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उशा की कहानी
09-21-2010, 10:40 PM
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उशा की कहानी
उशा अपने मा-बाप कि एकलौती लरकी है और देलहि मे रहती है। उशा के पितजी, मर। जिवन शरमा देलहि मे हि ल।इ।स। मे ओफ़्फ़िसेर थे और पेचले चर सल पहले सवरगवसि हो गये थे और उशा कि मतजी, समत। रजनि एक हौसे विफ़े है। उशा के और दो भै भि है और उनकि शदी भि हो गयी है। उशा पीचले साल हि म।अ। (एनगलिश) पस किया है। उशा का रनग बहुत हु गोरा है और उसके फ़िगुरे 36-25-38 है। वो जब चलती है तो उसके कमर मे एक अजीब सि बल खती है और चलते वकत उसकि चुतर बहुत हिलते है। उसके हिलते हुए चुतर को देख कर परोस के कयी नवजवन, और बुरहे आदमी का दिल मचल जता है और उनके लुनद खरा हो जता है। परोस के कै लरकोन ने कफ़ी कोशिश की लेकिन उशा उनके हथ नही आउई। उशा अपने परहैए और उनिवेरसिती के सनगी सथी मे हि मुशगूल रहती थी। थोरे दिनो के बद उशा कि शदी उसि सहर के रहने वले एक पोलिसे ओफ़्फ़िसेर से तया हो गयी।

उस लरके के नम रमेश था और उसके पितजी का नम गोविनद था और सब उनको गोविनदजी कहकर बुलते थे। गोविनदजी अपने जवनी के दिनो मे और अपनि शदि के बद भि हर औरत को अपनि नज़र से चोदते थे और जब कभि मौका मिलता था तो उनको अपनि लौरे से भि चोदते थे। गोविनदजी कि पतनि का नम सनेहलरा है और वोए क लेखिका है। अब तब गिरिजा जी ने करीब 8-10 कितबे लिख चुकि है। गोविनदजी बहुत चोदु है औरा अब तक वो अपने घर मे कैए लरकी और औरत को चोद चुके थे और अब जब कि उनका कफ़ी उमर हो गया था मौका पते हि कोइ ना कोइ औरत को पता कर अपनि बिसतेर गरम करते थे। गोविदजी का लुनद कि लुमबै करीब 8 1/2” लुमबा औ मोतै करीब 3 ½” है और वो जब कोइ औरत कि चूत मे अपना लुनद दलते तो करीब 25-30 मिनुत के पहले वो झरते नही है। इसिलिये जो औरत उनसे अपनि चूत चुदवा लेति है फिर दोबरा मौका पते हि उनका लुनद अपनि चूत मे पिलवा लरति हैन।

आज उशा का सुहगरत्त है। परसोन हि उसकि शदि रमेश के सथ हुए थी। उशा इस समय अपने कमरे मे सज धज कर बैथी अपनी पति का इनतिजर कर रही है। उसकि पति कैसे उसके सथ पेश अयेगा, एह सोच सोच कर उशा का दिल जोर जोर से धरक रहा है। सुहगरत मे कया कया होता है, एह उसको उसकी भभी और सहेलोएओन ने सब बता दिया था। उशा को मलुम है कि आज रत को उसके पति कमरे मे आ कर उसको चुमेगा, उसकि चुनसिओन को दबैगा, मसलेगा और फिर उसके कपरोन को उतर कर उसको ननगी करेगा। फिर खुद अपने कपरे उतर कर ननगा हो जयेगा। इसके बद, उसका पति अपने खरे लुनद से उसकि चूत कि चतनी बनते हुए उसको चोदेगा।

वैसे तो उशा को चुदवने कि तजुरबा शदी के पहले से हि है। उशा अपने सोल्लेगे के दिनो मे अपने सलस्स के कै लरकोन का लुनद अपने चूत मे उत्रवा चुकि है। एक लरके ने तो उशा को उसकि सहली के घर ले जा कर सहेली के समने हि चोदा था और फिर सहेली कि गनद भि मरी थी। एक बर उशा अपने एक सहलि के घर पर शदि मे गयी हुइ थी। वहन उस सहलि के भै, सुरेश, ने उसको अकेले मे चेर दिया और उशा का चुनची दबा दिया। उशा सिरफ़ मुसकुरा दिया। फिर सहली के भै ने अगे बरह कर उशा को पकर लिया और चुम लिया। तब उशा ने भि बरह कर सहली के भै को चुम लिया। तब सुरेश ने उशा के बलौसे के अनदर हथ दल उसकि चुनची मसलने लगा और उशा भि गरम हो कर अपनि चुनची मसलवने लगी और एक हथ से उसके पनत के उप्पेर से उसके लौनद पर रख दिया। तब सुरेश ने उशा को पकर कर चत पर ले गया। चत पर कोइ नही था, कयोनकी सरे घर के लोग नीचे शदी मे बयसते थे। चत पर जा कर सुरेश ने उशा को चत कि दिवर से खरा कर दिया और उशा से लिपत गया। सुरेश एक हथ से उशा कि चुनची दबा रहा था और दुसरा हथ सरी के अनदर दल कर उसकि बुर को सहला रहा था। थोरि देर मे हि उशा गरमा गयी और उसकि मुनह से तरह तरह कि अवज निकलने लगी। फिर जब सुरेश ने उशा कि सरी उतरने चहा तो उशा ने मना कर दिया और बोलि, “नही सुरेश हुमको एकदम से ननगी मत करो। तुम मेरा सरी उथा कर, पीचे से अपना गधे जैसा लुनद मेरि चूत मे पेल कर मुझे चोद दो।” लेकिन सुरेश ना मना और उसने उशा को पुरि तरह ननगी करके उसको चत के मुनदेर से खरा करके उसके पीचे जा कर अपना लुनद उसकि चूत मे पेल कर उसको खुब रगर रगर कर चोदा। चोदते समय सुरेश अपने हथोन से उशा कि चुनचेओन को भि मसल रहा था। उशा अपनि चूत कि चुदै से बहुत मजा ले रही थी और सुरेश के हर धक्के के सथ सथ अपनि कमर हिला हिला कर सुरेश का लुनद अपनि चूत से खा रही थी। थोरि देर के बद सुरेश उशा कि चूत चोदते चोदते झर गया। सुरेश के झरते हि उशा ने अपनि चूत से सुरेश का लुनद निकल दिया और खुद सुरेश के समने बैथ कर उसका लुनद अपने मुमह मे ले कर चत चत कर सफ़ कर दिया। थोरि देर के बद उशा और सुरेश दोनो चत से नीचे आ गये।

आज उशा अपनि सुहगरत कि सेज पर अपनि कै बर कि चुदि हुए चूत ले कर अपने पति के लिये बैथी थी। उसकि दिल जोर जोर से धरक रही थी कयोनकी उशा को दर था कि कहीन उसके पति एह ना पता चल जये कि उशा पहले हि चुदै का अनद ले चुकी है। थोरि देर के बद कमरे का दरवजा खुला। उशा ने अपनि अनख तीरची करके देझि कि उसकी ससुरजी, गोविनदजी, कमरे मे आये हुए हैन। उशा का मथा थनका, कि सुहगरत के दिन ससुरजी का कया कम आ गया है। खैर उशा चुपचप अपने आप को सिकोर बैथी रही। थोरि देर के बद गोविनदजी सुहग कि सेज के पस आये और उशा के तरफ़ देख कर बोला,”बेति मैं जनती हुन कि तुम अपने पति के लिये इनतिजर कर हो। आज के सब लरकेअन अपने पति का इनतिज़र करती है। इस दिन के लिये सब लरकिओन का बहुत दिनो से इनतिज़र रहती है। लेकिन तुमहरा पति, रमेश, आज तुमसे सुहगरत मनने नही आ पयेगा। अभि अभि थने से फोने आया था और वोह अपने उनिफ़ोरम पहन कर थने चला गया। जते जते, रमेश एह कह गया कि सहर के कै भग मे दकैती परी है और वोह उसके चनबिन करने जा रहा है। लेकिन बेति तु बिलकुल चिनता मत करना। मैं तेरा सुहगरत खली नही जने दुनगा।” उशा अपने ससुरजी कि बत सुन तो लिया पर अपने ससुर कि बत उसकि दीमग मे नही घुसा, और उशा अपना चेहेरा उथा कर अपने ससुर को देखने लगी। गोविनदजी अगे बरह कर उशा को पलनग पर से उथा लिया और जमीन पर खरा कर दिया। तब गोविनदजी मुसकुरा कर उशा से बोले, “घबरना नही, मैं तुमहरा सुहगरत बेकर जने नही दुनगा, कोइ बत नही, रमेश नही तो कया हुअ मैं तो हुन।” इतना कह कर गोविनदजी अगे बरह कर उशा को अपने बनहोन मे भर कर उसकि होथोन पर चुम्मा दे दिया।

जैसे हि गोविनदजी ने उशा के होथोन पर चुम्मा दिया, उशा चौनक गयी और अपने ससुरजी से बोलि, “एह आप कया कर रहेन है। मि अपके बैते कि पतनि हुन और उस लिहज से मैं आप कि बेति लगती हुन और मुझको चुम रहेन है?” गोविनदजी ने तब उशा से कह, “पगल लरकी, अरे मैं तो तुमहरि सुहगरत बेकर ना जये इसलिये तुमको चुमा। अरे लरकिअन जब शदि के पहले जब शिव लिनग पर पनि चरते है तब वो कया मनगती है? वो मनगती है कि शदि के बद उसका पति उसको सुहगरत मे खुब रगरे। समझी? उशा ने पनि चेहेरा नीचे करके पुची, “मैं तो सब समझ गयी, लेकिन सुहगरत और रगरने वलि बत नही समझी।” गोविनदजी मुसकुरा कर बोले, “अरे बेति इसमे ना समझने कि कया बत है? तु कया नही जनती कि सुहगरत मे पति और पतनि कया कया करते है? कया तुझे एह नही मलुम कि सुहगरत मे पति अपने पतनि को कैसे रगरता है?” उशा अपनि सिर को नीचे रखती हुइ बोलि, “हान, मलुम तो है कि पहलि रत को पति और पतनि कया कया करते और करवते हैन। लेकिन, आप ऐसा कयोन कह रहेन है?” तब गोविनदजी अगे बरह कर उशा को अपने बहोन मे भर लिया और उसकि होथोन को चुमते हुए बोले, “अरे बहु, तेरा सुहगरत खलि ना जये, इसलिये मैं तेरे सथ वो सब कम करुनगा जो एक अदमि और औरत सुहगरत मे करते हैन।”

उशा अपनि ससुर के मुनह से उनकि बत सुन कर शरमा गयी और अपने हथोन से अपना चेहेरा धनक लिया और अपने ससुर से बोलि, “है! एह कया कह रहेन है आप। मैं अपके बेते कि पतनि हुन और इस नते से मैं अपकि बेति समन हुन और मुझसे कया कह रहेन है?” तब गोविनदजी अपने हथोन से उशा कि चुनचिओन को पकर कर दबते हुए बोले, “हन मैं जनता हुन कि तु मेरि बेति समन है। लेकिन मैं तुझे अपने सुहगरत मे तरपते नही देख सकता और इसिलिये मैं तेरे पस अयह उन।” तब उशा अपने चेहेरे से अपना हथ हता कर बोलि, “थीक है बबुजी, आप मेरे से उमर मे बरे हैन। आप जो हि कह रहेन है, तीक हि कह रहेन हैन। लेकिन घर मे आप और मेरे सिबा और भि तो लोग हैन।” उशा का इशरा अपने ससुमा के लिये थी। तब गोविनदजी ने उशा कि चुनची को अपने हथोन से बलौसे के उपर से मलते हुए कह, “उशा तुम चिनता मत करो। तुमहरि ससुमा को सोने से पहले दूध पिने कि अदपत है, और आज मैं उनकि दूध मे दो नीनद कि गोलि मिला कर उनको पिला दिया है। अब रत भर वो अरम से सोती रहेनगी।” तब उशा ने अपने हथोन से अपने सौरजी कि कमर पकरते हुए बोलि, “अब आप जो भि करना है किजिए, मैं मना नहि करुजगी।”

