एक हत्यारा
'मेडम रात बहुत हो चुकी है आप कब तक रहेंगी यहा ? ' चोकीदार ने पूछा.

'बस काका जा रही हूँ' माया ने टेबल पर बिखरे कागजॉ को एक फाइल कवर में रखते हुवे कहा.
माया ऑफीस के चोकीदार को काका कह कर ही बुलाती थी. |

जैसे ही माया अपने कॅबिन से बाहर निकली ऑफीस के सन्नाटे को देख कर उसका डर के मारे गला सुख गया. |

'ओह... कितनी देर हो गयी. पर क्या करूँ ये काम भी तो पूरा करना ज़रूरी थी वरना वो कमीना सेक्सेना मेरी जान ले लेता कल. भगवान ऐसा बॉस किसी को ना दे.... !!!' माया पार्किंग की तरफ तेज़ी से बढ़ती हुई बड़बड़ा रही है.

कार में बैठते ही उसने अपने पापा को फोन लगाया,'पापा मैं आ रही हूँ. 20 मिनिट में घर पहुँच जाउंगी |

माया शादी शुदा होते हुवे भी 5 महीने से अपने मायके में थी. कारण बहुत ही दुखद था. उसका पति सुरेश उसे दहेज के लिए ताने देता था. हर रोज उसकी नयी माँग होती थी. माँगे पूरी करते करते माया के परिवार वाले थक चुके थे. जब पानी सर से उपर हो गया तो माया अपने ससुराल(देल्ही) से मायके(देहरादून) चली आई.|

'ऊह आज बहुत ठंड है. सड़के भी सुनसान है. मुझे इतनी देर तक ऑफीस नही रुकना चाहिए था |'

रात के 10:30 बाज रहे थे. सर्दी में जन्वरी के महीने में इस वक्त सभी लोग अपने-अपने घरो में रज़ाई में डुबक जाते हैं |

पहली बार माया इतनी देर तक घर से बाहर थी. कार चलाते वक्त उसका दिल धक-धक कर रहा था. जो रास्ते दिन में जाने पहचाने लगते थे वो रात को किसी खौफनाक खंडर से कम नही लग रहे थे.|

माया के हाथ स्टेरिंग पर काँप रहे थे.' ऑल इस वेल...ऑल इस वेल' वो बार बार दोहरा रही थी.|

[Image: MIIEMQ.jpg]
अचानक उसे सड़क पर एक साया दीखाई दिया. माया ने पहले तो राहत की साँस ली की चलो सुनसां सड़क पर उसे कोई तो दिखाई दिया. पर अचानक उसकी राहत घबराहट में बदल गयी. वो साय बिल्कुल सड़क के बीच आ गया था और हाथ हिला कर गाड़ी रोकने का इशारा कर रहा था |

माया को समझ नही आया की क्या करे. जब वो उस साए के पास पहुँची तो पाया की एक कोई 35-36 साल का हटा-कटा आदमी उसे कार रोकने का इशारा कर रहा था |


माया को समझ नही आ रहा थी की क्या करे क्या ना करे. पर वो शक्स बिल्कुल उसकी कार के आगे आ गया था. ना चाहते हुवे भी माया को ब्रेक लगनी पड़ी |

जैसी ही कार रुकी वो आदमी माया के कार को ज़ोर-ज़ोर से थप-थापाने लगा. वो बहुत घबराया हुवा लग रहा था |

माया को भी उसके चेहरे पर डर की लकीर दीखाई दे रही थी. माया ने अपनी बारी का शीसा थोडा नीचे सरकया और पूछा, “क्या बात है, पागल हो क्या तुम ?”

“मेडम प्लीज़ मुझे लिफ्ट दे दीजिए. मेरी जान को ख़तरा है. कोई मुझे मारना चाहता है |”

“मेरे पास ये फालतू बकवास सुनने का वक्त नही है |, ” माया के मूह से ये शब्द निकले ही थे की उस आदमी की चीख चारो तरफ गूंजने लगी.

एक नकाब पॉश साया उस आदमी को पीछे से लगातार चाकू घोंपे जा रहा था.
“हे भगवान्…!!” माया का पूरा शरीर ये दृश्य देख कर थर-थर काँपने लगा.”

वो इतना डर गयी की कार को रेस देने की बजाए ब्रेक को दबाती रही. उसे लगा की कार स्टार्ट नही होगी. वो कार से निकल कर फॉरन उस साए से दूर भागी.

जो साया उस आदमी को मार रहा था फुर्ती से आगे बढ़ा और माया को दबोच लिया, “छ.....छोड़.... मुझे…मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?”

बिगाड़ा तो उस आदमी ने भी मेरा कुछ नही था.

“फिर…फिर… तुमने उसे क्यों मारा.”

“मुझे लोगो को मारने में बहुत मजा आता हे |”

“हे भगवान् क्या तुम्ही हो वो साइको सीरियल किल्लर.”

“बिल्कुल मैं ही हूँ वो…आओ तुम्हे जंगल में ले जाकर आराम से काटता हूँ. तेरे जैसी सुन्दर परी को मारने में और मज़ा आएगा.”

“बचाओ…” इससे ज़्यादा माया चिला नही सकी. क्योंकि उस साए ने उसका मूह दबोच लिया था.”

“हे भगवान मैं किस मुसीबत में फँस गयी. इस साइको किल्लर का अगला शिकार मैं बनूँगी मैने सोचा भी नही था. काश दरिंदे का चेहरा देख पाती”

पीछले 2 महीनो में चार मर्डर हो चुके थे. उनमे से 3 आदमी थे और एक कॉलेज गर्ल. पूरे देहरादून में लोग ख़ौफ़ में जी रहे थे. उसके पापा उसे रोज कहते थे की कभी शाम 6 बजे से लेट मत होना. माया भी इस घटना से घबराई हुई थी पर काम में बिज़ी होने के कारण उसे वक्त का ध्यान ही नही रहा.

जंगल की गहराई में ले जा कर उस साए ने माया के मूह से अपना हाथ हटाया और बोला,”बताओ पहले कहा घुसाऊ ये तेज धार चाकू.”

“प्लीज़ मुझे जाने दो. मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है, मेरे पर्स में जितने पैसे हैं रख लो. मेरी कार भी रख लो…मुझे मत मारो प्लीज़.”

“वो सब तुम रखो मुझे वो सब नही चाहिए. मुझे तो बस तुम्हे मार कर तस्सल्ली मिलेगी. वैसे तुम्हारे पास कुछ और देने को हो तो बताओ.”

“माया समझ रही थी की कुछ और से उसका मतलब क्या है. मेरे पास इस वक्त कुछ और नही है प्लीज़ मुझे जाने दो”

“अब तो यहा से तुम्हारी लाश ही जाएगी फिर,” वो चाकू को उसके गले पर रख कर बोला.

“रूको अगर चाहो तो मैं ब्लो जॉब दे सकती हूँ”

“वो क्या होता है.”

“ब…ब…ब्लो जॉब मतलब ब्लो जॉब,” माया ने हकलाते हुवे कहा.

“हां पर इसमें करते क्या हैं. समझाओ तो सही तुम्हारा प्रस्ताव समझ में आया तो ही बात आगे बढ़ेगी वरना में तुम्हे काटने को मरा जा रहा हूँ. मेरा मज़ा खराब मत करो.”

माया से कुछ कहे नही बन रहा था. उसे समझ नही आ रहा था की वो इस दरिंदे को कैसे समझाए. वो बस जींदा रहना चाहती थी इसलिए उसने ये प्रस्ताव रखा था. “क्या गारंटी है की ये साइको वो करने पर भी मुझे जींदा जाने देगा. इसे तो लोगो को मारने में मज़ा आता है.”

“अरे क्या सोच रही हो. कुछ बोलॉगी की नही या काट डालूं अभी के अभी.”

“देखो मुझे उसका मतलब नही पता जो करना है करो.”

“अरे समझाओ तो सही. मैं वादा करता हु की अगर मुझे पसंद आया तो मैं तुम्हे जाने दूँगा.”

“तुम जूठ बोल रहे हो. तुम्हारा इन सब बातो में कोई दिलचस्पी नही है. तुम बस मुझसे खेल रहे हो. मुझे सब पता है उस कॉलेज गर्ल को तुमने बिना कुछ किए मारा था.”

“कोण सी कॉलेज गर्ल.”

“अछा तो तुम लोगो को मार-मार कर भूल भी जाते हो. वही जिसको मार कर तुमने बस स्टॅंड के पीछे फेंक दिया था.”

“अछा वो…उसने ऐसा प्रस्ताव रखा होता तो हो सकता है आज वो जींदा होती.”

