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चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
01-06-2017, 03:08 AM
Post: #1
चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
चारु की जांघ विनय के जांघ से एक दम सटी हुइ थी. उसकी गांड के ऊपर लेग्गिंग थी, जो की एक दम टाइट होक गांड से लिपटी हुई थी. ऊपर उसने स्लीवेलेस पीले कलर का कुरता पहना हुआ था. कैब ऑफिस की तरफ बढ़ रहा था. गर्मी का दिन था और दिन के 1 बजने वाले थे. ऐ.सि होने के बावजूद भी गर्मी लग रही थी. पसीने की एक बूँद चारु के कंधे से उसकी बगल की तरफ बढ़ रहा था. विनय नज़रें चुरा के देखने की कोशिस कर रहा था. चारु सर्वानी से बात कर रही थी. कैब में विनय के अलावा चारु, सर्वानी, रवि और मनीष थे. कैब के पीछे वाली सीट पे कुछ सामन रखा हुआ था इसी वजह से सभी लोग बहुत ठस के बैठे थे. चारु विनय के बगल में थी, उसकी बगल में सरवनी थे. सामने वाली सीट पे रवि और मनीष थे. अगले स्टॉप पे प्रिया कैब में बैठने वाली थी.

चारु वैसे थी तो हाइट में छोटी पर उसकी चूचियां और गांड बहुत मस्त थे. अभी हाल ही में शादी हुई थी उसकी. और शायद चुदाई खाने की वजह से गांड की गोलाई और साइज़ बड़ते जा रहे थे. चूचियां भी दब दब के एक दम बड़े हो रहे थे. विनय ने ये ऑफिस ज्वाइन करने के दिन ही चारु को देखा था, और 5 मिनट बाद टॉयलेट जाके मुत्थ मारा था. जब से उसने चारु को देखा , पोर्न स्टार्स भी फीके लगने लगे थे. उसकी शरारत भरी आँखें, चिकनी स्किन, स्लीवलेस पेहेनने पर नंगी बाजुयें, सुदोल गांड, विनय के सपने में भी आते थे. विनय बस एक बारउसे चोदना चाहता था. पर 2 महीने बाद उसकी शादी हो गयी, अब कोई और बंदा उसे छोड़ रहा था. क्या करेगा पांडू, जब किस्मत ही हो.... खैर..

अगला स्टॉप आया पर, प्रिया के साथ एक और बंदा भी था जो की काफी भारी भर्कम था,. जगह बनाने की ज़रूरत थी. सर्वानी ने चारु को बोला की तू विनय की गोद में बैठ जा. वो शायद मज़ाक कर रही थी, पर चारु सच में उठ के विनय की गोद में बैठ गयी. बाकी लोग ऐसे रियेक्ट कर रहे थे मानो कुछ हुआ ही नहीं, पर विनय सकपका उठा.

कैब आगे बढ़ी. सब लोग आपस में बातें कर रहे थे. चारु के शरीर की खुशबु विनय की नाक में जा रही थी. और उसका लंड अब खड़ा होने वाला था. विनय ने नीचे देखा तो उसकी नज़र चारु के कुरते के अन्दर गयी. उसने वायलेट कोलोउस की ब्रा पहनी हुई थी. उसका लंड खड़ा हो रहा था. शायद चारु को भी पता लग ही रहा होगा पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

आगे का रास्ता थोडा खराब था, गाडी उचल रही थी, साथ ही में चारु की गांड भी विनय के गोद में उचल रही थी. विनय से कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. एक और गड्ढा आया , गाडी उछली, चारु की गर्दन से पसीने की एक बूँद उचल की विनय के मुह पे गिरी. एक और गड्ढा, चारु उचल के उसके लुंड के और पास आ गयी.
एक और गढ़ह, चारू की मुलायम गांड, अब विनय के लुंड के ऊपर थी. एक और गड्ढा, अब विनय से रुका नहीं गया. उसने चारु के कन्धों को पकड़ के नीचे से झटके देना शुरू कर दिया.
रवि और मनीष ने देखा पर आँख मार के इगनोर कर दिया. विनय की चुदास बदती जा रही थी, वो चाहता था की चारु को पटक के वहीँ चोदे. उसने चुचिय्याँ दबा दी चारु की. ठीक उसी समय उसे अपने पैर पे कुछ खुजली महसूस हुई.