तब गोविनदजी उशा को अपने बहोन मे भिनच लिया और उसकि मुनह को बेतहशा चुमने लगे और अपने दोनो हथोन से उसकि चुनचेओन को पकर कर दबने लगे। उशा भि चुप नही थी। वो अपने हथोन से अपने ससुर का लुनद उनके कपरे के उपर से पकर कर मुथिअ रही थी। गोविनदजी अब रुकने के मूद मे नही थे। उनहोने उशा को अपने से लग किया और उसकि सरी कि पल्लू को कनधे से नीचे गिरा दिया। पल्लू को नीचे गिरते हि उशा कि दो बरि बरि चुनची उसके बलौसे के उपर से गोल गोल दिखने लगी। उन चुनची को देखते हि गोविनदजी उन पर तुत परे और अपना मुनह उस पर रगरने लगे। उशा कि मुनह से ओह! ओह! अह! कया कर रहे कि अवजे अने लगी। थोरि देर के बद गोविनदजी ने उशा कि सरी उतर दिया और तब उशा अपने पेत्तिसोअत पहने हि दौर कर कमरे का दरवजा बनद कर दिया। लेकिन जब उशा कमरे कि लिघत बुझना चही तो गोविनदजी ने मना कर दिया और बोले, “नही बत्ती मत बनद करो। पहले दिन रोशनि मे तुमहरि चूत चोदने मे बहुत मज़ा अयेगा।” उशा शरमा कर बोलि, “तीख है मैं बत्ती बनद नही कर ती, लेकिन आप भि मुझको बिलकुल ननगी मत किजियेगा।” “अरे जब थोरि देर के बद तुम मेरा लुनद अपनि चूत मे पिलवओगी तब ननगी होने मे शरम कैसा। चलो इधर मेरे पस आओ, मैं अभि तुमको ननगी कर देता हुन।” उशा चुपचप अपना सर नीचे किये अपने ससुर के पस चलि आये।

जैसे हि उशा नज़दिक आयी, गोविनदजी ने उसको पकर लिया और उसके बलौसे के बुत्तोन खोलने लगे। बुत्तोन खुलते हि उशा कि बरि बरि गोल गोल चुनचिअन उसके बरा के उपर से दिखने लगी। गोविनदजी अब अपना हथ उशा के पीचे ले जकर उशा कि बरा कि हूक भि खोल। हूक खुलते हि उशा कि चुनची बहर गोविनदजी के मुनह के समने झुलने लगि। गोविनदजी तुरनत उन चुनचेओन को अपने मुनह मे भर लिया और उनको चुसने लगे। उशा कि चुनचेओन को चुसते चुसते वो उशा कि पेत्तिसोअत का नरा खीनच दिया और पेत्तिसोअत उशा के पैर से सरकते हुए उशा के पैर के पस जा गिरा। अब उशा अपने ससुर के समने सिरफ़ अपने पनती पहने कहरी थी। गोविनदजी ने झत से उशा कि पनती भि उतर दी और उशा बिलकुल ननगी हो गयी। ननगी होते हि उशा ने अपनि चूत अपने हथोन से धक लिया और सरमा कर अपने ससुर को कनखेओन से देखने लगी। गोविनदजी ननगी उशा के सामने जमीन पर बैथ गये और उशा कि चूत पर अपना मुनह लगा दिया। पहले गोविनदजी अपने बहु कि चूत को खुब सुघा। उशा कि चूत से निकलती सौनधी सौनधी खुशबु गोविनदजी के नक मे भर गया। वो बरे चव से उशा कि चूत को सुनघने लगे। थोरि देर के बद उनहोने अपना जीव निकल कर उशा कि चूत को चतना सुइरु कर दिया। जैसे हि उनका जीव उशा कि चूत मे घुसा, तो उशा जो कि पलनग के सहरे खरे थी, पलनग पर अपनि चुतर तिका दिया और अपने पैर फ़ैला कर अपनि चूत अपनि सौसर से चतवने लगी। थोरि देर तक उशा कि चूत चतने के बद गोविनदजी अपना जीव उशा कि चूत के अनदर दल दिया और अपनि जीव को घुमा घुमा कर चूत को चुसने लगे। अपनि चूत चतै से उशा बहुत गरम हो गयी और उसने अपने हथोन से अपनि ससौर का सिर पकर कर अपनि चूत मे दबने लगी और उसकि मुनह से सी सी कि अवजे भि निकलने लगी।

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09-21-2010, 10:40 PM
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RE: उशा की कहानी
अब गोविनदजी उथ कर उशा को पलनग पर पिथ के बल लेता दिया। जैसे हि उशा पलनग पर लेती, गोविनदजी झपत कर उशा पर चर बैथ गये और अपने दोनो हथोन से उशा कि चुनचेओन को पकर कर मसलने लगे। गोविनदजी अपने हथोन से उशा कि चुनची को मसल रहे थे और मुनह से बोल रहे थे, “मुझे मलुम था कि तेरि चुनची इतनि मसत होगि। मैं जब पहली बर तुझको देखने गया था तो मेरा नज़र तेरि चुनची पर हि थी और मैने उसि दिन सोच लिया था इन चुनचेओन पर मैं एक ना एक दिन जरूर अपना हथ रखुनगा और इनको रगर रगर कर दबुनगा। “है! अह! ओह! एह आप कया कह रहेन है? एक बप होकर अपने लरके के लिये लरकी देखते वकत आप उसकि सिरफ़ चुनचिओन को घुर रहे थे। ची कितने गनदे है आप” उशा मचलती हुइ बोलि। तब गोविनदजी उशा को चुमते हुए बोले, “अरे मैं तो गनदा हुन हि, लेकिन तु कया कम गनदी है? अपने ससुर के समने बिलकुल ननगी परी हुइ है और अपनि सुनचिओन को ससुर से मसलवा रही है? अब बता कयोन जयदा गनदा है, मैं या तु?” फिर गोविनदजी ने उशा से पुचा, “अस्सहा एह बत कि चुमची मसलै से तेरा कया हल हो रहा है?” उशा अपने ससुर से लिपत कर बोलि, “"ऊऊह्हह्हह और जोरे से हान ससुरजी और जोरे से दबाओ बदा मजा आरहा है मुझे, अपका हथ औरतोन के चुमची से खेलने मे बहुत हि महिर है। अपको पता है कि औरतोन कि चुनची कैसे दबया जता है। और जोर से दबैये, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर उशा अपने ससुर को अपने हथोन से बनधते हुए बोलि, “अब बहुत हो गया है चुनची से खेलना। आपको इसके आगे जो भि करने वले हैन जलदी किजिये, कहीन रमेश ना आ जये और मेरि भि चूत मे खुजली हो रही है।” “अभि लो, मैं अभि तुझको अपने इस मोते लुनद से चोदता हुन। आज तुझको मैं ऐसा चोदुनगा कि तु जिनदगी भर यद रखेगी” इतना कह कर गोविनदजी उथकर उशा के पैरोन के बीच उकरु हो कत बैथ गये।

ससुरको अपने ऊप्पेर से उथते हि उशा ने अपनि दोनो तनगोन को फ़ैला कर ऊपर उथा लिया और उनको घुतने से मोर कर अपना घुतना अपने चुनचिओन पर लगा लिया। इस्से उशा कि चूत पुरि तरह से खुल कर ऊपर आ गयी और अपने ससुर के लुनद अपनि चूत को खिलने के लिये तयर हो गयी। गोविनदजी भि उथ कर अपना धोति उतर, उनदेरवेअर, कुरता और बनिअन उतर कर ननगे हो गये और फिर से उशा के खुले हुए पैरोन के बीच मे आकर बैथ गये। तब उशा उथ कर अपने ससुर का तनतनया हुअ लुनद अपने नज़ुक हथोन से पकर लिया और बोलि, “ऊओह्हह्हह ससुरजी कितना मोता और सखत है अपका यै।” गोविनदजी अतब उशा के कन से अपना मुनह लगा कर बोले, “मेरा कया? बोल ना उशा, बोल” गोविनदजी अपने हथोन से उशा का गदरया हुअ चुमचेओन को अपने दोनो हथोन से मसल रहे थी और उशा अपने ससुर का लुनद पकर कर मुथी मे बनधते हुए बोलि, "आआअह्हह्ह ऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ ऊईईइम्मम्ममाआ ऊऊह्हह्ह ऊऊउह्हह्हह्हह्ह! अपका एह पेनिस स्सस्सह्हह्हह्हह्ह ऊऊम्मम्मम्ममाआह्हह्ह।" गोविनदजी फिरसे उशा के कन पर धिरे से बोले, "उशा हिनदि मैं बोलो ना इसका नाम पलेअसे"। उशा ससुर के लुनद को अपने हथोन मे भर कर अपनि नज़र नीची कर के अपने ससुर से बोलि, “मैं नही जनता, आप हि बोलिए ना, हिनदि मे इसको कया कहते हैन।” गोविनदजी ने हनस कर उशा कि चुनची के चुसते हुए बोले, “अरे ससुर के समने ननगी बैथी है और एह नही जनती कि अपने हथ मे कया पकर रखी है? बोल बेति बोल इको हिनदि मे कया कहते और इस्से अभि हुम तेरे सथ कया करेनगे।”

तब उशा ने शरमा कर अपने ससुर के नगी चती मे मुनह चुपते हुए बोलि, “ससुरजी मैं अपने हथोन से अपका खरा हुअ मोता लुनद पकर रखी है, और थोरि देर के बद आप इस लुनद को मेरि चूत के अनदर दल कर मेरि चुदै करेनगे। बस अब तो खुश हैन आप। अब मैं बिलकुल बेशरम होकर आपसे बत करुनगी।” इतना सुन कर गोविनदजी ने तब उशा को फिर से पलनग पर पीथ के बल लेता दिया और अपने बहु के तनगो को अपने हथोन से खोल कर खुद उन खुली तनगो के बीच बैथ गये। बैथने के बद उनहोने झुक कर उशा कि चूत पर दो तीन चुम्मा दिया और फिर अपना लुनद अपने हथोन से पकर कर अपनि बहु कि चूत के दरवजे पर दिया। चूत पर लौनद रखते हि उशा अपनि कमर उथा उथा कर अपनि ससुर के लुनद को अपनि चूत मे लेने कि कोशिश करने लगी। उशा कि बेतबी देख कर गोविनदजी अपने बहु से बोलि, “रुक चिनल रुक, चूत के समने लुनद आते हि अपनि कमर उचका रही है। मैं अभि तेरे चूत कि खुजली दुर करता हुन।” उशा तब अपने ससुर के चती पर हथ रख कर उनकि निप्पले के अपने उनगलेओन से मसलते हुए बोलि, “ऊऊह्हह ससुरजी बहुत हो गया है। आब बरदशत नहिन हो रहा है आओ ना ऊऊओह्हह पलेअसे ससुरजी, आओ ना, आओ और जलदी से मुझको चोदो। आब देर मात कारो आब मुझे चोदो ना आब और कितनि देर करेनगे ससुरजी। ससुर जी जलदी से अपना एह मोता लुनद मेरि चूत मे घुसेर दिजिये। मैं अपनि चूत कि खुजली से पगल हुए जा रही हुन। जलदी से मुझे अपने लुनद से चोदिये। अह! ओह! कया मसत लुनद है अपका।” गोविनदजी अपना लुनद अपने बहु कि चूत मे थेलते हुए बोले, “बह रे मेरे चिनल बहु, तु तो बरि चुद्दकर है। अपने मुनह से हि अपने ससुर के लुनद कि तरीफ़ कर रही है और अपनि चूत को मेरा लुनद खिलने के लिये अपनि कमर उचका रही है। देख मैं आज रत को तेरे चूत कि कया हलत बनता हुन। सलि तुझको चोद चोद करत तेरि चूत को भोसरा बना दुनग” और उनहोने एक हि झतके के सथ अपना लुनद उशा कि चूत मे दल दिया।