“अछा क्या कपड़े पहने थे उस लड़की ने उस दिन. जिस दिन तुमने उसे मारा था.” माया को शक हो रहा था की ये नकाब पॉश वही साइको किल्लर है की नही.

“देखो में यहा तुम्हे मारने लाया हूँ तुम्हारे साथ कोई प्रश्नोत्तरी में हिस्सा लेने नही.अब तुम्हे ख़तम करना ही होगा.” उसने ये कहते ही चाकू माया के गले पर रख दिया.

“रूको…”

“क्या है अब. मुझे कुछ नहीं सुनना . अगर ब्लो जॉब का मतलब समजओगी तो ही रुकुंगा वरना तुम गयी काम से.”

“अछा चाकू तो गले से हटाओ.”

“हा ये लो बोलो अब.”

“तुम सब जानते हो है ना…” माया ने दबी आवाज़ में कहा.


'देखो मेरे पास ज़्यादा बकवास करने का वक्त नही है. तुम बताती हो या नही या फिर उस आदमी की तरह तुम्हे भी मार डालूं'

'बताती हूँ, मुझे थोडा वक्त तो दो'

'जल्दी बोलो वरना फिर कभी नही बोल पाओगी'

'ब्लो जॉब मतलब की मूह में उसे रख कर चुसना '

'ये उसे का क्या मतलब है साफ़-साफ़ बताओ'

'इससे ज़्यादा मैं नही जानती'

'चल ठीक है जाने दे शुरू कर ये तेरी ब्लो जॉब'

'क्या गारंटी है की ये सब करने के बाद तुम मुझे मारोगे नही'


'किया ना वादा तुझ से मैने...चल अब जल्दी कर'


'उसे बाहर तो निकालो'


'तुम खुद निकालो...'

'खुद निकाल कर दो वरना मैं नही करूँगी'


'ऐसा है तो तुम्हे जिंदा रखने का क्या फायदा. अभी काट डालता हूँ तुम्हे' उसने माया के गले पर चाकू रख कर कहा.


'रूको निकालती हूँ' माया ने दबी आवाज़ में कहा


माया के काँपते हाथ उस नकाब पॉश साए की पेंट की ज़िप की तरफ बढ़े.

उसने धीरे से ज़िप खोलनी सुरू की. पर अभी वो थोड़ी सी ही खुली थी की वो अटक गयी.

'ये अटक गयी है...मुझसे नही खुल रही'

'थोडा ज़ोर लगाओ खुल जाएगी'


माया ने कोशिस की पर ज़िप नही खुली

'ओह्ह हटो तुम. मुझे खोलने दो'


उसने एक झटके में ज़िप खोल दी और बोला,'चलो अपने काम पे लग जाओ'


माया ने अपनी जान बचाने के लिए बोल तो दिया था की वो ब्लो जॉब करेगी पर अब वो दुविधा में थी. 'क्या करूँ अब. मन नही मानता ये सब करने का पर अगर नही किया तो ये ज़रूर मुझे मार देगा. पर अगर ये सब करने के बाद भी इसने मुझे मार दिया तो? '


'हे जल्दी करो मेरे पास सारी रात नही है तुम्हारे लिए.'


माया ने दाया हाथ उसकी ज़िप में डाला. जैसे ही उसका हाथ नकाब पॉश के तने हुवे लंड से टकराया उसके पसीने छूटने लगे. उसे अहसास हो चला था की वो जिसे बाहर निकालने की कोशिस कर रही है वो बड़ी भारी चीज़ है. 'ओह गोड ये तो बहुत बड़ा है' उसने अपने मन में कहा.
उसने अब तक अपने पति का ही देखा और छुआ था और वो अब इस नकाब पॉश के लंड से बहुत छोटा मालूम पड़ रहा था. माया इतने मोटे लंड को अपने हाथ में पाकर अचंभित भी थी और परेशान भी.


'कैसे चुसुंगी इसे...ये तो बहुत बड़ा है.'


'अरे निकालो ना जल्दी बाहर और जल्दी से मूह में डालो. मुझ से इंतेजार नही हो रहा.'


माया ने धीरे से उसके लंड को ज़िप से बाहर निकाला. और अपना मूह बिल्कुल उसेक लंड के नज़दीक ले आई. उसने उसे मूह में लेने के लिए मूह खोला ही था की......

एक दर्द भरी ज़ोर की चीख अचानक वहा गूंजने लगी.


'एक मिनिट रूको. मुझे देखना होगा की ये कौन चीखा था' नकाब पॉश ने अपने लंड को वापिस पेंट के अंदर डालते हुवे कहा.


माया को कुछ समझ नही आ रहा था की आख़िर हो क्या रहा है.
माया को कुछ भी समझ में नही आ रहा था की आख़िर हो क्या रहा है.

‘’चलो मेरे साथ और ज़रा भी आवाज़ की तो अंजाम बहुत बुरा होगा,’’ नकाब पॉश ने माया के गले पर चाकू रख कर कहा.
माया के पास कोई और चारा भी नही था. वो चुपचाप उसके साथ चल दी.

वो नकाब पॉश माया को ले कर सड़क के करीब ले आया. पर वो दोनो अभी भी घनी झाड़ियों के पीछे थे. वहा पहुँच कर माया ने देखा की उसकी कार के पास कोई खड़ा है. वो तुरंत नकाब पॉश को ज़ोर से धक्का दे कर भाग कर अपनी कार के पास आ गयी.

“प्लीज़ हेल्प मी वो दरिन्दा मुझे मारना चाहता है. उसी ने आदमी को भी मारा है जो मेरी कार के पास पड़ा है.”

"अछा ऐसा है क्या बताओ मुझे कहा है वो,’’ उष आदमी ने कहा.

“वो वहा उन झाड़ियों के पीछे है,” माया ने इशारा करके बताया.

उष आदमी ने टॉर्च निकाली और झाड़ियों की तरफ रोशनी की. “वहा तो कोई नही है, आपको ज़रूर कोई वहम हुआ है”

“मेरा यकीन कीजिए वो यहीं कहीं होगा. इस आदमी को भी उसी ने मारा है. क्या ये लाश आपको दीखाई नही दे रही”

“हाँ दीखाई दे रही है…पर हो सकता है इसे आपने मारा हो.”

“क्या बकवास कर रहे हैं. मैं क्या आपको खूनी नज़र आती हूँ”

“खूनी नज़र तो नही आती पर हो सकता है की तुमने ही ये सब किया हो और अब कहानिया बना रही हो. चलो मेरे साथ पोलीस स्टेशन.”

“देखिए मेरा यकीन कीजिए…मैने किसी का खून नही किया. मैं आपको कैसे समजाऊं.”

“मुझे कुछ समझाने की ज़रूरत नही है. ये खून तुमने ही किया है बस.”

तभी एक मोटरसाइकल सवार वहा से गुज़रते हुवे ये सब देख कर रुक जाता है.

“ठीक है जो भी होगा सुबह देखा जाएगा अभी मैं घर जा रही हूँ,” माया ने उष आदमी से कहा

“तुम कहीं नही जाओगी.” वो आदमी ज़ोर से बोला.

“क्या हुवा मेडम कोई प्राब्लम है क्या.” मोटरसाइकल सवार ने उनके पास आकर पूछा.

पर इससे पहले की वो कुछ बोल पाती उष आदमी ने उष मोटरसाइकल सवार को शूट कर दिया. 2 गोलियाँ उसके शीने में उतार दी. ये देख कर माया थर-थर काँपने लगी. “ओह माय गोड, त…त…तुमने उशे मार दिया. क…क…कौन हो तुम.”

“कोई प्राब्लम है क्या. क्या किसी ने शिखाया नही की दूसरो के मामले में टाँग नही अडाते.” वो आदमी पागलो की तरह बोला.

“वो तो बस मुझसे पूछ रहा था…”

“चुप कर साली…अब तेरी बारी है. पागल समझती है मुझे. बता क्या नाटक चल रहा है यहा.”

“मैं सच कह रही हूँ. इस आदमी को एक नकाब पॉश ने मारा था. वो मुझे भी घसीट कर झाड़ियों में ले गया था…”

“फिर कहा गया वो नकाब पॉश.”

“म…म…मुझे नही पता.”

“तुम सारा सर जूठ बोल रही हो.”

“आप इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं.”

“क्योंकि इस आदमी को जो तुम्हारी कार के पास पड़ा है, मैने मारा है. वो भी इस चाकू से. और अब इसी चाकू से मैं तुम्हारी खाल निकालूँगा.”

माया का डर के मारे वैसे ही बुरा हाल था. अब उसका सर घूम रहा था. वो जो कुछ भी देख और सुन रही थी वो सब यकीन के परे थे. एक बार तो उसने ये भी सोचा की कहीं ये सब सपना तो नही. पर अफ़सोस ये सब सपना नही हक़ीकत थी.