वो नज़र अंदाज़ करके झटके देना चाहता था, पर खुजली बदती गयी......

रवि एक झटके से नींद से जगा तो देखा की पैर पे कम से कम 15 मछर बैठे हुए थे. उसका लंड एक दम सरिये की तरह सख्त हो रखा था. वो बुदबुदाया , " मादरचोद, थोड़ी और और रुक जाते तो सपने में ही सही, चारु की गांड तो मार लेता."


दिन के 3:30 बज रहे थे, विनय की नींद टूट चुकी थी. उसके पास अभी टाइम पास करने को कुछ नहीं था, ऊपर से लंड खड़ा हो रखा था. उसने सोचा की छत पे जाके मुट्ठ मारेगा. वो अक्सर ऐसा करता था. वो जिस कमरे में किराए पे रहता था, वो एक ऐसी बिल्डिंग में था जो की उस इलाके में सबसे ऊँची थी. 5 मंजिला. वहाँ सामने ही मार्किट था, जहां हर टाइम कोइ न कोई माल दिख ही जाती थी. विनय के रूम से मार्किट वाली सड़क दिखाई नहीं देती थी, पर छत से अच्छा दिखाई देता था. अक्सर वो अपना कैमरा भी ले जाता था और फोटो खींच के नीचे आके मुट्ठ मारता था.

खड़े लंड के साथ , हाथ में कैमरा लिए वो छत की तरफ बढ़ा. जैसे ही उसने छत का दरवाज़ा थोडा सा खोला उसे एक बहुत ही संगीन दृश्य दिखाई दिया.

उसके मकान मालिक की बेटी दीवार से चिपकी हुई थी. उसकी जीन्स नीचे तक उतरी हुई थी. पैंटी घुटनों के पास मुड़ी हुई अटकी थी, ब्रा नाभि के पास थी और शर्ट खुली हुई थी. उसके ऊपर एक लड़का लगा हुआ था. एक हाथ से चुछियाँ दबा रहा था, दूसरा हाथ गर्दन के पीछे लड़की के बाल को खींच के पकड़ा हुआ था. और मुंह से मुंह सटा के किस कर रहा था. लड़के ने भी अपनी पेंट और चड्डी उतार राखी थी घुटनों तक. दिन की धुप में उसकी गांड चमक रही थी, और झटके मार रही थी आगे की ओर.

विनय ने कैमरा ओं करके विदोए बनान शुरू किया. उसका मन हुआ की मुट्ठ मारे, पर उसने महसूस किया की अगर आज उसने सब ठीक से कर लिया तो आगे मुट्ठ की जगह चूत मिलेगी मारने के लिए .


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01-06-2017, 03:09 AM
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RE: चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
विनय का मकान मालिक, मर. गुप्ता उस इलाके का नामी रईस था. उसके काफी सारे बिज़नस और एक पीवीआर भी था. वो किराए पे मकान भी देता था. पर अमीरी का नशा उसको इतना ज्यादा था कि वो इंसान को इंसान नहीं समझता था. विनय जब अपने लिए किराए पे रूम लेने आया तो उसने बहुत ही बदतमीजी से बात की थी, जैसे की माँ का लंड फ्री में रख रहा हो. किराया भी काफी ज्यादा लिया था उसने, पर चूँकि ये कमरा शहर के प्राइम लोकेशन पे था, और ऑफिस की कैब इस से दूर तक जाती नहीं थी, इसलिए विनय अपनी बेईज्ज़ती का घूँट पी गया था और कमरा ले लिया था रेंट पर.