चूत मे अपने ससुर का लुनद घुसते हि उशा कि मुनह से एक हलकी सि चिख निकल गये और उसने पने हथोन से अपने ससुर को पकर उनका सर अपनि चुनचेओन से लगा दिया और बोलने लगी, “वह! वह ससुर जी कया मसत लुनद है आपका। मेरि तो चूत पुरि तरह से भर गये। अब जोर जोर से धक्का मा कर मेरि चूत कि खुजली मिता दो। चूत मे बहुत खुजली हो रही है।” “अभि लो मेरे चिनल चुद्दकर बहु, अभि मैं तेरि चूत कि सरि कि सरि खुजली अपने लुनद के धक्के के सथ मितता हुन” गोविनदजी कमर हिला कर झतके के सथ धक्का मरते हुए बोले। उशा भि अपने सौर के धक्के के सथ अपनि कमर उचल उचल कर अपनि चूत मे अपने ससुर का लुनद लेते बोलि, “ओह! अह! अह! ससुरजी मज़ा आ गया। मुझे तो तरे नज़र आ रहेन है। अपको वाकि मे औरत कि चूत चोदने कि कला आती है। चोदिए चोदिए अपने बहु कि मसत चूत मे अपना लुनद दल कर खूब चिदिए। बहुत मज़ा मिल रहा है। अब मैं तो आपसे रोज़ अपनि चूत चुदवौनगी। बोलिये चोदेनगे ना मेरि चूत?” गोविनदजी अपनि बहु कि बत सुन कर मुसकुरा दिये और अपना लुनद उसकि चूत के अनदर बहर करमा जरि रखा। उशा अपनि ससुर कि लुनद से अपनि चूत चुदवा कर बेहल हो रही थी और बरबरा रही थे, “आआह्हह्हह ससुरजीईए जोर्रर्रर सीई। हन्नन्न ससयरजीए जूर्रर्रर जूर्रर्र से धक्कक्काअ लगीईईईईई, और्रर्रर जूर्रर सीई चोदिईईए अपनि बहूउ कि चूत्तत्त को। मुझीई बहूत्तत्त अस्सह्हह्हाअ लाअग्गग रह्हह्हाअ हैईइ, ऊऊओह्हह्ह और जुर से चोदो मुझे आआह्हह्ह सौऊउर्रर्रजीए और जोर से करो आआअह्हह्हह्हह्हह्ह और अनदेर जोर सै। ऊऊओह्हह्ह दीआर्रर ऊऊओह्हह्हह्ह ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ आआह्हह्हह आआह्हह्हह्ह ऊउईईई आअह्हह्हह ऊऊम्मम्माआआआह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊओह्हह्हह्हह।"

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09-21-2010, 10:41 PM
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RE: उशा की कहानी
थोरि देर तक जोर जोर धक्को से अपने बहु चूत चोदने के बद गोविनदजी ने अपना धक्कोन कि रफ़तेर धेमे कर दिया और उशा कि चुमचेओन को फिर से अपने हथोन मे पकर कर उशा से पुचा, “बहु कैसा लग रहा अपने ससुर का लुनद अपनि चूत मे पिलवा कर?” तब उशा अपनि कमर उथा उथा कर चूत मे लुनद कि चोत लेति हुइ बोलि, “ससुरजी अपसे चूत चुदवा कर मैं और मेरि चूत दोनो का हल हि बेहल हो गया है। आप चूत चोदूनीई मे बहुत एक्सपेरत्तत्तत हैन्नन्नन बदाअ मजा आ रहा है मुझे ससुरजी ऊओह्हह्हह ससुरजी आप बहुत अच! छा चोदते हैन आआह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह्हह्हह्हह्ह। ऊऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ ससुरजी आप बहुत हि एक्सपेरत हैन और अपको औरतोन कि चूत चोद कर औरतोन को सुख देना बहुत अस्सह्हीए तरह से आत्ता हैन। मुझे बहुत अस्सह्हा लग रहा है ययून्न ही हान सौरजीई यून्न ही चोदो मुझे आप्पप्प बाहुत अच्चहे हो बास्स ययून हि चोदै करो मेरि ऊओह्हह्हह्हह खूब चोदो मुझे। गोविनदजी भि उशा कि बतोन को सुन कर बोले, “ले रनदि, चिनल ले अपने चूत मे अपसने सौर के लुनद का थोकर ले। आज देखतेन है कि तु कितनि बरि चिनल चुद्दकर है। आज मैं तेरि चूत को अपने हलवी लुनद से चोद चोद कर भोसरा बना दुनगा। ले मेरि चुदक्कर बहु ले मेरा लुनद अपनि चूत से खा।” गोविनदजे इतना कह कर फिर से उशा कि चूत मे पना लुनद जोर जोर से पेलने लगे और थोरि देर के अपना लुनद जर तक थनस कर अपनि बहु कि चूत के अनदर झर गये। उशा भि अपने सौर कि लुनद को चुतौथा उथा कर अपनि चूत से खती खती झर गयी। थोरि देर तक दोनो ससुर और बहु अपनि चुदै से थक कर सुसत परे रहे।

थोरि देर के बद उशा ने अपनि अनख खोलि और अपने ससुर और खुद को ननगी देख कर शरमा कर अपने हथोन से अपना चेहेरा धक लिया। तब गोविनदजी उथ कर पहले बथरूम मे जा कर अपना लुनद धो कर सफ़ करने के बद फिर से उशा के पस बैथ गये और उसकि शरेर से खेलने लगे। गोविनदजी ने अपने हथोन से उशा का हथ उसके चेहेरे से हथा कर अपने बहु से पुचा, “कयोन, चिनल चुद्दकर रनदी उशा मज़ा अया अपने ससुर के लुनद से अपनि चूत चुदवा कर? बोल कैसा लगा मेरा लुनद और उसके धक्के?” उशा अपने हथोन से अपने ससुर को बनध कर उनको चुमते हुए बोलि, “बबुजी अपका लुनद बहुत शनदर है और इसको किसि भि औरत कि चूत को चोद कर मज़ा देने कि कला अति है। लेकिन, सुबसे अस्सह्हा मुझे अपका चिदते हुए गनदी बत करना लगा। सुच जब आप गनदी बत करते हैन और चोदते है तो बहुत अस्सह्हा लगता है।” गोविनदजी ने अपने हथोन से उशा कि चुनची को पकर कर मसलते हुए बोले, “अरे चिनल, जा हुम गनदा कम कर रहेन हैन तो गनदी बत करने मे कया फ़रक परता है और मिझको तो चुदै के समय गली बकने कि अदपत है। अस्सह्हा अब बोल तुझे मेरा चुदै कैसी लगी? मज़ा आय कि नही, चूत कि खुजली मेती कि नही?” उशा ने तब अपने हथोन से अपने ससुर का लुनद पकर कर सहलते हुए बोलि, “ससुरजी अपका लुनद बहुत हि शनदर है और मुझे अपसे अपनि चूत चुदवा कर बहुत मज़ा आया। लगता है कि अपके लुनद को भि मेरि चूत बहुत पसनद आया। देखेये ना अपका लुनद फिर से खरा हो रहा है। कया बत एक बर और मेरि चूत मे घुसना चहता है कया?” गोविमदजी ने तब अपने हथ उशा कि चूत पर फेरते हुए बोले, “सलि कुतिअ, एक बर अपने ससुर का लुनद खा कर तेरि चूत का मन नही भरा, फिर से मेरा लुनद खना चहती है? थीक है मैं तुझको अभि एक बर फिर से चोदता हुन।”

गोविनदजी कि बत सुन कर उशा झत से उथ कर बैथ गयी और अपने ससुर के समने झुक कर अपने हथ और पैर के बल बैथ कर अपने ससुर से बोलि, “बबुजी, अब मेरि चूत मे पीचे से अपना लुनद दल कर चोदिअ। मुझे पीचे से चूत मे लुनद दलवने मे बहुत मज़ा आता है।” गोविनदजी ने तब अपने समने झुकि हुए उशा किए चुतर पर हथ फेरते हुए उशा से बोले, “सलि कुत्ती तुझको पीचे से लुनद दलवनव मे बहुत मज़ा आता है? ऐसा तो कुतिअ चुदवती है, कया तु कुतिअ है?” उशा अपना सिर पीचे घुमा कर बोलि, “हन मेरे सोदु ससुरजी मय कुतिअ हुन और इस समय आप मुझे कुत्ता बन कर मेरि चूत चोदेनगे। अब जलदी भि कतिये और शुरु हो जैअ जलदी से मेरि चूत मे अपना लुनद दलिये।” गोविनदजी अपने लुनद पर थुक लगते हुए बोले, “ले रेनि रनदी बहु ले, मैं अभि तेरि फुदकती चूत मे अपना लुनद दल कर उसकि खबर लेत हुन। सलि तु बहुत चुद्दकर है। पता नहीन मेरा बेता तुझको शनत कर पयेगा कि नही।” और इतना कहकर गोविनदजी अपने बहु के पीचे जकर उसकि चूत अपने उनगलिओन से फैला कर उसमे अपना लुनद दल कर चोदने लगे। चोदते चोदते कभि कभि गोविनदजी अपना उनगली उशा कि गनद मे घुसा रहेन थे और उशा अपनि कमर हिला हिला अपनि चूत मे ससुर के लुनद को अनदर भर करवा रही थी। थोरि देर के चोदने के बद दोनो बहु और सौर झर गये। तब उशा उथ कर बथरूम मे जकर अपना चूत और झनगे धोकर अपने बिसतर पर आकर लेत गयी और गोविनदजी भि अपने कमरे जकर सो गये।

अगले हफ़ते रमेश और उशा अपने होनेयमून मनने अपने एक दोसत, जो कि शिमला मे रहता है, चले गये। जैसे हि रमेश और उशा शिमला ऐरपोरत से बहर निकले तो देखा कि रमेश का दोसत, गौतम और उसकि बिबि सुमन दोनो बहर अपनि सर के सथ उनका इनतेज़र कर रहेन हैन। रमेश और गौतम अगे बरज कर एक दुसरे के गले लग गये। फिर दोन ओने अपनि अपनि बिबिओन से इनत्रोदुसे करवा दिया और फिर सर मे बैथ कर घर कि तरफ़ चल परे। घर पहुनच कर रमेश और गौतन दरविनग मे बैथ कर पुरनी बतो मे मशगूल हो गय और उशा और सुमन दुसरे कमरे मे बैथ कर बतेन करने लगे। थोरि देर के बद रमेश और गौतम अपने बिबिओन को बुअकर उनसे कह कि खना लग दो बहुत जोर कि भुक लगी है। सुमन ने फता फत खना लगा दिया और चरोन दिनिनग तबले पर बैथ कर खने लगे। खना खते वकी उशा देलह रही थी कि रमेश खमा खते वकत सुमन को घुर घुर कर देख रहा है और सुमन भि धिरे धिरे मुसकुरा रही है। उशा को दल मे कुच कला नज़र अया। लेकिन वो कुच नही बोलि।

अगले दिन सुबह गौतम नहा धो कर और नशता करने के बद अपने ओफ़्फ़िसे के लिये रवना हो गया। घर पर उशा, रमेश और सुमन पर बैथ कर नशता करने के बद गप लरा रहे थे। उशा आज सुबह भि धयन दी कि रमेश अभि भि सुमन को घुर रहा है और सुमन धिरे धिरे मुसकुरा रही है। थोरि देर के बद उशा नहने के लिये अपने कपरे ले कर बथरूम मे गयी। करीब अधे घनते के बद जब उशा बथरूम से नहा धो कर सिरफ़ एक तौलिअ लप्पेत कर बथरूम से निकली तो उसने देखा कि सुमन सिरफ़ बलौसे और पेत्तिसोअत पहने तनगे फैला कर पनि कुरसी पर फैली अधे लेति और अधे बैथी हुए है और उसकि बलौसे के बुत्तोन सब के सब खुले हुए है रमेश झुक कर सुमन कि एक चुनची अपने हथोन से पकर चुस रहा है और दुसरे हथ से सुमन कि दुसरी चुनची को दबा रहा है। उशा एह देख कर सन्न रह गयी और अपनि जगह पर खरि कि खरि रहा गयी। तभि सुमन कि नज़र उशा पर पर गयी तो उसने अपनि हथ हिला कर उशा को अपने पस बुला लिया और अपनि एक चुनची रमेश से चुरा कर उशा कि तरफ़ बरहा कर बोलि, “लो उशा तुम भि मेरि चुनची चुसो।” रमेश चुप चप सुमन कि चुनची चुसता रहा और उसने उशा कि तरफ़ देलहा तक नही। सुमन ने फिर से उशा से बोलि, “लो उशा तुम भि मेरि चुनची चुसो, मुझे चुनची चुसवने मे बहुत मज़ा मिलता है तभि मैने रमेश से अपनि चुनची चुसवा रही हुन।” उशा ना अब कुच नही बोलि और सुमन कि दुसरी चुनची अपने मुनह मे भर कर चुसने लगि।

