Post Thread 
नौकरी हो तो ऐसी
10-04-2016, 10:00 AM
Post: #11
RE: नौकरी हो तो ऐसी
तभी मैने देखा
वकील बाबू ने ज़रा ज़ोर
से धक्के मारना शुरू किया और
अपनी
बेटी को ज़ोर से उपर
नीचे करने लगे.
गाड़ी चले जा
रही थी
और वो अपनी
बेटी को चोदे जा रहा
था. ये देख के मैं बस पागल हो
रहा था. मैने अपना एक हाथ
आगे निकाल के सेठानी
की चुचि को पकड़ लिया
और मसलने लगा इससे
सेठानी दंग रह
गयी पर उसने मेरा
हाथ हटाया नही
बल्कि थोड़ा सा काँच की
तरफ झुक के तिरछा हो
गयी
इधर वकिलबाबू अपने धक्को मे
बहुत ज़्यादा गति ला चुके थे जिसके
कारण लड़की
की बारीक
आवाज़ आह …आह…. से
उहह… उहह…मे बदल
गयी वो
बुरी तरह से
दबी हुई
थी और
वकील बाबू फुल
स्पीड मे अपना
हथोडा उपर नीचे
करके उसे नीचे
की तरफ ज़ोर से दबा
रहे थे. लड़की उपर
उठने की कोशिश
करती पर
वकील बाबू उसे
नीचे दबा देते. मुझे लग
रहा था कि वकील बाबू
का लंड उसके लिए ज़रा जायदा
ही बड़ा था क्यू कि
जैसे ही वो
नीचे जाती
वो उपर उठने की
कोशिश करती,
वकील बाबू फॅट से उसे
नीचे दबा देते और
उसके मुँह से उहह..
की आवाज़ निकल
जाती …
थोड़ी देर बाद उसने
उठने की कोशिश
की और इस बार
रावसाब ने उसे नीचे दबा
दिया, वो बरदाश्त करने
की हालत मे
नही थी
…. और वकिलबाबू ने
अपनी गति और ज़्यादा
करदी और
लड़की के मुँह से
अभी उम्म्मह….
उंह की आवाज़े ज़्यादा
ही निकलने
लगी. इतने मे
वकील बाबू शांत हो
गये… लगता है उनकी
शांति का कारण अपनी
बेटी के चूत के अंदर
अपन रस छोड़ना था…
गाड़ी मे
थोडिसी शांति होते दिखाई
दी… तभी
मैने देखा कि कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
वकील बाबू के
बेटी की
चूत के छेद के अंदर
उंगली डाल
दी और अंदर तक घुसा
दी और अपने मुँह से
चाटने लागे. लड़की शांत
हो गयी
थी उसकी
चूत से पानी टपक रहा
था जो कि वकील बाबू
का ही
वीर्य था.
तभी मैने देखा तो दंग
रह गया
रावसाब वकील बाबू
की तरफ देखते हुए
बोले “अरे तुम इस
खिड़की पास आ जाओ
ये काँच ठीक से लगने
के कारण मुझे जोरोसे हवा लग
रही है”
और फिर वकील बाबू
काँच की तरफ सरक
गये और रावसाब बीच
मे, जैसे ही
वकील बाबू
की
लड़की,
वकील बाबू के साथ
काँच की तरफ सरकने
लगी, रावसाब ने
उसकी कमर को पकड़
के अपनी गोद मे
खीच लिया और बोले
“अरे बेटी बैठो इधर
मेरे गोद मे ही.. काँच
के पास बहुत हवा आ
रही है..”
वकील बाबू
की लड़की
ना चाहते हुए भी
रावसाब की गोद मे बैठ
गयी. वो
बैठी ही
थी कि मुझे पॅंट
की चैन खोलने
की
हल्की
सी आवाज़ आई. मैने
थोड़ा मुँह नीचे करके
देखा तो रावसाब अपना तगड़ा घोड़ा
निकाल रखे थे और आक्रमण
की तय्यारी
मे थे, जब से मैने इन चारो भाइयो को
देखा था तबसे मेरे दिमाग़ मे एक
ही बात चल
रही थी
ये तीनो जो मेरे साथ
बैठे वो काले और इतने तगड़े क्यू
है और जो चार नंबर के है
मास्टर जी वो गोरे और
पतले क्यू है, ये बात मेरे समझ
से इस वक़्त बाहर
थी…
मैने देखा तो रावसाब ने
वकील बाबू
की लड़की
को उपर उठाया और
उसकी चढ्ढि बाहर
निकाल के पॅंटी
भी निकाल
दी… कांट्रेक्टर बाबू ने
चुपके से पॅंटी
अपनी पॉकेट मे रख
दी, और रावसाब ने
फिरसे उसको चढ्ढि पहेना
दी. अभी
उनका लंड अंदर जानेके लिए कोई
प्राब्लम नही
थी क्यूकी
अभी पॅंटी
की
मुसीबत
बीच मे
नही थी.
फिर उन्होने वकील
बाबू के बेटी के चुचिया
ज़ोर्से दबाई और उसे थोड़ा उपर उठा
दिया, जैसे ही उन्होने
उसे उपर उठा दिया मुझे पता चल
गया कि अभी तो
वकील बाबू
की बेटी
की लगने
वाली है क्यू कि
रावसाब वकील बाबू से
दो गुना तगड़े थे और मजबूत
भी….
इसीलिए
वकील बाबू
की बेटी
उनकी गोद मे बैठने से
भाग रही
होगी क्यू कि उसे पता
होगा कि इधर वो अगर फस
गयी तो फिर उसे कोई
बचा नही सकता
रावसाब से…
रावसाब ने उसे उपर उठाया और
निशाना लगाके उसे नीचे
दबाने लगे पर वो नीचे
आने के लिए ज़्यादा
ही विरोध करने
लगी, तभी
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
उसकी कमर पकड़
कर नीचे दबोच दिया
वैसे ही उसके मुँह
से “उईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
माआआआ….”
“उहह…….ईईईईई…….उूुुुउउ….ई
“उूुुुुुउउ….आअहह…..उहह….”
की आवाज़
बड़ी ही
बारीक
चीख खुद पे नियत्रन
करते हुए निकली
मैं समझ गया था कि उसके लिए
रावसाब का लंड सहन से बाहर
था, तब भी वो ज़्यादा
कुछ आवाज़ किया बिना खुद पे काबू
पाने की कोशिश कर
रही थी.
अभी फिरसे रावसाब ने
बड़ी हिम्मत करके
उसे उपर उठाया और ज़ोर्से दबा के
अपने लंड पे बिठा दिया, फिरसे
थोड़ी आवाज़ आई
….अभी राव साब ने
थोड़ा नीचे दबाना शुरू
किया…. मैं ठीक से देख
नही पा रहा था लेकिन
ऐसे लग रहा था कि उसके पैर
नियंत्रण से बाहर हिल रहे है.
वो सिकुड रही
थी…
अभी धक्को
की गति बढ़ने के कारण
वो और सिकुड़ने लगी
…और रावसाब उसे उपर
नीचे करने लगे….
उन्होने उसकी कमर
अपने हाथ मे पकड़ के ज़ोर्से उसे
उपर नीचे करने लागे
और एक दम से “आहह….”
की आवाज़
निकली और फिर
गाड़ी मे शांति हो
गयी….
वकील बाबू
की बेटी
की हालत
काफ़ी
पतली हो
चुकी थी
वो ठीक से हिल
भी न्ही
पा रही
थी
….उसकी चूत से
वीर्य की
धारा गाड़ी
की सीट पे
गिर रही
थी…उसमे कॉंट्रॅक्टर
बाबू हाथ लगाके उस
वीर्य के हाथ
वकील बाबू
की लड़की
के मुँह मे डाल रहे थे…. वो
इच्छा नही होते हुए
भी अपना मुँह खोल
के उनकी उंगलिया चूस
रही
थी…. मुझे तो लग रहा
था कि ये गाड़ी से
उतरने के बाद चल भी
नही
पाएगी......
मेरे एक हाथ मे
सेठानी की
चुचि थी…जो मैं ये
दृश्य देख के ज़ोर ज़ोर से दबा रहा
था …एक दृश्य के
बीच मे मैने दो बार
शेतानी के निपल्स
नाख़ून से दबा दिए जिसके कारण
शेतानी
हॅकीबॅक्क
रह गयी परंतु
गाड़ी मे होने के कारण
वो कुछ नही कर
पाई….
अभी 30 मिनट का
रास्ता बाकी था……
अब कॉंट्रॅक्टर बाबू जो कद मे
वकील बाबू से दुगने थे
और रावसाब के बराबर दिखते थे, वो
बहुत ही ज़्यादा गरम
हो गये थे, उन्होने
वकील बाबू
की बेटी
की चूत मे
उंगली डाल
दी. चुदाई
की वजह से
उसकी चूत बहुत
आकर्षक और गुलाबी
हो गयी
थी. कॉंट्रॅक्टर बाबू
वकील बाबू
की बेटी
की चूत
की फाके
खीच रहे थे फिर
उंगलिया अंदर डाल रहे थे,
वकील बाबू
की बेटी
मुँह उपर नीचे कर
रही थी
पर इससे ज़्यादा, उससे हो
नही पा रहा था…
उसका विरोध एक
चीटी के
बराबर का लग रहा था. उधर
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
वकील बाबू
की बेटी
के चूत के बाल, जो मुलायम और
छोटे छोटे थे, चूत से
उंगली निकाल के,
खिचने शुरू कर दिए ….. उन्हे
इससे बहुत ही मज़ा
आ रहा था…
इधर रावसाब ने वकील
बाबू के बेटी के भरे
फूले आम जिनके उपर, लाल –लाल
और छोटे निपल्स थे, उन निपल्स
को ज़ोर्से निचोड़ा, तो
वैसेही वो कराह
उठी, रावसाब इस खेल
के बहुत पुराने खिलाड़ी
मालूम हो रहे थे, मैं अपना मुँह
नीचे करके बैठा था
लगभग 1.30 घंटे से, मेरे मन मे
दर्द होने लगा था,
उसी समय रावसाब ने
वकील बाबू
की बेटी
की कामीज़
से हाथ निकाल के
कमीज़
नीचे से नाभि तक उपर
उठाई और नाभि मे
अपनी एक
बड़ी
मज़ली
उंगली डाल
दी और उस
बड़ी
उंगली को ज़ोर्से घुमाने
लगे, वैसे ही वो और
ज़ोर्से कराह उठी….
खिड़की मे बैठे
वकील बाबू
अभी
अपनी
बेटी की
चुदाई देख के खुश लग रहे थे,
क्यूँ कि उनका काला घोड़ा फिरसे खड़ा
हो गया था ...उनका काला घोड़ा
जिसपे अभी
भी बाजू बाजू मे गाढ़ा
चिपचिपा वीर्य और
बेटी के
कमनीय चूत का मादक
रस लगा था.... वकील
बाबू ने अपनी
बेटी का कोमल हाथ
पकड़ा और चुपके से अपने काले
घोड़े के सूपदे पे रख दिया और
अपने हाथ से उसके हाथ को जो
काले गहरे रंग के सूपदे पर था,
उसे उपर नीचे करने
लागे, वकील बाबू
की बेटी
अपने बाप के लंड की
काली
चमड़ी खुद अपने
हाथोसे उपर नीचे कर
रही
थी….
अब वकील बाबू ने
बेटी की
चूत पर हाथ रखना चाहा वैसे
ही उन्हे उस
जगह पे कंटॅकटर बाबू का हाथ
महसूस हुआ, उन्होने उसका
हाथ और उंगलिया झटके से निकाल
दी, और अपने
बेटी की
चिकनी
गीली चट
के अंदर जो गधे जैसे लंड
की चुदाई से
फूली हुई
थी उसमे डाल
दी और अंदर बाहर
करने लागे, इससे
वकील बाबू के
बेटी का हाल बहुत
बुरा होने लगा और
उसकी चूत जो अब
तक 4-5 बार पानी
छोड़ चुकी
थी, फिरसे
पानी छोड़ने
लगी….
इधर मेरे बाजू मे बैठे कॉंट्रॅक्टर का
गहरा काले-लाल रंग के सुपादे के
छेद से हल्का हल्का
वीर्य के पहले का
पानी छोड़ रहा था…..
उनके सूपदे का आकर लगभग गधे
के सूपदे से ज़रूर मिलता होगा…मैने
जिंदगी मे
पहली बार इतना बड़ा
सूपड़ा देखा… मैं सोच मे पड़ गया…
इनका सूपड़ा ही इतना
बड़ा है तो पूरा लंड कितना बड़ा
होगा और अगर ये लंड इस
बेचारी की
चूत मे अगर गया तो वो तो ज़रूर
बेहोश हो जाएगी..
मैने कब्से सेठानी का
निपल अपने एक हाथ मे दबोच
रखा था, और अपने नखुनो से उसे
तडपा रहा था, सेठानी
की साँसे इस वजह से
काफ़ी तेज़ चल
रही थी..
पर वो अपने पे काबू पाने
की पूरी
कोशिश कर रही
थी … क्यू कि उसे पता
था ये बात अगर सेठ
जी को पता चल
गयी तो
उसकी और
मेरी खैर
नही…. मैने अपना
हाथ सेठानी के
पीठ के उपर्से से
निकाल के पीठ मे डाल
दिया… वैसे ही मुझे
सेठानी के घने बालो ने
इशारा किया मैने 10-15 बॉल हाथ
मे पकड़े और उन्हे सहलाने लगा
और बीच मे
ही ज़ोर्से खिचने लगा
इससे सेठानी
की और
पतली होने
लगी वो चरम
सीमा के द्वार पे
पहुच रही
थी.


☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:01 AM
Post: #12
RE: नौकरी हो तो ऐसी
अब इधर फिरसे रावसाब रंग मे आ
गये और उन्होने
वकील बाबू
की बेटी
के बाल ज़रा एक साथ समेटे और
एक हाथ मे पकड़ लिए,
उसकी चूत मे जो
वकील बाबू का हाथ था
उसे निकाल दिया, और
अपनी एक
बड़ी
उंगली
उसकी चूत
की फांको के
बीच मे से चूत मे डाल
दी और ज़ोर्से अंदर
बाहर करने लागे
उनकी गति बहुत
ज़्यादा थी उस वजह
से वकिलबाबू की
बेटी ज़्यादा
ही हिलने
लगी, फिर रावसाब ने
अपनी
दूसरी
उंगली और फिर मैं तो
देखते ही रह गया,
तीसरी
उंगली भी
उस फूली चूत मे डाल
दी उस वजह से
वकील बाबू
की लड़की
छटपटाने लगी,
वैसेही रावसाब ने
अपनी
तीनो उंगलिया ज़ोर्से
अंदर बाहर- अंदर बाहर करना
शुरू कर दिया…लड़की
की साँसे बहुत
ही तेज़ चलने
लगी, वो अपने चरमा
सीमा पर बहुत
ही
जल्दी पहुचने
वाली थी,
रावसाब ने और गति बढ़ाई और
उंगलियो को अंदर तक डालने लगे….
वैसे ही मैने देखा
लड़की सिकुड़ने
लगी और
उसकी चूत से
पानी के 2-3 फवारे
उड़े…फिर रावसाब थोड़े शांत हुए….
लड़की कुछ समझने
की हालत से बाहर
जा चुकी
थी…
उसकी हालत एक
बकरी के जैसे हो
गयी थी
जो जंगल के शिकारी
कुत्तो के जाल मे बुरी
तरह फसि थी….
ये नज़ारा देख के कॉंट्रॅक्टर बाबू
की आँखे और ज़्यादा
चमकने लगी, उन्होने
वकील बाबू
की लड़की
को अपने तगड़े और काले हाथो से
रावसाब की गोद से
आराम से और चुपके से उठाया और
अपनी गोद मे ले लिया,
जैसे के वो मेरे बाजू मे
ही बैठे थे.. जैसे
ही उन्होने
वकील बाबू के
लड़की को हाथो मे उठा
कर अपनी गोद मे रखा
तो, उसकी कोमल गांद
का स्पर्श मेरी
पीठ को हुआ और
मेरे अंग अंग मे एक लहर दौड़
गयी…..
मेरी हालत तो
भीगी
बिल्ली
जैसी थी…
मैं इधर कुछ भी
नही कर सकता था….
अभी कॉंट्रॅक्टर बाबू
पूरी तैय्यारि के साथ
वकील बाबू
की बेटी
की
गीली
मुलायम चूत चोदने के लिए तैय्यार
होने लगे, और ये सोच सोच के
पागल हुए जा रहे थे, उन्होने
अपने लंड की
चमड़ी सूपदे से
पीछे
की…. और वो अब
निशाना साधने के लिए तैय्यार थे..
तभी मैने देखा बाहर
कुछ ज़्यादा ही
प्रकाश दिखने लगा, मैने थोड़ा
खिड़की से बाहर झाँक
के देखा तो मैने देखा कि वो प्रकाश
कही और से
नही बल्कि जिस मदिर
मे जा रहे थे वहाँ से आ रहा था
इसका मतलब मंदिर आ गया था…
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने जब ये समझा तो
उनका तो
केएलपीडी
(खड़े लंड पे डंडा) हो गया…

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:01 AM
Post: #13
RE: नौकरी हो तो ऐसी
जब हम लोग उतरे तो मैने देखा,
मंदिर बहुत ही भव्य
दिव्य और पुराना
मालूम हो रहा था, जिसे देख के
सच मे पूजा के अंतर्भाव आ रहे
थे, लगभग 2 एकर के क्षेत्र मे
मंदिर फैला था बाजू मे बाथरूम और
कई सारी व्यवस्थाए
थी,
जैसे ही हम सब
उतरे तो चार पाँच लोग भागते चले
आए, इससे पताचल
रहा था कि सेठ जी
कोई हल्के ज़मींदार
नही बल्कि बहुत
बड़े ज़मींदार है.
सब लोग और जिनमे 4-5 घर
की लड़किया, 4 बहुए,
सेठानी और 2
नौकरानी
थी, गांद मटकाते हुए
मंदिर की तरफ जाने
लगी
इन सब को देख के मुझे स्वर्ग मे
आने के
भाव मंन मे आ रहे थे, ऐसा लग
रहा था कि अभी
पूरी जिंदगी
ना मुझे
पाने की ज़रूरत है
और नही कुछ
करनेकी,
सभी महिलाए मंदिर
मे घुस गयी, उनके
पीछे सेठ
जी भी
मंदिर मे चले गये
मैं थोडा पीछे था, तब
मैने देखा कि रावसाब,
वकील बाबू और
कॉंट्रॅक्टर बाबू बाथरूम
की तरफ जा रहे थे,
क्यू नही जाएँगे
हालत तो उनकी
बहुत पतली
थी,
कॉंट्रॅक्टर बाबू के चेहरे से लग
रहा था कि बहुत ही
लाल हो चुके थे
आख़िर
केएलपीडी
हो गया तो कौन नही
भड़केग़ा
थोड़ी देर इधर उधर का
अंदाज़ा लेते हुए मैं भी
मंदिर मे आ गया,
देखा तो उधर बड़ी
सी
हवनबेदी
बनी हुई
थी जिसपे
शुभ हवन श्रिशुक्त हवन, शुभ
हवन पुरुष शुक्ता हवन,
शुभहवन रुद्रा शुक्ता हवन ऐसे
शब्द लिखे
हुए थे, हवन बेदी
के बाजू मे 4 बड़े पेट वाले जो
बहुत ही उच्च
शिक्षित दिख रहे थे वो
बैठे हुए थे और पूजा शुरू करने
की तैय्यारि कर रहे
थे,
तभी मेरे आँखो के
सामने कुछ चमका, अगले पल मैने
देखा पूजारी के
शिष्य शिष्या पूजा के लिए मदिर मे
चले आ रहे थे
पुरुष शिष्य गन पूजारियो के
आजूबाजू बैठ गये जो हम सब के
सामने
बैठे थे, एक बाजू मे
सभी महिलाए बैठ
गयी और एक बाजू मे
पुरुषो के लिए जगह
रखी थी
पुरुष तो ज़्यादा कोई थे
नही इसलिए सेठ
जी ने जो 4-5 महिला
शिष्या बची
थी उनको पुरुषो
के साइड वाली जगह
मे बैठने को बोला
|
अभी सेठ
जी और 3 नौकर और
2-3 तीन जने
पहचान वाले लोग
तीसरे और चौथे हवन
के सामने बैठे थे, महिला शिष्य को
जगह ना
होने के कारण सेठ जी
ने उन्हे पुरुषो के साइड मे अपने
पीछे बिठा दिया,
और वो भी
पीछे आके बैठ गया, मैं
पीछे खड़े ये सब देख
रहा था, मेरा हाल
गाड़ी मे
देखी चुदाई को देख के
बहुत ही बुरा हो गया
था अभी मुझे तो
कुछ गरम करनेवाली
चीज़ मेरे आजूबाजू
चाहिए थी. तो मैं उन
4-5 महिला
शिष्य के पीछे आके
बैठ गया, उन्होने भगवे रंग
की साडी
पहेनी हुई
थी, पर इन
साड़ी मे कुछ
बात थी, बहुत
ही पतली
मालूम हो रही
थी ये सब
साडी,
सभी की
सभी
महिला शिष्य एक दम
गोरी और घरेलू लग
रही थी,
लग रहा था कि इन पूजारियो ने चुन
चुन के माल लिया है...
उनकी
साडी की
पीठ कुछ ज़्यादा
ही खुली
थी, उन्होने गजरे
लगाए थे,
उसकी वजह से
उनके शरीर से एक
मादक महेक निकल
रही थी
ऐसे लग रहा था कि कोई सुंदर
गुलाबों के उपवन मे टहल रहे
हो, उनके
बाल भी बहुत
ही सुंदर और अति
लंबे थे जो उनकी गांद
के नीचे तक लटक
रहे थे....
तभी मैने देखा तो
रावसाब, वकील बाबू
और
कॉंट्रॅक्टर बाबू मंदिर मे आ गये
और मेरे बाजू मे आके बैठ गये
और आगे बैठी
महिला शिष्या को देख के दंग रह
गये, उन सबकी आँखे
फिरसे चमकने
लगी. मैने कॉंट्रॅक्टर
बाबू को कहते हुए सुना "क्या माल
है यार...ये मिल
जाए चोदने को मज़ा आ जाए..." इस
पर रावसाब और वकील
बाबू ज़ोर्से हस
पड़े और एक दूसरे को आँख मार
के इशारा करने लगे
तभी एक पुरुष शिष्य
मेरे बाजू मे आके
बैठ गया. मैने उसे पूछा कि ये पूजा
कब तक चलेगी तो
उसने बोला कि ये पूजा नये बालक
के जनम की है और
उसे अगले जीवन मे
कोई बाधा ना आए इसलिए इसमे
बहुत सारे देवताओ
की शांति
करनी
पड़ती है और ये पूजा
लगभग
1.30 घंटे तक
चलेगी...
उसी वक़्त एक और
शिष्य नवजात बालक को कपड़े मे
लेके आया और उसे हवन से
थोड़ी दूर
बनी
एक बड़ी
उची जगह पे रख
दिया...फिर एक पूजारी
ने ज़ोर से ज़ोर्से मन्त्र
पढ़ना शुरू कर दिए, सब लोग हाथ
जोड़कर बैठ गये.... फिर दूसरे
पंडित ने भी मन्त्र
बोलना शुरू कर
दिए...ऐसे करते करते पूजा शुरू हो
गयी परंतु रावसाब,
वकील बाबू और
कॉंट्रॅक्टर बाबू
का मंन पूजा मे था ही
नही उनका मंन तो
सामने बैठी
अपनी
भारी और
गोरी पीठ
दिखाती महिला
शिष्याओ पे था..... और सच बोलू
मेरा भी .........
पूजरी ने मन्त्र शुरू
किए, और पूजा शुरू हो
गयी… एक एक करके
देवताओ की पूजा और
शांति हो रही
थी… सब लोग बड़े शांत
चित्त से हवन की
तरफ देख रहे थे….
बड़ी उँची
जगह पे रखा बच्चा उसके छोटे
पालने मे से इधर उधर देख रहा
था…. रात बहुत हो
चुकी थी
और कुछ लोग तो आधी
नींद मे लग रहे थे.
घर की महिलाए और
सेठ जी और सामने
बैठे कुछ नौकर दुलकिया मारते हुए
दिख रहे थे…
मैं जिस महिला शिष्य के
पीछे बैठा था,
उसकी
पीठ बहुत
ही गोरी
और मस्त थी…. वो
सभी शिष्या कोई
कंपनी की
एरहोस्टेज से कम
नही लग
रही थी…
सुंदर पोशाक…..बँधे हुए लंबे बाल,
सर पे एक छोटी
सी बिंदी,
चेहरा एक दम मुलायम और
कोमल, टोकड़ दार नाक, आँखो मे
हल्का सा काजल, ब्लाउस एक
दम पतला, जिससे लगभग आर पार
देख सके, सफेद कलर
की ब्रा, वो मस्त हवा
से हल्के हल्के
उड़ती ही
हुई साडी…. मन
बहुत ही मोहित हो
चला था… ऐसे लग रहा था
इनकी बाहो मे इन
कोमल कोमल मांसल टाँगो पे सो जाऊ
और फिर कभी ना
उठु….
तभी सामने
वाली लाइन से दो नौकर
उठे, और मंदिर से निकलने लगे,
मैने उनकी तरफ देखा
तो मुझे थोड़ा शक सा हो गया कि
इतनी रात ये पूजा छोड़
के ये दोनो कहाँ जा रहे है… परंतु
मैने ध्यान नही दिया
और उधर ही बैठा
रहा…. इधर कॉंट्रॅक्टर बाबू
की हालत
पतली
होती जा
रही थी…
उनका कब्से खड़ा हुआ काला घोड़ा
उन्हे परेशान किए जा रहा था और
उन्हे उसे मुक्ति देने का समय
नही मिल रहा था….

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:02 AM
Post: #14
RE: नौकरी हो तो ऐसी
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने दिमाग़ लगाया, जिस
महिला शिष्या के पीछे
वो बैठे थे, उसके वो
नज़दीक मतलब थोड़े
आगे सरक गये, जैसे कि उस
महिला शिष्या के आगे सेठ
जी बैठे थे, वो महिला
शिष्या आगे सरक
नही पाई और
वही पर
ही थोड़ी
हिल कर बैठ गयी,
इस चीज़ का पूरा फ़ायदा
उठाते हुए कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपना
लंड का कुछ ख़याल ना करते हुए
पॅंट से निकाल लिया और उस शिष्या
का हाथ पीछे खिचते
हुए उसे हाथ मे थमा दिया, मैं ये
देख के दंग रह गया और
आजूबाजू की माहिला
शिष्या को भी इस बात
का पता चल गया… कॉंट्रॅक्टर बाबू
का लंड उस शिष्या के हाथ मे आ
नही रहा था इतना
बड़ा और फूला हुआ था…वो
बेचारी उसे हाथ मे
लेके बैठ गयी वैसे
ही कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
उसका कान खिचते हुए उसके कान
मे कुछ कहा और वो कॉंट्रॅक्टर
बाबू का लंड हिलाने
लगी…वो लंड
की चमड़ी
उपर नीचे करने
लगी वैसे
ही कॉंट्रॅक्टर बाबू
आनंदित होने लगे…उनके मन मे
कोमल हाथ के स्पर्श से
पंछी उड़ने लगे…..
