अतृप्त पड़ोसन की तृप्ति-२
हेलो दोस्तो !

उम्मीद है आप सभी को मेरी पहली कहानी "अतृप्त पड़ोसन की तृप्ति" पसन्द आई होगी।

सबसे पहले तो मैं गुरूजी का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने ना सिर्फ़ मेरी कहानी को आपके सामने पेश किया, बल्कि उसे एक अच्छा नाम भी दिया।

मुझे इस कहानी के लिए बहुत से पत्र आए जिनसे मेरा काफ़ी उत्साहवर्धन हुआ। मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

जैसा कि मैंने वादा किया था, मैं आपके सामने इस कहानी का अगला भाग पेश कर रहा हूँ।

उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम उसका पूरा पूरा फ़ायदा उठाते। मैंने उसे उसके घर में हर जगह और हर ढंग से चोदा, बेडरूम, रसोई, बाथरूम, सीढ़ियाँ जहाँ मौका मिला हमने अपनी वासना शांत की।

कई दिनों तक उसकी चूत चोदने के बाद मुझे उसकी उभरी गाण्ड में लण्ड डालने की जबरदस्त इच्छा होने लगी। पर जब भी मैं उसकी गाण्ड में लण्ड डालने की बात करता, वो मुझे मना कर देती कि इसमें बहुत दर्द होगा। पर मैं भी कहाँ मानने वाला था।

एक दिन जब उसके घर पे कोई नहीं था तो मैं वहाँ गया। वो रसोई में काम कर रही थी। मैंने उसे पीछे से बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन पर प्यार करने लगा। साथ ही उसकी मैक्सी पीछे से उठा दी और गाण्ड पे हाथ फ़ेरने लगा। वो उस वक्त रिफ़ाईण्ड तेल को पैकेट से डिब्बे में डाल रही थी। मेरे पकड़ने से उससे थोड़ा सा तेल स्लैब पर गिर गया। उसने पैकेट को डिब्बे पे रखा और घूम कर मेरे बालों में हाथ फिराने लगी। मेरे हाथ अभी भी उसकी कोमल गांड पर फिसल रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया। कभी मेरी जीभ उसकी होठों से होती हुई उसके मुंह में घूम कर आती कभी उसकी जीभ मेरे मुंह का स्वाद लेती।

उसकी गांड से खेलने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था। अचानक मेरी नज़र स्लैब पर गिरे तेल पर पड़ी। मैंने उससे अपनी हथेलियों पर लगा लिया और गांड पर मलने लगा। वो बोली यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने जवाब दिया कि मालिश कर रहा हूँ।

वो हंसने लगी और हम फिर अपने चूमा चाटी के खेल में मशगूल हो गए। मैं तेल अच्छी तरह से उसकी गांड और गांड के छेद पर मलने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा। वो समझ गई कि आज मैं मानने वाला नहीं हूँ पर उसने कुछ कहा नहीं। फिर मैंने उसे बाहों में भर लिया और उठाकर सोफे पे लिटा दिया। फिर मैंने उसकी मैक्सी को उसके बदन से अलग कर दिया। फिर उसे घुमाकर पीठ को चूमते और चाटते हुए मैंने उसकी ब्रा को दांतों से खोल दिया।

अब मैं उसके रसीले मोम्मों को मसलने लगा और उसके गर्दन का किस भी करने लगा। फिर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरी शर्ट और पैंट को उतार दिया। अब मेरा हथियार उसके हाथों में था और वो उससे खेलने लगी। फिर वो नीचे बैठ गई और मेरा अंडरवियर उतारकर मेरे लंड को चूसने लगी। जैसा कि मैं अपनी पहली कहानी में जिक्र कर चुका हूँ कि उसके चूसने का तरीका बहुत अच्छा था और मुझे बड़ा आनन्द मिलता था।

फिर मैंने उसे उठाकर उसकी पैंटी भी अलग कर दी और उससे सोफे पे लिटाकर उसके चूत में अपना लंड दे दिया। पहले झटके से उसके सिसकारी निकल गई। मैं कुछ देर रुका और धीरे धीरे धक्के मारने लगा। अब हमारा खेल पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने लगा। मैं उसे चोदते चोदते कभी उसकी चूचियां मसल देता था और कभी उसे किस करने लग जाता था। मेरे हर एक्शन को उसका पूरा साथ मिल रहा था।