थोरि देर के बद उशा ने देखा कि सुमन अपना हथ अगे कर के रमेश का लुनद उसके पैजमे के ऊपेर से पकर कर अपनि मुथि मे लेकर मरोर रही है और रमेश सुमन कि एक चुनची अपने मुनह मे भर कर चुस रहा है। अब तक उशा भि गरम हो गयी थी। तभि सुमन ने रमेश का पैजमे का नरा खीनच कर कजखोल दिया और रमेश का पैजमा सरक कर नीचे गिर गया। पैजमा को नीचे गिरते हि रमेश ननगा हो गया कयोनकी वो पैजमे के नीचे कुच नहि पहन रखा था। जैसे हि रमेश रमेश ननगा हो गया वैसे हि सुमन अगे बरह कर रमेश का खरा लुनद पकर लिया और उसका सुपरा को खोलने और बनद करने लगी और अपने होथोन पर जीव फेरने लगी। एह देख कर उशा ने अपने हथोन से पकर कर रमीश का लुनद सुमन के मुनह से लगा दिया और सुमन से बोलि, “लो सुमन, मेरे पति का लुनद चुसो। लुनद चुसने से तुमहे बहुत मज़ा मिलेगा। मैं भि अपनि चूत मरवने के पहले रमेश का लुनद चुसती हुन। फिर रमेश भि मेरि चूत को अपने जीव से चत्ता है।” जैसे हि उशा ने रमेश का लुनद सुमन के मुनह से लगया वैसे हि सुमन ने अपनि मुनह खोल कर के रमेश का लुनद अपने मुन मे भर लिया और उसको चुसने लगी। अब रमेश अपना कमर हिला हिला कर अपना लुनद सुमन के मुनह के अनदर बहर करने लगा और अपने हथोन से सुमन कि दोनो चुनची पकर कर मसलने लगा। तब उशा ने अगे बरह कर सुमन कि पेत्तिसोअत का नरा खोल दिया। पेत्तिसत का नरा खुलते हि सुमन ने अपनि चुतर कुरसी पर से थोरा सा उथा दिया और उशा अपने हथोन से सुमन कि परत्तिसोअत को खीनच कर नीचे गिरा दिया। सुमन ने पेत्तिसोअत के नीचे पनती नही पहनी थी और इसलिये पेतीसोअत खुलते हि सुमन भि रमेश कि तरह बिलकुल ननगी हो गयी।

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09-21-2010, 10:42 PM
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RE: उशा की कहानी
उशा ने सबसे पहले ननगी सुमन कि जनघोन को खोल दिया और उसकि चूत को देखने लगी। सुमन कि चूत पर झनते बहुत हि करीने से हतया गया था और इस समय सुमन कि चूत बिलकुल चमक रहि थी। सुमन कि चूत से चुदै के पहले निकलने वला रस रिस रिस कर निकल रहा था। उशा झुक कर सुमन के समने बैथ गयी और सुमन कि चूत से अपनि मुनह लगा दिया। उशा कि मुनह जैसे हि सुमन कि चूत पर लगा तो सुमन ने अपनि तनगे और फैला दिया और अपने हथोन से अपनि चूत को खोल दिया। अब उशा ने अगे बरह कर सुमन कि चूत को चतना शुरु कर दिया। उशा अपनि जीव को सुमन कि चूत के नीचे से लेकर चूत के ऊपेर तक ला रही थी और सुमन मरे गरमि के उशा का सर अपने हथोन से पकर कर अपनि चूत पर दबा रही थी। उधर रमेश ने जैसे हि देखा कि उशा अपनि जीव से सुमन कि चूत को चत रही है तो उसने अपना लुनद सुमन के मुनह से कगा कर एक हलका सा धक्का दिया और सुमन अपनि मुनह खोल कर रमेश का लुनद अपने मुनह मे भर लिया। नीचे उशा अपनि जीव से सुमन कि चूत को चत रही थी और कभि कभि सुमन कि सलित को अपने दनतोन से पकर कर हलके हलके से दबा रही थी।

थोरि देर तक सुमन कि चूत को चतने और चुसने का बद उशा उथ खरी हो गयी और रमेश का लुनद पकर सुमन के मुनह से निकल दिया और सुमन से बोलि, “सुमन अब बहुत हो गया लुनद चुसना और चूत चतवना। चलो अब अपने पैर कुरसी के हती के ऊपर रखो और रमेश का लुनद अपने चूत मे पिलवओ। मुझे मलुम है कि अब तुमहे रमेश का लुनद अपने मुनह मे नही अपनि चूत के अनदर चहिये।” और उशा ने अपने हथोन से अपने पति का कहरा हुअ लुनद सुमन कि गिलि चूत कि ऊपर रख दिया। चूत पर लुनद के रखते हि सुमन ने पने हथोन से उसको अपनि चूत कि चेद से भिरा दिया और रमेश कि तरफ़ देख कर मुसकुरा कर बोलि, “लो अब तुमहरी बिबि हि तुमहरा लुअरे को मेरि चूत से भिरा दिया। अब देर किस बत का है। चलो चुदै शुरु कर दो।” इतना सुनते हि रमेश ने अपना कमर हिला कर अपना तना हुअ लुनद सुमन कि चूत के अनदर उतर दिया। चूत के अनदर लुनद घुसते हि सुमन ने अपने पैर को कुरसी के हथेलिओन पर रख कर औए फैला दिया और अपने हथोन से रमेश का कमर पकर कर उसको अपनि तरफ़ खीनच लिया। अब रमेश अपने दोनो हथोन से सुमन कि दोनो चुनचेओन को पकर कर अपना कमर हिला हिला कर सुमन को चोदना शुरु कर दिया। सुमन अपनि चूत मे रमेश का लुनद पिलवा कर बहुत कुश थी और वो मुर कर उशा से बोलि, “उशा तेरे पति का लुनद बहुत हि शनदर है, बहुत लुमबा और मोता है। रमेश का लुनद मेरे बस्सहेदनि पर थोकर मर रहा है। तेरि ज़िनदगी तो रमेश से चुदवा कर बहुत अरम से कत रही होगे?” उशा तब रमेश का एक हथ सुमन कि चुनची पर से हता कर सुमन कि चुनची को मसलते हुए बोलि, “हन, मेरे पति का लुनद बहुत हि शनदर है और मुझे रमेश से चुदवने मे बहुत मज़ा मिकता है। मैं तो हर रोज़ तीन – चर बर रमेश का लुनद अपनि चूत मे पिलवती हुन। कयोन, गौतम तेरि चूत नही चोदता? कैसा है गौतम का लुनद?”

सुमन बोलि, “गौतम का लुनद भि अस्सह्हा है और मैं हर रोज़ दो – तेन बर गौतम के लुनद से अपनि चूत चुदवती हुन। गौतम रोज़ रत को हुमको रगर कर चोदता है और रत कि चुदै के समय मैं कम से कम से चर-पनच बर चूत का पनि चिरती हुन। लेकिन रमेश के लुनद कि बत हि कुच और है। एह लुनद तो मेरे बस्सहेदनि पर थोकर मर रहा है। असल मे मुझे अपनि पति के अलवा दुसरे लुनद से चुदवने मे बहुत मज़ा अता है और जब से मैने रमेश को देखा है, तभि से मैं रमेश का लुनद खने के लिये ललैत थी। अब मेरि मन कि मुरद हो गयी है। अब शम को जैसे हि गौतम ओफ़्फ़िसे से घर अयेगा उसका लुनद मैं तेरि चूत मे पिलवैनगी। तब देखना कि गौतम कैसे तुमको चोदता है। मुझे मलुम है कि गौतम के लुनद अपनि चूत से खकर तुम बहुत खुश होगी।” उशा चुप चप सुमन कि बत सुनति रही और झुक कर रमेश का लुनद सुमन कि चूत के अनदर बहर होना देखती रही। थोरि देर के बद उशा झुक कर सुमन कि एक चुनची अपने मुनह मे भर लिया और जोर जोर से चुसने लगी। थोरि देर के बद उशा को एहसस हुअ कि कोइ उसके चुतर के ऊपेर से उसकि तौलिअ हता कर उसकि चूत मे अपना लुनद घुसेरने कि कोशिह कर रहा है। उशा चौनक कर पीचे मुर कर देखि तो तो पया कि उसकि चूत मे लुनद घुसेरने वला और कोइ नही बलकी गौतम है। हुअ एह कि गौतम के ओफ़्फ़िसे मे किसि का देहनत हो गया था और इसलिये ओफ़्फ़िसे बनद कर दिया गया था और इसकिये गौतम ओफ़्फ़िसे जकर हि वपस अ गया था।

गौतम अब तक उशा कि बदन से उसकि तौलिअ हता कर अपना तन्नया हुअ लुनद उशा कि चूत मे दल चुक्का था और उशि कि कमर को पकर के उशा कि चूत मे अपने लुनद कि थोकर मरना शुरु हो गया था। गौतम जोर जोर से उशा कि चूत अपने लुनद से चोद रहा था और अपने हथोन से उशा कि चुनची को मसल रहा था। रमेश इस समय सुमन को जोरदर धक्कोन के सथ चोद रहा था और उसने अपना सिर घुमा कर जब उशा कि चुदै गुअतम के सथ होते देखा तो मुसकुरा दिया और गौतम से बोला, “देख गौतम देख, मैं तेरे हि घर मे और तेरे हि समने तेरि बिवि को चोद रहा हुन। तुझे तेरि बिबि कि चुदै देख कर कैसा लग रहा है?” गौतम ने तब उशा को चुमते और उसकि चुनची को मलते हुए रमेश से बोला, “अबे रमेश, तु कया मेरि बिबि को चोद रहा है। अरे मेरि बिबि तो पुरनि हो गयी है उसकि चूत मैं पिचले दो सल से रत दिन चोद रहा हुन। सुमन कि चूत तो अब कफ़ी फैल चुक्का है। अबे तु देख मैं तेरे समने तेरि नयी बवही बिबि को कुतिअ कि तरह झुका कर उसकि तिघत चूत मे अपना लुनद दल कर चोद रहा हुन। अब बोल किसे जयदा मज़ा मिल रहा है। सफ़ी मे यर रमेश, तेरि बिबि कि चूत बहुत हि तिघत है मगर तेरि बिबि बहुत चुद्दकर है, देख देख कैसे तेरि बिबि कि चूत मेरा लुनद पकर रकह है।” फिर गौतम उशा कि चुनची को मसलते हुए उशा से बोला, “ओह! ओह! मेझे उशा कि चूत चोदने मे बहुत मज़ा मिल रहा है। अह! उशा रनि और जोर से अपनि गनद हिला कर मेरे लुनद अपर धक्का मर। मैं पीचे से तेरि चूत पर धक्का मर रहा हुन। उशा रनि बोल, बोल कैसा लग रहा मेरे लुनद से अपनि चूत चुदवना। बोल मज़ा मिल रहा कि नही?” तब उशा अपनि गनद को जोर जोर से हिला कर गौतम का लुनद अपनि चूत को खिलते हुए गौतम से बोलि, “चोदो मेरे रजा और जोर से चोदो। मुझे तुमहरि चुदै से बहुत मज़ा मिल रहा है। तुमहरा लुनद मेरे चूत कि अखरी चोर तक घुस रहा है। ऐसा लग रहा कि तुमहरा लुनद का धक्का मेरि चूत से होकर मेरि मुनह से निकल परेगा। और जोर से चोदो, और सुअमन और रमेश को दिखा दो चूत कि चुदै कैसे कि जती है।”