उन्होने फिर कान
खीच कान मे कुछ
बोला…उसके बाद वो शिष्या
कॉंट्रॅक्टर बाबू का लंड ज़रा और
ज़ोर्से हिलाने लगी….
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने पीछे
से उसकी
पीठ पे हाथ दिए और
उसकी
पीठ को होले होले
सहलाने लगे…. उससे वो शिष्या
भी उत्तेजित होने
लगी थी
और अपने शरीर को
कसमसा रही
थी….
उसकी वो कसमकस
देख के आजूबाजू की
शिष्या भी गरम होने
लग गयी और सबसे
ज़्यादा गरम होने लगे रावसाब और
वकील बाबू…. अगर ये
पूजा नही चालू
होती तो मैं तो कहता
हू ये इन सब महिला शिष्यो को
इसी मंदिर के प्रांगण मे
चोद देते…..
अभी कॉंट्रॅक्टर बाबू
कुछ ज़्यादा ही गरम
हुए लग रहे थे,
उनकी साँस तेज़ चल
रही थी…
इधर जिस शिष्या के हाथ मे उनका
लिंग था वो भी गरम हो
गयी थी
और ज़ोर ज़ोर्से उनका लिंग हिलाने
लगी…. कॉंट्रॅक्टर बाबू
चरम सीमा पर पहुच
गये और उनके लंड ने उस शिष्या
की पीठ पे
और उसके हाथ पे अपना कामरस
उगलना शुरू कर दिया…..उस शिष्या
का हाथ कामरस से पूरा भर गया…
और ये देख के बाजुवलि शिष्याए
हल्के हल्के मुस्कुराने
लगी और उसके तरफ
देखने लगी…उसने
अपना मुँह नीचे कर
दिया और हल्के से अपना रुमाल
निकाल के अपनी
पीठ और हाथ सॉफ
करने लगी…. इधर
असीम आनंद
की प्राप्ति कर
कॉंट्रॅक्टर बाबू बहुत खुश हो
गये… और उनका काला लंड मुरझा
गया…. फिर उन्होने अपने पॅंट का
नाडा खोला और उसे अंदर लेके शांति
से सुला दिया…….
मंदिर मे पूजा चल रही
थी. कॉंट्रॅक्टर बाबू का
वीर्य दान
अभी अभी
हुआ था तो वो ज़रा शांति से बैठे
थे.सेठानी अपने बगल
मे बैठे सेठ जी से चुप
चुप के कुछ बात किए जा
रही थी
और हस रही
थी.
वकील बाबू
की बेटी
भी बैठी
दिख रही
थी, पर
गाड़ी मे रावसाब और
वकील बाबू के काले
लंड ने उसकी बुर
की मा चोद
दी थी,
इसलिए वो थोडिसी
टेढ़ी मेधी,
पाव उपर नीचे किए जा
रही
थी... बल्कि उसे
नींद भी
बहुत आ रही
थी... ये देख कर
सेठानी ने मुझे उसे
मंदिर के बाजू मे बने बड़े बंग्लॉ के
एक रूम मे ले जाने का इशारा किया,
मैं उठा और उसे ले जाने लगा
तभी एक और पुरुष
शिष्य भी उठ गया और
हम उसे लेके तलवाले मंज़िल पे
एक बड़े से कमरे मे लेके गये और
उसे वहाँ पे सुला दिया हम वापस
आके अपनी जगह पे
बैठ गये और पूजा चल
रही थी,
आधे लोग सोने को आए थे आधे
जाग रहे थे, कोई मन्त्र बोल रहा
था कोई सुन रहा था कोई
नही सुन रहा था.
रावसाब वकील बाबू
और कॉंट्रॅक्टर बाबू सामने
बैठी महिला शिष्या
की पीठ
को घुरे जा रहे थे और मौका मिलते
ही आगे खिसक के
उनकी गांद से अपने
घुटनो को मिला रहे थे, शिष्या आगे
सरकने लगती तो सेठ
जी सामने से
पीछे देखते तो वो फिर
पीछे हो
जाती, ये देख के
तीनो हसते और,
जोरोसे उनकी गांद पर
अपना घुटना घिसते....रावसाब
अभी भी
एक हाथ से अपने घोड़े को सहला
रहे थे, वो बड़े लंबे रेस के घोड़े
लग रहे थे. एक बात तो
थी सेठ
जी के परिवार
की सभी
महिलाओ की चुचिया
बहुत बड़ी
बड़ी
थी..सबकी
सारिया थोडिसी
खिसकी हुई
थी तो बाजू से
बड़ी बड़ी
चुचिया देखने को मिल
रही थी
मैं सोच रह था कि इस
नौकरी मे मुझे
महीने का पगार
भी मिलनेवाला है और
इन सब और बातो का मज़ा ये तो
दुगना लॉटरी है.
किसीकि
लटकती हुई चुचिया तो
किसीकि मजबूत और
छाती से
तंगी
चिपकी हुई ताजे आम
के तरह नोकदार आकार
बनाती चुचिया देख के
मेरे लंड की हालत
और बेकार हुई जा
रही थी.
अभी पूजा लगभग
ख़तम होने को थी बस
आधा पौना घंटा और
बाकी थी.
तभी एक पंडित उधर
से उठे और बंगले की
तरफ चल दिए, उनकी
जगह दूसरे पंडित ने ले
ली, उनके
पीछे
सेठानी भी
चल दी, मुझे ये बात
थोडिसी रहास्यमय
लगी पर मैं बैठा रहा
जैसे कि मैं पहले बंगले मे जा चुका
था इसलिए मैं चाहू तो
अभी भी
जाके ये लोग कहाँ गये ये
आसानी से पता लगा
सकता था थोड़ी देर मे
मैं मूत के आता हू कहके उधर
से उठा और बंगले की
तरफ चल दिया...बाहर सब अंधेरा
था बंगले के बाजू मे बस
रोशनी थी
वो भी बहुत
धीमी
थी... बंगले के चारो
और बड़ा सा कंपॅन लगा हुआ था
और चारो और से बहुत
सारी जगह
छूटी हुई
थी जो आगे जाके बड़े
बड़े खेतो को मिलती
थी. मैं बंगले के
पीछे गया और आगे
थोड़ा सा खेतो मे चलता गया, उधर
मैने अपने लंड को धार मारने के
लिए बाहर निकाला और राहत
की साँस लेते हुए मूत
क्रिया पूर्ण की वापसे
आते समय मैं बंगले के
पीछे से दिख
रही बड़ी
बड़ी खिड़कियो को देखते
जा रहा था, मैं पहचान पा रहा था
कि अनुमान से देखा जाए तो जिस
खिड़की मे लाइट जल
रही है वो
वोही है जिसमे
हमने वकील बाबू के
बेटी को सुलाया था...मेरा
दिमाग़ तेज़ चलने लगा और मैने
समझ लिया कि दाल मे कुछ तो काला
है क्यू कि जब हम उसे सुला के
निकले थे तो हम ने लाइट बंद कर
दी
थी………. मैं आगे
चलते गया और बंगले के पास
पहुचा, काँच की
खिड़की जिसपे अंदर से
परदा लगा हुआ था,
खिड़की
की उँचाई ज़्यादा
नही थी
पर आजूबाजू बहुत
सारी झाड़ियाँ
थी इसलिए
खिड़की तक पहुच
पाना थोड़ा मुश्किल लग रहा था तब
भी मैं वहाँ पहुचने
की कोशिश करने लगा
जैसे ही मैं
नज़दीक जाने लगा मुझे
कुछ आवाज़े सुनाई देने
लगी और जैसे कि मैने
पहले वकील बाबू के
बेटी की
आवाज़ सुनी
थी ये आवाज़ उससे
जानी
पहचानी लग
रही
थी...
थोड़ी ही
देर मे झाड़ियो के बीच
मेसे मैं उस खिड़की के
पास पहुचने मे कामयाब हो गया
जैसे ही मैं उधर
पहुचा मुझे सेठानी
की जानी
पहचानी आवाज़ सुनाई
दी और ऐसा लग रहा
था कि जो पंडित पूजा से निकला था वो
भी यहाँ मौजूद
है...मैने अभी
धीरे से जिस बाजू से
परदा थोड़ा उपर उठा रखा था उस
बाजू से अंदर देखा. अंदर तो
आश्चर्या चकित करने वाला द्रिश्य
दिखाई दिया, मैं तो देख के दंग रह
गया, सेठानी
पूरी नंगी
बैठी थी,
वकील बाबू
की लड़की
के कपड़े पंडितजी एक
हाथ से निकल रहे थे
वकील बाबू
की बेटी
की चुचिया एक दम
गोलाकार, अपने यौवन मे आने के
लिए और चूसने के लिए तरस
रही थी,
उन चुचियो को देख के ऐसा लग रहा
था जैसे मैं इस पंडित का खून करके
उनको अभी
पीने के लिए चला
जाउ…. जबसे मैं गाव मे आया था ये
मैं तीसरी
चुदाई देख रहा था और मेरे लंड को
अभी किसिका हाथ
भी नही
लगा था… पंडितजी
शरीर से बहुत
ही मजबूत और मोटे
और निंगोरे थे, उन्होने
नीचे धोती
पहनी थी
और उपर कुछ भी
नही… पेट पे सफेद
गन्ध की रेखाए….सर
पे थोडेसे बाल, दूध
दही खाने से बने
मदमस्त ताकतवर बाजू और
छाती… कोई
भी उनकी
इस देह पे फिदा हो जाता…. पंडित
धीरे धीरे
वकील बाबू
की लड़की
के कपड़े उतार रहा था,
अभी उसे पूरा नंगा किया
और उसे खड़ा होने को बोला, वो
नीचे मुँह करके
खड़ी हो
गयी, फिर पंडित ने
अपनी
धोती उपर
खीची और
अपना क़ाला-पुष्तिला लंड बाहर
निकाल के लड़की का
एक हाथ पकड़ के, उसमे दे
दिया…. लंड इतना मोटा था कि जैसे
कोई कुल्हड़ हो, उसका सूपड़ा
और भी मोटा था…
पंडितजी का लंड
रावसाब के लंड को ज़रूर टक्कर दे
रहा था.. वकील बाबू
के लड़कीनेजैसे
ही लंड हाथ मे लिया
वैसे ही उसे कुछ
चिपचिपा सा द्रव हाथ मे लगा
उसके कारण उसने लंड छोड़ दिया….
ये देख के सेठानी
बोली “अरे डरो
नही कुछ
नही होता वो तो
तीर्थाप्रसाद है …
पंडितजी ये
तीर्थाप्रसाद बस कुछ
भक्तो ही देते है
..तुम भी लेलो…… ऐसा
करो यहा मेरी गोद मे
बैठ जाओ… और मुँह मे
तीर्थ प्रसाद लो….”
सेठानी
नीचे बैठ
गयी और
वकील बाबू
की लड़की
उनकी गोद मे बैठ
गयी,
पंडितजी ने
धोती उपर एक हाथ
से पकड़ के, एक हाथ मे लंड
पकड़ के वकील बाबू
की लड़की
के मुँह मे घुसाया,
वैसेही उसने मुँह
पीछे किया और लंड
बाहर निकाल दिया.
सेठानी
बोली “भगवान का
प्रसाद है ..ऐसे नही
करते अभी फिरसे ऐसा
मत करना…पहले थोड़ा
नमकीन लगेगा पर बाद
मे मस्त लगेगा….. ” और फिर
पंडितजी ने
लड़की के मुँह मे
अपना लंड घुसा दिया और इस बार
पंडितजी ने
चालाकी से उसका सर
पकड़ कर लंड की
तरफ दबा दिया, और उधर
सेठानी ने गोद मे बैठे
बैठे लड़की
की नौजवान बुर मे
उंगली डालना शुरू
की……
मुँह मे गधे लंड के वजह से
वकील बाबू
की लड़की
की साँसे रुक
सी गयी
थी.
पंडितजी मुँह मे लंड
घुसाए जा रहे थे. उधर
नीचे
सेठानी उंगलियो का
न्रत्य करके उसकी
बुर को नचा रही
थी.
पंडितजी ने लंड
अभी थोड़ा बाहर
निकाला और सेठानी के
मुँह मे भर दिया,
सेठानी ने
लड़की को गोद से उठा
के पलंग पे बिठाया,
पंडितजी
की धोती
के कारण मुझे सेठानी
के मुँह के अंदर जा रहा लंड
नही दिख रहा था ,
सेठानी के मुँह मे
पंडित लंड घुसा रहे थे और मुँह
अपनी ओर खिच रहे
थे. सेठानी के मुँह से
चिपचिपा पानी निकल
रहा था, पंडितजी ने
अभी लंड फिरसे बाहर
निकाला और मेरे तरफ मुँह करके
पलंग पे बैठी
लड़की के मुँह मे
घुसाया और बाहर निकाला,
सेठानी को बुला के लंड
पे थूकने को बोला…
सेठानी लंड पे थूकने
लगी, और थूक से लंड
को पूरा गीला कर दिया,
पलंग पे सब थूक गिरने
लगी… अब
पंडितजी ने फिरसे लंड
लड़की के मुँह मे
घुसाया… वो नही
नही बोलने
लगी पर
सेठानी ने “कुछ
नही होता बेटा ये
अच्छा है …तुम्हे अच्छा लगेगा”
कहके उसका मुँह खुलवाके
घुसवा ही दिया लंड
मुँह मे…. फिर
पंडितजी ने
लड़की के मुँह के
अंदर ज़ोर्से धक्के मारना शुरू किया…
उससे लड़की
की साँसे फिरसे फूलने
लगी और वो थोड़ा थोड़ा
प्रतिकार करने लगी पर
पंडित लंड अंदर घुसाए
ही जा रहे थे…. अब
सेठानीने
पंडितजी
की टाँगो
बीच से आके
पंडितजी
की काली
मोटी तंगी
हुई गोतिया मुँह मे ले
ली और उनको लॉलिपोप
की तरह चूसने
लगी, चुसते चुसते
मुँह से थूक बाहर निकल के
फिरसे गटकने लगी…
पंडितजी इस क्रिया से
बहुत ही ज़्यादा गरम
हो गये होते भी क्यू
नही उनके सामने
एक ऐसी मदहोश
लड़की थी
जिसका बदन कूट कूट के यौवन से
भरा था और एक ऐसी
देवी थी
जिसने काम क्रीड़ा के
सभी प्रकारो
की बक्शी
प्राप्त की
थी…
सेठानी के मुँह से
टपकती लार
सीधे जाके
वकील बाबू
की लड़की
के पेट और घुटनो पे गिर
रही
थी….