पर अपने मकान मालिक के प्रति उसके मन में एक कसक थी. मकान मालिक की बेटी, भावना, भी खुद को हूर की परी समझती थी. वैसे तो वो शकल से कुछ खास नहीं थी पर हमेशा हवा में रहती थी. साली गाडी में घूमती और शौपिंग करती रहती थी. थी वो एक दम गोरी चिट्टी, वैक्सिंग की हुई टांगें, और बाहिने, मेक उप, चूचियां, गांड सब मस्त थे उसके. बस शकल ही गधे जैसी थी. लम्बी बेढब नाक, चौड़ी ठुड्डी, और थोड़ी सी टेढ़ी आँखें. थी तो वो क्लास 11थ में लेकिन हरकतें ऐसी की रंडियां शर्मा जाए. उसका बाप तो बिज़नस ही संभालता रह जाता और अपनी माँ को वो कुछ समझती नहीं थी. लडको के साथ गाडी में घूमना, देर रात तक बाहर रहना, छोटे कपडे पहन के पार्टियों में क्लब में जाना उसके लिए आम बात थी. लड़के भी उसके आगे पीछे घुमते थे. मेहेंगी गादियोंमे घूमना और चुदाई करना किस लड़के को अच्छा नहीं लगेगा. विनय ने ऐसा सुना था कि भावना ने अपने क्लास के हर लड़के से चुदवाया हुआ है. विनय के बगल वले कमरे में रहने वाला बंदा, सुधीर इन सब चीज़ों की बड़ी खबर रखता था.

यूँ तो भावना की चुदाई के लिए जगहों की कमी नहीं थी, पर आज वो छत में चूत खोल के क्यूँ चुदवा रही थी ये विनय को समझ नहीं आया. लंड को दबा कर शांत करने की कोशिस करता हुआ विनय विडियो बनाता रहा. मन ही मन सोच रहा था " मादरचोद गुप्ता, तेरी रांड बेटी को इतना चोदुंगा, इतना चोदुंगा कि छिनाल की चूत से चुदाई का भूत उतर जाएगा. और तू जो इतना पैसे की धौंस दिखाता है मादरचोद तेरा ही लंड उसके गांड में डलवाऊंगा".

विनय का लंड झटके ले रहा था.

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01-06-2017, 03:09 AM
Post: #3
RE: चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
भावना ने लड़के को कस के पकड़ा हुआ था. लड़का अपनी गांड को धीमे गति में आगे पीछे कर रहा था. विनय को पता चल गया कि चुदाई अभी अपने चरम पे नहीं पहुंचा है. भावना ने आँखें बंद कर रखी थी, और अपना निचला होंट दांतों तले दबा के चुदाई का मजा ले रही थी. लड़के ने भावना का मुह छोड़ के उसकी एक चूची को चुसना शुरू किया. झटके अभी भी जारी थे.

विनय का लंड फनफना रहा था. लेकिन वो को जल्दी बाज़ी नहीं करना चाहता था.

भावना के चेहरे पर धीरे धीरे हिंसक भाव आ रहे थे. रंडी की चुदास बदती जा रही थी. लड़का शायद लंड निकाल के कुछ और करना चाहता था पर भावना ने अपनी दोनों टांगें उसके कमर के ऊपर चढ़ा दी और टांगो को आपस में फंसा लिया. भावना की सांसें अब और तेज़ हो गयी थी और उसने दोनों हाथों से लड़के के बालों को पकड़ा हुआ था. उसकी आँखों से साफ़ था की इस समय भावना बस अपनी चूत की प्यास मिटाना चाहती थी. लड़का भी शायद समझ गया. उसने दोनों हाथों को भावना की पीठ पे किया और उसका वज़न संभालने के लिए उसे दीवार से टिका दिया. अपन दोनों टांगों को थोडा सा खोल के वो लड़का अब असली चुदाई के लिए रेडी हो गया.

भावना को एक भरपूर किस करने के बाद , उस लड़के ने झटके मारने शुरू किये. दोनों एक दूसर को घूर रहे थे, लम्बी लम्बी सांसें ले रहे थे और चुदाई कर रहे थे.