गौतम और उशा कि चुदै देखते हुए सुमन ने उशा से बोलि, “कयोन चिनर उशा, गौतम का लुनद पसनद अया कि नही? मैं ना बोल रही थी कि गौतम का लुनद बहुत हि शनदर है और गौतम बहुत अस्सह्हि तरह से चोदता है? अब जी भर लर चुदवा ले अपनि चूत गौतम के लुनद से। मैं भि अपनि चूत रमेश से चुदवा रही हुन।” रमेश जोरदर धक्कोन के सथ सुमन को चिदते हुए बोला, “यर गौतम, एह दोनो औरत बरि चुदसि है, चल आज दिन भर इनकि चूत चोद चोद कर इनकि चूतोन को भोसरा बनता हुन। तभि इनकि चूतोन कि खुजी मितेगी।” इतना कह कर रमेश सुमन कि चूत पर पिल परा दना दन चोदने लगा। गुअतम भि पीचे नही था, वो अपना हथोन से उशा कि दोनो चुनची पकर कर अपनि कमर के झतकोन से उशा कि चूत चोदना चलु रखा। थोरि दे रैसे हि चुदै चलती रही और दोनो जोरे अपने अपने सथिओन के जम कर चुदै चलु रखि और थोरि देर के बद दोनो जोरे जोरे हि झर गये। जैसे हि रमेश और गौतम सुमन और उशा कि चूत के अनदर झरने के बद अपना अपना लुनद बहर निकला तो दोनो का लुनद सफ़ेद सफ़े पनि से सना हुअ थाउर उधर सुमन और उशा कि चूतोन से भि सफ़ेद सफ़ेद गरहा पनि निकल रहा था। झत से सुमन और उशा उथ कर अपने अपने पतिओन का लुनद अपने मुनह मे भर कर चुस चुस कर सफ़ किया और फिर एक दुसरे कि चूत मे मुनह लगा कर अपने अपने पतिओन का बीरज़ चत चत कर सफ़ किया। थोरि देर के बद रमेश और गौतम का सनस नोरमल हुअ और उथ कर एक दुसरे के लगले लग गये और बोले। “यरे क दुसरे कि बिबिओन को चोदने का मज़ा हि कुच अलग है। अब जब तक हुमलोग एक सथ है बिबिओन को अदल बदल करके हे चोदेनगे।”

थोरि देर के बद सुमन और उशा अपनि कुरसि से उथ कर खरि हो गयी और तौलिअ से अपनि चूत और जनघे पोनच कर ननगी हि कितचेन कि तरफ़ चल परि। उनको ननगी जते देख कर रमेश और गौतम का लुनद खरा होना शुरु कर दिया। थोरि देर के बद सुमन और उशा ननगी हि कितचेन से चै और नशता ले कर कमरे अये और जुरसि पर बैथ गयी। रमेश और गौतम भि ननगे हि कुरसी पर बैथ गये। थोरि दे के बद सुमन झुक कर पयली मे चै पलतने लगी। सुमन के झुकने से उसकि चुनची दोनो हवा ने झुलने लगे। एह देख कर रमेश ने अगे बरह कर सुमन कि चुनचेओन को पकर लिया और उनहे दबने लगा। एह देख कर उशा अपनि कुरसी से उथ खरी हो गयी और गौतम के ननगे गोद पर जा कर बैथ गयी। जैसे हि उशा गोद मबैथी गुअतम ने पने हथोन से उशा को जकर लिया और उसकि चुनची को दबने लगा। उशा झुक कर गौतम के लुनद को पकर कर सहलने लगे और थोरि देर के गौतम के लुनद को अपने मुनह मे भर लिया। एह देख कर सुमन चै बनना चोर कर रमेश के पैरोन के पस बैथ गयी उसने भि रमेश का लुनद अपने मुनह मे भर लिया। होरि देर के रमेश अपने हथोन से सुमन को खरा किया और उसको तबले के सहरे झुका कर सुमन कि चूत मे पीचे से जकर अपना लुनद घुसेर दिया। सुमन एक हलकि से सिसकरि भर कर अपने चुतर हिला हिला अपनि चूत मे रमेश का लुनद पिलवती रही और वो खुद उशा और गौतम को देखने लगी। रमेश और सुमन को फिर से चुदै शुरु करते देलह गुतम भि अपने आप को रोक नही पया उर उसने उशा को अपनि गोद से उथा कर फिर से उसके दोनो पैर अपने दोनो तरफ़ करके बैथा लिया। इस तरिके से उशा कि चूत थीक गौतम के लुनद के समने था। उशा ने अपने हथोन से गौतम के लुनद को पकर कर अपनि चूत से भिरा कर गौतम के गोद पर झतके सथ बैथ गयी और गौतम का लुनद उशा कि चूत के अनदर चला गया। उशा अब गौतम के गोद पर बैथ कर अपनि चुतर उथा उथा कर गौतम के लुनद का धक्का अपनि चूत पर लेने लगी। कमरे सिरफ़ फस्सह, फस्सह का अवज गुनज रहा था और उसके सथ सथ सुमन और उशा कि सिसकिअन।

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09-21-2010, 10:42 PM
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RE: उशा की कहानी
रमेश थोरि देर तक सुमन कि चूत पीचे से लुनद दल कर चोदता रहा। थोरि देर के बद उसने अपनि एक उनगली मे थूक लग कर सुमन कि गनद मे उनगली करने लगा। अपनि गनद मे रमेश कि उनगली घुसते हि सुमन ओह! ओह! है! कर उथि। उसने रमेश से बोलि, “कया बत है, अब मेरि गनद पर भि तुमहरा नज़र पर गया है। अरे पहले मेरि चूत कि आग को शनत करो फिर मेरि गनद कि तरफ़ देखना।” लेकिन रमेश अपनि उनगली सुमन कि गनद के चेद पर रख कर धिरे धिरे घुमने लगा। थोरि देर के रमेश ने अपनि उनगली सुमन कि गनद मे घुसेर दिया और दजिरे धिर अनदर बहर करने लगा। सुमन भि अपना हथ नीचे ले जकर अपनि चूत कि घुनदी को सहलने लगी। जब अपनि थूक और उनगली से रमेश ने सुमन कि गनद कि चेद कफ़ि धिली कर ली तब रमेह ने अपने लुनद पर थूक लगकर सुमन कि गनद कि चेद पर रखा। अपनि गनद मे रमेह का लुनद चुते हि सुमन बोल परि, “अरे अरे कया कर रहे हो। मुझे अपनि गनद नही चुदवना है। मुझे मलुम है कि गनद मरवने से बहुत तकलीफ़ होति है। हतो, रमेश हतो अपना लुनद मेरि गनद से हता लो।” लेकिन तब तक रमेश ने अपना खरा हुअ लुनद सुमन कि गनद कि चेद पर रख कर दबने लगा था और थोरि से देर के बद रमेश का लुनद का सुपरा सुमन कि गनद कि चेद मे घुस गया। सुमन चिल्ला परि, “अर्रर्रीईए माआर्रर्र दलाआआ, ओह! ओह! रमेस्सस्सह्हह निकल्लल्लल्ल लूऊ अपनाआ म्मूस्सस्साअर्रर ज्जजाआईस्सस्साअ लुनद्दद्दद म्ममीर्ररीई गाआनद्दद सीई। मैईई मर्रर्र जौनगीईए।” लेकिन रमेश कहना सुमने वला था। वहो अपना कमर करा कर के और अपना लुनद को हथ से पकर के एक धक्का मरा तो उसका अधा लुनद सुमन कि गनद मे घुस गया। सुमन चतपतने लगी।

थोरि देर के बद रमेश थोरा रुक कर एक धक्का और मरा तो उसका पुरा का पुरा लुनद सुमन कि गनद मे घुस गया और वो झुक कर एक हथ से सुमन कि चुनची सहलने लगा और दुसरी हथ से सुमन कि चूत मे उनगली करने लगा। लेकिन सुमन मरे दरद के चतपता रही थी और बोल रही थे, “अबे सले भरुए गौतम, देखो तुमहरे समने तुमहरि बिबि कि गनद कैसे तुमहरा दोसत जबरदसती से मर रहा है। तुम कुच करते कयोन नही। अब मेरि गनद आज फत जयेगी। लग रहा है आज इस चोदु रमेश मेरि गनद मर मर कर मेरि गनद और बुर एक कर देगा। गिअतम पलेअसे तुम रमेश से मुझे बचओ।” तब रमेश अपने उनगलेओन से सुमन कि चूत मे उनगली करते हुए सुमन से बोला, “अरे सुमन रनि, बस थोरि देर तक सबर करो, फिर देखना आज गनद मरवने ने तुमहे कितनि मज़ा मिलता है। आज मैं तुमहरी गनद मर कर तुमहरी चूत कि पनि निकलुनगा। बस तुम ऐसे हि झुक कर खरि रहो।” रमेश कि बत सुन कर गौतन अपना लुनद से उशा कि चूत चोदता हुअ सुमन से बोला, “रनि, आज तुम रमेश का मोता लुनद अपनि गनद दलवा कर खूब मज़े उरओ, मैं भि अभि अपना लुनद रमेश कि नये बिवि कि गनद मे घुसेरता हुन अनद उशा कि गनद मरता हुन। मैं शा कि गनद मर कर तुमहरि गनद मरने का बदला निकलता हुन।” उशा जैसे हि गौतम कि बत सुनि तो बोल परि, “अरे वह कया हिसब है, रमेश आज मौका पा कर सुमन कि गनद मर रहा है और उसकि किमत मुझे अपनि गनद मरवा कर चुकनि परेगी। नहि मैं तो अपनि गनद मे लुनद नहि पिलवती। गौतम तुम मेरि गनद के बजय रमेश कि गनद मर कर अपना बदला निकलो।” गौतम तब उशा से बोला, “नहे मेरि चुद्दकर रनि, जिस तरह से रमेश ने मेरि बिवि कि गनद मे अपना लुनद घुसेर कर मेरि बिवि कि गनद मर रहा है, मैं भि उसि तरह से रमेश कि बिवि कि गनद मे अपना लुनद घुसेर कर रमेश कि बिवि कि गनद मरुनगा और तभि मेरा बदला पुरा होगा।” इतना कह कर गौतम ने अपना लुनद उशा कि चूत से निकल लिया और उसमे फिर से थोरा रहुक लगा कर उशा कि गनद से भिरा दिया। उशा अपनि कमर इधर उधर घुमने लगी लेकिन गौतम ने अपने हथोन से उशा का कमर पकर कर अपना लुनद का अधा सुपरा उशा कि गनद कि चेद मे दल दिया। उशा दरद के मरे चतपतने लगी।