मैंने उसे कुतिया की तरह किया। जैसा कि मैं आप सभी को बता चुका हूँ कि कुतिया की तरह बना कर भी मैं उसकी पीछे से चूत ही मारता था। उसकी चूत मारते मारते गांड पे हाथ फेरने लगा। जैसे ही उसने अपनी गांड को ढीला छोड़ा और चुदाई का मज़ा लेने लगी, मैंने एक ऊँगली उसकी गांड में डाल दी। मेरी उंगली वैसे ही चिकनी हो रखी थी और उसकी गांड भी, सो उंगली आसानी से उसकी गांड में चली गई। वो कराह उठी और उसने अपना सर पीछे फ़ेंक दिया। पर चूंकि चुदाई बहुत तेज़ हो रही थी और एक ऊँगली जाने से ज्यादा दर्द भी नहीं हो रहा था सो उसने कुछ बोला नहीं।

अब मैं चूत मारने के साथ साथ धीरे धीरे गांड में ऊँगली भी कर रहा था तो उसे बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे पूरी उम्मीद थी की आज तो मैं इसकी मोटी गांड की भी चुदाई कर सकूँगा।

उसने पूछा- आज इरादे नेक नहीं लगते जनाब के !

तो मैंने कहा कि जब इरादों का पता चल ही गया है तो मज़ा उठाओ। इतनी मस्त गांड होने के बावाजूद अगर मरवाई नहीं तो ग़ाण्ड जलन के मारे हड़ताल कर देगी !

तो वो हँसने लगी और बोली कि मैं अपना बदन तुम्हारे नाम कर चुकी हूँ पर जो भी करना आराम से करना ! मुझे बहुत दर्द होगा!

तो मैंने कहा कि चिंता न करो जानेमन, दर्द तुम्हें होता है तो आँख मेरी भर आती है। यह सुनकर वोह मेरी और भी दीवानी हो गई। और उधर मैंने अपना काम जारी रखा। फिर धीरे से मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी उसकी गांड में डाल दी। उसे थोड़ा दर्द और हुआ पर वो सह गई। तभी मैंने अपनी चुदाई तेज़ कर दी और दूसरे हाथ से उसकी चूत दबाने लगा और वो झड़ गई।

मैंने उसे घोड़ी बनाए रखा, और अपने लंड को गांड के छेद पे रखकर एक तेज़ धक्का मारा। मेरा लंड डर्बी रेस के घोड़े की तरह उसकी गांड में समां गया। और वो दर्द से तड़प उठी। मैं रुक गया और उसकी चूचियां मसलनी शुरू कर दी और धीरे धीरे उसे मज़ा आने लगा। फिर मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड में अन्दर बाहर करने लगा और वो मजे से सिसकारियां लेने लगी।

उसकी मादक सिस्कारियों से मेरा लंड मचलने लगा और मैंने अपने धक्के तेज़ कर दिए। अब वो भी मेरे धक्कों के साथ अपनी गांड आगे पीछे करने लगी। पूरे कमरे में हमारी सिसकारियां और बदन के आपस में टकराने की मदमस्त आवाज़ गूंजने लगी। इस सबसे वो समां बहुत ही उत्तेज़क हो चला था। हम दोनों को पहली बार गांड मारने और मरवाने का आनंद आ रहा था। थोडी देर में मैं उसकी मस्त गांड में झड़ गया और वोह मेरे गरम गरम लावे को अपनी गांड के अंदर महसूस करने लगी।

मैंने पूछा कैसा लग रहा है तो वो बोली कि इसमें बहुत मज़ा आया। ऐसा मज़ा मुझे अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं मिला।

फिर वो मुझसे चूत के साथ साथ गांड भी मरवाने लगी।

इसके बाद हमारा खेल करीब तीन साल तक चला और हम दोनों ने एक दूसरे को भरपूर मज़ा दिया।

दोस्तों, जैसा कि मैंने आपसे वादा किया था यह मेरी कहानी का दूसरा भाग था। अपनी मेल मुझे भेजते रहिएगा। और मैं अपनी कहानी आपके सामने पेश करता रहूँगा।
 


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