फच फच फच फच फ़च्छ चुदाई की आवाज़ आ रही थी.

धक्कों की गति बढ़ी, भावना ने लड़के के सर को अपनी छाती से चिपका लिया. लड़का भी अब मदमस्त सांड बन चुका था. लम्बे लम्बे झटके दे रहा था. भावना पूरी तरह लड़के से लिपटी हुई थी. तान्गिएँ तो पहले से लड़के के कमर पे थी, अब भावना ने लड़के के सर के ऊपर अपने दोनों हाथों को जकड के रखा हुआ था. दोनों अब पूरी तरह एक दुसरे में घुसे हुए थे.

धचच धचच धचच... फच फच फ़च्छ...भावना के चेहरे पर शिकन आ रही थी. वो लगातार अपने निचले होंठ को काट रही थी. उसकी आँखें उअप्र की तरफ उठ रही थी. वो चुदाई की दरिया में डूबती जा रही थी. बस कुछ देर और, फिर उसकी चूत में से पानी का झरना विस्फोट करके निकलने ही वाला था. लड़का भी अपना दम रोके धक्के दिए जा रहा था. दोनों थोड़ी ही देर में झडके शांत होने वाले थे , लेकिन तभी भावना की नज़र छत के गेट के पीछे कैमरा लिए रिकॉर्डिंग करते विनय पर पड़ी.

उसके मुंह से हलकी से चीख निकल गयी और उसने लड़के को धक्का देकर खुद से अलग कर दिया.
लड़का चौंक गया. बिचारे का लंड अपने आप ही उठ रहा था और झुक रहा था. भावना खुद हांफ रही थी. पर सोच नहीं पा रही थी की क्या करे. विनय ने कैमरा पॉज किया और गेट के पीछे से निकल कर सामने आया.

"रुक क्यों गए आप लोग. करते रहो.". विनय ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा.

भावना ने शर्ट से अपनी छाती ढककर अपनी पैंटी और जेनस ऊपर करनी चाही. लड़का भी अपने कपडे ठीक करने लगा था, पर विनय गुर्राया " खबरदार. जैसे हो वैसे ही रहो." भावना की तरफ देखके, " शर्ट खोल. और पैंटी घुटनों से नीचे कर.".

भावना सहमी हुई थी. विनय ने इस बार थोड़ी ऊँची आवाज में बोला " जो बोलता हूँ कर, वरना नीचे से तेरी माँ को बुला कर लूँगा और सब बताऊंगा. जानता हूँ तू अपनी माँ को कुछ नहीं समझती पर तुम्हारी चुदाई का जो विडियो बनाया है मैंने उसे अगर इन्टरनेट पे डाल दिया न, तो तेरा बाप भी बचा नहीं पाएगा तुझे. समझी".

भावना और वो लड़का समझ गए थे कि उनकी अब एक नहीं चलने वाली. भावना ने अपनी पैंटी नीच की. लड़के का लंड उस संगीन सीन में भी खड़ा था. विनय ने मुस्कुरा के बोला " अभी भी चुदास गयी नहीं तेरी? ऐसा कर तू छत के गेट के पास जा और मुट्ठ मार. अगर कोई आता दिखे तो इशारा कर देना. और अगर कुछ चालाकी की तूने तो याद रखियो, इस कैमरे में तू भी है. ये रंडी तो अमीर है इसकी तो बस बदनामी होगी, पर तू मिडिल क्लास का लड़का लगता है, तेरी लाइफ बर्बाद हो जाएगी. जा गेट के पास. लड़का पेंट को ऊपर खींचते खींचते उधर की ओर बढ़ा.

विनय ने अब भावना की तरफ देखा. रंडी की चूत गीली थी पूरी तरह. निप्पल भी एक दम टाइट. हल्का पसीना भी आया हुआ था. जो की चुचों के बीच से होता हुआ नाभि की तरफ बढ़ रहा था. चूत एक दम क्लीन शेव थी. चूत की दोनों तरफ मोटे मोटे जांघ चमक रहे थे. उनपे भी हल्का पसीना था. पूरी शरीर पर सिवाय सर के, एक भी बाल नहीं था. रंडी कुछ भी हो, वेल मेंटेनड थी.

