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निर्जन टापू पर
10-02-2016, 03:06 AM
Post: #11
RE: निर्जन टापू पर
वह जान कर भी कि वह जो कर रही है कि जों हो रहा है वह गलत है फिर भी ,यह सब अभी इतना आनंद दायक प्रतीत हो रहा है कि उसको अभी इसी समय रोक पाना नामुमकिन लगता है.

अब उसने उसकी ओर पीठ कर ली और उस रेशों के ब्रश (ज्यादा अच्छा रेशों के पोटली )से अपने गुह्य अंगो को पानी के भीतर रगड़ कर साफ़ करने लगी ,इस सब में भी उसके नितम्ब पानी के बाहर झलक ही जा रहे थे .उसने ऐसा मात्र लज्जा वश नहीं किया था बल्कि इसका भी मकसद था .उन रेशों की रगड़ से उसके गुह्यांग में उठाने वाली उत्तेजना की लहरे उसके सम्पूर्ण शरीर को झनझना जाती थी इस असीम आन्नद से वह विरत नहीं होना चाह रही थी और वह यह भी नहीं चाहती थी की रोबी समझ सके की वह यौन -वासना से उत्तेजित हो रही है .काफी देर तक यौन उत्तेजना का आन्नद लेने के बाद वह नहा कर पानी से बाहर आई .उसका बदन नहाने से चमक रहा था और वह अपने कमनीय बदन का प्रदर्शन करते हुई बाहर आई .


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10-02-2016, 03:07 AM
Post: #12
RE: निर्जन टापू पर
पानी से निकालने के पश्चात वह थोड़ी देर तक पास की चट्टान पर बैठ कर नहाने से शीतल हुए शरीर को गर्माहट पहुचने का प्रयास करने लगी ,थोड़ी देर बाद सूरज की किरणों से उसके शरीर में थोड़ी गर्मी का संचार हुआ .

अब वह वहां से जाने का उपक्रम करते हुए उठी ,अब तक वह आश्वस्त हो चुकी थी की उसका बेटा अब तक वहां से चला गया था .जों उसके शरीर के आकर्षण तथा खुद की उठाती जवानी के वशीभूत जो भी वह कर रहा था उस पर उसका कितना जोर था ?

खुद वह माँ होकर भी उसके यौवन के प्रभाव को तथा अपनी दमित वासना को कब तक दबा पाती ?

अब तक उस द्वीप पर उन्हें कई वर्ष बीत चुके थे . रोज सुबह होकर शाम फिर रात का आगमन होता था ,एक ऋतु के पश्चात दूसरी ऋतु आती और चली जाती थी ,वर्ष के बाद वर्ष बीत रहे थे ,यद्यपि उसकी आयु बढ़ रही थी फिर भी उसका उतना असर उसकी देह -यष्टि पर नहीं परिलक्षि होता था ,पर उसके बेटे को नवयौवन दिन पर दिन निखर रहा था .

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10-02-2016, 03:07 AM
Post: #13
RE: निर्जन टापू पर
वापस जाते हुए उसके मन -मस्तिष्क में विचारो का झंझावात उसे उद्विगन कर रहा था की उसने यह सब क्यों किया ?

अपने विचारो से लड़ते हुए ,इस आत्म-भर्त्सना से द्वंद्व करते हुए उसने सोचा की उसने जों भी किया सोच समझ कर ही किया था .
इसलिए उससे घबड़ाने या विचलित होने से कुछ होने वाला नहीं .और उसने भी जी भरकर इसका आन्नद लिया ,
अब इसके सिवा कोई रास्ता भी नहीं नजर आता.

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