उष आदमी ने चाकू को हवा मैं लहराया और बोला, “तैयार हो जाओ मरने के लिए…आज तो ,मज़ा आ गया एक ही रात में तीसरा खून करने जा रहा हूँ.”

पर तभी उसके सर पर एक बड़े डंडे का वार हुवा और वो नीचे गिर गया. ठीक माया के कदमो के पास.

माया ने देखा की उष आदमी को नीचे गिराने वाला कोई और नही वही नकाब पॉश था जिसके चुंगल से बच कर वो भागी थी.
इससे पहले की माया कुछ कह और सोच पाती उष आदमी ने फुर्ती से अपनी पिस्तोल से नकाब पॉश की और फाइरिंग की. पर वो बच गया.
नकाब पॉश ने माया का हाथ पकड़ा और उशे खींच कर झाड़ियों में ले गया.

“भागते कहा हो तुम बचोगे नही.” वो आदमी खड़ा हो कर चिलाया
“ये…ये सब हो क्या रहा है. कौन हो तुम.”

“चुप रहो…सब बताऊंगा. अभी वो हमें ढूंढ़ रहा है. पिस्तोल है उसके पास. हमें ज़रा भी आवाज़ नही करनी ओके.”
“You can run but you cannot hide. ज़्यादा देर तक मुझसे बचोगे नही….”

उष आदमी ने माया की कार का दरवाजा खोल कर उसकी कार की चाबी निकाल ली. “तुम लोग यहा से बच कर नही जा सकते. नौटंकी करते हो मेरे साथ…”

माया और वो नकाब वाला आदमी छुप गये तो माया ने कहा, “क्या तुम मुझे बताओगे अब की यहा हो क्या रहा है. ये सब कुछ नाटक है या हक़ीकत.”

“जो कुछ हम तुम्हारे साथ कर रहे थे वो सब नाटक था. पर अब जो हो रहा है वो हक़ीकत है.”

“क्या…तुम्हारा मतलब तुम उष साइको किल्लर की कॉपी कर रहे थे पर क्यों.”

“तुम्हे परेशान करने के लिए.” नकाब पॉश ने कहा

“पर मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है. मैं तो तुम्हे जानती तक नही.”

“तुम मुझे जानती हो…”

“क्या…कौन हो तुम…साफ़-साफ़ बताओ मेरा वैसे ही सर घूम घूम रहा है.”

“तुमने तिन महीने पहले मुझे नौकरी से निकलवाया था याद करो…”

“क्या…तुम वो हो! एक तो तुम काम ठीक से नही करते थे. मेरी जगह कोई भी होता तो तुम्हे निकाल ही देता.”

“स्स्स्स....... धीरे से कहीं वो सुन लेगा ”

“हाँ क्या नाम था तुम्हारा?”

“कपिल…” नकाब पॉश ने कहा.

“हाँ कपिल…उष बात के लिए तुमने मेरे साथ इतना घिनोना मज़ाक किया…और…और तुम तो मेरा बलात्कार करने वाले थे …”

“ऐसा नही है मेडम… मैं तो बस”

“क्या मैं तो बस तुमने मुझे वो सब करने पर मजबूर किया”

“हाँ पर ब्लो जॉब का प्रपोज़ल तो आपने ही रखा था. मेरा मकसद तो आपको बस डराना था. थोड़ी देर में मैं आपको जाने देता पर आप ही ब्लो जॉब करना चाहती थी.”

“चुप रहो ऐसा कुछ नही है… मैं बस अपनी जान बचाने की कोशिस कर रही थी. तुम मेरी जगह होते तो तुम भी यही करते.”

“मैं आपकी जगह होता तो ख़ुसी-ख़ुसी मार जाता ना की किसी का लंड चूसने के लिए तैयार हो जाता.”

“चुप रहो तुम”

“श…किसी के कदमो की आवाज़ आ रही है” नकाब पॉश ने माया के मूह पर हाथ रख कर कहा.”

“मुझे पता है तुम दोनो यहीं कहीं हो. चुपचाप बाहर आ जाओ. प्रॉमिस करता हूँ की धीरे-धीरे आराम से मारूँगा तुम्हे.” उष सायको ने चिल्ला कर कहा.

“यही वो साइको किल्लर है.” माया ने धीरे से कहा.

“इसमे क्या कोई शक बचा है अब. थोड़ी देर चुप रहो.”

“तुमने मुझे इस मुसीबत में फँसाया है.”

“चुप रहो मेडम वरना हम दोनो मारे जाएँगे. बंदूक है उष पागल के पास. मुझे लगता है यहा रुकना ठीक नही पास ही मेरा घर है वहा चलते हैं.”

“तुम्हारे पास फोन तो होगा, अभी पुलिस को फोन लगाओ.”

“फोन मेरे दोस्त के पास था.”

“कौन दोस्त?”

“वही जिसकी लाश तुम्हारी कार के पास पड़ी है.”

“तुमने उसे मारने का नाटक किया था है ना.”

“हाँ…हमारा प्लान था की तुम्हे डराया जाए. मेरा मकसद तुम्हे जंगल में ले जाना नही था. पर जब तुम कार से निकलकर भागी तो मैने सोचा थोडा सा खेल और हो जाए.”

“तुम्हारा दोस्त सच में मारा गया. वाह क्या खेल खेला है. जो दूसरो के लिए खड्डा खोदत्ते हैं वो खुद उसमें गिर जाते हैं. तुम्हे भी अपने दोस्त के साथ मर जाना चाहिए था.”

“मैने तुम्हारी जान बचाई है और तुम ऐसी बाते कर रही हो.”

“तुम्हारे कारण ही मैं यहा फसी हूँ समझे. उपर से इतनी ठंड.”

“ब्लो जॉब कर लो गर्मी आ जाएगी.”

“एक बार यहा से निकल जाऊं फिर तुम्हे बताती हूँ.” माया ने मन ही मन कहा.

“वैसे एक बात बताओ…मेरा लंड अपने हाथ में ले कर तुम्हे कैसा महसूस हो रहा था.”


“शट अप मुझे इस बारे में कोई बात नही करनी…एक तो मेरे साथ ज़बरदस्ती करते हो फिर ऐसी बाते करते हो.”

“मैने अपना लंड तुम्हारे हाथ में नही रखा था ओके…तुमने खुद निकाला था मेरी ज़िप खोल कर. वो भी इसलिए क्योंकि तुम मेरा लंड अपने मूह में लेना चाहती थी.”

“तुम्हे शरम नही आती एक लड़की से इतनी गंदी बाते करते हुए.”

“पर तुमने ही तो ब्लो जॉब करने को कहा था. और तुमने ही तो ब्लो जॉब का मतलब समझाया था.”

“तुम अच्छे से जानते हो की ये सब मैने क्यों किया इसलिए इतने भोले मत बनो. सुबह होते ही तुम भी सलाखो के पीछे होगे. मैं पुलिस को सब कुछ बता दूँगी. तुमने मेरा बलात्कार करने की कोशिस की है.”

“तुम्हारी जान बचाने का ये सिला दोगी तुम मुझे…मैं अगर वक्त पर आकर उष साइको के सर पर डंडा नही मारता तो अब तक तुम्हारी भी लाश पड़ी होती वहा.”

“और अगर तुम इतनी घिनोनी हरकत ना करते तो में इतनी रात को इस जंगल में ना फाँसी होती.”

“और अगर तुम मुझे बिना किसी मतलब के नौकरी से ना निकालती तो मैं ये सब तुम्हारे साथ नही करता.”

“इसका मतलब तुम्हे कोई पछतावा नही…”

“पछतावा है…मेरे दोस्त की जान चली गयी इस खेल में…”

“मेरे लिए तुम्हे कोई पछतावा नही…”

“तुम्हे तुम्हारे किए की सज़ा मिली है…भूल गयी कितनी रिक्वेस्ट की थी मैने तुम्हे. फिर भी तुमने मुझे ऑफीस से निकलवा कर ही छोड़ा.”

“देखो ये मेरे अकेले का डिसिशन नही था. फाइनली ये डिसिशन बॉस का था.”

“हां पर सारा किया धराया तो तुम्हारा ही था ना.”

“मुझे तुम्हारा काम पसंद नही था. प्राइवेट सेक्टर में ये हर जगह होता है. हर कोई तुम्हारी तरह बदले लेगा तो क्या होगा…और वो भी इतनी घिनोकी हरकत…छि तुम तो माफी के लायक भी नही हो. ये सब करने की बजाए तुम किसी और काम में मन लगाते तो अछा होता.”

“ठीक है मुझसे ग़लती हो गयी…बस खुस”

“पर अब यहा से कैसे निकले…वो सायको मेरी कार की चाबी भी ले गया.”