सेठानी ने
अभी तक एक
ही काली
गोटी मुँह मे
ली थी पर
ये क्या अब मैने देखा तो
सेठानी ने
पाड़ितजी
की दोनो गोतिया मुँह मे
भर ली और ज़ोर ज़ोर्से
उनका रस चूसने
लगी…
सेठानी के लाल लाल
गुलाब के जैसे होठ और वो गोरा
चेहरा…. और मुँह मे
काली गोतिया वाह क्या
नज़ारा था मैं देख के मदहोश हो
रहा था… तभी
पंडितजी ने
लड़की की
बुर मे उंगली
डाली, वो पलंग पे सोई
अवस्था मे थी…
उंगली जैसे
ही अंदर
गयी तो
पंडितजी बोले “अरे ये
क्या इसकी बुर मे तो
किसीने
अभी
वीर्यादान किया है…”
इस बात को सुनके
सेठानी दंग रह
गयी क्यू कि वो
समझती
थी कि
वकील की
लड़की
अभी कली
है पर ये तो फूल
निकली,
सेठानी ने पंडित
जी से कहा “ये बाद मे
देखते है … पहले आप
अपनी क्रिया शुरू करो
वक़्त बहुत कम हैं…” ये सुनके
पंडितजी ने फिरसे
उसकी बुर मे
उंगली
डाली और निकलते
ही
उनकी उंगलिमे सफेद
गाढ़ा बहुत सारा रस चिपक के आया
ये देखकर पंडितजी
और मदमस्त हो गये और
लड़की की
बुर मे फिरसे उंगली
डाल के रस बाहर निकालने लगे…
उसकी बुर का मंज़ला
पूरा हिस्सा सफेद सफेद द्रव
उगल रहा था…. पंडितजिने
उंगली
सेठानी को चाटने को
दी,
सेठानीने
भी मस्त मज़े से उसे
चूसने लगी और आँखे
बंद कर करके रस का मज़ा लेने
लगी… उसे कहाँ पता
था कि जिस रस को चाट
रही थी
निगल रही
थी वो उसके बेटो का
ही था….
पंडितजी से
अभी रहा
नही जा रहा था..
पंडितजी का काला लंड
अभी बहुत ज़्यादा
फूल गया था पर लड़की
अर्ध निद्रा मे थी
इसलिए उसे इस चीज़
का ठीक से पता
नही चल रहा था…
पंडितजी ने
सेठानी के मुँह मे
अपने होठ डाले और
सेठानी के मुख रस को
लड़की की
चूत मे गिराया… उस वक्त से
लड़की की
चूत और चमकने
लगी…. अब
पंडितजी ने
लड़की को
अपनी तरफ खिचा और
अपना लाल काला सूपड़ा
उसकी बुर के पास
लेके गये… उसकी बुर
के गहरे हल्के
मखमल्ली बालो को
देख के उस लड़की को
अभी के
अभी चोदने का मन कर
रहा था… उन बालो के
बीच मे वो कोमल लाल
लाल सूजी हुई बुर को
देख के मॅन रोमांचित हो रहा था …
पंडितजी ने थोड़ा झुक
के लड़की
की बुर पे निशाना लगाया
सेठानी ने घुटनो के
बीच से आके
लड़की की
चूत के दो होठ थोडेसे अलग करके
उसपे थोडिसी थूक थोप
दी अब
पंडितजी ने सूपदे को
छेद पे रखा और थोड़ा
पीछे होके आगे
की ओर एक छोटसा
धक्का मारा उनका सूपड़ा ज़्यादा
चिकनाई की वजह से
उपर सटाक गया लगता था उन्होने
फिरसे निशाना लगाया और इस बार
हल्केसे अपने बल्ब के आकर
के सूपदे के मुँह को
लड़की योनि मे प्रवेश
करवाया.. लड़की
थोडिसी कराह
उठी… वैसे
ही सेठानी
घुटने के बीच से
निकल के लड़की मुँह
के पास आई और उसे पलंग पे सोई
अवस्था मे ही रखने
की कोशिस करने
लगी…
पंडितजी ने अब
थोड़ी साँस लेके फिरसे
सूपड़ा थोड़ा अंदर डाला
लड़की उठने
की कोशिश करने
लगी पर
सेठानी के उपर से थोड़ा
दबाव बनाते ही वो
नीचे सो
गयी..
पंडितजी ने अब थोड़ा
पीछे होके अपना
सूपड़ा बाहर निकाल के दोनो हाथोसे
बुर के होंठो को पकड़े रखते हुए
निशाना लगाके सूपड़ा बुर के अंदर
घुसा दिया … लगभग पूरा सूपड़ा अंदर
जा चुका था बस गाँठ
बंधनी
बाकी थी…
सेठानी ने
लकड़ी के मुँह पे
हाथ डाला हुआ था नहितो उस
चीख से लगभग सबको
पता चल जाता कि अंदर क्या होरहा
है …. अब पांडिजीने
लंड को अंदर दबाव देते हुए थोड़ा
दबाया, और सूपड़ा पूरा अंदर चला
गया…लड़की हाथ पाव
उपर नीचे करने
लगी पर
पंडितजी ने अपने काम
साध लिया था लड़की
अभी उनके गिरफ़्त से
बाहर नही निकल
सकती
थी..
पंडितजी ने
अभी अपने आप को
गति दी और लंड को
और अंदर डाला…
लड़की
पीठ उपर करके विरोध
करने लगी पर
पंडितजी और
सेठानी सुननेवालो मे से
नही थे
..पंडितजी ने अब
धक्के मारना शुरू किया आधे से
ज़्यादा लार टपकाते हुए उस कोमल
लालसुजी हुई बुर मे
घुस गया था…. और आधा बाद के
धक्के ने घुसा दिया
लड़की ज़ोर्से उठने
की कोशिश कर
रही थी
सेठानी ने बाजू मे
पड़ी तकिया उठा कर
उसके मुँह पे दबा दी
और पंडितजी जोरोसे
धक्का मारने लगे….
सेठानी ने
थोड़ेही पल मे तकिया
निकला लड़की
थोडिसी
ठीक हो
गयी थी
पंडित के धक्के चला रहे थे…
सेठानी इस पल का कूट
कूट के मज़ा ले रही
थी और
अपनी
पोती को चुदवा
रही
थी….
थोदीही
देर मे मैने देखा पांडिजी
हफ़फ़ रहे है उन्होने गति को
और बढ़ाया लड़की
सिकुड़ने लगी… और
धाप्प.. धाप्प्प….
पांडिजीने
लड़की की
चूत के अंदर अपना
वीर्य दान कर दिया… वो
उस कोमल लड़की
की काया पे ढेर हो गये
और उसके कोमल होंठो को चूमने
लगे…. थोड़ी देर के बाद
सेठानी ने
पांडिजी का लंड बुर से
बाहर निकाला वैसेही
काम रस भी बाहर
निकल आया उसे सेठानी
ने कमाल से चूसा और पूरा
पी लिया और काम रस
से भरे पंडितजीके लंड
को मुँह मे लेके चुस्के सॉफ करने
लगी……….

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:02 AM
Post: #15
RE: नौकरी हो तो ऐसी
सेठानी ने
अभी लंड अपने मुँह
मे से निकाला और
लड़की की
बुर से निकल रहे
वीर्य को चाटने
लगी..
अपनी
जीब को वो
लड़की की
बुर के कोमल होंठो को बड़े आराम
से अलग कर के अंदर डाल
रही थी
और उस वीर्य का
स्वादिस्त मज़ा ले रही
थी…
तभी
पंडितजी बोले “अरे चलो
यहाँ से नही तो कोई
आ जाएगा तो अपनी
पूरी योजना निष्प्रभाव
हो जाएगी और सबको
कानो कान खबर लग
जाएगी”
पंडितजी ने अपने लंड
को एक कपड़े से पोछते हुए कहा
, सेठानी
बोली “मेरी
शांति तो आपने की
ही
नही” तब पंडित
जी बोले “अरे
तुम्हारी शांति
अभी
अगली बार ज़रूर
करेंगे… बस इस
लड़की को
किसी बहाने इधर
ही छोड़ जाना.. बहुत
ही मजेदार
चीज़ है…”
तो सेठानी
बोली “अरे
नही बाबा इसे मैं यहा
रखूँगी तो इसे तुम चोद
चोद के रंडी बना दोगे…
और मैं सेठ जी को
क्या जवाब दूँगी…”
पंडितजी बोले
“ठीक है तो मैं
ही कुछ इंतज़ाम करता
हू हवेली पे फिर”
ये कह के पंडितजी
उस कमरे से निकल गये
सेठानी
अपनी
सारी ठीक
ठाक करने लगी और वो
भी निकलने
की तैयारी
करने लगी उसने
लड़की के कपड़े
ठीक करके उसके
उपर चादर डाल के बड़े आराम से
उसे सुला दिया जैसे कुछ हुआ
ही नही
पर सिर्फ़ मुझे ही
पता था कि पिछले 15 मिनट मे यहा
क्या हुआ था और कैसे हुआ था
ये सारी
जानकारी मुझे भविश्य
मे बहुत ही
उपयोगी
आनेवाली
थी ये मैं
भी नही
जानता था.
मैं जल्दिसे निकल आया और
अपनी जगह पे जाके
बैठने के लिए जल्दी
जल्दी चल दिया मैं
मंदिर पहुचा तो सब लोग खड़े थे
और आरती चल
रही थी
मैं भी चुपके से उनमे
समा गया और आरती
चल रही
थी.
राव साब ने एक महिला शिष्या
की सफेद
सारी मे अंदर
पीछे से हाथ डाला
हुआ था और पता
नही पर
उनकी हर्कतो से
मालूम पड़ रहा था कि वो
उसकी गांद को अच्छे
से मसल रहे थे. सारी
एक दम
ढीली हो
गयी थी
और ऐसा लग रहा था कि
किसी भी
क्षण गिर सकती
है… कॉंट्रॅक्टर बाबू और
वकील बाबू दोनो हस
रहे थे… वो महिला शिष्या गरम
हो रही
थी पर कोई ज़्यादा
ध्यान नही दे रहा था
मानो जैसे कुछ हो ही
नही रहा है इससे
पता चल रहा था कि इन लोगो
की इधर
कितनी
चलती है.
महा पूजा ख़तम हो
गयी थी…
सब लोग निकलने लगे और
अपनी
अपनी गाडियो मे जाके
बैठने लगे मैं इस बार
पहलिवाली
गाड़ी मे बैठ
नही पाया जिसमे मैं
आया था, मुझे सोभाग्यवश इस बार
घर की महिलाओ
की गाड़ी मे
बैठने को बोला गया…
गाड़ी मे ड्राइवर के
साथ एक महिला बीच
वाली सीट
मे तीन महिला और
पीछे मैं और 2 घर
की महिला ऐसे सब
मिलके आठ लोग बैठे थे..इनमे
सेठानी
नही
थी..
मैं समझ नही पा रहा
था कि सेठानी छोड़ के ये
लोग तो चार भाइयो की
चार बीविया
होनी चाहिए तो ये लोग
6 कैसे है?
पर मेरे इस सवाल का जवाब मैं
किसीसे
नही पूछ सकता था.
मैं शांति से पीछे बैठ
गया और मेरे सामने
वाली सीट
मे 2 घर की महिला
बैठ गयी जैसे कि लाइट
चालू नही
थी और रास्ता बहुत
ही खराब था कुछ
समझ नही आ रहा
था कि सामने कौन बैठी
है पर हां एक बात
थी कि मास्टर
जी की
बीवी
जिसको चोदते चोदते मैं ट्रेन से यहाँ
आया थॉ वो पिछली
वाली सीट
मे नही
थी वो शायद ड्राइवर के
बाजुवाली
सीट मे
थी…
मेरा लंड पूरा तन चुका था और हर
तरीके से उड़ने
की कोशिश कर रहा था
पर कोई भी दर्रार उसे
नही मिलने के कारण
वो हवा मे ही आग
उबल रहा था….