उशा अपनि गनद से गौतम का लुनद को निकलने कि कोशिश कर रही थी और गुतम अपने लुनद को उशा कि गनद मे घुसरने कि कोशिस कर रहा था। इसि दौरन गौतम ने एकबर उशा कि कमर को कस कर पकर लिया और अपना कमर करके एक धक्का मरा तो उसका लौरे का सुपरा उशा कि गनद कि चेद मे घुस गया। फिर गौतम ने जलदी से एक और जोरदर धक्का मरा तो उसका पुरा का पुरा लुनद उशा कि गनद मे घुस गया और गौतम कि झनते उशा कि चुतर को चुने लगा। अपनि गनद ने गौतम का लुनद को घुसते हि उशा एक जोर से चिखी और चिल्ला कर बोलि, “सले बहनचोद, दुसरे कि बिवि कि गनद मुफ़त मे मिल गया तो कया उसको फरना जरूरि है? भोसरि के निअकल अपना मुसर जैसा लुनद मेरि गनद से और जा अपना लुनद अपनि मा कि गनद मे या उसकि बुर मे दल। अरे रमेश तुमहे दिख नही रहा है, तुमहरा दोसत मेरि गनद फर रहा है? अरे कुच करो भि, रोको गौतम को, नही तो गौतम मेरि गनद मर मर कर मुझे गनदु बना देगा फिर तुम भि मेरि चूत चोर कर के मेरि गनद हि मरना।” रमेश अपना लुनद सुमन कि गनद के अनदर बहर करते उशा से बोला, “अरे रनि, कयोन चिल्ला रही हो। गौतम तुमहे अभि चोर देगा और एक-दो गनद मरवने से कोइ गनदु नहि बन जता है। देखो ना मैं भि कैसे गौतम कि बिवि कि गनद ने अपना लुनद अनदर बहर कर रहा हुन। तुमको अभि थोरि देर के बद गनद मरवने मे भि बहुत मज़ा मिलेगा। बस चुपचप अपनि गनद मे गौतम का लुनद पिलवति जओ और मज़ा लुतो। इतना सुनते हि गौतम ने अपना हथ आगे बरहा कर उशा कि एक चुनची पकर कर मसलने लगा और अपना कमर हिला हिला कर अपना लुनद उशा कि गनद के अनदर बहर करने लगा। थोरि देर के उशा को भि मज़ा अने लगा और वो अपनि कमर चला चला कर गौतम का लुनद अपनि गनद से खने लगी। थोरि देर के बद रमेश और गौतम दोनो हि सुमन और उशा कि गनद मे अपना लुनद के पिचकरी से भर दिया और सुसत हो कर सोफ़ा मे लेत गये।

इसतरह से रमेश और उशा जब तक गौतम और सुमन के घर पर रुके रहे तब तक दोनो दोसत एक दुसरे कि बिविओन कि चूत चोद चोद कर मज़ा मरते रहे। कभि कभि तो दोनो दोसत उशा या सुमन को एक सथ चोदते थे। एक बिसतेर पर लेत कर नीचे से अपना लुनद चूत मे दलता था और दुसरा अपना लुनद ओपेर से गनद मे दलता था। उशा और सुमन भि हर समय अपनि चूत या गनद मरवने के लिये तयर रहती थी। जब सब लोग घर के अनदर रहते थे तो सभि ननगे हि रहते थे। उशा और सुमन भि ननगी हो कर हि चै या खना बनती थी और जब भि रमेश या गौतम उनके पस अता था तो वो झुक कर उनका लुनद अपने मुनह मे भर कर चुसती थी और जैसे हि लुनद खरा हो जता था तो खुद अपने हथोन से खरे लुनद को अपनि चूत से भिरा कर खुद धक्का मर कर अपनि चूत मे भर लेती थे। एक हफ़ता तक उशा और रमेश अपने दोसत के घर बने रहे और फिर वपस अपने घर के लिये चल परे।

जब पलनर मे रमेश और उशा अपने घर के लिये जा रहे थे तो रमेश ने उशा से पुचा, कयोन उशा रनि, एक बत सहि सहि बतओ, कयोन जयदा अछा चोदता है, मैं, गुअतम या पितजी?” रमेश का बत सुन कर उशा बिलकूल अचमभित हो गये, फिर उसने धिरे से पुची, “पितजी से चुदै कि बत तुमको कैसे मलुम? तुम तो अपनि सुहगरत पर दुती पर थे?” तब रमेश धिरे से उशा को चुमते हुए बोला, “हन, तुम थीक कह रही हो, मिझे उस दिन दुती पर जना परा। जब हुम अपनि दुती से करीब एक घनते के बद लौता तो देखा तुम पितजी का लुनद पकर चूस रहि हो और पितजी तुमहरी चूत मे अपनि उनगली पेल रहेन है। एह देख मैं चुप चप कमरे के बहर खरा हो कर तुमहे और पितजी का चुदै खतम होते वकत तक देखा और फिर लौत गया और सुबह हि घर पर अया।” “कया तुम मुझसे नरज़ हो” उशा धिरे से रमेश से पुची। “नही, मैं तुम से बिलकुल भि नरज़ नही हुन। तुमने पितजी को अपनि चूत दे कर एक बहुत बरा उपकर किया है” रमेश बोला। उशा एह सुन कर बोलि, “वो कैसे”। तब रमेश बोला, “अरे हुमरि मतजी अब बुधि हो गयी हैन और उनको तनग उथने मे तकलीफ़ होते है, लेकिन पितजी अभि भि जवन हैन। उनको अगर घर पर चूत नही मिलता तो वो जरूर से बहर जकर अपना मुनह मरते। उसमे हुम लोगो कि बदनमी होती। हो सकता कि पितजी को कोइ बिमरी हो जती। लेकिन अब एह सब नही होगा कयोनकी उनको घर पर हि तुमहरी चूत चोदने को मिल जया करेगा।” “तो कया मुझको पितजी से घर मे बरबर चुदवना परेगा?” उशा पलत कर रमेश से पुची। “नही बरबर नही, लेकिन जब उनकि मरज़ी हो तुम उनको अपनि चूत देने से मना मत करना।” “लेकिन अगर तुमहरी मतजी ने देख लिया तो?” उशा ने पुचि। “तब कि बत तब देखि जयेगी” रमेश ने कह।

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09-21-2010, 10:42 PM
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RE: उशा की कहानी
फिर उशा और रमेश अपने घर आ गये और उनहोने अपने अपने कम पर लग गये। रमेश अब पुरि तरह से दुती करता और रत तो उशा को ननगी करके खूब चोदता था। गोविनदजी भि कभि कभि उशा को मौका देख चोद लेते थे। फिर कुच दिनो के बद उशा और रमेश सथ सथ उशा के मैके पर गये। ससुरल मे रमेश का बहुत अब-भगत हुअ। उशा के जितनेय रिशतेदर थे उन सभि ने रमेश और उशा को खने पर बुलया। रमेश और उशा को मज़े हि मज़े थे। अपने ससुरल पर भि रमेश उशा को रत को दो-तीन दफ़ा जरूर चोदता था और कभि मौका मिल गया तो दिन को उशा को बिसतर पर लेता कर चुदै चलु कर देता था। एक दिन रमेश पस के किसि दुकन परा गया हुअ था। उशा कमरे मे बैथ कर पपेर परह रही थी। एकैक उशा को अपनि मा, रजनि जी जी, कि रोने कि अवज़ सुनै दिया। उशा भग कर अनदर गयि तो देखा कि रजनि जी भगवनजी के फोतो समने खरि खरि रो रही है और भगवनजी से बोल रही है, “भगवन तुमने ये कया किया। तुम मेरे पति इतनी जलदी कयोन उथा लियी और अगर उनको उथा लिये तो मेरी बदन मे इतना गरमी कयोन भर दिया। अब मैं जब जब अपनि लरकि और दमद कि चुदै देखता हुन तो मेरि शरेर मे आग लग जती है। अब कया करून? कोइ रशता तुमही दिखला दो, मैं अपनि गरम शरेर से बहुत परेशन हो गया हून।” उशा समझ गयी कि कया बत है। वो झत अपनि मा के पस जकर मा को अपने बहोन मे भर लिया और पीचे से चुमते हुए बोलि, “मा तुमको इतना दुख है तो मुझसे कयोन नही बोलि?” रजनि जी अपने आपको उशा से चुरते हुए बोलि, “मैं अगर तुझसे बता तो तु कया कर लेति? तुब हि तो मेरि तरह से एक औरत हि है?” “अरे मुझसे से कुच नही होता तो कया तुमहरा दमद तो है? तुमहरा दमद हि तुमको शनत करत” उशा अपनि मा को फिर से पकर कर छुमते हुए बोलि। “कया बोलि तु, अपने दमद से मैं अपनि जिसम कि भुख शनत करवौनगी? तेरा दिमग तो थिक है?” रजनि जी ने अपनि बेति उशा से बोलि। तब उशा अपने हथोन से अपनि मा कि चुनचेओन को पकर कर दबते हुए बोलि, “इसमे कया हुअ? तुम जिसम कि भुख से मरि जा रहि हो, और तुमहरा दमद तुमहरि जिसम कि भुक को मिता सकता है, अगर तुमहरे जगह मैं होति तो मैं अपने दमद के समने खुद लेत जति और उस्से कहती आओ मेरे पयरे दमदजी मेरे पस आओ और मेरि जिसम कि बुझओ।” “चल हत बरि चुद्दकर बन रहि है, मुझे तो एह सोच कर हि शरम आ रही है, कि मैं अपनि दमद के समने ननगी लेत कर अपनि तनग उथौनगी और वो मेरि चूत मे अपना लुनद पेलेग” रजनि जी मुर कर अपनि बेति कि चुनचेओन को मसलते हे बोलि।

तभि रमेश, जो कि बहर गया हुअ था, कमरे मे घुसा और घुसते घुसते हुए उसने अपनि बिवि और सस कि बतोन को सुन लिया। रमेश ने अगे बरह कर अपने सस के समने घुतने के बलबैथ गया और अपनि सस के चुतरोन को अपने हथोन से घेर कर पकरते हुए सस से बोला, “मा आप कयोन चिनता कर रही हैन, मैं हुन ना? मेरे रहते हुए अपको अपनि जिसम कि भुख कि चिनता नही करनी चहिए। अरे वो दमद हि बेकर का है जिसके होते हुए उसकि सस अपनि जिसम कि भुख से पगल हो जये।” “नही, नही, चोरो मुझे। मुझे बहुत शरम लग रही है” रजनि जी ने अपने आप को रमेश से चुरते हुए बोलि। तभि उशा ने आगे बरह कर अपनि मा कि चुनची को पकर कर मसलते हुए उशा अपनि मा से बोलि, “कयोन बेकर का शरम कर रहि हो मा। मन भि जओ अपने दमद कि बत और चुप चप जो होरहा उसे होने दो।” तब थोरि देर चुप रहने के बद रजनि जी अपनि बेति कि तरफ़ देख कर बोलि, “तीख है, जैसे तुम लोगो कि मरज़ी। लेकिन एक बत तुम दोनो कन होल कर सुन लो। मैं अपने दमद के समने बिलकुल ननगी नही हो पौनगी। आगे जैसा तुम लोग चहो।” इतना सुन कर रमेश मुसकुरा कर अपने सस से कह, “अरे ससुमा आप को कुच नही करमा है। जो कुच करमा मैं हि करुनगा, बस आप हुमरा सथ देति जये।”

फिर रमेश उथ कर खरा हो गया और अपनि सस को अपने दोनो बहोन मे जकर कर चुमने लगा। रजनि जी चुप चप अपने आप को अपने दमद के बहोन मे चोर कर खरी रही। थोरि देर तक अपने सस को चुमने के बद रमेश ने अपने हथोन से अपने सस कि चुनची पकर कर दबने लगा। अपने चुनचेओन पर दमद का हथ परते हि रजनि जी अमरि सुच के बिलबिला उथि और बोलने लगी, “और जोर से दबओ मेरि चुनसेओन को बहुत दिन हो गये किसि ने इस पर हथ नही लगया है। मुज़हे अपने दमद से चुनची मसलवने मे बहुत मज़ा मिल रहा है। और दबओ। आ बेति तुब हि आ मेरे पस और मेरे इन चुनचेओन से खेल।” अब रमेश फिर से अपने सस के पैरोन के पस बैथ गया और उनकि सरी के ऊपेर से हि उनकि चूत को चुमने लगा। रजनि जी अपने चूत के ओपेर अपने दमद के मुनह लगते हि बिलबिला उथि और जोर जोर से सनस लेने लगी। रमेश भि उनकि सरी के ओपेर से हि उनकि चूत को चुमता रहा। थोरि देर के बद रजनि जी से सहा नही गया और खुद हि अपने दमद से बोलि, “अरे अब कितना तरपओगे। तुमहे चूत मे उनगली या जीबन घुसनि है तो थीक तरिके से घुसओ। सरी के ओपेर से कया कर रहे हो?” अपनि सस कि बत सुन कर रमेश बोला, “मैं कया करता, आपने हि कह था आप सरी नही उतरनगे। इसिलिये मैं अपकि सरी के ओपेर से हि अपकि चूत चुम रहा हून।” “वो तो थीक है, लेकिन तुम मेरि सरी उथा कर तो मेरि चूत कि चुम्मा ले सकते हो?” रजनि जी ने अपने दमद से बोलि। अपनि सस कि बत सुनते हि रमेश जलदि से अपनि सस कि सरी को पैरोन के पस से पकर कर ओपेर उथना शुरु कर दिया और जैसे हि सरी रजनि जी कि जनघो तक उथ गया तो रजनि जी मरे शरम के अपना चेहेरा अपने हथोन से दख लिया और अपने दमद से बोलि, “अब बस भि करो, और कितना सरी उथओगे। अब मुझे शरम आ रही है। अब तुम अपना सर उनदर दल कर मेरि चूत को चुम लो।” लेकिन रमेश अपनि सस कि बत को उनसुनि करते हुए रजनि जी कि सरी को उनके कमर तक उथा दिया और उनकि ननगी चूत पर अपना मुनह लगा कर चूत को चुम लिया। थोरि देर तक रजनि जी कि ननगी चूत को चुम कर रमेश अपनि सस कि चूत को गौर से देखने लगा और अपने उनगलेओन से उनकि चूत कि पत्तिओन और सलित से खेलने लगा। रमेश कि हरकतोन से रजनि जी गरमा गयी और उनकि सनस जोर जोर से अने लगि।