“मेरे घर चलॉगी…थोड़ी दूर ही है.”

“नही…मैं सिर्फ़ अपने घर जाउंगी.”

“पर कैसे तुम्हारी कार की चाभी वो साइको ले गया. फोन हमारे पास है नही…वैसे तुम्हारा फोन कहा है.”

“कार में ही था.”

“मेरी बात मानो मेरे घर चलो. वो साइको पागलो की तरह हमें ढूंढ़ रहा है. हमें जल्द से जल्द यहा से निकल जाना चाहिए”

“क्या तुम्हारे घर फोन होगा.”

“फोन तो नही है वहा भी…पर हम सुरक्षित तो रहेंगे.”

“कितनी दूर है तुम्हारा घर.”

“नज़दीक ही है आओ चलें.”

“पर वो साइको यही कहीं होगा वो हमारे कदमो की आहट सुन लेगा.”

“दबे पाँव चलेंगे…ज़्यादा दूर नही है घर मेरा. और ये जंगल भी ज़्यादा बड़ा नही है. 5 मिनिट में इसके बाहर निकल जाएँगे और बस फिर 5 मिनिट में मेरे घर पहुँच जाएँगे.”

“घर में कौन-कौन है.”

“मैं अकेला ही हूँ…”

“क्यों तुम्हारी बीवी कहा गयी…”

“तलाक़ हो गया मेरा उषसे. या यूँ कहो की मेरी ग़रीबी से तंग आकर उसने मुझे छोड़ दिया. वक्त बुरा होता है तो परछाई भी साथ छोड़ जाती है. नौकरी छूटने के बाद बीवी भी छोड़ गयी.”

“क्या ये सब मेरे कारण हुवा.”

“जी हाँ बिल्कुल…चलो छोड़ो यहा से निकलते हैं पहले.”

वो धीरे धीरे जंगल से बाहर आ गये.

“कितना अंधेरा है यहा. क्या कोई और रास्ता नही तुम्हारे घर का.”

“रास्ते तो हैं…पर इस वक्त ये सब से ज़्यादा सुरक्षित है. अंधेरे में हम आराम से उष साइको को चकमा दे कर निकल जाएँगे.”

“मैने उष साइको की शकल देख ली है. मैं कल पोलीस को सब बता दूँगी.” ----------- Note This Point

“मुझे तो नही फसओगी ना तुम.”

“वो कल देखेंगे.”

“वैसे इस कम्बख़त ने आकर मज़ा खराब कर दिया. वरना आज पहली बार ब्लो जॉब मिल रही थी…” कपिल ने मज़ाक के अंदाज में कहा.

“अछा क्या तुम्हारी बीवी ने नही किया कभी.” माया ने भी मज़ाक में जवाब दिया.

“नही…तुमने ज़रूर किया होगा अपने पति के साथ है ना.”

“छोड़ो ये सब…और जल्दी घर चलो.”

“हाँ बस हम पहुँचने ही वाले हैं.”
“ये आ गया मेरा घर.” कपिल ने एक छोटे से कमरे की तरफ इशारा करते हुवे कहा.


“ये घर है तुम्हारा…ये तो बस एक कमरा है. और आस-पास ज़्यादा घर भी नही हैं” माया ने कहा


“हाँ छोटा सा कमरा है ये…पर यही मेरा घर है. ये छोटा सा कमरा है. जो भी हो इस वक्त जंगल में रहने से तो अछा ही है.”


कपिल ने दरवाजा खोला और माया को अंदर आने को कहा, “आ जाओ… डरो मत यहा तुम सुरक्षित हो.”


माया को कमरे में जाते हुवे डर लग रहा था. पर उस के पास कोई चारा भी नही था.


“अरे मेडम सोच क्या रही हो… आ जाओ यहा डरने की कोई बात नही है.”


“जो कुछ मेरे साथ हुवा उसके बाद कोई भी डरेगा.”


“समझ सकता हूँ.” कपिल ने गहरी साँस ले कर कहा


माया कमरे के अंदर आ गयी.


“देखो इस छोटे से कमरे में बस एक ही बेड है और एक ही रज़ाई” कपिल ने कहा


“मुझे नींद नही आएगी तुम सो जाओ, मैं इस कुर्सी पर बैठ कर रात गुज़ार लूँगी.”


“अरे ये सब करने की क्या ज़रूरत है.तुम आराम से बिस्तर पर सो जाओ मैं कंबल ले कर नीचे सो जाऊँगा.”


“पर मुझे नींद नही आएगी.”


“हाँ पर ठंड बहुत है…तुम रज़ाई में आराम से बैठ जाओ. सोने का मन हो तो सो जाना वरना बैठे रहना.”


“ठीक है…पर याद रखो कोई भी ऐसी वैसी हरकत की तो…”


“चिंता मत करो मैं ऐसा कुछ नही करूँगा. जंगल में भी मेरा कोई इरादा नही था. वो तो तुमने ब्लो जॉब का ऑफर किया इसलिए मैं बहक गया वरना किसी के साथ ज़बरदस्ती करने का कोई इरादा नही मेरा.”


“तो तुम अब मानते हो की वो सब ज़बरदस्ती कर रहे थे तुम मेरे साथ.”


“हाँ पर तुम्हारी रज़ामंदी से …अगर वो काम अब पूरा कर सको तो देख लो”


“उसके लिए तुम्हे मेरी गर्दन पर चाकू रखना होगा और मुझे डराना होगा. मैं वो सब खुसी से हरगिज़ नही करूँगी.” माया ने गंभीर मुद्रा में कहा.


“फिर रहने दो…उष सब में मज़ा नही है.”


माया रज़ाई में बैठ गयी और कपिल कंबल ले कर ज़मीन पर चटाई बिछाकर लेट गया.


“क्या लाइट बंद कर दूं या फिर जलने दूं.” कपिल ने पूछा.


“जलने दो…” माया ने कहा.



“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.”


कोई 5 मिनिट बाद कमरे का दरवाजा ज़ोर-ज़ोर से खड़का.


माया घबरा गयी की कहीं वो साइको उनका पीछा करते-हुवे यहाँ तक तो नही आ गया.


माया ने धीरे से पूछा, “कौन है?’


“शायद कोई पड़ोसी होगा. तुम चिंता मत करो मैं दरवाजा खोलता हूँ पर पहले ये लाइट बंद कर देता हूँ ताकि जो कोई भी हो तुम्हे ना देख सके.”


“ठीक है…”


कपिल ने दरवाजा खोला और दरवाजा खुलते ही सरपट एक लड़का अंदर आ गया.


“कहा चले गये थे तुम गुरु…मैं कब से तुम्हारी राह देख रहा हूँ.” उष लड़के ने कहा


“कुछ काम से गया था” कपिल ने जवाब दिया


“हाँ बहुत ज़रूरी काम था इसे आज…” माया ने मन ही मन कहा.


“क्या तुम भी गुरु…जब भी मैं जुगाड़ लगाता हूँ तुम गायब हो जाते हो. और ये अंधेरा क्यों कर रखा है… लाइट जला ना.”


“मुन्ना अभी नींद आ रही है…कल बात करेंगे.”


“अरे मैं कब से तुम्हारी वेट कर रहा हूँ गुरु… और तुम कह रहे हो नींद आ रही है.”


“हाँ यार बहुत तक गया हूँ…तू अभी जा कल बात करेंगे.”


“गुरु हिना है साथ मेरे.”


“हिना ! कौन हिना ?”


“वही मोटू बूढ़े की लड़की जिसकी गांड मारी थी तुमने…याद आया.”


“हे भगवान ये कैसी-कैसी बाते सुननी पड़ रही है मुझे.” माया ने मन ही मन खुद से कहा


“अछा वो….यार तू भी ना हमेशा ग़लत वक्त पर प्लान बनाता है. मैं आज बहुत तका हुवा हूँ. जा तू मौज कर उसके साथ.”


“अरे गुरु कैसी बाते करते हो…आज क्या हो गया है तुम्हे…रोज मुझे कहते थे कब दिलाओगे दुबारा उसकी…आज वो आई है तो…”


“मुन्ना तू नही समझेगा… ये सब फिर कभी देखेंगे.”


“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी...”


“सॉरी यार..जाओ मज़े करो.” कपिल ने कहा.


“अछा यार ये तो बता…मुझे तो वो गांड देने से माना कर रही है. कह रही है…दर्द होता है बहुत. कैसे करूँ पीछे से उसके साथ.”


“मैं क्या गांड मारने में स्पेशलिस्ट हूँ. थूक लगा के डाल दे गांड में. हो जाएगा सब.”


“छि....... कितने गंदे लोग हैं ये. इतनी गंदी बाते कोई नीच ही कर सकता है. और इस कपिल को ज़रा भी शरम नही है. मेरे सामने ही सब बकवास किए जा रहा है.” माया ने अपने मन में कहा.