तभी मैने जाना कि मेरे
पैर पे किसी का पैर है
मैने चप्पल पहनी
थी, उस पैर मे चप्पल
नही थी
मैने सामने देखा तो कुछ समझ
नही रहा था कि
किसका पैर है…
उस पैर ने घिस घिस के मेरे पैर से
चप्पल उतरवा दी और
वो पैर अभी उपर उपर
चढ़ने लगा तभी मैने
पाया कि दूसरी और से
एक और पैर आया और जाँघो पे
ठहर गया. मैं अचंभे मे था कि रात
के एक बजे इन लोगो को इतना मज़ा
लेनेकी
पड़ी है…
मेरी जाँघॉपे जो पैर थॉवो
भी मेरे लंड तक
पहुच गया और मेरे लंड को
सहलाने लगा मैं पीछे
खिड़की से
पूरी तरह चिपक गया
और अपनी कमर को
नीचे छोड़ दिया जिससे
सामने वालो को शक नाहो कि
पीछे कुछ हो रहा है
तभी मैने सामने
होनेवाली हलचल से
भाँपा कि कोई अपनी
चोली के हुक खोल
रहा है. जैसे ही
हुक खोले मैने दो बड़ी
चुचिया बाहर निकली
पाई…. वाह मज़ा आ गया मुझे
चुचिया दिख नही
रही थी
पर उनका आकर देख के मुझे बड़ा
ही गरम लग रहा
था… तभी मैने पाया
एक हाथ मेरी गर्दन
की तरफ आया और
एक झटके मे मुझे उन चुचियो पे
खिसका के ले गया अगले
ही पल मेरा मुँह दोनो
चुचियो के बीच और दो
सीट के
बीच की
जगह मे घुटने के बल बैठा मैं…
मेरा मुँह पूरी
अच्छी तरह से चुचियो
मे दबाया जा रहा था
मेरी साँस तेज़्ज़ हो
गयी थी..
मैने अपना मुँह पीछे
करते हुए एक चुचि पे ध्यान देना
चाहा और एक चुचि को अपने मुँह
मे लेके चूसने की
कोशिश करने लगा मुझे बड़े दबाव से
चुचियो पे घिसे जा रहा था लग रहा
था कि इस ओरत ने पिछले 5-6
महीने मे सम्भोग
नही किया हो….
कुतिया की तरह
मेरी जान के
पीछे पड़ी
थी…
मैने थोडिसी साँस को
काबू मे किया और फिरसे चुचि को
चूसने की कोशिश करने
लगा मैने जैसे ही एक
चुचि की
गुलाबी निपल को अपने
मुँह मे लिया…वाह मज़ा आ गया…
क्या अचंभा था …उसमे से स्वादिष्ट
नमकीन मलाईदार दूध
निकल के आया इसका मतलब ये था
कि सेठ जी के घर मे
अभी 2-2 गाये बच्चे
जनि थी और दूध दे
रही थी…
मैने ट्रेन मे जो दूध पिया था उससे
भी ये दूध मुझे बहुत
अच्छा और स्वादिष्ट लग रहा था
मैने कस कस के चुचि को दबाना
चालू रखा और दूध को अपने मुँह
से खिचता चला गया
5-10 मिनट के दूध ग्रहण करने
के बाद मुझे दूसरी और
खिचा गया और जब मुझे पता चला तो
मैने पाया कि मेरी नाक
मे नोकिले बाल जा रहे है और मेरा
मुँह दूसरी महिला
की बुर पे टिका हुआ
है… उस बुर की वो
नमकीन सुगंध से मैं
और भी पागल सा हो
गया मैने भी
अपनी
जीब
निकाली और उस बालो
की जंगली
बुर मे डाल दी और उस
बुर के मोती को चूसने
लगा और अपनी
अदाकारी से
जीब को बुर के अंदर
ही अंदर डालने लगा…
मुझे बड़ा ही मज़ा आ
रहा था क्यू कि इतनी
रसीली बुर
मैने कभी
नही
चूसी थी…
बुर के होठ तो इतने कोमल थे कि
मैं उनको अपने दांतो के
बीच रखता तो
भी वो मेरे दांतो के
बीच से निकल जा रहे
थे उस कोमल और
रसीली बुर
ने मुझे पागल बनाया था मैं उसमे
और अंदर और अंदर
अपनी
जीब को घुसा रहा था
और उससे निकल रहे योनिरस को
पिए जा रहा था…
थोड़ी देर मे उस कोमल
योनि से अचानक एक कोमल मादक
रस की धार निकल
आई उससे मुझे पता चल गया कि
ये तो झाड़ गयी है…
उस औरत ने मुझे उपर उठाया और
मेरे होंठो को चूमने
लगी उधर
दूसरी ने मेरे पॅंट मे
हाथ डाल के मेरे काले साँवले
महाराज को बाहर निकाल दिया और
जोरो से हिलाना शुरू किया मैं इस
धक्के से अपने सीट
पे बैठ गया और वो महिला
बीच की
जगह मे घुटनो के बल
बैठी मेरा लंड अपना
मुँह घुसाए जा रही
थी और अपने पूरे बल
से मेरे लंड की
चमड़ी उपर
नीचे उपर
नीचे कर
रही
थी....

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:03 AM
Post: #16
RE: नौकरी हो तो ऐसी
सबेरे से देखी जा
रही इन सब घटनाओ
से मैं पहले ही चरम
सीमा पे था, इसलिए
मुझे पता था कि ये गरम हाथ जब
अपने लंड पे पड़ा है तो
अभी मैं इसे ज़्यादा
वक़्त नियंत्रण मे
नही रख सकता उस
औरत ने फिरसे मुँह मे मेरा लंड
लिया और जोरोसे उसे चूसने
लगी… मेरा बेलन इतना
बड़ा मूसल शायद ही
आधा उसके मुँह मे जा रहा था पर
होनेवाली गर्मिसे मुझे
अभी काबू जाता हुआ
नज़र आया अगले ही
पल मैने उस महिला के मुँह मे
अपनी गंगा जमुना
बहानी चालू
की और उसके सर को
अपने लंड पे जोरोसे दबाया…वो
भी कच्ची
खिलाड़ी
नही लग
रही थी
उसने भी अपने मुँह
से लंड को हरगिज़ बाहर
नही निकाला और पूरा
वीर्य निगल लिया….
इसके बाद हम तीनो
लगभग शांत हो गये… और
अभी गाव
भी लगभग
आही गया था तो हम
पीछे अपने कपड़े
सवारने लगे अगले 10 मिनट मे
हम लोग हवेली के
सामने थे……….
हवेली के सामने
उतरते ही सब लोग
अंदर चले गये. नौकर और ड्राइवर
जो कुछ सामान था वो लेके अंदर
जाने लगे. मैने अपने
शरीर से थोड़ा आलस्य
दूर किया और मैं भी
अंदर आ गया. सब के चेहरे पे
भारी नींद
दिख रही
थी. सब अपने अपने
कमरो मे सोने के लिए चल पड़े.
मुझे सेठ जी ने एक
कमरा दिखाया मैं उधर जाके गद्दे पे
लेट गया, कब आँख
लगी पता
ही नही
चला…..
सबेरे खिड़की से सूर्य
की शांत और
लुभावनी किरणें मेरे
चेहरे पे पड़ी तब मैं
थोड़ा सा जाग गया और
घड़ी मे वक़्त देखा,
सुबह के 7 बजे थे.. मुझे
पहलेसे ही कसरत
का शौक था. मैने उठ कर अपने
शरीर को उपर
नीचे दाए बाए मोडके,
फिर सूर्यनामस्कार किए और थोडा
उठक बैठक करके
अपनी कसरत को
पूर्णविराम दिया.
मैं नीचे आके सोफे पे
बैठ गया उतने मे उधरसे सेठ
जी आए और बोले
“तुम अभी नहा धोके
जल्दी तैय्यार हो
जाना… आज मुझे तुम्हे सब काम
कैसे चलता है और सब हिस्साब
किताब बताना है….”
और उन्होने आवाज़ लगाई “चंपा
….इन्हे जल्दी से
तैय्यार करदो…” सेठ
जी की
आवाज़ सुनते ही चंपा
अपने चूतादो को हिलाते हुए और
अपनी मस्त चुचियो को
हिलाते हुए आई और “हाँ सेठ
जी” कह के मुझे
अपने साथ चलने का इशारा करके
चली गयी.
मैं उसके पीछे
पीछे चला गया उसने
मुझे नाहने की जगह
दिखाई वो एक बड़ा सा कमरा लग
रहा था उसमे सब सुविधाए
थी… मैं अंदर जाके
नहा लिया और तैय्यार होके चंपा
के हाथ का बना नाश्ता कर के सेठ
जी के साथ निकल
गया…
सेठ जी के साथ
जीप मे बैठ के हम
लोग खेतो की ओर चल
दिए गाव से बाहर निकलते
ही सेठ
जी के सारे खेत दिखने
शुरू हो गये सेठ जी
बताने लगे “ये सब मेरे
पिताजी दादा और परदादा
की ज़मीन
है …इन लोगोने खूब मेहनत
करके ये ज़मीन अपने
नाम से जाने से रोकी
है …अभी लगभग
हम लोग 300-400 एकर के
मालिक है…. इसमे 100-200
कूल्हे है… लगभत 90 प्रतिशत
ज़मीन
बागायती है और
बाकी की
ज़मीन जानवर चराने के
लिए रखी है… मैं
चाहता हू कि तुम अब कारोबार पे
अच्छे से ध्यान दो… हमारे पहले
मुनीम जी
अच्छे से इस कारोबार को संभालते
थे पर अब तुम्हे ये सब देखना
होगा ” मैं हाँ करके मुँह हिला
रहा था सेठ जी
बोले“पहले
मुनीम्जी
अच्छे थे पर मेरे बेटे उन्हे
ठीक से हर एक काम
पे कितने रुपये खर्च हुए इसका
हिसाब किताब बराबर से
नही देते थे तो उन्हे
ज़रा परेशानी
रहती थी
….तुम्हे अगर कोई
भी
परेशानी आए तो तुम
मुझे बेझीजक बताना
पर हां हिसाब के बारे एक दम
बराबर रहना…” हम
अभी खेतो से निकल के
सेठ जी के कार्यालय
कीतरफ निकल पड़े…
जैसे कि मैं यूनिवर्सिटी
का ग्रॅजुयेट था और मैं एक
चार्टर्ड अकाउंट के
नीचे काम किया था…
मुझे हिसाब किताब मे किए
जानेवाली हर एक
चीज़ का
बारीकी से
ग्यान था और हिसाब मे
की गयी
कोई भी
लापरवाही या
मिलीभगत मैं यू पकड़
सकता था…..
हम कार्यालय पे पहुचे…
कार्यालय मतलब एक गोदाम था
जहाँ
मुनीमाजी
और सेठ जी बैठते थे
वहाँ पे बहुत सारे अनाज
की बोरिया
लगी हुई
थी करीब
1000-2000 अलग अलग
किस्म के अनाज की
बोरिया थी…पर उन्हे
बहुत ही अच्छे से
रखा गया था…बहुत सारे मजदूर
लोग वहाँ मौजूद थे जो साफ सफाई
और देखभाल के लिए रखे थे….
गोदाम पुरखो का और मजबूत लग
रहा था… उसकी हाल
ही मे पुताई
भी की
गयी हो ऐसे लग रहा
था …यही
मेरी काम
की जगह बनने
वाली थी
आजसे….
उधर ही गोदाम के
अंदर एक बाजू मे सेमेंट का बड़ा
उँचा एक बरामदा तैय्यार किया था
जहापे सब हिस्साब किताब
की पुस्तक और कापिया
रखी थी…
नीचे बैठने के लिए
तीन चार गद्दे और
लोड लगाए थे …..3-4 छोटे छोटे
मेज भी थे जहापे
मूंदी डाल के अच्छे से
हिसाब किताब कर सकते थे ….
हम लोग उधर आए और उस
बरामदे मे
सीडी से
चढ़ गये…. लगभग 20
सीडी चढ़
के हम बरामदे मे पहुच गये.
सेठ जी
अपनी मेज के पास
बैठ गये और मुझे बाजू बिठा के सब
हिसाब किताब समझाने लगे “ये ऐसा
है… वो वैसा है ..इस साल इतना
गेहू हुआ था ..उस साल उतना
चावल हुआ था….
इसकी
इतनी
उधारी है… उसके
उतने देने है… ये सब इसके बिल
है… ये पिछले साल के कूल्हे
बनाने का खर्चा है …ये सब
कामगारो की पगार के
हिसाब की पुस्तक
है… ”
सेठ जी 2 घंटे मुझे
सब बता और समझ रहे थे…
दोपेहर मे हम लोगोने खाना खा
लिया…उसके बाद आके सेठ
जी मुझे समझाने लगे
कि किधर क्या लिखना है और
किधर कौनसी पुस्तक
रखनी है…. हिसाब
किताब पुराने ढंग से किया हुआ था..
जिसके अंदर का अक्षर
भी एक दम चिडमिद
और गंदा था… एक बार मे कोई
चीज़ की
कीमत
जल्दी समझ
नही आ
रही थी…
बस एक चीज़
थी सेठ
जी एक बड़े
ज़मींदार के एक बड़े
व्यापारी भी
थे… वो अपना सारा अनाज व्यापारियो
को ना बेचते थे बल्कि बड़े जिले मे
बाजार मे जाके बाजार समिति मे लेके
सीधे बेचते थे इससे
उन्हे बहुत ही
ज़्यादा मुनाफ़ा मिलता था…
अभी शाम होनेको
थी. सेठ
जी भी
थोडेसे थके हुए दिख रहे थे…
लगभग 6 बजे हम
हवेली
की तरफ चल निकले
जो कि 25-30 मिनट
की दूरी पे
थी…
एक बात तो थी… सेठ
जी को मेरे बारे मे मामाने
बहुत काबिल लड़का है ये वो जो
तारीफ की
थी उससे मेरेपे बहुत
ज़्यादा भरोसा हो गया था.. और वो
मुझे एक नौकर की
तरह ना रखते हुए अपने बेटे
की तरह ख़याल रख
रहे थे.. उनका मेरे प्रति व्यवहार
देखके कोई ये नही
कह सकता था कि मैं उनकानौकर
हू…..