विनय बोला "तुझे किस किस तरीके से चोदुं मेरी जान.". घमंडी भावना जिसने कभी किसी की परवाह नहीं की, जिसे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं महसूस हुई आज पूरी तरह बेबस थी. वो नीचे देख रही थी. लड़का छत के गेट के पास खड़े होकर अपना लंड जोर जोर से हिला रहा था. वो समझ गया कि अभी यहाँ ऐसा कुछ होने वाला है जिस से कि उसे और भी मुट्ठ मारना पड़ सकता है .

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01-06-2017, 03:09 AM
Post: #4
RE: चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
विनय ने कैमरा एक साइड पे रखा. वो भावना को घूरे जा रहा था, और भावना थी की नज़रें नीची करके ही खड़ी थी, वैसे वो करती भी क्या.
विनय ने उसे अपने पास बुलाया. पर वो बुत बनी कड़ी हुई थी. जो भावना हर टाइम गुस्सैल मिजाज़ में रहती थी, जो कि ड्राईवर, नौकरों यहाँ तक अपनी माँ पे भी हर टाइम चिल्लाती रहती थी और हुकुम चलती रहती थी उसको इस हालत में देखके विनयको बड़ा ही मज़ा आ रहा था. साली किरायदारों को तो इन्सान ही नहीं समझती थी.

विनय ने उसे फिर से बुलाया , "सुनाई नहीं दे रहा क्या. इधर आ". आख़िर के दो शब्द उसने थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोले. भावना हलकी सी चौंक उठी और धीरे धीरे आगे बढ़ी.

उसके चड्डी घुटनों के पास मुड़ी हुई अटकी हुई थी और जीन्स एक दम एड़ीयों पर थी सो उसे चलने में थोड़ी परेशानी हो रही थी. वो आके विनय के सामने सर झुका के खड़ी हो गयी. अपने हाथों को उसने अपनी चूत के सामने पकड़ के रखा हुआ था. विनय ने उसके हाथों को हटा दिया सामने से और उसकी चूत पे हाथ लगाया.

साली की चूत गीली थी पूरी तरह. विनय मुस्कुराया और उसके चूत के पानी से गीले उँगलियों को अपने खड़े लंड के मुंह पे फेरा. फिर बोला " घुटनों पे बैठ."
भावना फिर भी खड़ी रही. विनय ने हलकी सी सांस छोड़ी और फिर खींच के एक थप्पड़ भावना के गाल पे दे मारा.
उसकी आवाज़ इतनी ज्यादा थी कि गेट के सामने खड़े होक मुट्ठ मारता लड़का भी पल भर के लिए रुक गया. भाव का गोरा गाल पल भर में लाल हो गया. उसकी आँखों में आंसू उमड़ आए.

विनय , " माँ की लोड़ी, जो बोलूं वो तुरंत के तुरंत किया कर. नहीं ओ माँ छोड़ दूंगा तेरी यहीं पे. जो चूत अभी गीली हुई पड़ी है न, उसमे जलता हुआ सिगरेट डाल दूंगा." विनय ने जेब से सिगरेट और माचिस भी निकाल के दिखाया.

भावना बैठ गयी. विनय ने बोला " हाथ पीछे कर, और मेरे आंड चाट. पर खबरदार, गलती से भी लंड को हाथ मत लगाना. बस अपनी जीभ निकाल बाहर और आंड चाट मेरे".
भावना थोड़ी जिझ्की फिर हाथ पीछे कर लिए. विनय ने अपना लंड शॉर्ट्स के बाहर निकला हुआ था. 3 हफ़्तों से झांट नहीं काटी थी, और 2 दिन से नहाया भी नहीं था. उसके लंड और झांटों से मुट्ठ और मूत का एक मिला जुला गंध आ रहा था. भावना के नाभि से उल्टी निकल के आई पर थप्पड़ के डर से वो उसे दबा गयी.