अपनि मा कि हलत देख कर उशा अगे बरह कर अपनि मा कि चुनसेओन से खेलने लगी और धिरे धिरे उनकि बलौसे के बुत्तोन खोलने लगी। रजन ने अपने हथोन से अपने बलौसे को पकरते हुए अपने बेति से पुचने लगी, “कया कर रही हो? मुझे बहुत शरम लग रही है। चोर दे बेति मुझको।“ उशा अपनि कम जरी रखते हुए अपनि मा से बोलि, “अरे मा, जब तुम अपने दमद का मुसत अपने चूत मे पिलवने जा रही हो तो फिर अब शरम कैसा? खोल दे अपने इन कपरोन को और पुरि तरफ़ से ननगी हो कर मेरे पति के लुनद का सुच अपने चूत से लो। चोरो मुझको तुमहरि कपरे खोलने दो।” इतना कह कर उशा ने अपनि कि बलौसे, बरा, सरी और फिर उनकि पेत्तिसोअत भि उतर दिया। अब रजनि जी अपने दमद के समने बिलकुल ननगी खरी थी। रमेश अपने ननगी सस को देखते हि उन पर तुत परा और एक हथ से उनकि चिनचेओन को मलता रहा और दुसरे हथ से उनकि चूत को मसलता रहा। रजनि जी भि गरम हो कर अपने दमद का कुरता और पैज़मा उतर दिया। फिर झुक कर अपने दमद का उनदेरवेअर भि उतर दिया। अबस अस और दमद दोनो एक दुसरे के समने ननगे खरे थे।

जिअसे हि रजनि जी ने रमेश का मोता मसत लुनद को देखी, रजनि जी अपने आप को रोक नही पैए और झुक कर उस मसत लुनद अपने मुनह मे भर कर चुसने लगि। उशा भि चुपचप खरि नही थी। वो अपनि मा के चुतर के तरफ़ बैथ कर उसकि चूत से अपना मुनह लगा दिया और अपनि मा कि चूत को चुसने लगि। रजनि जी अपने दमद का मोता लुनद अपने मुनह मे भर कर चुसने लगी और कभि कभि उसको अपने जीव से चतने लगी। लुनद को चत्ते चत्ते हुए रजनि जी ने अपने दमद से बोलि, “है! रमेश, तुमहरा लुनद तो बहुत मोता और लुमबा है। पता नही उशा पहली बर कैसे इसको अपनि चूत मे लिया होगा। चूत तो बिलकुल फत गयी होगी? मेअर तो मुनह दरद होने लगा इतना मोता लुनद चुसते चुसते। वैसे मुझे पता था कि तुमहरा लुनद इतना शनदर है” “कैसे?” रमेश ने अपने सस कि चुनचेओन को दबते हुए पुचा। तब रजनि जी बोलि, “कैसे कया? तुम जब मेरे घर मे अपने शदि के बद अये थे और रोज दोपहर और रत को उशा को ननगी करके चोदते थे तो मैं खिरकी से झनका करता था और तुमहरी चुदै देखा करता था। उनि दिनो से मैं जनता था कि तुमहरा लुनद कि सिज़े कया है और तुम कैसे चूत चते हो और चोदते हो।” तब रमेश ने अपने सस कि चुनचेओन को मसलते हुए पुचा, “कया माजी, अपके पति यने मेरे ससुरजी का लुनद इतना मोता और लुमबा नही था?” “नही, उशा के पपा का लुनद इतना मोता और लुमबा नही था, और उनमे सेक्स कि भवना बहुत हि कम था। इसलिया वो मुझको हफ़ते मे केबल एक-दो बर हि चोदते थे” रजनि जी ने बोलि।

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09-21-2010, 10:43 PM
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RE: उशा की कहानी
थोरि देर के रमेश अपनि सस को बिसतर पर लिता कर उसकि चूत से अपना मुनह लगा दिया और अपने जीव से उसकि चूत को चतना शुरु कर दिया। चूत मे जैसे हि रमेश का जीव घुसा तो रजनि जी अपनि कमर उचकते हुए बोलि, “उम्मम्म, अह्हह, ऊइ मा, रजा अभि चोरो ना कयु तदपते हो, मैं जाल रहि हुन, तुमहरा लुनद मुझे चुसना है। तुमहरा लुनद तो घोदे जैसे है, मुझे दर लाग रहा है जब तुम अनदेर मेरे चूत मैं दलोगे तो चूत फात जयीगि, मेरि चूत का बहूत चोता है और जयदा चुदि भि नही है। आज तुम पहली बर मेरि चूत मे अपन लुनद दलने जा रहे हो। अरम अरम से दलना और बरे पयर से मेरि चूत को चोदन”

तब रमेश ने अपना लुनद अपनि सस कि चूत के बरबर लगते हुए बोला, “कोइ बत नहि मजी, अपकि चूत को जो भि कमि पहले थी अब उसको मैं पुरा करुनगा। मैं अब रोज़ अपकि और अपकि बेति को एक हि बिसतर पर लिता कर अपनलोगोन कि चूत चोदुनगा।” एह सुनते हि उशा अपने मुम्मी से बोलि, “मा अब तो तुम खुश हो? अब से रोज़ तुमहरा दमद तुमको और मुझको ननगी करके हुमरि चूत चोदेगा। हन अगर तुम चहो तो तुम अपनि गनद मे भि अपने दमद का लुनद पिलवा सकती हो।” इतना कह कर उशा ने रमेश से बोलि, “मेरे पयरे पति, अब कयोन देर कर रहे हो। जलदी से अपना एह खरा लुनद मेरि मा कि चूत मे पेल दो और उनको तबियत के सथ खूब चोदो। देख नही रहे हो कि मेरि मा तुमहरा लुनद अपनि चूत मे पिलवने के कितनि बेकरर है। लओ मैं हि तुमहरा लुनद पकर कर पनि मा कि चूत मे दल देति हुन,” और उशा ने अपने हथोन से पकर कर रमेश का लुनद उसके सस कि चूत पर लगा दिया। रमेश का लुनद को चूत से लगते हि रजनि जी ने ने अपनि कमर हिलना शुरु कर दिया और रमेश नेब हि अपना कमर हिला कर अपना लुनद अपने सस कि चूत मे दल दिया। रजनि जी कि चूत अपने पति के देहनत के बद से चुदि नही थी और इसलिये बहुत तिघत थी और उसमे अपना लुनद दलने मे रमेश को बहुत मज़ा मिल रहा था। रजनि जी भि अपने दमद का लुनद अपनि चूत मे पेलवा कर सतवेन असमन पर पहुनच गयी थी और वो बरबरा रही थी, “आआअह ऊऊऊह आराम सय दालो यार, मेरि चूत ज़यादा खुलि नहिन है। पलीईएज़ पूरा लुनद मत दलो नहि तो मेरि चुत पथ जयेगि, उहि मा मार गै, ओह, आह, हन, मेरि चूत फर दो, हन, ज़ोर सय, और ज़ोर से, रजा है मथेरचोद रमेश आज मेरि चूत फार दो आआअह आआआह ऊऊऊह ज़ोर सय दलो, और ज़ोर सय दलो, आज जितना ज़यादा मेरि चूत कय साथ खेल सकतय हो खेलो, रजा येह लुनद पूरा मुझय दय दो, मैन इस कय बिना नहिन रेह सकति, पूरा लुन दलो, उम्मम्मम आआह आआआह” “उम्मम्मम आआआआह फ़ुसक मे गूद, उम्मम्मम्म अह अह अह ओह्ह ओह नो। मैं चूत कि खज से मरि जा रही हुन, मुझे जोर जोर से धक्के मर मर कर चोदो।” थोरि देर के बद रजनि जी ने अपने दमद को अपने चरोन हथ और पैर से बनध कर बोलि, “आआअह आआआआआह उम्मम्मम्म, चोदो मुझय ज़ोर सय उम्मम्मम्मम्म, उफ़ मथेरचोद बोहुत मज़ा आ रहा है, पलेअसे रुकना नही, ओह मुझे रगर कर चोदो, ज़ोर सय चोदो, अपना लुनद पूरा मुझ को दे दो, तुम जैसय कहोगे मैन वैसय करूनगि लयकिन मुझय और चोदो, तुम बहुत अस्सह्हा चोदते हो, मुजही आज बोहुत ज़यादा चोदो भेनचोद तुमहरा लुनद तो तुमहरे ससुर से भि बरा है, चोदो मुझय नहिन तो मैन मर जावँगि, अभि तो तुम नय मेरि गानद भि मरनि है।”

थोरि देर तक रजनि जी कि चूत चोदने के बद रमेश ने अपनि सस से पुचा, “मा जी केरि चिदौ आप को कैसि लग रही है?” रजनि अपने दमद कि लुनद के धक्के अपने चूत से खति हुइ बोलि, “मेरे पयरे दमद जी बहुत अस्सह्हा लग रहा है। मुझे तुमहरि चुदै बहुत अस्सह्ही लग रही है। तुम चूत चोदने मे बहुत हि महिर हो। बदाअ मजा आ रहा है मुझे तुमसे चोदवने मेन देअर ऊओह्हह्हह देअर तुम बहुत अच्चहा चोदते हो आआह्हह्हह्ह ऊऊऊह्हह्हह्हह्हह्ह ऊऊओफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ द्दीआर्रर यौ अरे अन एक्सपेरत। तुमहे मलुम है कि कैसे किसि औरत कि चूत कि चुदै की जति है और तुमहे एह भि मलुम है कि एक औरत को कैसे कैसे सुख दिया जा सकता है। ययून्न ही हान द्दीआर्र यून्न ही चोदो मुझे…बस्स चोदते जाओ मुझे आब्ब कुछ नहिन पुछो आअज जी भार के चोदो मुझे देअर हान देअर जम्म कार चोदै करो मेरि तुम बाहुत अच्चहे हो बास्स ययून हि चोदै करो मेरि…ऊऊह्हह्हह्हह…।। खूब चोदो मुझे…" और रमेश अपनि सस को अपनि पुरि तकत के सथ चोदता रहा।