“अरे यार तुझे तो पता है…वो नखरे बहुत करती है. कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो अगली बार नही देगी.” मुन्ना ने कहा


“ऐसा कुछ नही होगा…पहले धीरे से डालना …फिर धीरे-धीरे मारना…धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा…और उसे मज़ा आने लगेगा. हाँ बस जल्दबाज़ी मत करना”


“क्या तुमने ऐसे ही ली थी ?”


“किसी की भी लेने का यही तरीका है. थोडा सयम से काम लेना होता है. पता है ना सयम का मतलब.”


“समझ गया.”


“क्या समझे बताओ तो.”


“धीरे से डालना है.”


“हाँ ठीक समझे…जाओ अब फ़तेह कर लो हिना की गांड.”


“अब तो फ़तेह ही समझो.”


“हाँ…और ज़बरदस्ती मत करना बेचारी के साथ. अगर ना जाए तो रहने देना… अगली बार में कर के दिखाऊंगा ........ओके ........”


“पहले फ़तेह करने को कहते हो फिर मायूस करते हो.”


“मेरा कहने का मतलब है की आराम से शांति से काम लेना. ठीक है.”


“ओक गुरु… तुम सच में गुरु हो.”


“हा-हा ठीक है जाओ अब.”


“अगर मन करे तो आ जाना मेरे कमरे पे ठीक है गुरु.”


“ठीक है…जी”

मुन्ना के जाने के बाद. माया गुस्से में आग-बबूला हो कर बोली, “तुम्हे शरम नही आई मेरे सामने ऐसी बाते करते हुवे.”


“इसमें शरम की क्या बात है…तुम कोई बची तो हो नही. शादी-शुदा हो.”


“मुझे ये सब अछा नही लगा. तुम मुझसे अभी भी कोई बदला ले रहे हो है ना.”

“ऐसा कुछ नही है…देखो वो अचानक आ गया…मैं तो बस नेचरली बात कर रहा था उसके साथ.”


“इसे तुम नेचरली कहते हो.”


“हम तो रोज ऐसे ही बात करते हैं.”


“छि…शरम आनी चाहिए तुम्हे ऐसी गंदी बाते करते हुवे. उस बेचारी हिना का शोषण कर रहे हो तुम.”


“जिसे तुम शोषण कह रही हो, हो सकता है उसके लिए वो जन्नत हो. वैसे अभी एक बार ही ली है मैने उसकी. आज तुम साथ ना होती तो सारी रात मज़े करता मैं.”


“हाँ तो मुझसे बदला लेने का प्लान तो तुम्हारा ही था ना…भुगतो अब…वैसे तुम जाना चाहो तो जा सकते हो.”


“नही जब साथ में तुम्हारे जैसी हसीना हो तो उसके साथ कुछ करने का मन नही करेगा.” कपिल ने धीरे से कहा


“क्या कहा तुमने…” माया ने सुन तो सब लिया था पर फिर भी उसने यू ही पूछ लिया.



“कुछ नही सो जाओ…” माहित ने जवाब दिया.


“कमीना कहीं का. इसकी नियत ठीक नही है. मुझे सावधान रहना होगा. पता नही क्या हो रहा है आज मेरे साथ,” माया से अपने सर पर हाथ रख कर खुद से कहा.


“वैसे एक बात कहूँ.” कपिल ने कहा.


“क्या है अब.”


“जिस कामुक अंदाज से तुमने मेरा लंड मेरी ज़िप खोल कर बाहर निकाला था उसने बहुत उत्तेजित कर दिया था मुझे.”


“वो कोई कामुक अंदाज नही था. डरी हुई थी मैं. मेरे हाथ काँप रहे थे.”


“वैसे मेरे लंड को हाथ में ले कर तुम किसी सोच में डूब गयी थी. इतना बड़ा पहले नही देखा ना तुमने?”


“बकवास बंद करो और चुपचाप सो जाओ.”


“मुझे तुम्हारा साथ बहुत अछा लग रहा है.”

“बास्टर्ड…” माया ने दाँत भींच कर कहा.
माया रज़ाई में डुबक कर चुप-चाप बैठी थी. ऐसी हालत में उसे नींद आना ना-मुमकिन था. उसे बस सुबह होने का इंतेज़ार था.

“हे भगवान किसी तरह से ये रात बीत जाए. ना जाने किसका मूह देखा था सुबह.”

“मेडम एक बात बताना भूल गया.” कपिल ने अचानक कहा.

माया जो की अपनी सोच में डूबी थी अचानक कपिल की आवाज़ सुन कर चोंक गयी.

“क्या है अब?”

“तुम्हारी दाई तरफ पर्दे के पीछे बाथरूम है…”

“ठीक है…ठीक है”

“मुझे लगा तुम्हे बता दूं... कहीं तुम परेशान रहो.”

“ठीक है…तुम सो जाओ”

“वैसे सच कहूँ तो मुझे भी नींद नही आ रही.”

“क्यों तुम्हे क्या हुवा है…तुम्हे तो खुस होना चाहिए आज. तुम्हारा बदला जो पूरा हो गया.”

“बहुत अछा दोस्त था विकास मेरा.”

“कौन विकास?”

“वही जिसने तुम्हारी कार रुकवाई थी.”

“उसके परिवार में कौन-कौन है.”

“उसका छोटा भाई है और मा है. उसके बापू का बहुत पहले देहांत हो गया था. शादी अभी तक हुई नही थी. बड़ी मुश्किल से माना था मेरा साथ देने के लिए. आख़िर तक मुझे समझाता रहा की सोच लो…मुझे ये सब ठीक नही लग रहा”

“पर तुम पे तो मुझसे बदला लेने का भूत सवार था है ना.” माया ने कहा.

“ठीक है जो हो गया सो गया…पर मुझे विकास के लिए बहुत दुख है.”

“मुझे बस सुबह होने का इंतेज़ार है.”

-0-

इधर मुन्ना अपने कमरे में वापिस आ जाता है.

“गुरु नही आएगा…वो थका हुवा है…”

“तो मैं कौन सा उसे बुला रही थी…तुम ही चाहते थे उसे बुलाना.” हिना ने कहा.

“क्यों अछे से नहीं मारी थी तुम्हारी गांड गुरु ने, पिछली बार जो ऐसे कह रही हो.”

“मुझे बहुत दर्द हुवा था मुन्ना…इसलिए तो मैं दुबारा वहा से नही करूँगी…”

“ये खूब कहा…तू मेरी गर्ल फ्रेंड है…गुरु को तो गांड दे दी…मुझे देने से मना कर रही है.”

“तुम ही लाए थे उस दिन उसे वरना मैं कभी नही होने देती ऐसा…”

“चल छोड़ ये सब आ ना घूम जा…आज बहुत मन कर रहा है गांड मारने का, देखूं तो सही की इसमे कैसा मज़ा आता है.” मुन्ना ने हिना के चूतडो पर हाथ रख कर कहा.

“आगे से करो ना…वहा ऐसा कुछ अलग नही है.” हिना ने कहा.

“मुझे एक बार टेस्ट तो कर लेने दे…”

“नही मुझे दर्द होता है वहा.”

“कुछ नही होगा…मैं गुरु से सीख कर आया हूँ.”

“क्या सीख कर आए हो.”

“यही की गांड कैसे मारनी है.”

“मुझे नही करना ये सब…आगे से करते हो तो ठीक है वरना मैं चली…मुझे सुबह बहुत काम देखने हैं…देर हो रही हूँ.”

“तू तो कहती थी की सारी रात रहेगी मेरे साथ.”

“तो तुमने कौन सा बताया था की तुम ये सब करोगे…”

“तो तुमने गुरु को क्यों डालने दिया था पीछे”

“वो उसने मुझे बातो में फँसा लिया था बस…वरना मेरा कोई इरादा नही था.”

“ह्म…यार ऐसे मत तडपा मान जा ना.” मुन्ना ने हिना को बाहों में भर के कहा.

“ठीक है एक शर्त पर…दुबारा नही करूँगी…ये पहली और आखरी बार होगा.”

“ठीक है मंजूर है मुझे…” मुन्ना ने हंस कर कहा. उसकी आँखो में चमक आ गयी थी.

हिना जो की पूरी तरह नंगी थी उल्टी घूम कर पेट के बल सो गयी.

“ऐसे नही…कुतिया बन जाओ…गांड मारने का मज़ा कुत्ता-कुत्ती बन कर ही आएगा.”

हिना ने पोज़िशन ले ली और बोली, “भो-भो”

“ये क्या है…”

“तुम्ही तो कह रहे थे कुतिया बन जाओ…अब तुम भी कुत्ते की तरह ही करना ओक…” हिना ने हंस कर कहा.

