर दर्द हुआ और रोई भी पर भैया भाभी के सामने उसकी एक न चली. रविवार था इसलिये दिन भर अमर ने उसे तरह तरह के आसनों में चोदा और रेखा कमला से अपनी चूत चुसवाती रही.

दूसरे दिन से यह एक नित्यक्रम बन गया. अमर रात को कमला को चोदता या उसकी गांड मारता. हर रात कमला को दर्द होता क्योंकि जो क्रीम उसकी चूत और गांड में लगाई जाती थी उससे उसके छेदों को आराम मिलने के अलावा वे फ़िर टाइट भी हो जाते. स्कूल से वापस आने पर दिन भर रेखा उस बच्ची को भोगती. उसकी चूत चूसती और अपनी चुसवाती.

अमर रात को ब्लू फ़िल्म देखते समय कमला की गांड में लंड घुसेड़कर अपनी गोद में बिठा लेता और उसे चूंअते हुए, उसकी छोटी छोटी मुलायम चूचियां मसलते हुए उछल उछल कर नीचे से गांड मारते हुए पिक्चर देखा करता. उधर रेखा उसके सामने बैठ कर उसकी कमसिन बुर चूसती. एक भी मिनट बिचारी कमला के किसी भी छेद को आराम नहीं मिलता. आखिर कमला चुद चुद कर ऐसी हो गई कि बिना गांड या चूत में लंड लिये उसे बड़ा अटपटा लगता था.

धीरे धीरे रेखा ने उसे करीब करीब गुलाम सा बना लिया और वह लड़की भी अपनी खूबसूरत भाभी को इतना चाहती थी कि बिना झिझक भाभी की हर बात मानने लगी. यहां तक कि एक दिन जब रेखा ने उससे चूत चुसवाते चुसवाते यह कहा कि पिशाब लगी है पर वह बाथरूम नहीं जाना चाहती, वह किशोरी तुरम्त रेखा का मूत पीने को तैयार हो गई. शायद रेखा का मतलब वह समझ गई थी. "भाभी, मेरे मुंह में मूतो ना. प्लीज़ तुंहें मेरी कसम, मुझे बहुत दिन से यह चाह है."

"बिस्तर तो खराब नहीं करेगी? देख गिराना नहीं नहीं तो चप्पलों से पिटेगी." रेखा मन ही मन खुश होकर बोली. कमला जिद करती रही. आखिर वहीं बिस्तर पर रेखा की चूत पर मुंह लगाकर वह लेट गई और रेखा ने भी आराम से धीरे धीरे अपनी ननद के मुंह में मूता. वायदे के अनुसार कमला पूरा उसे निगल गई, एक बूम्द भी नहीं छलकायी. अब रेखा को बाथरूम जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी क्योंकि रात को उसका पति और दिन में ननद ही उसके बाथरूम का काम करते थे.

चोद चोद कर उस लड़की की यह हालत हो गई कि वह कपड़े सिर्फ़ स्कूल जाते समय पहनती थी. बाकी अब दिन रात नंगी ही रहती थी और लगातार चुदती, रात को बड़े भाई से और दिन में अपनी भाभी से. उसके बिना उसे अच्छा ही नहीं लगत था. उसके लंड की प्यास इतनी बढ़ी कि आखिर अमर ने रेखा को एक रबर का लंड या डिल्डो ला दिया जिससे उसकी चुदैल पत्नी भी दिन में अपनी ननद को चोद सके और उसकी गांड मार सके.

सच में कमला अब अपने भैया भाभी की पूरी लाड़ली हो गई थी.
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