जीभ निकाल के उसने चाटना शुरू किया. विनय ने कैमरा ऑन किया फिर से. भावना ने 2 तीन बार चाटा फिर थूक दिया और थोड़ी सांस लेके वापस चाटने ही वली थी तब विनय ने बोला , "थूकने बंद कर. मेरे आंड की खुशबु और जीभ में जो भी लग रहा है उसे निगल. चल अगर बाल आ जाये तो उसे अलग फेंक देना ".
भावना अब थूक भी नहीं सकती थी. वो चाटती रही. विनय ने लंड को हाथ लगाने से मन किया था, इसकी वजह से विनय का लंड उसके पूरे चेहरे पे रगड़ खा रहा था. विनय ने गेट के पास मुट्ठ माते लड़के से पुछा " कभी गांड चोदी है इसकी?"
लड़के ने न में सर हिलाया.
विनय मुस्कुराया. " ठीक है अब खड़ी हो जा ". भावना उठके खड़ी हो गई.

" अपनी पैंटी और पेंट उतार के अलग रख. शर्ट और ब्रा भी निकाल दे". भावना ने चुप चाप कपडे उतारना शुरू कर दिया. इतने में मुट्ठ मार्ट अल्द्का भी झड़ने के करीब पहुँच गया. विनय ने भावना की चड्डी उसकी और फेंकी और बोला " इसकी चड्डी पे झाड दे मुट्ठ". फिर थोडा सा हंसा.
लड़के ने मुट्ठ गिरा गिरा के चड्डी को भीगा दिया!! पूरा झड़ने के बाद वो दीवार से टिक़ के लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा.
विनय ने अब भावना से कहा, " दीवार का सहर ले और एक टांग दीवार पे चढ़ा के खड़ी हो जा."
भावना को ठीक से शायद समझ नहीं आया था विनय फिर से बोला " तेरी गांड चोदुंगा महारानी. चूत तो तूने पता नहीं कितनो से चुदवाई होगी, पर तेरी गांड जो इतनी टाइट है उसे शायद आज तक लंड का स्वाद नहीं मिला. चल टांग चढ़ा दीवार पे."
गेट के पास खड़े लड़के का लंड धीरे धीरे फिर से सख्त हो रहा था.

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01-06-2017, 03:09 AM
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RE: चूत चूची और जवानी - मकान मालिक की बेटी
विनय ने अपने मुंह से थोडा थूक लिया और लंड के मुंह पर लगाया. फिर भावना की गांड को दोनों हाथों से खींचकर फैलाया. और पाना लंड उसके गांड की छेद में डालने लगा. पर माँ की लोड़ी की गांड बहुत टाइट थी. लंड गया नहीं अन्दर. विनय ने भावना से बोला कि अपने हाथों से गांड को दोनों साइड खींच.

उसका काले रंग का गांड का छेद एकदम सिकुड़ा हुआ था. बिचारी डरी हुई थी. पर विनय की बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा भी तो नहीं था. उसने गांड को दोनों ओर खींचा. अब वो दीवार से टिक कर कड़ी थी. उसकी चूची और उसका गाल दीवार से लगा हुआ था. विनय लंड को गांड के छेद के सामने ले गया. इस समय वो तिरछी हो रखी थी. उसने ऊँगली डालकर उसे और खींचा.

फिर लंड को धीरे धीरे गांड के ऊपर दबाने लगा. लंड जा ही नहीं रहा था. विनय ने फिर जोर लगाया तो थोडा सा अन्दर गया. उसने एक हाथ से दीवार का सहारा लिया और फिर दम लगाने लगा. भावना के आँखों से आंसू निकल आए. पर वो होंठ को भींचे दम बंद करके कड़ी थी.