जब हम हवेली
पहुचे तो शाम का वक़्त हो चला
था… मैने देखा सेठ जी
क़ी छोटी
बहू मेरे सामने खड़ी
है मैने उसे देखा तो वो
बोली “ज़रा हमारे साथ
आओ हमे कुछ सामान लाना है
उसकी लिस्ट बनाना
है…” सेठ जी ने
कहा “अरे वो अभी
आया है थोड़ा आराम करने दो
उसके लिए चाय लेके आओ..”
छोटी बहू ने कहा
“ठीक है तुम मेरे
कमरे मे जाके बैठो..पहले माले पे
तीसरा कमरा… मैं
तुम्हारे लिए चाय लेके
आती हू…..”

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:03 AM
Post: #17
RE: नौकरी हो तो ऐसी
मैं सूचना अनुसार उस कामरे मे जाके
बैठा. कमरे मे पालने मे बच्चे को
सुलाया था… मैं यहाँ वहाँ देख रहा
था उतने मे वो चाय लेके आई और
मेज पे रख दी और
दरवाजा ठप से बंद कर दिया… और
सीधे आके अपने
चूतादो को मेरे से सटा कर बैठ
गयी बोली
“कहाँ थे तुम.. मैं कब्से तुम्हे
ढूँढ रही
थी” मैने बोला “सेठ
जी के साथ काम
पर….” मैं बोल ही
रहा था कि छोटी बहू
ने मेरे हॉटोपे अपने होठ टिका दिए
और मेरे निचले होटो को अपने
मुँह के अंदर लेके चूसने
लगी अभी
उसकी
जीब मेरे मुँह मे
गयी और हम एक
दूसरे की
जीब चूसने लगे.. वाह
क्या मज़ा आ रहा था उसके वो
कोमल और गरम होठ मेरे
शरीर मे रोमांच पैदा कर
रहे थे.. मैने उसकी
चुचियो को हाथ मे ले लिया और
हल्केसे सारी बाजू
करके सहलाने लगा…. वो मेरे और
करीब आ
गयी और मेरे
शरीर से पूरा चिपक
गयी….
मैने हाथ उसके चूतादो पे घुमाने
शुरू किए …इन चूतादो को मैने ट्रेन
मे अच्छे से मला था…
भारी भारी
चूतादो पे हाथ घुमाने से मेरे अन्ग
अन्ग मे रोमांच भरने लगा मैं
छोटी बहू को और
अपनी
छाती मे दबाने लगा और
अपनी लार उसके
मुँह मे और उसकी
लार मेरे मुँह मे जीब
से अंदर बाहर करने लगे….. मैने
पीछेसे
सारी को थोड़ा खिसका के
उसके नंगे चूतादो को पकड़ा और
सहलाने लगा वाह मैं तो सातवे
आसमान पे था… मैने
पीछेसे एक
उंगली
छोटी बहु
की गांद के छेद पे
रखी और उसे अच्छे
से मसल्ने लगा… वो
बोली “उधर मत
जाना….” मैं बोला “कुछ
भी तो
नही किया बस
रखी है…” और मैं
फिरसे धीरे से गांद के
छेद पे अपनी
उंगली मलने लगा…. मैं
उंगली अंदर
डालनेकी कोशिश कर
रहा था.. पर गांद ज़्यादा
ही
चिपकी थी
इसलिए जल्दी अंदर
नही जा
रही थी..
छोटी बहू
की गांद मारना ये
मेरी ट्रेन के सफ़र से
ख्वाहिश रही
थी पर उसने मुझे मौका
ही नही
दिया था पर यहाँ मैं तो उसे चोदने
ही वाला था… मैने
अभी छेद के बराबर
बीचो बीच
उंगली रख के अंदर
घुसाई… वो कराह
उठी…
बोली “मत डालो
उधर…. दर्द होता है बहुत”
इतने मे पालने मे सोया बच्चा रोने
लगा…. वैसे ही वो
मुझसे अलग हो गयी
और बच्चे को उठा कर
अपनी गोद मे लेके
गद्दे पे बैठ गयी…
उसने अपनी
चोली खोली
और एक चुचि बच्चे के मुँह मे
दी और बच्चा शांत हो
गया
मैने कपड़े ठीक करते
हुए पूछा “तुम मुझे घरके
बाकी लोगोसे कब
मिलवाने वाली हो”
वो बोली “क्यू
उनकी गांद मे
भी उंगली
डालनी है क्या”
मैं बोला “ठीक है जैसे
तुम्हारी
मर्ज़ी” मैं उसके बाजू
मे जाके बैठ गया और
उसकी
दूसरी चुचि को सहलाने
लगा वैसे ही....
छोटी बहू
बोली
“नही
ठीक है
बताती हू….” वो बच्चे
को दूध पिला रही
थी उसकी
चुचिया बड़े बड़े टमाटर
की तरह लाल लाल
दिख रही
थी…
वो बोली “घर मे बहुत
लोग है तुम्हे एक बार मे याद
रखना मुश्किल होगा…इसलिए जैसे
जैसे तुम यहाँ रहोगे तुम जैसे
उनसे मिलोगे वैसे मैं तुम्हे उनके
बारे मे बताती जाउन्गि”
मैने बोला “पर हर समय तुम
थोड़िना हर मेरे साथ
रहोगी ये बताने के लिए
कि ये कौन है वो कौन है….”
वो बोली
“ठीक है तो सुनो….
जैसे कि तुम जानते हो…सेठ
जी घर के मुखिया
है..सब उनका बहुत आदर
सन्मान करते है उनसे डरते
ही है …और
सेठानी जी
जो हमारी सास है पर
हमसे ज़्यादा प्यार
करती है…. उनके
चार बेटे और एक बेटी
है … चार बेटे जैसे कि रावसाब,
वकील बाबू, कॉंट्रॅक्टर
बाबू और मेरे पति मास्टर
जी…. एक
बेटी है जिसका पति
इतना अमीर ना होने
के कारण वो पति के साथ
यही
रहती है”
मैं बोला “अच्छा….”
वो बोली “रावसाब
ज़्यादातर खेती काम
देखते है… और गुलच्छर्रे उड़ाने
मे लगे रहते है…वैसे
सभी गुल्छर्रो मे
ही लगे रहते
है….तो रावसाब के दो
बीविया है उनको
पहली
बीवीसे
संतान नही हुई
इसलिए उनकी
दूसरी शादी
करदी गयी
पर हां उनकी
पहली
बीवी
दूसरी से बहुत सुंदर
है…. उन्हे दूसरी
बीवी से
एक लड़का और एक
लड़की जो
अभी तक पढ़
रही है… उनके
लड़के की
शादी 1.5 साल पहले
हुई और अंदर की
बात ये है कि उसकी
बीवी
अभी पेट से है
लगभग तीसरा
महीना चल रहा
है…”
वो बोलते जा रही
थी “इसके बाद है
वकील बाबू
जिनकी एक
ही
बीवी है…
उनको तीन लड़किया
है ..जिसमे से बड़ी
की पिछले साल
शादी हो
गयी है.. और दो
छोटी लड़किया
अभी
कुँवारी है और
अभी
पढ़ती है…
उनकी
बीवी
बोलती है कि हमे दो
ही चाहिए
थी..ये
तीसरी
निरोध फटने से हो
गयी… और पता
ही नही
चला कब दिन चले गये….” मैं
हसने लगा
छोटी बहू मुस्कुरा के
बोली“उसके बाद
कॉंट्रॅक्टर बाबू जिनकी
भी एक
ही
बीवी
है…. उन्हे एक बड़ा लड़का और
एक लड़की है दोनो
भी कुंवारे है…और
पढ़ाई करते है”
“उसके बाद तो मेरी
और मास्टर जी
की जोड़ी..
जैसे के तुम जानते हो…. और
हमारा ये एक लाड़ला“ उन्होने
बच्चे के गाल की एक
पप्पी लेते हुए कहा
मैने पूछा “और सेठ जी
की बेटी
का क्या जो यही
रहती है…”
वो बोली “हाँ वो
भी है ना… वो अपने
पति के साथ यही
रहती है…उन्हे
एक बड़ी
लड़की और लड़का है
जो अभी पढ़ रहे है”
मैं इतना बड़ा परिवार
अभी तक
कही
नही देखा था…
अभी लगभग 7.30
बज रहे थे और खाना खाने का
टाइम हो गया था… सब लोग सिवाय
सेठ जी और
सेठानी के, खाना खाने
के लिए रसोईघर मे आ गये… रसोई
घर बहुत ही बड़ा था
और उधर 3-4
नौकरानी
खड़ी
थी…. नौकरानिया
भी एक से एक
खूबसूरत और भरी
हुई थी…मुझे पूरा
यकीन था कि रावसाब
और बाकियोने इन सुंदरियोका मज़ा
ज़रूर चखा होगा….राव साब हाथ
धोने का बहाना करके रसोईघर के
पीछे जाने लगे और
जाते जाते एक नौकरानी
की चुचि को ज़ोर्से
चुटकी निकाल
ली, हाथ धोके वापस
आ गये…. सब लोग बैठ गये राव
साब, वकील बाबू,
कॉंट्रॅक्टर बाबू और मास्टर
जी और मैं एक साथ
एक साइड बैठ गये और हमारे
सामने बाकी लोग बैठ
गये तभी घर
की सारी
औरतो ने रसोईघर मे प्रवेश किया.
एक से एक बहुए थी
सेठ जी
की …. मा कसम क्या
रूप था उनका….सफेद
देसी घी
की तरह उनका वो
रंग… वो बड़ी
बड़ी चुचिया…मैं तो सोच
रहा था कि इनकी बुर
कैसी
होगी, उनके चुतताड़ो
पे मैं अपना लंड घीसूँगा
तो क्या स्वर्ग आनंद आएगा....
मेरा मन खाने से उड़के इनको चोदा
कैसे जाए इस सोच मे लग गया. मैं
सिर्फ़ छोटी बहू को
जानता था और सेठानी
को… बाकी सबके लिए
मैं अंजान था… पर
सेठानी ने
सभी महिलाओ को मेरे
बारे मे बताया था इसलिए मुझे सब
जानते थे शायद….
हमारे सामने ताइजी के
पति भी बैठे थे वो शांति
से खा रहे थे… लग
ही नही
रहा था कि ताइजी के
पति है वो रूपवती और
ये छिछोरा…. मतलब रंग रूप मे वो
गोरा था पर शरीर
एकदम मध्यम था इसलिए
ताइजी को जच
नही रहा था….
खाना खाते खाते बहुत मज़ा आ
रहा था जब भी कोई
रोटी परोसने आता था तो
मैं अपनी
मुंदी उपर करके
उनकी
चोली के अंदर झाँक
कर रसीली
चुचीयोको हल्केसे
देखता था…और जब
जाती थी
तब उनके चूतादो को निहार रहा
था… मेरा लंड इस वजह से संभोग
क्रिया पूर्व ही
पानी छोड़ रहा था
तभी कॉंट्रॅक्टर बाबू
बोले- “खाने मे आज क्या है…”
ताइजी
बोली- “आम का रस…
और लस्सी है और
भी बहुत कुछ है.”
कॉंट्रॅक्टर बाबू ताइजी
जो उनकी बहेन
थी उनसे बोले “आम
का रस है फिर मीठा तो
होगा ज़रूर”
ताइजी
बोली- “एक बार चख
के देख लो….. पता चल जाएगा
मीठा है या कड़वा…”
कॉंट्रॅक्टर बाबू- “2 दिन पहले
ही चखा था
इन्ही आमो का रस…
बहुत ही
मीठा लगा था तुम्हारे
आमो का रस…”
रसोई घर मे बैठे और खड़े
सभी इस संभाषण को
भली भाँति समझ रहे
थे और मन ही मन
मुस्कुरा रहे थे….

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:04 AM
Post: #18
RE: नौकरी हो तो ऐसी
उतने मे राव साब की
पहली
बीवी
रूपवती
बोली- “हमने आज
अपने हाथो से लस्सी
बनाई इसे भी चख के
देख लो…
मीठी है
या नही ”
उसपे कॉंट्रॅक्टर बाबू आम रस
पीते हुए बोले- “अरे
पहले आम को तो चखने दो..
इतनी भी
क्या जल्दी है…
ताइजी के हाथो के
आम रस का मज़ा ही
कुछ और है…...
लस्सी भी
पी लेंगे…. ”
वकील बाबू- “हमे
बहुत पसंद है
लस्सी ज़रा हमे
भी पिला दो
बड़ी
भाभिजी… वैसे कैसे
बनी है
लस्सी
गाढ़ी है या
पतली है…”
रूपवती –
“लस्सी के आप तो
खूब दीवाने है ये कौन
नही जानता… वैसे
आपकी
लस्सी से ज़्यादा
गाढ़ी
लस्सी कोई
नही बना सकता ”
वकील बाबू- “हम
कहाँ भाभिजी…..यहा
हम से भी बड़े बड़े
दीवाने है जो
लस्सी के प्यासे रहे
है….”
अब सब हसने लगे मुझे कुछ
समझ रहा था कुछ
नही….