“वह यार क्या आइडिया है…तू सच में हॉट आइटम है…मज़ा आएगा तेरी गांड मार कर.”

“अब मारेगा भी या बकवास ही करता रहेगा, मेरा मूड बदल गया तो मैं कुछ नही करने दूँगी.”

“ओके......ओके…बस डाल रहा हूँ…वो मैं गुरु की बताई बाते सोच रहा था. उसने मुझे बताया था की कैसे करना है.”

“गुरु को छोड़ो…उसने बहुत दर्द किया था मुझे…तुम अपने दिमाग से काम लो…आराम से धीरे से डालो.

“वैसे तुम्हे आज ये सब करने का भूत कैसे सवार हो गया.”

“गुरु ने मुझे बताया था की उसे तेरी गांड मार के बड़ा मज़ा आया था. तभी से मैं भी लेने को तड़प रहा था.” मुन्ना ने जवाब दिया.

“वैसे मुझे ज़्यादा मज़ा नही आया था.”

“कोई बात नही अब आएगा मज़ा तुझे.” मुन्ना ने कहा

“आ… धीरे से डालना…” हिना सिहर उठी.

“चिंता मत कर धीरे-धीरे ही अंदर डालूँगा.” मुन्ना ने कहा.

मुन्ना ने अपने लंड को हिना की गांड पर रख दिया.

“मैं आ रहूं हूँ तुम्हारे अंदर.” मुन्ना ने कहा और अपने लंड को हल्का सा धक्का दिया.

“ऊऊई मा मार गयी…निकालो इसे बाहर मुझसे नही होगा.”

खेल बिगड़ता देख मुन्ना ने अपने लंड को पूरा का पूरा हिना की गांड में धकेल दिया. “अगर बाहर निकालना ही है तो पूरा डाल कर निकालूँगा. एक बार अच्छे से गांड में लंड डालने का मज़ा तो ले लू” मुन्ना ने खुद से मन ही मन कहा.

“नहि यीईई ये क्या कर रहे हो मुन्ना…निकालो इसे मैं मार जाउंगी…तुमने तो एकदम से पूरा डाल दिया.”

“सॉरी हिना …वो लंड चिकना होने के कारण खुद-बा-खुद अंदर फिसल गया.”

“जूठ बोल रहे हो तुम…तुम तो अपने गुरु के भी बाप निकलने…निकालो वरना मैं फिर कभी तुम्हारे पास नही आउंगी.”

“अछा थोडा रूको तो सही…मुझे ठीक से अहसास तो होने दे की मैं तेरी गांड के अंदर हूँ.”

“तेरे अहसास के चक्कर में मैं मर जाउंगी.”

“ऐसा कुछ नही होगा धीरज रखो…” मुन्ना ने हिना के सर पर हाथ फिरा कर कहा.

हिना छटपटाती रही पर मुन्ना ने अपने लंड को बाहर नही निकाला.

कुछ देर बाद हिना का दर्द कम हो गया और वो बोली, “तुम बहुत खराब हो.”

“आराम है ना अब.”

“हा…पर मैं तुम्हे करने नही दूँगी…निकालो बाहर,.”

“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी.”

मुन्ना ने अपना लंड हिना की गांड की गहराई से बाहर की तरफ खींचा. लेकिन इससे पहले की वो पूरा बाहर आ पाता एक झटके में उसे पूरा का पूरा फिर से अंदर धकेल दिया.

“ऊओयइी….तुम नही मानोगे.”

“बिल्कुल नही…बड़े दिन से तमन्ना थी तेरी गांड मारने की. आज अछे से मार कर ही दम लूँगा.”

“आहह…धीरे से मारो ना फिर…तुम तो ज़ोर से डाल रहे हो.” हिना ने कहा

“क्या करूँ कंट्रोल ही नही होता.”


“आगे से तुम्हारे पास नही आउंगी मैं.” हिना ने गुस्से में कहा.

“सॉरी बाबा ग़लती हो गयी…अब मैं धीरे-धीरे करूँगा.”

मुन्ना धीरे-धीरे अपना लंड हिना की गांड में रगडता रहा. कुछ ही देर में दोनो की साँसे फूलने लगी. और मुन्ना के धक्को की स्पीड खुद-ब-खुद तेज होती चली गयी.

“सॉरी अब धीरे से करना मुस्किल हो रहा है…बहुत मज़ा आ रहा है…क्या कहती हो… .”

“ठीक है पर जल्दी ख़तम करना मुझसे सहा नही जा रहा.”

मुन्ना ने अपने धक्के तेज कर दिए…वो अपने चरम के करीब था. कोई 2 मिनिट तेज-तेज धक्के मारने के बाद वो हिना की गांड में झड़ गया.

“आआहह मज़ा गया कसम से…गुरे ठीक कहता था…तेरी गांड बड़ी मस्त है.”

“हटो अब…मुझे लेटना है…थक गयी हूँ इस पोज़िशन में.”

मुन्ना बहुत खुस था आख़िर उसकी मुराद जो पूरी हो गयी थी…..


-0-


माया अभी भी जाग रही है. रात के 2:30 हो गये हैं.

पर कपिल के खराटो की गूँज पूरे कमरे में गूँज रही है.

“कम्बख़त मुझे मुसीबत में फँसा कर खुद चैन से सो रहा है"
जैसे-जैसे रात बीत रही थी माया मन ही मन राहत की साँस ले रही थी. 4 बजने को थे. कमरे में अभी भी कपिल के खराटो की आवाज़ गूँज रही थी. माया रात भर आँखे खोले बैठी रही. भूल कर भी उसकी आँख नही लगी. जैसे हर बुरा सपना बीत जाता है ये रात भी बीत ही रही थी. कब 5 बज गये पता ही नही चला.

'क्या मुझे चलना चाहिए...पर सर्दी का वक्त है सड़के अभी भी सुनसान ही होंगी. मुझे 6 बजने तक वेट करना चाहिए.उस वक्त शायद कोई ऑटो मिल जाए. जहा इतना वेट किया थोडा और सही.' माया ने सोचा.

अचानक कमरे का दरवाजा ज़ोर-ज़ोर से खड़कने लगा. कपिल गहरी नींद में था उसे कुछ सुनाई नही दिया. 'कौन हो सकता है...मुझे क्या लेना होगा कोई कपिल की पहचान वाला...पर कपिल उठ क्यों नही रहा' माया ने सोचा.


दरवाजा लगातार खड़कता रहा. जब कपिल नही उठा तो माया ने बेड से उठ कर उसे हिलाया.

'उठो बाहर कोई है...लगातार दरवाजा खडका रहा है तुम्हे सुनाई नही देता क्या.' माया ने कपिल को हिलाते हुवे कहा.

'क...कौन है' कपिल उठते ही हड़बड़ाहट में बोला.

'मैं हू...दरवाजा खोलो कोई कब से खड़का रहा है'


'क्या टाइम हुवा है'

'5 बज कर 5 मिनिट हो रहे हैं'

'इतनी सुबह-सुबह कौन आ गया'

कपिल ने पहले की तरह लाइट बंद करके दरवाजा खोला. माया इस बार बाथरूम में चली गयी.

'मुन्ना तू इतनी सुबह क्या कर रहा है. बताया था ना की मैं थका हुवा हूँ'

'सॉरी गुरु बात ही कुछ ऐसी थी की मुझे आना पड़ा.' मुन्ना ने कहा

'क्या हुवा अब नही दी क्या हिना ने तुझे'

'गुरु मज़ाक की बात नही है...बहुत सीरीयस बात है...मुझे अंदर तो आने दो'

'क्या बात है यार तू इतना डरा हुवा क्यों है'

'जब तुम्हे पता चलेगा तो तुम्हारी भी मेरी जैसी हालत हो जाएगी'


'यार पहेलिया मत बुझा साफ़-साफ़ बता की बात क्या है' कपिल ने कहा.

बाथरूम में माया भी सब कुछ बड़ी उत्सुकता से सुन रही थी. उसे लग गया था की कोई गंभीर बात है. पहले तो उसने सोचा की मुझे क्या लेना देना लेकिन फिर उत्सुकता के कारण उनकी बाते सुनने लगी.
'यार अभी थोड़ी देर पहले में हिना को घर छोड़ कर जब वापिस आया तो मैने यू ही टीवी ओन करके देखा'

'क्या देखा टीवी में'

'यार तेरा वो दोस्त है ना विकास'

कपिल समझ गया की टीवी पर विकास के कतल की खबर आ रही होगी पर उसने अनजान बन-ने की कोशिस की.