विनय ने अचानक पूरा दम लगाके धक्का मारा और लंड आधा अन्दर चला गया. भावना चीख उठी. " आआआआआ...ओह्ह्ह्हह्ह".

विनय ने अपना गाल उकसे पसीने से टार गाल से लगा दिया, उसका लंड डाला हुआ था उसकी गांड मेंऔर वो धीरे धीरे बुदबुदाया " कैसा लग रहा है बहन की लोड़ी ? दर्द हो रहा है न? साली जब तू मिनी सकृत पहन कर चड्डी दिखाती हुई सीढ़ी से उतरती है और हम लोगों को इगनोरे करती है हमारे लंड में भी दर्द होता है. साली हम को तो तू इंसान ही नहीं समझती. आज देख तू कैसे तेरी गांड फाड़ता हूँ मैं..? अगली बार जब भी अपने गांड पे हाथ लगेगी या कोई भी तेरी गांड पे हाथ लगेगा तो याद रखना कि किसने और कैसे तेरी गांड मरी थी?"

वविनय ने फिर दम लगाया. लंड और अन्दर गया. अब उसने लंड को वापिस खींचा और फिर अन्दर डाला. वो धीरे धीरे मोशन में आना चाहता था. शाम होने वाली थी और छत में कोई भी आ सकता था.
वो लंड को अन्दर बाहर कर रहा था और भावना की गर्दन, उसके गाल, उसकी पीठ, उसकी बगल चाट रहा था. वो पूरा मज़ा लेना चाहता था.

एक बार जब लंड आराम से चलना शुरू हो गया तो भावना को बी मज़ा आने लगा. विनय भी फिर फुल स्पीड में आ गया और पूरा लंड बाहर निकालकर अन्दर तक डालने लगा. जब वो झड़ने ही वाला था तो उसने लंड निकाल लिया और लड़के को बोला की कैमरा लेके आए.

वो फिर से मुठ मारने लगा था. एक हाथ से लंड को और एक हाथ से कैमरा पकड़ के वो आया.

विनय ने बोला उसके मुंह पर फोकस कर . फिर वो भावना के मुंह के सामने मुठ मारने लगा "तेरी गांड या चूत में भी झाड सकता था मैं. लेकिन तेरे मुंह पे मुठ झादुन्गा, इसका मतलब तू मेरी रंडी हुई आज से.. समझी? जब भी अपना चेहरा ददेखेगी तो अपने चेहरे पर मेरे मुठ याद रखियो.. रंडी..आः आह्ह्ह्हह्ह...मादरचोद.... ओह्ह्ह... ले माँ की लोड़ी... ले ले और ले... साली रांड"'.
विनय झड़ने लगा. भवना का गोरा चेहरा मुठ से भर दिया. सपने में चारु की गांड मरने का सपना देखने वाले विनय ने आज भावना की गांड चोद दी.

विनय ने कैमरा लिया और रिकॉर्डिंग सेव कर ली. "अब से मैं जब भी बोलूं चुप चाप आ जाना छत पे अपनी चुदवाने के लिए. समझी ?"

भावना ने सर हिलाया.

विनय नीचे चला गया. उस लड़के का लंड अभी भी खड़ा था. बिचारा झाड नहीं पाया था, उसने भावना पर हाथ रखा पर भावना ने उसका हाथ झिड़क दिया. लड़के ने भी गुस्से में आकर भवन एके मुंह पर मुठ गिराने की कोशिस की. कुछ मुठ उसके मुंह पर कुछ उसकी बालों में गिरा. लड़के ने उसपर थूक दिया और लंड को चड्डी के अन्दर डालकर नीचे चला गे.

भावना भी उठी और अपनी चड्डी उठाई. वो लड़के के मुट्ठ से गीली थी. भावना ने वोही पहन ली. उसके चूत और जाँघों में लड़के का मुट्ठ लग गया. उसने अपने चेहरे और बालों से भी विनय और लड़के के मुठ को हटाया. फिर वो नीचे की तरफ बढ़ी.

---------------------------- समाप्त-----------------

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