रमेश अपनि सस कि बत सुन सुन कर बहुत उत्तेजित हो गया और जोर जोर से अपने सस कि चूत मे अपना लुनद पेलने लगा। थोरि देर के बद रमेश को लगा कि अब वो झने वला है तो उसने अपनि सस से बोलि, “ससुमा मैं जादने जर अहा हुन।” तो रजनि जी बोलि, “रजा, पलेअसे मेरि चूत के अनदर हि झरो” और रमेश अपना लुनद पुरा पुरा का अपनि सस कि चूत मे थनस कर लुनद कि पिचकरी चोर दिया। थोरि देर के रजनि जी बिसतर पर उथ खरि हुए और सीधे बथरूम मे जा कर घुस गयी। थोरि देर के बद अपनि चूत धो धा कर रजनि जी फिर से कमरे घुसि और मुसकुरा कर अपने दमद से बोलि, “है! मेरे रजा आज तो तुमने कमल हि कर दिया। तुमतो सिरफ़ एक झरे लेकिन मैं तुमहरी चुदै से तीन बर झरी हुन। इतना जोरदर चुदै मैने कभी नही की। मेरि चूत तो अब दुख रहा है।” तभि उशा, जो कि अपने पति और अपने मा कि चुदै देख रही थी, बोलि, “मा अपने दमद का लुनद अपनि चूत मे पिलवा कर मज़ा अया? मेरि शदे कि पहलि रत तो मैं बिलकुल मर सि गयी थी और अब इस लुनद से बिना चुदवा कर मेरि तो रूत को नीद हि नही आती। मैं रोज़ कम से कम एक बर इस मोता तगरा लुनद से अपनि चूत जरूर चुदवती हुन या अपनि गनद मरवति हून।” तभि रमेश ने अपने सस को अपने बहोन मे भर कर बोला, “माजी, एक बर और हो जये अपकि चूत कि चुदै। मैं जब तब कम से कम दो या तीन बर नही चोद लेता मेरा मन्नही भरता।” रजनि जी बोलि, “अरे थोरा रुको, मेरि चूत तुमहरी चुदै से तो अब तक कल्ला रही है। अब तुम एक बर उशा कि चूत चोद दलो।” “नही माजी, मैं तो इस वकत अपकि चूत या गनद मे अपना पेलना चहता हुन। आपकि लरकी कि चूत तो मैं रोज़ रत को चोदता हुन, मुझे तो इस समय आपकि चूत या गनद चोदने कि इस्सह्हा है।” तब उशा अपने मा से बोलि, “मा चुदवा ना लो और एक बर। अगर चूत बहित कल्ला रही है तो अपने गनद मे ले लो अपने दमद का लुनद। कसम से बहुत मज़ा मिलेगा।” तब रजनि जी बोलि, “तीख है, जब तुम दोनो कि एही इस्सह्हा है, तो सहलो मैं एक बर फिर से चुदवा लेति हुन। लेकिन इस बर मैं गनद मे रमेश का लुनद लेना चहती हुन। और दो मिनुत रुक जओ, मिझे बहुत पयस लगी है मैं अभि पनि पी कर आती हुन।” तब उशा अपने मा से बोलि, “अरे मा रमेश का लुनद बहुत देर से खरा है औरा ब पनि पीने जा रही हो? इनहा बिसतर पर लेतो मैं तुमहरी पयस अपनि मुत से बुझा देति हुन।”

इतना सुनते हि रजनि जी बोलि, “थीक है ला अपनि मुत हि मुझे पिला मैं पयस से मरि जा रही हुन” और वो बिसतर पर लेत गयी। मा को बिसतर पर लिता देख कर उशा भि बिसतर पर चर गयी और अपने दोनो पैर मा कि सर के दोनो तरह करके बौथ गयी और अपनि चूत रजनि जी के मुनह से भिरा दिया। रजनि जी भि अपनि मुनह खोल दिया। मुनह खुलते हि उशा ने पिशब कि धर अपने मा कि मुनह पर चोर दिया और रजनि जी अपनि बेति कि मुत अबरे चब से पिने लगी। पिशब पुरा होने पर उशा अपने मा के ऊपर से उथ खरि हो गयी और रजनि जी के बगल मे जा कर बैथ गयी। तब रमेह ने अपने सस के बहोन को पकर कर उनको बिसतर पर उलता लेता दिया और उनके कमर को पकर कर उनके चुतर को उपर कर दिया। जैसे रजनि जी घोरि बन कर बिसतर पर असन लिया तो रमेश अपने मुनह से थोरा सा थुक निकल कर अपने सस कि गनद मे लगा दिया और अपना लुनद को अपने हथोन से पकर कर अपनि सस कि गनद कि चेद मे लगा दिया। रजनि जी तब अपनि हथोन से अपनि बेति कि चुनचेओन को मसलते हुए बोलि, “रमेश मेरे रजा, मैने आज तक कभि गनद नहि चुदवया है और मुझको पता है कि गनद मरवने मे पहले बहुत दरद होता है। इसलिया तुम अरम अरम से मेरि गनद मे अपन लुनद दलना। जैसे हि रमेश ने जोर लगा कर अपना लुनद का सुपरा अपनि सस कि गनद मे घुसेरा तो रजनि जी चिल्ला उथि, “आआआह ऊऊऊऊह आआआआह कया कर रहय हो, मैन मर जावँ गि, रजा तुम नय मेरि गानद फर कय रख दोगेय, मैन नय पेहलय कभि गानद नहिन मरवै पलीज़ मेरे लला अहिसता से करो।” अपनि मा को चिल्लते देख उशा ने रमेश से बोलि, “कया कर रहे हो, धिरे धिरे अरम अरम से से पेलो ना अपनि लुनद। देख नही रहे हो मेरि मा मरि जा रही है। मा कोइ भगि थोरि ना जा रही है।” रमेश इतना सुन कर अपनि बिवि से बोलि, “कयोन चिनता कर रही हो। तुमको अपनि बत यद नही। जब मैने पहली बर अपना लुनद तुमहरी गनद मे पेला था तो तुम कितना चिल्लै थी और बद तुमही मुझसे बोल रही थी, और जोर से पेलो, पेलो जितना तकत है फर दो मेरि गनद, मुझको बहुत मज़ा मिल रहा और मैं तो बा ओज़ तुमसे अपनि गनद मे लुनद पिलवौनगी।” उशा अपने पति कि बत सुन कर अपनि मा से बोलि, “मा थोरा सा सबर करो। अभि तुमहरि गनद कि दरद खतम हो जयेगा और तुमको बहुत मज़ा मिलेगा। रमेश जैसा लुनद पेल रहा है उसको पेलने दो।” तब रजनि जी बोलि, “वो तो थीक है, लेकिन अभि तो मेरा गनद फता जर अहा है, और मुझको अब पिशब भि करमा है।” रमेश अपनि सस कि बत सुन कर उशा से बोला, “उशा तुम जलदी से कितचेन मे से एक जुग लेकर आओ और उसको अपनि कि चूत के नीचे पकरो।” उशा जलदी से कितचेन मे से एक जुग उथा कर लयी और उसको अपनि मा कि चूत के नीचे रख कर मा से बोलि, “लो अब मुतो। तुम भि मा एक अजीब हि हो। उधर तुमहरा दमद अपना लुनद तुमहरे गनद मे घुसेर रखा है और तुमको पिशब करनी है।” रजनि जी कुच नहि बोलि और अपने एक हथ से जुग को अपनि चूत के तीक नीचे लकर चर चर करके मूतने लगी। राजनि को वकै हि बहुत पिशब लगी थी कयोनकि जुग करीब करीब पुरा का पुरा भर गया। जब रजनि जी का पिशब रुक गया तो उशा ने जुग हता लिअ और जुग को उथा कर अपने मुनह से लगा कर अपनि माअ कि पिशब पीने लगी। एह देख कर रमेश रजनि जी से बोला, “अरे कया कर रही हो, थोरा मेरे लिये भि चोर देना। मुझको भि अपने सेक्सी सस कि चूत से निकला हुअ मीत पिना है।” उशा तब बोलि, “चिनता मत करो, मैं तुमहरे लिये अधा जुग चोर देती हुन।”

थोरि देर के बद रजनि जी ने अपने दमद से बोलि, “बेता मैं फिर से तयर हुन, तुम मुझे आज एक रनदी के तरह चोदो। मेरि गनद पहद दो। मैं बहुत हि गरम हो गयी हुन। मेरि गनद भि मेरि चूत कि तरह बिलकुल पयसी है।” “अभि लो मेरि सेक्सी ससुमा, मैं अभि तुमहरा गनद अपने लुनद के चोतोन से फरता हुन” और एह कह कर रमेश ने अपना लुनद फिर से अपने सस कि गनद मे पेल दिया। गनद मे लुनद घुसते हि रजनि जी फिर जोर से चिल्लने लगी, “है! फद दल मेरि गनद फर दला। अरे कोइ मुझे बसहो, मेरि दमद और मेरि बेति दोनो मिल कर मेरि गनद फरवा दला।” तब उशा अपने मा से बोलि, “अरे मा कयोन एक चिनल रनदी कि तरह चिल्ला रही हो, चुप हो जओ और चुप चप अपने दमद से अपनि गनद मे लुनद पिलवओ। थोरि देर के बद तुमको बहुत मज़ा मिलेगा।” अपनि बेति कि बत सुन कर रजनि जी चुप हो गये लेकिन फिर भि उसकि मुनह से तरह तरह कि अवज निकल रही थी। “…।आआह्हह्ह……यययौऊ…।ऊऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़…।।ईईईइस्सस्सस्सस्सह्हह्हह…।ऊऊओह्हह्हह्ह…।यययौउ…।।​ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़……एह…।।लुनद बहुत मोता और लुमबा है। ऊऊऊओम्मम्मम्माआआआह्हह्हह्हह…है! मैं मरि जा रही हुन। ऊऊउह्हह्हह्हह्हह……पलेअस्ससे…।आआआआअ…।ऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़…।धिरे…जरा धिरे पेलो मैं मरि जा रही हुन। अरे बेति, अपने पति से बोल ना कि वो जरा मेरि गनद मे अपना लुनद धेरे धेरे पेले। मुझे तो लग रहा कि मेरि चूत और गनद दोनो एक हो जयेनगे।” थोरि देर के बद रमेश अपना हथ अपने सस के समने ले जकर उनकि चूत को सहलने लगा और फिर अपनि उनगलेओन से उनकि चूत कि घुनदी को पकर कर मसलने लगा। अपनि चूत पर रमेश का हथ परते हि रजनि जी बिलबिला उथी और अपनि कमर हिला हिला कर रमेश के लुनद पर थोकर मरने लगी।

एह देख कर रमेश ने उशा से कह, “देख तेरि रनदि मा कैसे अपनि कमर कमर चला कर मेरे लुनद को अपने गनद मे पिलवा रही है। कया तुमहरि एहि मा अभि थोरि देर पहले अपनि गनद मरवने पर चिल्ला रही थी?” एह सुन कर उशा बोलि, “ओह्ह रमेश! कया बत है! देखो मेरि मा कया मज़े से अपनि गनद से तुमहरा लुनद खा रही है। देखो मेरि मा कैसे गनद मरवा रही है। मरो, मरो रमेश, मेरि मा कि गनद मे अपना लुनद खूब जोर जोर से पेलो। इसकि पुरे बदन मे लुनद के लिये खुजली भरी परि है। चोदो रमेश सलि कि गनद मारो बदि खुजला रहि थि!” रजनि जी अपनि गनद मे दमद का लुनद पिलवा कर सतवे असमन पर थी और बरबरा रही थी, “ओह्हह्ह! देखो उशा मेरि बेति! तुमहरि मा गनद मे लुनद लेकर चुदवा रहि है! तुम आखिर अपने मरद से मेरि चूत, गनद चोदवा हि लि! देखो सला रमेश कैसे चोद रहा है! सला सछा मरद है! दल औत दल रे! चोद ! मेरि गानद मर! मेरे बेति को दिखा! आह्हह ऊह्हह्हह्हह चोद चोद चोद ऐईइ!” रमेश अपनि बिवि और अपनि सस कि बत सुनतन रहा और अपना कमर चला चला कर अपनि सस कि गनद मे अपना लुनद पेलता रहा। थोरि देर तक रजनि जी कि गनद मरने के बद रमेश एक बर जोर से अपना पुरा का पुरा लुनद रजनि जी कि गनद घुसेर दिया और रजनि जी को जोर से अपने हथोन से जकर कर अपना लुनद का पनि अपने सस कि गनद ने चोर दिया। झरने के बद रमेश ने अपना लुनद अपने सस कि गनद

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