'क्या हुवा विकास को'

'गुरु वो सायको किल्लर के हाथो मारा गया'

'क्या ऐसा नही हो सकता'

'सच कह रहा हूँ तुम खुद टीवी चला कर देख लो...पर वो माया बचेगी नही' मुन्ना ने कहा.

'क्या मतलब...ये माया कौन है.'

'और कौन, वही जिसने विकास को मारा है. ये सीरियल किल्लर जिसने देहरादून में ख़ौफ़ मचा रखा है कोई आदमी नही औरत है. वो भी खूबसूरत. यकीन नही आता तो टीवी चला कर देख लो'

ये सब सुनकर माया के होश उड़ गये. उशे पूर्वाभास हो रहा था की हो ना हो जिस औरत की बात मुन्ना कर रहा है वो, वो खुद है. कपिल भी उतना ही चकित था. उसने फॉरन टीवी ओन किया.

'किस चॅनेल पर आ रही है खबर' कपिल ने पूछा.

'कोई भी चॅनेल लगा लो हर किसी पे यही खबर है.

कपिल ने आज तक चॅनेल लगा लिया.उस पर वाकई वही खबर चल रही थी.

'ध्यान से देखिए इस खूबसूरत चेहरे को यही है वो जिसने देहरादून में ख़ौफ़ फैला रखा है' न्यूज़ एंकर चिल्ला-चिल्ला कर बोल रहा था.

वो चेहरा किसी और का नही माया का था.

'मुन्ना तू जा...हम बाद में बात करेंगे'

'क्या हुवा गुरु'

'कुछ नही मैं विकास की मौत के कारण दुखी हू तुम जाओ अभी बाद में बात करेंगे.

'ठीक है...मुझे भी बहुत दुख हुवा ये न्यूज़ देख कर. पता नही विकास के घर वालो का क्या हाल होगा भगवान उसकी आत्मा को शांति दे और इस कातिल हसीना को मौत का फंडा'

'ठीक है-ठीक है जाओ अब....'

जैसे ही कपिल ने दरवाजा बंद किया माया फ़ौरन बाथरूम से बाहर आई. टीवी स्क्रीन पर अपनी तस्वीर देख कर उसकी उपर की साँस उपर और नीचे की साँस नीचे रह गयी.


“ये सब क्या है कपिल?”


“पता नही क्या बकवास है…मुझे खुद कुछ समझ नही आ रहा.” कपिल ने कहा.


“मैं अभी पुलिस स्टेशन जा कर पुलिस को सब कुछ बता देती हूँ…” माया ने कहा.


“रूको पहले पूरी न्यूज़ तो सुन ले की माजरा क्या है…”


टीवी पर न्यूज़ लगातार चल रही थी…


“बने रहिएगा हमारे साथ…आगे हम बताएँगे कैसे हुवा परदा फास इस हसीन कातिल का…हम अभी हाज़िर होते हैं ब्रेक के बाद.” न्यूज़ एंकर ने कहा.


माया को सब कुछ एक बुरे सपने की तरह लग रहा था. ऐसा सपना जिस से वो चाह कर भी नही जाग पा रही थी. जागती भी कैसे ये सब हक़ीकत जो थी.


“तुम्हारी बेवकूफ़ हरकत की वजह से मैं इस मुसीबत में फसी हूँ.” माया ने कहा


“शांति रखो सब ठीक हो जाएगा…पहले देख तो लें की माजरा क्या है.”


टीवी पर न्यूज़ वापिस आई तो वो दोनो एक दम चुप हो गये.


“ये लड़की इस बार भी खून करके निकल जाती लेकिन इस बार किसी ने इसे खून करते हुवे देख लिया. कौन है वो शकस?…जीसने 2 खून होते हुवे देखे और पोलीस को इनफॉर्म किया. हम अभी आपको उसकी तस्वीरे दीखाते हैं. वो इस वक्त पोलीस स्टेशन में है और पोलीस को बयान दे रहा है.” न्यूज़ एंकर ने कहा.


टीवी पर कुछ फोटोस दीखाई गयीं. उसमें एक आदमी को दीखाया जा रहा था. उसके मूह पर कपड़ा लिपटा हुवा था.


“ये आदमी भयभीत है और अपना चेहरा नही दीखाना चाहता. इसे डर है की कही वो भी ना मारा जाए. पर इसने फिर भी इस खौफनाक कातिल का परदा फास तो कर ही दिया. इसने खुद अपनी आँखो के सामने दो कतल होते हुवे देखें है. हम इसकी हालत समझ सकते हैं. इसके अनुशार अकेले शिकार नही करती ये कातिल हसीना. उसके साथ एक आदमी भी था जीसने चेहरे पर नकाब पहन रखा था.” न्यूज़ एंकर ने कहा.


“क्या बकवास है ये?” कपिल ने कहा

“इस आदमी का चेहरा नही दीखा रहे पर मुझे पूरा यकीन है की यही है वो सायको किल्लर.” माया ने कहा



“ठीक कह रही हो. कल हम जब उसके चंगुल से बच निकले तो बोखलाहट में वो ये सब कर रहा है.” कपिल ने कहा



“बहुत चालाक है ये साइको…हमारे पोलीस तक पहुँचने से पहले ही अपनी झुठी कहानी शुना दी. मैं अभी पोलीस स्टेशन जाउंगी.”


“नही रूको…जल्दबाज़ी में कोई कदम मत उठाओ…हमें सोच समझ कर चलना होगा.”


“हमें से तुम्हारा क्या मतलब है.”


“मेरा जिक्र भी तो हो रहा है न्यूज़ में.”


“पर मेरी तो शकल दीखाई जा रही है. पता नही कहा से मिल गयी ये फोटो इन्हे. ये मीडीया वाले भी ना…बिना किसी इंक्वाइरी के फैंसला सुना रहे हैं की मैं ही कातिल हूँ.”


“मीडीया का तो यही काम है…वो सब छोड़ो…मुझे ऐसा लगता है की वो साइको किल्लर ये सब किसी सोची समझी साजिस के तहत कर रहा है…इसलिए कह रहा हूँ की हमें सोच समझ कर लेना होगा.” कपिल ने कहा.


“मैं फिलहाल घर जा रही हूँ.”


तभी टीवी पर न्यूज़ एंकर ने कहा, “पोलीस ने चारो तरफ नाकाबंदी कर दी है. हर वाहन को अछे से चेक किया जा रहा है. पोलीस को शक है की ये हसीन कातिल जीसका की पूरा नाम माया अरोरा है देहरादून से बाहर भागने की कोशिस करेगी. पोलीस माया के घर वालो से पूछताछ कर रही है…लेकिन कोई भी उसके बारे में बताने को तैयार नही है. उन्हे लगता है की माया को फँसाया जा रहा है. लेकिन गवाह को झुटलाया नही जा सकता. एक ना एक दिन माया के परिवार वालो को भी मान-ना ही होगा की वो एक सीरियल किल्लर है जिसको सक्त से सक्त सज़ा मिलनी चाहिए.”



“मुझे नही लगता की इस वक्त तुम्हारा घर जाना ठीक होगा.” कपिल ने कहा


“पर मैं यहा हाथ पर हाथ रख कर तो नही बैठ सकती. इस से तो साबित हो जाएगा की मैं ही कातिल हूँ.”
मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगी' माया ने कहा

'देखो मुझे नही पता था की बात इतनी बढ़ जाएगी'

'तुम्हारी बेवकूफी की सज़ा मुझे मिल रही है'

'शायद किसमत हमें साथ रखना चाहती है इसलिए ये सब खेल हो रहा है. तुम्हारे आने से इस घर में रोनक सी है. मुझे तुम्हारा साथ बहुत अछा लग रहा है'

'यहा मेरी जान पर बन आई है और तुम्हे ये बेहूदा मजाक सुझ रहा है, शरम नही आती तुम्हे ऐसी बाते करते हुवे'

तुम मुझे ग़लत समझ रही हो, मेरा कहने का मतलब ये था की हमें मिल कर इस मुसीबत का सामना करना होगा'

'मैं जब तक तुम्हारे साथ रहूंगी किसी न किसी मुसीबत में फसी रहूंगी. मुझे जल्द से जल्द यहा से निकलना होगा' माया धीरे से बड़बड़ाई.

'कुछ कहा तुमने'

'हा यही की मैं जा रही हूँ'

'तुमने सुना नही चारो तरफ पोलीस ढूंढ़ रही है तुम्हे. ऐसे में कैसे बाहर निकलोगी'

'कुछ भी हो मुझे जाना ही होगा'

तभी फिर से दरवाजा खड़कने लगा.

'मुन्ना ही होगा...चाय लाया होगा मेरे लिए' कपिल ने कहा.

'ठीक है उसे जल्दी रफ़ा दफ़ा करना...मुझे घर के लिए निकलना है' माया ये कह कर बाथरूम में आ गयी.