इस बातचीत के कारण
मैं अभी कई लोगोको
जानने लगा था …ताइजी
जो सेठ जी
की
एकलौती
बेटी थी वो
कोई अप्सरा से कम
नही
थी…
उसकी एक एक चुचि
2-2 किलो के तरबूज के बराबर
थी और उनका वो
पारदर्शक सारी मेसे
दिखने वाला सुंदर पेट …. मेरा लॉडा
खाना खाते हुए ही
बड़ा हो रहा था…
ताइजी का ख़ासकर
मेरी तरफ ज़्यादा ध्यान
था और ये बात छोटी
बहू ने भाँप ली
थी… मैं जब
भी उपर देखता वो मुझे
हल्केसे आँख मारती
और मैं नीचे देखने
लगता…
तभी मैने देखा
वकील बाबू
की मझली
लड़की रसोईघर के
अंदर आ गयी… वो
नलिनी थी,
वही
नलिनी जिसे खुद के
बापने वकिलबाबू ने
चलती
गाड़ी मे राव साब ने चोदा
था और बाद मे पंडितजी
ने… उसका वो गदराया बदन और
चुतताड एक लय मे हिल रहे थे
पर मैने देखा कि उसे चलने मे
थोड़ी
तकलीफ़ हो
रही थी
वो धीरे
धीरे पाव उठा कर चल
रही थी…
ये सब कल की चुदाई
का परिणाम था… बेचारी
को कल 3 भारी
भरकम काले घोड़ो की
भूख शांत करनी
पड़ी थी….
नलिनी
धीरसे नीचे
बैठ गयी
नीचे बैठते समय
उसके मुँह पे पीड़ा
जनक भाव दिख रहे थे….
हम लोगो का भोजन होने के बाद
घर की
सभी महिलाओ ने
भोजन कर लिया और सब लोग
अपने अपने कमरो की
तरफ चल पड़े……
मैं अपने कमरे के तरफ जानेवाला था
कि मुझे कॉंट्रॅक्टर बाबू
की छोटी
लड़की
मालंबंती ने पूछा “आप
कौन है” मैं उसके सामने गया और
बोला “मैं इस घर मे काम करता
हू..”
मालंबंती
की चुचिया छोटे छोटे सेब
की तरह
थी और उस टांग
कमीज़ के अंदर से
बाहर आने के लिए तरस
रही
थी..उसने
कमीज़ के अंदर कोई
अन्तवस्त्र नही
पहना होने के कारण उसके छोटे
छोटे अंगूर के जैसे चूचुक(निपल्स)
का आकार मेरे लंड को फिरसे खड़ा
कर रहा था
मालंबंती ने पूछा “कैसा
काम…”
मैं – “जो भी तुम
कहो वो काम”
मालंबंती – आप सब
काम करते हो क्या आपको
कहानी सुनाना आता
है”
मैं अर्श्चर्य मे पड़ गया इस उमर
मे भला ये कहानी
सुनने की बात क्यू कर
रही है
तभी वहाँ पे
नलिनी और
नसरीन
(वकील बाबू
की सबसे
छोटी
लड़की) चहल
पहल करते हुए आ
गयी.
नसरीन एक दम
मालंबंती के
जैसी
दिखती
थी.. उसने
भी तंग
कमीज़
पहनी
थी.. उस वजह से
उसके चूचुक(निपल्स)
भी नमस्ते कह रहे
थे और हमारे लंड महाराज भड़क
रहे थे… मेरी पॅंट को
अगर कोई ठीक से
देखता तो जान जाता कि मैं किस हाल
से गुजर रहा था….
नसरीन
बोली “अरे वाह आप
हमे कहानी
सूनाओगे.. आपको
आती है
कहानी..”
मैं उसकी
पीठ थपथपाते हुए
बोला- “हां आती है
और मैं तुम्हे सबको
कहानी सुनाउन्गा”…
ज़रूर सुनाउन्गा और मैने उसके गाल
पे हाथ पे रख के ईक
चिमती काट
ली…
नलिनी
बोली- “चलो ना हमारे
कमरे मे हमे कहानी
सूनाओ ना…”
उतने मे उधर ताइजी
अपनी
सारी के पेड्र को
ठीक करते हुए और
अपने सुंदर पेट पर धकते हुए
आई और बोली
“लड़कियो तुम सब सो जाओ कल
तुम्हे सुनाएँगे ये
कहानी…”
सब लड़किया एक सूरमे
बोली
“नही
अभी
सुननी है
कहानी ..”
ताइजी
बोली
“नही आज
नही कल…सोने जाओ
तुम लोग अभी ”
लड़किया ना चाहते हुए
भी अपने अपने कमरे
मे चली
गयी… मैं उनके मस्त
मस्त चूतड़ देखते रह गया… ये
मेरे खड़े लंड पे वार था…
ताइजी मुझे देखकर
बोली “तुम किधर
सोवोगे”
मैं – वही जहाँ मैं
दोपेहर मे सोया था
ताइजी – अरे
नही वहाँ तुम
नही सो सकते… उस
कमरे मे मैने आज समान रखवाया
है
मैं – तो फिर........कहाँ........
ताइजी – तो एक काम
करो मेरे कमरे मे दो पलंग है..
तुम एक पे सो जाना
मेरे लंड ने ये सुनके फिरसे लार
टपकानी शुरू
करदी, फिर
भी मैं बोला
मैं – पर….
ताइजी – अरे शरमाओ
नही… आ जाओ
अब आदेश तो आदेश…वैसे
भी अकेले सोने से
अच्छा किसिके साथ सोना चाहिए
चुदाई के ज़्यादा आसार रहते है...
मैं ताइजी के
पीछे उनके मुलायम
सारी के अंदर के चूतादो
का नाप लेते लेते उनके साथ पहला
माला चढ़ने लगा, जैसे
ही वो पैर उपर
रखती चूतड़ मस्त सुर
ताल ले मे हिलता और मज़ा आ
जाता….
मैं – आपका कमरा कौन्से माले पे
है
ताइजी –
तीसरे माले पे
मैं – इतना उपर क्यू
ताइजी – मुझे पसंद
है…. उपर शान्ती
होती है और उपर से
सब गाव भी दिखता है
ठंडी हवा
आती है इसलिए
हम एक बड़े कमरे मे पहुच
गये…कमरे मे दो
दीवान-पलंग, एक
बड़ी मेज, 2-3
कुर्सियाँ, सजने सवरने के लिए एक
बड़ा आयना बहुत कुछ था….
ताइजी ने दूसरे पलंग
पर पड़ा हुआ बिस्तर थोड़ा
ठीक ठाक किया मैं
वही खड़ा उनके दूध
को और चूचुक(निपल)
की मस्ती
को देख रहा था… वो चादर डाल
रही थी…
इससे उनकी चोलिसे
उनके मुलायम दूध बाहर
आनेकी नाकाम कोशिश
कर रहे थे… वो पीछे
पीछे आ
रही थी…
अचानक उनकी
बड़ी गांद मेरे जाँघोसे
टकरा गयी…
ताइजी – अरे मैने देखा
ही
नही… माफ़ करदेना
मैं – अरे माफी क्यू..
आप हम से बड़े हो ऐसा मत
बोलिए
ताइजी – (हस के)
ठीक है… (और
बिस्तर ठीक करने
लगी)
वाह क्या चेहरा था क्या रुतबा था
उस अदा मे, क्या
कम्सीन अदा
थी …
सेठानी की
पूरी
जवानी और
गरमी
ताइजी मे
उतरी
थी… जब वो रास्ते से
चलती
होगी तो सबके लंड
लार ज़रूर टपकाते होंगे…

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:04 AM
Post: #19
RE: नौकरी हो तो ऐसी
ताइजी – ये हो गया
तुम्हारा बिस्तर तैय्यार
अभी तुम सो सकते
हो आराम से..( उन्होने हॅस्कर
कहा)
मैने हां भरी और
पलंग पर गिर गया…
ताइजी
बोली –
थोड़ी ही
देर मे रमिता, रजिता के
पिताजी भी
आ जाएँगे
मैं – रमिता, रजिता????
ताइजी – ये
मेरी दो
प्यारी और नटखट
बेटियाँ है…जल्द ही
मिलवाउंगी मैं तुम्हे
उनसे… मैं नीचे जाके
आती हू तुम सोजाओ
और कुछ लगे तो चंपा को आवाज़
देना
ताइजी
नीचे चली
गयी… मेरा मान आज
सेठानी और
छोटी बहुको बहुत
याद कर रहा था और याद कर रहा
था वो हर एक पल जो मैने
उनकी चुदाई करते
हुए ट्रेन मे बिताए थे… पर यहा
मुझे जागरूक रहना था.. सब
परिस्तिथि का अंदाज़ा लेने के बाद
ही मैं अपना
असली रंग दिखानेवाला
था क्यू कि किसिको पता
नही चलना चाहिए था
कि मैं क्या चीज़ हू
नहितो मेरी
पूरी
आमदनी,
नौकरी और पता
नही क्या क्या जाना
संभव था…
मैने आँख बंद की पर
लंड महाराजा चादर को
अपनी करतूतो से उपर
उठा रहे थे… मैने उपर हाथ रखा
पर इससे वहाँ पहाड़ बन गया…
मैं एक बाजू पे सोने की
कोशिश करने लगा पर वैसे मुझे
जल्दी
नींद नही
आती
थी….
लगभग आधा पौना घंटे के बाद कमरे
मे किसीकि आहट
हुई… दरवाजा बंद हुआ मैं जाग
रहा पर आँखे बंद
थी… मैने हल्केसे
आँखे मिचमिची करके
देखा कोई आदमी था…
वो मेरे दीवान के पास
खड़ा रहा.. काफ़ी
अंधेरा था… वो 2-3 मिनट खड़ा रहा
और फिर दरवाजा बंद करके मेरे
पलंग पे बैठ गया.. मेरे मुँह
की अपोजिट दिशा मे…
अब हल्केसे उसने
मेरी गांद पे हाथ रखा
और उसे सहलाने लगा… मैं अंदर
हॅकबॅक्का रह गया… मुझे इस
तरह कभी
किसी पुरुष ने स्पर्श
नही किया था… पहले
तो मुझे बहुत गुस्सा आया पर थोड़ा
अच्छा भी लगने लगा…
वो गांद को सहलाते सहलाते
मेरी जाँघो तक पहुच
गया और उन्हे सहलाने लगा..
मेरे मन मे एक
गुदगुदी होने
लगी… मुझे पता
नही पर मज़ा आ
रहा था….
तभी उसने मेरा एक
हाथ पकड़ा मैने भी
पता नही क्यू…
बेझिझक अपना हाथ
ढीला छोड़ दिया.. और
अपनी
चड्डी मे घुसा दिया और
मेरे हाथो को अचानक से कुछ गरम
लगा.. वो उसका लंड था.. वो मेरा
हाथ उसके लंड पे रखके उपर से
अपना हाथ रख के हिलाने लगा…
उसका लंड बड़ा ही
छोटा लग रहा था पर गरम बहुत
था… मेरा लंड पूरा तन गया था पर
इसका बिल्कुल ही
छोटा सा क्यू था… उसका लंड गरम
तो लग रहा था पर
अभी भी
सोया हुआ था और बहुत
ही छोटा, बस
करीब 2 इंच तक का
लग रहा था…
वो दीवान से उठा और
फिरसे दरवाजे की तरफ
जाके एक बड़ी
कील को दरवाजे मे घुसा
के अच्छे से बंद कर लिया…. वो फिर
मेरे पास आके दीवान पे
बैठा और चादर को मेरे मुँह
की तरफ धकेला…
मुँह पे पूरी चादर
थी मेरा मुँह पूरा ढका
गया.. मैं कुछ समझ
नही पा रहा था…
उसने एकदम फटाक से
मेरी पॅंट को
नीचे खिचा…. फिर मेरे
निक्कर को भी
नीचे खीच
के मेरे काले पहाड़ को हाथ मे ले
लिया और गपक कर मुँह मे भर
लिया… मैं दंग रह गया पर मज़ा आ
गया…वो बहुत ही
कसा हुआ खिलाड़ी
मालूम हो रहा था उसने पूरा लंड
एक ही बार मे मुँह
मे ले लिया और अपने मुँह मे अंदर
तक घुसा दिया.. मेरा पूरा लंड मुँह
मे जाने की वजह से
उस की साँसे फूल
गयी और कुछ पल बाद
उसने आधे अधिक उसे बाहर
निकाल दिया…. और
अपनी लार उस पे
टपका के चाटने लगा मैं सातवे
आसमान पे था मुझे
नही पता था कि
आदमी भी
औरत का मज़ा दे सकता है… वो
मेरे सुपरे की
चमड़ी अपने मुँह के
अंदर बड़ी
आसानी से उपर
नीचे करके
अपनी
जीब से घिस रहा था….
अब वो मेरी गांद के
नीचे हाथ डाल के मेरे
निचले शरीर को उपर
उठाते हुए लंड को मुँह मे अंदर
ही अंदर भर रहा
था… मेरा बालो का जंगल
उसकी नाक मे दस्तक
दे रहा था… उसकी
साँसे फूली जा
रही थी
पर रुक ने का कुछ भी
नाम नही था…
घ्घ्घ्घ्ग्गाअताक्क्क….
गुपप्प्प्प….गाअत्ट….गगगगगगगग
गुपप्प्प गुपप्प्प्प्प्प्प्ुउुुऊउक्
ककककककक…
गगगगगगज्गगगग्गगुउुुुुउउप्प
आवाज़े आ रही
थी …मैं अपने आप को
पूरी तरह नियंत्रण मे
रखे हुए था
इतने मे उसने मेरे काले घोड़े को
मुँह से निकाला और
मेरी गोटियो को हाथ मे
पकड़ के उनको तान के उनपर
थुका.. और अपनी
जीब उन पर फेरने
लगा.. जीब फेरते फेरते
उसने मेरी दोनो गोटियो
को मुँह मे भर लिया और उनके
साथ मुँह मे मस्ती
करने लगा… जैसे वो गोटियो के साथ
पकड़ा पकड़ी का खेल
रहा हो मेरी गोटियो को
बहुत ही मस्त
मस्साज़ मिल रहा था….. गोतिया
बाहर निकाल के वो मेरे मुण्ड पे
थूकने लगा उसकी वो
गाढ़ी थूक को वो फिर
चाट के पूरे लंड पे पसार देता…. मेरा
अभी रुकना नामुमकिन
के बराबर था.. इतने मे उसने
अपनी नाक
मेरी दो
गोटी के
बीच की
चमड़ी पे रगड़ना शुरू
किया और एक हाथ मेरे सूपदे
की चमड़ी
को हिलाने लगा.... उसका वो कोमल
चेहरा मेरे लंड महाराज से टकराने
लगा … मेरा नियंत्रण
अभी छूटने वाला था…
तभी उसने फिरसे मेरा
लंड मुँह मे भर लिया और चूसने
लगा… मैं चरम सीमा
लाँघ चुका था… मैने
अपनी मलाई उसके
मुँह के अंदर ही
छोड़ना चालू किया…. वैसे
ही उसने मेरे लंड से
निकलती
पूरी मलाई को अपने
जीब पे जमाए रखा
और धीरे से निगलने
लगा…..वो निगलता गया और मैं
छोड़ता गया… मा कसम क्या मज़ा
आया था…. उसने मेरे लंड को
पूरी तरह चाट लिया….
तभी
किसीकि दूर से आहट
सुनाई दी उसने
मेरी पैंट और
चड्डी को उपर उठा
दिया और मेरी चादर
ठीक कर
दी. और फाटक से
जाके दरवाजे से कील
निकाल ली और जाके
बाजुवाले दीवान पे सो
गया…
मैं अभी संभल गया था
और कुछ समझ पा रहा था…
इसका मतलब ये था कि रमिता और
रजिता का बाप था ये…
ताइजी का पति
परमेश्वर.. पर ये तो लंड
की तलाश मे था… मेरे
सर मे बहुत सारे प्रश्नो का
कोलाहल मच गया….
उतने मे दरवाजा खुला और
ताइजी अंदर आ
गयी. उन्होने मेज पे
रखी
मोमबत्ती जला
दी…
मोमबत्ती के प्रकाश
मे ताइजी का वो चिकना
चेहरा, टमाटर जैसे लाल लाल गाल
और चुचिया अति उभरकर दिखने
लगी… उन्होने सफेद
ब्लाउस को ठीक किया…
मैने पीछेसे देखा तो
मुझे ब्लाउस के अंदर का
अंतरवस्त्र(ब्रा)
कीपत्तिया
नही
दिखी मतलब
ताइजी ब्रा निकाल के
आई थी… लाल
सारी और सफेद
ब्लाउस मे वो काम की
देवी दिख
रही
थी…. उनके माथे का
सिंदूर तो और भी चमक
रहा था….
ताइजी ने बाल खोल
दिए…उनके वो लंबे बाल
ठीक गांद के उभार तक
जाके गांद से चिपक गये ..
ताइजी अपने पति के
बाजू दीवान पे लेट
गयी…..
ताइजी का पति
खिड़की के बाजू मे था
उनके बाजू ताइजी और
दूसरे दीवान पे मैं था…
उन्होने लेटते ही
अपनी
सारी का पल्लू उन्होने
अपनी चुचियो से हटा
दिया.. और मैं देखते रह गया….
क्या दूध थे… एक से एक …
तरबूज की तरह…
पूरा दिन उनमे मुँह घुसाए रखो
ऐसे….एक दम कड़क और
मोटे….सीधी
पीठ पे सोने से वो
पहाड़ के जैसे उँचे उँचे ….चुचियोसे
चूचुक आसमान को पुकार रहे थे ..
चूचुक(निपल्स) बड़े बड़े
गुलाबी
गुलाबी अंगूरो
की तरह दिखने
लगे…. ताइजी
अभी मेरे बाजू मुँह
कर के सोई… वैसे उनके वो दोनो
चूचुक मेरे तरफ निसाना करके मुझे
निमंत्रित करने लगे…. इससे मेरे
लंड महाराज फिरसे उठने
की कोशिश करने लगे
और इससे थोड़ा मेरे लंड को दर्द
होने लगा.
मुझे रसोई घर की बात
याद आई.. कंटॅकटर बाबू
की आमो
वाली बात…. कॉंट्रॅक्टर
बाबू अपनी बहेन को
कहते कहते कह गये कि दो दिन
पहले ही आम खाए
थे… क्या इसका मतलब कॉंट्रॅक्टर
बाबू जो ताइजी के सगे
भाई थे वो ताइजी
की बुर चोदते थे…. इन
सबका मुझे पता लगाना था…
उन्होने रसोईघर मे सबके सामने
जब यह बात कही
थी तब
वकील बाबू और
रावसाब भी मुस्कुरा
रहे थे इसका मतलब क्या ये
तीनो
भाई….???????????????
तभी
ताइजी के पति
दीवान से उठे और जाने
लगे………..

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
10-04-2016, 10:05 AM
Post: #20
RE: नौकरी हो तो ऐसी
ताइजी –
इतनी रात गये कहाँ जा
रहे हो…………….
ताइजी के पति – मैं
ज़रा नीचे जाके सोने
की कोशिश करता
हू…………
ताइजी – क्यू क्या
हुआ यहाँ…………….
ताइजी के पति –
नही यहाँ मुझे
नींद नही
आ रही………..
ताइजी – अरे अच्छे
ख़ासे तो सोए थे यहाँ……………..
ताइजी के पति –
नही आँख खुल
गयी फिरसे…. बहुत
देर बाद लगी
थी… मैं
नीचे ही
सोता हू
ताइजी –
ठीक है….
मेरे मन मे आनंद की
धाराए बहने लगी
थी…
ताइजी और मैं अकेले
कमरे मे, इससे मुझे बुर चुदाई
की आशा
बढ़ती लग
रही
थी…….
10-15 मिनट तक जब कुछ
हलचल नही
दिखी तो मेरे लंड
जी शांत हो गये और
मुझे नींद
भी आने
लगी थी
और मैं सो गया….
अचानक आधी रात को
मुझे कुछ गिरने की
आवाज़ सुनाई दी… मैने
चादर मुँहसे हल्केसे हटा के
देखा तो कमरे की
छोटी बल्ब जल
रही थी
… मैने देखा कोई
शीशी का
ढक्कन उठा रहा था….
शरीर से देखा जाए तो वो
कॉंट्रॅक्टर बाबू ही
लग रहे थे… और उनके हाथ
एक शीशी
थी…..
शीशी पे
कुछ नाम नही था पर
शीशी से
निकल रही गंध से ये
ज़रूर पता चल रहा था कि गाव
की हाथ
भट्टी पे
बनी कोई मस्त और
महँगी दारू है….
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
शीशी का
ढक्कन मेज पे रख दिया… एक
ग्लास उठाई और उसमे आधे से
ज़्यादा दारू डाल दी और
थोड़ा सा पानी डाला
वो ग्लास लेके वो ताइजी
के दीवान के पास आए
और उन्हे जगाने लगे…
ताइजी आँखो को
मसलते हुए उठी और
बैठ गयी
ताइजी – ये क्या
है….
कॉंट्रॅक्टर बाबू – ये
वोही है जो तुम्हे
बहुत पसंद है
ताइजी – अरे वाह…
असलीवाली
ताजी ताजी
दारू…. मज़ा आएगा …
कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ मज़ा तो ज़रूर
आएगा
ताइजी – हाँ पर मुझे
एक ही ग्लास
पीना है… मैं जब
ज़्याता लेती हू तो मुझे
तो सरदर्द होता है बहुत… मुझे
दूसरे दिन पूरे अन्ग अन्ग मे दर्द
होता है… चलने और उठने मे
तकलीफ़
होती है…...तुम मुझे
एक से ज़्यादा मत पीने
देना
कॉंट्रॅक्टर बाबू – ठीक
है.. ज़रूर ज़रूर
ताइजी –
नही तो मेरे होश
नही रहते और फिर
तुम मेरे आम चुसते हो…
कॉंट्रॅक्टर बाबू – हम बस आम
चुसते है ताइजी…
और कुछ नही करते
ताइजी – याद
ही नही
रहता एक बार जो मैं
पी लेती
हू
अब मेरे दिमाग़ मे बात जा
रही थी
के आमो के साथ ये भाई
ताइजी का क्या क्या
चुसते और चोदते थे…
उधर ताइजी के मुँह
को कॉंट्रॅक्टर बाबू ने ग्लास लगाया…
ताइजी ने 2-3 घूंठ
पी लिए… कॉंट्रॅक्टर
बाबू ताई जी से
सटिककर बैठे थे. उनके हाथ
ताइजी की
चुचीयोको
कोहनी से घिस रहे
थे…5-10 मिनट बाद…..
ताइजी ने और एक बार
ग्लास को मुँह लगाया और 2-3
घूंठ पी
गयी… उनपे उस गाव
की दारू का नशा चढ़ते
हुए दिख रहा था…
अब ताइजी ने फिरसे
ग्लास को मुँह लगाया और गतगत
सब दारू पी
गयी… ग्लास
खाली हो गया….
ताइजी –
कितनी मस्त है ना ये
दारू
कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ बहुत मस्त
है… और चाहिए तुम्हे
ताइजी – हाँ चाहिए
पर….
ताइजी की
आँखे झपक रही
थी दारू का असर उनके
चेहरे पे सॉफ दिख रहा था वो
अपना आधा अधिक होश खोनेके
कगार पे थी…..दारू
पीते हुए
ताइजी के होठ और
गुलाबी और मदभरे
लग रहे थे अभी
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
ताइजी की
चुचीयोको थोड़ा थोड़ा
करके मसलना शुरू किया था…
कॉंट्रॅक्टर बाबू – पर वर कुछ
नही
ताइजी मैं दो
शीशी लेके
आया हू…
ताइजी – अरे
वाआह… तो लाओ….
कॉंट्रॅक्टर बाबू की
छाती पे
गिरती हुई वो
बोली, कॉंट्रॅक्टर बाबुने
ताइजी को बिस्तर पे
ठीक से बिठाया और
ग्लास लेके मेज की
तरफ गये…. ताइजी
अभी काम
की देवी
लग रही
थी…. वो मचलता बदन
और हसीन और गरम
हो गया था…
कॉंट्रॅक्टर बाबुने ग्लास भरा और
इस बार उसमे बिल्कुल हल्कसा
पानी मिलाया…. मैं दंग
रह गया… खड़े खड़े
ही ताइजी
के मुँह को ग्लास लगा दिया, और
एक ही झटके मे
उन्होने पूरा पिला दिया…. ग्लास से
दारू गिरती हुई
ताइजी के ब्लाउस को
गीला कर
गयी….. उससे
उनकी चुचिया
गीली हुई
और उस हल्केसे प्रकाश मे
भी एक दम स्पष्ट
दिखने लगी…..
ताइजी
अभी लगभग पूरा होश
गवाँ बैठी
ताइजी – और दो…
और दो मुझे…. और
कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ हाँ ज़रूर….
ज़रूर
कॉंट्रॅक्टर बाबुने और एक ग्लास
भरा और इस बार
शीशी मे
सब बची
कूची दारू ग्लास मे डाल
दी… पानी
डालनेकी जगह
ही नही
थी ….ग्लास से
उन्होने ताइजी के
मुँह को लगाया… घ्घ्घ्गतक गतक
गगग्गगातक करके
ताइजी फिरसे एक
ग्लास पी
गयी
अब ताइजी को बिल्कुल
भी होश
नही था… इधर
कॉंट्रॅक्टर बाबुने ग्लास को मेज पर
रखा और दीवान पे
बिस्तर पे मुन्दि डालके बैठ गये…
जैसे कि ताइजी का
शरीर मस्त फूला फला
था वैसे ही कॉंट्रॅक्टर
बाबू का शरीर
भी था उन्होने
ताइजी को
अपनी तरफ खिचा और
उठ कर छोटी
बच्ची की
तरह अपनी गोद मे
बिठा लिया बस गोद मे बिठाते वक़्त
ताइजी का मुँह अपने
मुँह के तरफ कर लिया.
भाई की गोद मे
बहेन…मेरा लंड तन के खड़ा हो
गया…. मेरी हालत
पतली होने
लगी….
उधर कॉंट्रॅक्टर बाबू ने
ताइजी के ब्लाउस के
हुक निकाल दिए…
ताइजी
हल्की आवाज़ मे
कुछ तो बड़बड़ा रही
थी… कॉंट्रॅक्टर बाबुने
ब्लाउस निकाल के फेंक दिया वो मेरे
मुँह पे आके गिरा…. उसमे से दारू
की गन्ध आ
रही थी…
उससे मैं रोमचित हो उठा
कॉंट्रॅक्टर बाबुने ताइजी
की छाती
मे चुचियो के बीच मे
अपना मुँह दबाया और दोनो हाथो
से चुचीयोको अपने
मुँह पे दबाने लगे…
ताइजी के मुँह से
आअहह….अया…
की आवाज़े आ
रही
थी…. उन्होने एक
चुचिको मुँह मे पकड़ा और
उसकी चूचुक(निपल)
को कस के काटने लगे
वैसेही
ताइजी कराह
उठी
पर कॉंट्रॅक्टर बाबू चुचि को काटते
रहे…ताइजी कराह
रही
थी….. अब कॉंट्रॅक्टर
बाबुने दोनो चुचियो को एक साथ किया
और दोनोकी निपल्स को
पकड़ के जोरोसे काटने लगे
ताइजी ज़ोर्से कराह
उठी
कॉंट्रॅक्टर बाबू – चुप कर
रंडी …. आवाज़ मत
निकाल

☆☆☆☆☆ Meethi Gaand ☆☆☆☆☆ Maa ka Agyakari Beta ☆☆☆☆☆
Post Thread