कपिल ने दरवाजा खोला. मुन्ना ही था. उसके हाथ में 2 कप चाय थी.

'गुरु आज मस्त चाय बनाई है'

'अछा ऐसा क्या कर दिया'

'इलायची डाली है गुरु...हिना लाई थी कल'

'ठीक है तू जा...मैं चाय पी लूँगा'

'गुरु बात क्या है...बार-बार मुझे यहा से निकाल देते हो'

'कुछ नही मुन्ना...तू नही समझेगा'

'तुम्हारा मूड ठीक करने के लिए कुछ दिलचस्प बात करूँ'

'बाद में बताना हिना की बात, अभी .'

'पर मैं तो कुछ और ही कह रहा था...हा हिना की बात से याद आया...गुरु कर ली फ़तह मैने उसकी गांड. बहुत मज़ा आया मार के, सच में. तुम सच कहते थे मस्त गांड है उसकी. एक-एक धक्के में वो मज़ा था की कह नही सकता...'

बाथरूम में माया सब सुन रही था. 'इन कमीनो को और कोई काम नही है, हर वक्त यही सब' माया ने सोचा.

'वैसे तू कुछ और क्या कहने वाला था?' कपिल ने पूछा.

'वो हाँ...गुरु देखी तुमने न्यूज़ पूरी'

'हाँ देख ली'

'विश्वास नही होता ना की इतनी हसीन लड़की कातिल भी हो सकती है'

'हा यार यकीन नही होता पर टीवी पर दीखा तो रहे हैं' कपिल को पता था की माया सुन रही होगी इसलिए उसने यू ही चुस्की ली.

'मेरा तो दिल आ गया इस कातिल हसीना पर'

चुप कर दीवारो के भी कान होते हैं' कपिल ने कहा.

'सुनो तो सही...मैं जब न्यूज़ देख रहा था पहले तो डर लग रहा था. फिर बार-बार उसे देख कर लंड खड़ा हो गया. कास मिल जाए उसकी एक बार.'

'अबे चुप कर मरवाएगा क्या' कपिल ने कहा.

माया का चेहरा गुस्से से लाल हो गया.

'सच कह रहा हूँ गुरु अगर एक बार मैने उसकी मार ली ना तो वो सारी रात मुझसे मरवाती रहेगी और ये रातो को खून करना बंद कर देगी.' मुन्ना ने कहा.

'बहुत हो गया तू जा अब'

'गुरु रात भर हिना से करने के बाद भी सुबह टीवी पर इस हसीना को देख कर वो दिल मचला की रुका नही गया...मूठ मार ली मैने'

'अबे पागल हो गया है क्या चल निकल यहा से'

'क्या हुवा गुरु गुस्सा क्यों होते हो, मैं तो बस...'

'इसे कहीं मत जाने देना अभी बताती हूँ इसे मैं' बाथरूम के अंदर से माया चीलाई.

'ये कौन चिल्लाया गुरु' मुन्ना हैरत में बोला.

'मैने कहा था ना दीवारो के भी कान होते हैं' कपिल ने कहा.

'हा पर दीवारो के पास मूह कब से आ गया, चिल्लाने के लिए'मुन्ना ने कहा.

तभी बाथरूम का दरवाजा खोल कर माया बाहर निकली.

माया को देखते ही राजू की उपर की साँस उपर और नीचे की साँस नीचे रह गयी. उसके हाथ से चाय का कप गिर गया और उसकी टांगे थर-थर काँपने लगी.

'हा तो फिर से कहो क्या कह रहे थे मेरे बारे में'

'ग...गुरु ये...' मुन्ना कुछ नहीं बोल पाया आगे.

'अबे क्या कर रहा है, तेरा तो पेशाब निकल गया...'

माया बहुत गुस्से में थी लेकिन फिर भी मुन्ना की ऐसी हालत देख कर हँसे बिना ना रह सकी.

'बस निकल गयी सारी हेकड़ी...बहुत बाते करता है...हा' माया ने कहा.
सुबह के 7 बजने को हैं. होटेल ग्रीन पॅलेस में एक खूबसूरत लड़की रूम नो 201 की बेल बजाती है. दरवाजा खुलता है.

'गुड मॉर्निंग सिर' लड़की हंस कर कहती है.

'गुड मॉर्निंग...आओ-आओ मैं तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहा था, मेरा नाम संजय है, वॉट'स योर नेम?'

'जी मुस्कान'

'बहुत शुनदर नाम है...बिल्कुल तुम्हारी तरह...कुछ चाय-कॉफी लॉगी' संजय ने पूछा.

'जी शुक्रिया...मैं घर से पी कर आई हूँ'

'क्या पी कर आई हो'

'चाय पी कर आई हूँ'

'मुझे तो यकीन नही था की इतनी सुबह मिस्टर कुमार किसी को भेज देगा. वास्तव मैं मेरे पास अभी वक्त था और शाम को मुझे निकलना है. बहुत मन हो रहा था. इतनी सुन्दर लड़की भेजेगा कुमार मुझे यकीन नही था.'

'शुक्रिया' लड़की ने कहा.

'किस बात के लिए?'

'मेरी तारीफ़ के लिए'

संजय ने मुस्कान को उपर से नीचे तक देखा और अपने बेग से 50,000 निकाल कर मुस्कान के हाथ में रख दिए और बोला,'ये लो तुम्हारी फीस'

मुस्कान ने पैसे चुपचाप पर्स में रख लिए.

'तुम कॉलेज गर्ल हो ना, मैने मिस्टर कुमार को कॉलेज गर्ल के लिए बोला था'

'जी हा मैं कॉलेज गर्ल हूँ'

'क्या करती हो कॉलेज में'

'क्या मतलब पढ़ती हूँ'

'मेरा मतलब क्या कर रही हो या बी.कॉम या कुछ और'

'मैं बी.ए फाइनल में हूँ'

'कब से हो इस लाइन में'

'ये मेरा पहला असाइनमेंट है' मुस्कान ने कहा.

'जो भी मुझे मिलती है यही कहती है' संजय ने हंसते हुवे कहा.

'सर, मैं दूसरो का नही जानती लेकिन ये मेरा पहला है'

'तो क्या पवित्र हो तुम'

'नही मेरा बॉय फ़्रेंड है'

'इस लाइन में मजबूरी से हो या फिर शॉंक से'

'जींदगी है...मैं इस बारे में कुछ नही कहना चाहती' कहते कहते मुस्कान की आँखे नम हो गयी थी. पर जल्दी ही उसने खुद को संभाल लिया. ये वाक्यी में उसका फर्स्ट टाइम था.

संजय खड़ा हो कर मुस्कान के सामने आ गया और बोला,'अछा छोड़ो ये सब...चलो मेरे गन्ने को बाहर निकाल कर चूसना शुरू करो...बहुत मचल रहा है तुम्हारे मूह में जाने के लिए'

मुस्कान ने संजय की जीन्स के बटनों खोल कर चैन नीचे सरका दी.

'आअहह जल्दी करो वेट नही होता'

मुस्कान ने एक हाथ से संजय के लंड को पकड़ कर बाहर खींच लिया. एक पल के लिए वो लंड को निहारती रही.

'कैसा है मेरा लंड मेरी जान, तेरे बॉय फ़्रेंड के लंड से बड़ा है क्या जो ऐसे देख रही हो'

'नही बड़ा तो नही है...हन पर इसका मूह थोड़ा मोटा है'

'देखो भाई 50,000 दिए हैं मैने इसका-उसका मत करो इसे नाम से पुकारो.'

'आपके लंड का मूह थोड़ा . है'

'ध्यान से देख ....ये . बॉय फ़्रेंड की मूँगफली से बड़ा .'

मुस्कान समझ . की ये आदमी . सनकी . वो तुरंत .,'हा-हा ठीक . . . लंड है .. . . से नही देखा ..'

'चल अब चूस इस गन्ने को और बता ये मीठा है . नही'

'जी अभी चख कर बताती हूँ'

'मुस्कान ने मूह खोला और संजय . लंड को मूह में आधा ले लिया.

'तू वेश्या तो है पर तुझे लंड चूसना नही आता. इतनी बुरी तरह से किसी ने आज तक मूह में नही लिया मेरा लंड.'

'जी ये मेरा पहली बार है'

'क्यों नही चुस्ती क्या अपने बॉय फ़्रेंड का लंड तू.'

'नही.....'

'देखो मैने पूरे पैसे दिए हैं मुझे एक दम मस्त ब्लो जॉब चाहिए. मैं अभी अपने लॅपटॉप में एक पॉर्न मूवी लगाता हूँ...उसमें जैसे लड़की चूसती है वैसे ही चूसना मेरा लंड...ओके.'

'जी...ओके'


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